Tag: 1

  • नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता

    नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Severe floods) और भूस्खलन (Landslides) ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार रात 8 बजे तक इस आपदा में 1093 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं।


    तीन महीने के लिए घोषित किया गया आपदा क्षेत्र

    नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

    सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।


    हेलीकॉप्टर से दिखी तबाही की तस्वीर

    चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं.

    तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं।

    आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है।


    नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले

    नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया।

    अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

    नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।

    मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।

    अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं।

  • अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन

    अवैध घुसपैठ से निपटने के लिए समुद्र में 1600 फीट की दीवार बनाएगा स्पेन


    मैड्रिड।
    मोरक्को (Morocco) से घुस आए अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) के चलते स्पेन (Spain) में काफी समस्या हुई है। अब स्पेन ने इससे निपटने के लिए नया तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया है। स्पेन (Spain) ने घोषणा की है कि वह अपने उत्तरी अफ़्रीकी क्षेत्र स्यूटा और पड़ोसी मोरक्को के बीच समुद्री सीमा (Maritime border.) पर 500 मीटर लंबा (1,600 फीट) बैरियर बनाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, सेउटा के तटीय इलाके में ताराजल ब्रेकवॉटर के पास एक तैरता हुआ अवरोध लगाया गया था। गौरतलब है कि मोरक्को के साथ लगती स्पेन के सेउटा सीमा पर मरने वालों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। स्पेन सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी।


    ब्रेकवॉटर बैरियर को पार कर गए

    स्पेन सरकार ने कहाकि मृतकों में कुछ ऐसे लोग शामिल हैं जो डूब गए और कुछ ‘ब्रेकवॉटर बैरियर’ को पार करने की भगदड़ में मारे गए। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सेउटा की घटनाओं पर यूरोपीय संघ के कुछ नेताओं की प्रतिक्रिया की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहाकि स्पेन को यूरोपीय संघ के सीमा-रहित शेंगेन क्षेत्र से निलंबित करने की मांग पूर्वाग्रह, फर्जी खबरों, अज्ञानता या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित है। शनिवार सुबह तैरकर सेउटा के ताराजल तट पर पहुंचे कुछ थके-हारे प्रवासियों को सैनिकों ने सीमा के पार वापस भेज दिया।


    गृह मंत्रालय ने क्या कहा

    स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि उत्तरी अफ्रीका में स्पेन के इलाके में दाखिल होने वालों में ज्यादातर लोग पहले ही मोरक्को लौट चुके हैं। स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का ने शनिवार को सेउटा में पत्रकारों से कहाकि हम कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आते हैं। जब यह सवाल पूछा गया कि दोनों तरफ कड़ी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोग सीमा कैसे पार कर पाए और क्या मोरक्को से सेउटा को कोई खतरा है, तो मार्लास्का ने रबात में मौजूद सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहाकि इन घटनाओं का स्पेन और मोरक्को को मिलकर जायजा लेने की जरूरत है। लेकिन पड़ोसी देशों के साथ सहयोग की वजह से ही स्पेन 24 घंटे में हालात को सामान्य कर पाया।


    इटनी ने शुरू की यात्रियों की जांच

    उधर, इटली ने स्पेन से आने वाले यात्रियों पर अस्थायी रूप से सीमा पर जांच शुरू कर दी है। फ्रांस ने भी अपनी सीमाओं पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री सांचेज ने यूरोपीय संघ के गृह मंत्रियों की आपातकालीन बैठक बुलाने का भी आह्वान किया है। करीब 84,000 की आबादी वाले सेउटा शहर पर इस अचानक आए दबाव के कारण स्पेन और पूरे यूरोप में राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इटली ने हवाई और समुद्री मार्ग से स्पेन से आने वाले गैर-यूरोपीय संघ के नागरिकों की जांच शुरू कर दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।

  • लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ अग्निकांड: 1200 झोपड़ियां राख, 6 बच्चे अब भी लापता, CM योगी ने दिए जांच और राहत के निर्देश

    लखनऊ। विकासनगर सेक्टर-12 में रिंग रोड किनारे स्थित अवैध बस्ती में बुधवार शाम भीषण आग लग गई। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप लेते हुए करीब 1200 झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया। झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलिंडर फटने से पूरे इलाके में जोरदार धमाके हुए और भगदड़ मच गई।

    घटना के बाद 22 दमकल गाड़ियों ने देर रात तक आग बुझाने का प्रयास किया। इस दौरान आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इलाके में दहशत फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार लगभग 50 मवेशियों के जलने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

    सूचना में देरी का आरोप, आग ने मिनटों में लिