Category: Madhya Pradesh

  • मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में नव नियुक्त सहायक अभियंता व केमिस्ट का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

    मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में नव नियुक्त सहायक अभियंता व केमिस्ट का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ


    मध्यप्रदेश । पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेडMPPGCL के नवनियुक्त 16 सहायक अभियंताओंप्लांट एवं केमिस्ट के प्रथम बैच का छह सप्ताह का आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण संस्थानएनपीटीआई नागपुर में प्रारंभ हो गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कंपनी में नव नियुक्त तकनीकी अधिकारियों को आधुनिक विद्युत उत्पादन तकनीकों संचालन प्रक्रियाओं एवं पर्यावरणीय मानकों की व्यावहारिक समझ प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

    छह सप्ताह की अवधि वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक अभियंताओं को ताप विद्युत एवं जल विद्युत संयंत्रों के संचालनऑपरेशन और संधारणमेंटेनेंस से संबंधित विस्तृत एवं गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को विद्युत उत्पादन की विभिन्न प्रणालियों उपकरणों की कार्यप्रणाली सुरक्षा मानकों तथा तकनीकी चुनौतियों से अवगत कराया जाएगा ताकि वे भविष्य में पावर प्लांट संचालन की जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें।प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक विशेष उपलब्धि के रूप में सहायक अभियंताओं को दो सप्ताह का विशेष सुपर-क्रिटिकल सिम्युलेटर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण के माध्यम से अभियंताओं को अत्याधुनिक सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित विद्युत संयंत्रों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से अभियंता वास्तविक परिस्थितियों में आने वाली तकनीकी समस्याओं का समाधान करना सीखेंगे जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी।

    वहीं नवनियुक्त केमिस्टों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत जल रसायनवॉटर केमिस्ट्री कोयला परीक्षणकोल टेस्टिंग बॉयलर एवं कूलिंग सिस्टम से संबंधित रासायनिक प्रक्रियाओं तथा पर्यावरणीय कारकों के परीक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें प्रदूषण नियंत्रण उत्सर्जन मानकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नवीनतम नियमों एवं प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी जाएगी जिससे विद्युत उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सके।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर एनपीटीआई नागपुर के प्रमुख निदेशक श्री रामचन्द्र उकिरदे ने कहा कि इस प्रशिक्षण सत्र का पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया है कि सहायक अभियंता ताप एवं जल विद्युत गृहों के संचालन और संधारण कार्यों में समान रूप से दक्षता प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विद्युत उत्पादन की नवीन तकनीकों के साथ-साथ पर्यावरणीय बारीकियों गुणवत्ता मानकों एवं सुरक्षा उपायों की भी गहन जानकारी दी जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि एनपीटीआई का उद्देश्य ऐसे कुशल और जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी तैयार करना है जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रतिभागियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाएगा बल्कि उन्हें भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।

  • शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे सरकार का बड़ा फैसला

    शासकीय कार्यालयों में बगैर वैध दस्तावेज के वाहन नहीं चल सकेंगे सरकार का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश शासन के परिवहन विभाग ने शासकीय विभागों, निगमों एवं निकायों द्वारा विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनुबंधित किए जाने वाले वाहनों के संबंध में नवीन निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेशानुसार अब बगैर वैध दस्तावेजों के किसी भी वाहन को शासकीय कार्यालयों में उपयोग में नहीं लिया जाएगा।

    शासकीय विभागों द्वारा सीधे अथवा निजी एजेंसियों के माध्यम से उपयोग में लाए जाने वाले मालवाहक एवं यात्री वाहनों के सभी वैधानिक दस्तावेज अनुबंध से पूर्व और वाहन उपयोग की संपूर्ण अवधि के दौरान वैध होना अनिवार्य होगा। साथ ही, विभागों को भुगतान से पहले भी इन दस्तावेजों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    परिवहन विभाग ने यह भी निर्देश दिये है कि खनिज अथवा अन्य सामग्री के परिवहन के लिये जारी की जाने वाली अनुमति संबंधित वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक नहीं होनी चाहिए। अनुबंधित वाहनों द्वारा नियमानुसार मोटरयान कर का भुगतान किया गया होना चाहिए।

    ई-मेल से भीप्राप्‍त कर स‍कते हैं मार्गदर्शन

    सभी विभागों, निगमों एवं निकायों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे अपने यहां अनुबंधित अथवा एजेंसियों द्वारा उपयोग में लाए जा रहे वाहनों के संबंध में परिवहन आयुक्त कार्यालय, मध्यप्रदेश, ग्वालियर से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए ई-मेल आईडी [email protected] पर पत्र प्रेषित किया जा सकता है।

  • मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद

    मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है।

    आयुक्त एमएसएमई श्री दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

  • भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।

    भोपाल में मातम: बैंक क्लर्क ने ट्रेन के आगे कूदकर दी जान, सुसाइड नोट में खुद को बताया जिम्मेदार।


    भोपाल । राजधानी भोपाल के व्यस्ततम एमपी नगर इलाके से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है जहां जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। भारतीय स्टेट बैंक SBI में क्लर्क के पद पर कार्यरत 35 वर्षीय अभिनाष जैन ने मंगलवार को चेतक ब्रिज के नीचे ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना उस समय हुई जब ऑफिस में उनका अपनी पत्नी के साथ किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ था।

    दफ्तर से निकले और फिर कभी नहीं लौटे जानकारी के अनुसार लाला लाजपत राय कॉलोनी निवासी अभिनाष जैन और उनकी पत्नी रोली जैन दोनों ही मैदा मील स्थित एसबीआई की एक ही शाखा में कार्यरत थे। मंगलवार की सुबह दोनों हमेशा की तरह साथ में घर से दफ्तर के लिए निकले थे लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी मुलाकात होगी। ऑफिस पहुंचने के बाद पति-पत्नी के बीच किसी गंभीर विषय पर बहस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक विवाद के बाद अभिनाष मानसिक रूप से काफी विचलित हो गए और अचानक बैंक से बाहर निकल गए।

    व्हाट्सएप पर अंतिम विदाई: अब कभी वापस नहीं आऊंगा बैंक से निकलने के कुछ ही समय बाद अभिनाष ने अपने पिता भाई और पत्नी को व्हाट्सएप पर एक भावुक संदेश भेजा। इस संदेश को सुसाइड नोट के रूप में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि वे अब कभी वापस नहीं लौटेंगे और अपने इस कठोर फैसले के लिए वे किसी और को नहीं बल्कि स्वयं को जिम्मेदार मानते हैं। संदेश भेजने के तुरंत बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया जिससे परिजनों में हड़कंप मच गया। घबराए हुए परिजनों ने तत्काल एमपी नगर पुलिस को इसकी सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की।

    चेतक ब्रिज के पास मिला क्षत-विक्षत शव पुलिस और परिजन जब शहर के विभिन्न कोनों में अभिनाष की तलाश कर रहे थे तभी चेतक ब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर लोगों की भारी भीड़ जमा होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचे मृतक के साले ने कपड़ों और हुलिए से अभिनाष की पहचान की। ट्रेन की चपेट में आने के कारण शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था। सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल रवाना किया।

    जांच के घेरे में वो आखिरी विवाद पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। एएसआई अनूप के अनुसार प्राथमिक तौर पर यह मामला आत्महत्या का ही है लेकिन पुलिस उस विवाद की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो बैंक परिसर में पति-पत्नी के बीच हुआ था। क्या तनाव केवल उस क्षण का था या लंबे समय से कोई पारिवारिक कलह चल रही थी पुलिस इन सभी बिंदुओं पर परिजनों के बयान दर्ज करेगी। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।यह दुखद घटना समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और छोटी-छोटी बातों पर उपजे विवादों के भयावह परिणाम की याद दिलाती है। एक सुरक्षित भविष्य और प्रतिष्ठित नौकरी होने के बावजूद क्षणिक आवेश ने एक युवा जीवन का अंत कर दिया।

  • अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..

    अंबेडकर पोस्टर प्रकरण: अनिल मिश्रा को हाईकोर्ट से जमानत, तत्काल रिहाई..


    ग्वालियर। हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एडवोकेट अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें एक लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड और समान राशि की जमानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। चार दिनों से न्यायिक हिरासत में बंद मिश्रा की रिहाई अब सुनिश्चित हो गई है यह मामला ग्वालियर से जुड़ा है, जहां सोशल मीडिया पर कथित पोस्टर जलाने की घटना के बाद साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई की। इस प्रकरण में अनिल मिश्रा समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

    हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई आपत्ति

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि एफआईआर में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर अनिल मिश्रा को नोटिस देकर पूछताछ की जा सकती थी। हिरासत लेना अंतिम विकल्प होना चाहिए था, जबकि इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी से पहले वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई, जो व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा संवेदनशील विषय है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसी आधार पर जमानत प्रदान की गई। हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि अन्य सह-आरोपियों को भी राहत मिल सकती है, बशर्ते उनके मामलों में परिस्थितियां समान हों।

    एफआईआर रद्द करने की मांग पर अलग सुनवाई
    अनिल मिश्रा की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि दर्ज एफआईआर कानूनन टिकाऊ नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर निरस्त करने की मांग को अलग प्रक्रिया के तहत सुना जाएगा। फिलहाल केवल जमानत याचिका पर निर्णय लेते हुए उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।

    पुलिस जांच जारी

    ग्वालियर साइबर पुलिस का कहना है कि प्रकरण की जांच अभी भी जारी है और सोशल मीडिया से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को अपनी कार्यप्रणाली पर जवाबदेह रहना होगा।

    कानूनी हलकों में चर्चा

    इस फैसले के बाद प्रदेश के कानूनी और अधिवक्ता समुदाय में चर्चा तेज हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की वैधानिक सीमाओं को रेखांकित करता है। पुलिस को यह संदेश जाता है कि संवेदनशील मामलों में भी कानून की प्रक्रिया से समझौता नहीं किया जा सकता।
  • ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी

    ग्वालियर गैंगवार35 गोलियां चलीं. 10 हजार के इनामी बदमाश की गिरफ्तारी


    ग्वालियर। ग्वालियर में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं।

    इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
    में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।

    ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरारआरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। में दो महीने पहले घासमंडी क्षेत्र के कोटेश्वर रोड पर हुई गैंगवार में 35 गोलियां चली थीं। इस घटना में हवलदार के बेटे विजय गौड़ और एक अन्य युवक हाकिम सिंह बघेल घायल हो गए थे। यह हमलावर बदमाशों के गैंग रिंकू कमरिया से जुड़े थे जो वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गुस्से में थे। अब इस गैंग के 10 हजार के इनामी बदमाश मनीष यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

    गैंगवार और गोलियां

    यह घटना रविवार रात की थी जब विजय गौड़ अपने दोस्त बल्लू सरदार और हाकिम सिंह के साथ कार से घासमंडी क्षेत्र में जा रहे थे। वापस लौटते समय उनका सामना रिंकू कमरिया गैंग से हुआ जिसमें अन्नी कमरिया छोटू कमरिया मनीष यादव चेतन पांडेय प्रियांशु अनिल कमरिया कालू कमरिया और रमेश कमरिया शामिल थे। बदमाशों ने कार को घेर लिया और 15 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 35 गोलियां चलाई गईं। इस हमले में विजय गौड़ को तीन और हाकिम सिंह को एक गोली लगी। इसके बाद सभी बदमाश फरार हो गए थे।

    लेन-देन का विवाद और रिंकू कमरिया

    पुलिस जांच में पता चला कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर हुआ था। विजय गौड़ ने पुलिस को बताया कि रिंकू कमरिया उससे कई बार पैसे मांगने के बावजूद रुपए नहीं लौटा रहा था। उसने धमकी दी थी कि अगर पैसे मांगे तो वह गोली मार देगा। रिंकू कमरिया जो एक लिस्टेड बदमाश है पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है जिनमें फायरिंग मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे मामले दर्ज हैं।

    गिरफ्तारी और फरार आरोपी

    पुलिस को सूचना मिली कि मनीष यादव जो इस मामले में मुख्य आरोपी था घासमंडी चौराहे के पास देखा गया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कार्रवाई शुरू की। जब मनीष यादव ने पुलिस को देखा तो उसने भागने की कोशिश की लेकिन पुलिस की सतर्कता से उसे पकड़ लिया गया। मनीष यादव की पहचान बुलबुलपुरा मिर्जापुर के निवासी के रूप में हुई।

    इस गैंगवार के मास्टरमाइंड रिंकू कमरिया समेत 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि एक और आरोपी राहुल फौजी अब भी फरार है जिसकी तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है।ग्वालियर में हुए इस गैंगवार ने न केवल पुलिस की सतर्कता को चुनौती दी बल्कि यह भी साबित किया कि अपराधी समूहों में वर्चस्व की लड़ाई और लेन-देन के विवाद किस हद तक खतरनाक हो सकते हैं। इस घटना के बाद पुलिस अब पूरी तरह से सक्रिय हो गई है और सभी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

  • भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल में सक्रिय हैं 6 ईरानी गैंग. चोरी-ठगी से लेकर नकली सोना खपाने तक के कारनामे

    भोपाल । भोपाल के ईरानी डेरे में अब तक की पुलिस जांच से यह खुलासा हुआ है कि यहां पर एक नहीं. बल्कि 6 से ज्यादा गैंग सक्रिय हैं। इन गैंग्स के पास अपनी-अपनी अपराधों की शृंखलाएँ हैं. और ये गैंग विभिन्न तरीकों से आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। इन गैंग्स का संचालन अलग-अलग लीडर्स करते हैं. लेकिन इन सभी गैंग्स के पीछे एक ही सरगना है राजू ईरानी. जो अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है
    ईरानी डेरे से पुलिस को एक बड़ी मात्रा में चोरी के सामान जैसे मोबाइल. लैपटॉप. सीपीयू. पैनड्राइव आदि मिले हैं. जिनका परीक्षण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये गैंग चोरी के मोबाइलों का सिक्योरिटी लॉक तोड़ने के लिए इन डिवाइसों का इस्तेमाल करते थे।

    काला ईरानी का प्रॉपर्टी कारोबार

    इसके अलावा. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ‘काला ईरानी’. जो निशातपुरा इलाके में लंबे समय से प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़ा था. पर भी पुलिस की नजर है। काला ने जनता नगर कॉलोनी में कई प्लॉटों को हेरफेर कर बेचा और करोड़ों की संपत्ति बना ली। पुलिस अब उसकी संपत्ति की बारीकी से जांच कर रही है। काले ईरानी के करीबी रहीम पर भी पुलिस की विशेष नजर है।

    सफर में होना और अपराधों का फैलाव

    ईरानी डेरे के अपराधी. जिनकी संख्या सैकड़ों में है. लंबे समय तक दूसरे शहरों और राज्यों में रहते हैं. ताकि वे विभिन्न आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे सकें। इस समय को गैंग “सफर में होना” कहते हैं। इसमें कबीले के युवा विभिन्न अपराधों को अंजाम देते हैं और पकड़े जाने पर माल को कबीले तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए दो अन्य लोग जिम्मेदार होते हैं। ये लोग बड़ी दूरी तय करने के लिए लग्जरी कार और बाइक का इस्तेमाल करते हैं।

    रिश्तेदारी का नेटवर्क और अपराध का फैलाव

    गैंग के कई सदस्य आपस में रिश्तेदार हैं. और इन रिश्तों के कारण उनका नेटवर्क महाराष्ट्र और राजस्थान तक फैला हुआ है। इस रिश्तेदारी का लाभ उठाते हुए यह गैंग दिल्ली. मुंबई. आंध्र प्रदेश. छत्तीसगढ़. राजस्थान. तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आपराधिक गतिविधियाँ कर रहा है। ईरानी डेरा भोपाल में चोरों. ठगों और लुटेरों का पनाहगार बन चुका है। इस डेरा में रहने वाले करीब 70 परिवारों में हर परिवार में किसी न किसी का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। यह गैंग न केवल मध्य प्रदेश में. बल्कि देश के 12 राज्यों में भी आपराधिक वारदातें अंजाम देता रहा है। वे गिरोह बनाकर दूसरे राज्यों में स्पेशल 26 फिल्म की तर्ज पर नकली सेल टैक्स. कस्टम. सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर लूट और ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    पुलिस पर हमला और हिंसा का सामना

    हाल ही में. भोपाल में पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने के लिए दबिश दी. तो स्थानीय महिलाओं ने पुलिस का रास्ता रोका और बाद में पुरुषों के साथ मिलकर पुलिस जवानों से झूमाझटकी की। इस बवाल के बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया और हंगामे को काबू किया। पुलिस ने इस हिंसक घटना में 24 पुरुषों और 10 महिलाओं को गिरफ्तार किया। भोपाल का ईरानी डेरा अब अपराधियों के लिए एक कुख्यात ठिकाना बन चुका है. जहां से पूरे देश में आपराधिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। पुलिस द्वारा की जा रही जांच और दबिश के बावजूद. इस गैंग का सरगना राजू ईरानी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस की कार्रवाई को लेकर लगातार उग्र विरोध और हिंसा भी हो रही है. लेकिन यह गैंग अब तक अपनी पकड़ बनाए हुए है।

  • मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी

    मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असरदिल्ली से आने वाली ट्रेनें लेट. स्कूलों में छुट्टी जारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे का प्रभाव बहुत गहरा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रात का तापमान 10 डिग्री से नीचे चला गया है. और कई इलाकों में यह और भी नीचे पहुंच चुका है। उमरिया में तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जबकि राजगढ़. खजुराहो और शिवपुरी में 4.5 से 5 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरा है। वहीं. रीवा में भी 5.8 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बुधवार की सुबह कोहरे के कारण प्रदेश के आधे हिस्से में दृश्यता कम रही। विशेष रूप से सतना. दतिया. गुना. रीवा. ग्वालियर. राजगढ़. खजुराहो. नौगांव और सीधी जैसे इलाकों में कोहरे का असर सबसे ज्यादा रहा। इस कारण दिल्ली से आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें लेट हो गई हैं. जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    इसके साथ ही. इंदौर. रायसेन. ग्वालियर. मऊगंज. धार और नर्मदापुरम जिलों के स्कूलों में भी बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में कोल्ड वेव और शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले भी शाजापुर. शहडोल. सिवनी. मंदसौर. सीहोर में शीतलहर का असर देखा गया था. और भोपाल-राजगढ़ में तीव्र शीतलहर भी चली थी।

    प्रदेश में पिछले तीन दिन से लगातार कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस सर्दी की वजह से ही इंदौर. उज्जैन. मंदसौर. शाजापुर. विदिशा. ग्वालियर. अशोकनगर. रायसेन. आगर-मालवा. भिंड. टीकमगढ़. हरदा. नीमच. रतलाम. राजगढ़. मंडला. जबलपुर. दमोह. डिंडौरी. नर्मदापुरम. झाबुआ. छतरपुर. सीधी. बैतूल और कई अन्य जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई है।

    इंदौर. रायसेन. ग्वालियर और नर्मदापुरम में बुधवार को भी स्कूलों की छुट्टियां जारी रही। वहीं. भोपाल. धार. सीहोर. अनूपपुर. बड़वानी. मुरैना और खरगोन में स्कूल सुबह 9 बजे के बाद ही खोले गए हैं। इस कड़ाके की ठंड ने बच्चों को स्कूलों तक पहुंचने में दिक्कतें दी हैं. खासकर छोटे बच्चों को सुबह-सुबह ठंड में स्कूल पहुंचने में काफी परेशानी हो रही है।

    इस बार कड़ाके की ठंड का असर खास रहा है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी थी. और दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है। जनवरी के पहले सप्ताह में भी प्रदेश में माइनस तापमान की स्थिति देखने को मिली।

    सर्दी का यह मौसम क्यों खास है

    मौसम विभाग के मुताबिक. दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से सर्द हवाएं प्रदेश की ओर आती हैं. जिसके कारण इन महीनों में कड़ाके की ठंड होती है। इन दो महीनों में खासतौर पर शीतलहर और कोल्ड वेव जैसी स्थितियां बनती हैं। पिछले 10 सालों में ऐसे ही ट्रेंड देखे गए हैं. और इस बार भी जनवरी में मावठा हल्की बारिश का असर कुछ जिलों में देखा गया है।

    प्रदेश के प्रमुख शहरों में जनवरी के मौसम का ट्रेंड भी बहुत दिलचस्प है

    भोपाल18 जनवरी 1935 को यहां का रात का तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका था। 26 जनवरी 2009 को दिन का तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।इंदौरजनवरी में माइनस तापमान का रिकॉर्ड 16 जनवरी 1935 को माइनस 1.1 डिग्री सेल्सियस था।उज्जैन22 जनवरी 1962 को यहां पारा 0 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका था।

    अंत में. मध्यप्रदेश में इस बार सर्दी और कोहरे का असर अत्यधिक देखा जा रहा है. जिससे न सिर्फ आम जनजीवन प्रभावित हुआ है. बल्कि स्कूलों और ट्रेनों की समय सारणी भी गड़बड़ाई है। ठंड और कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट हो रही हैं. और छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार. यह स्थिति आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है।

  • दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित

    दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित


     इंदौर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ आम नागरिकों की जान ली, बल्कि ‘देश के सबसे स्वच्छ शहर’ के रूप में पहचान बना चुके इंदौर की छवि को भी गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों की सिविल के साथ-साथ आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

    हाईकोर्ट में दूषित पेयजल से संबंधित पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि पीड़ित परिवारों को दिया गया मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसे बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब के साथ नई और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार की अनदेखी को अदालत ने गंभीर अपराध की श्रेणी में माना। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 110 मरीज फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 15 मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने होने के बावजूद ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

  • इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित

    इंदौर दूषित पानी से न केवल जानें गईं. छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी प्रभावित


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है। दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।

    राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।

    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। “हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं। दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।

    दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है। रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है।मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।

    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है।इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है. और सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं. इस भयावह स्थिति का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं. बल्कि यहां के छोटे कारोबारों पर भी गहरा पड़ा है।
    दूषित पानी के कारण लोग बाहर का खाना खाने से बचने लगे हैं. जिसके कारण फास्ट फूड. चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचों पर ग्राहकी पूरी तरह से ठप हो गई है।राजवीर सिंह कुशवाह. जो भागीरथपुरा में बर्गर. पिज्जा और चायनीज आइटम बेचते थे. बताते हैं कि नए साल की छुट्टियों में उनके कारोबार की सबसे ज्यादा कमाई होती थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच उनका बिजनेस बहुत अच्छा चलता था. लेकिन इस बार 28 दिसंबर से 5 जनवरी तक दुकान पूरी तरह बंद रही। “हमारे फास्ट फूड आइटम्स में पानी का इस्तेमाल होता है. और खराब पानी के कारण हमें दुकान बंद रखनी पड़ी। अब दुकान तो खोली है. लेकिन ग्राहक बिल्कुल नहीं आ रहेउन्होंने कहा।
    इसी तरह. महेश हार्डिया. जो पानीपुरी और चाट बेचते हैं. बताते हैं कि 8-10 दिनों से उनका ठेला बंद है। पानी की गंदगी के कारण प्रशासन ने ठेला बंद करने का आदेश दिया था। हम रोज 700-800 रुपये कमाते थे. लेकिन अब काम नहीं हो रहा। अब तक जितनी सेविंग्स हैं. उससे काम चल रहा है। जब तक पानी की समस्या ठीक नहीं होती. काम में सुधार की उम्मीद कम हैमहेश ने कहा।नाश्ते की दुकान चलाने वाली सीमा सिकरवार भी परेशान हैं।दूषित पानी के कारण ग्राहक बहुत कम हो गए हैं। पहले की तरह ज्यादा ग्राहक नहीं आ रहे हैं। अब बोरिंग का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भी ज्यादा समस्या हो रही है सीमा ने बताया।दूसरी ओर. इस संकट का असर अब परिवारों पर भी पड़ने लगा है।
    रोशनी कोरी. जो कपड़े की दुकान पर काम करती थीं. ने बताया कि उनके परिवार ने भागीरथपुरा छोड़ने का फैसला किया है। मेरे बेटे की तबीयत खराब हो गई थी. अब ठीक हो गया है. लेकिन इस गंदे पानी के कारण हम सागर लौटने का सोच रहे हैं। हम यहां 8-9 महीने से किराए पर रह रहे थे. लेकिन अब हमें यहां से पलायन करना पड़ रहा हैउन्होंने कहा।इस क्षेत्र में दूषित पानी का असर गहरा है और इससे छोटे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं होती. उनका कारोबार ठीक से नहीं चल पाएगा।
    वहीं. कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर लगातार हालात का जायजा ले रहे हैं और पानी की सप्लाई को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन जब तक लोग भरोसा नहीं करते. व्यापारियों की स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है। इंदौर में हुई इस जलसंकट की घटना ने ना सिर्फ स्वास्थ्य को प्रभावित किया है. बल्कि रोजी-रोटी के संकट को भी जन्म दिया है। इस गंभीर स्थिति में छोटे कारोबारी अपनी दिक्कतें साझा कर रहे हैं. और प्रशासन से जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।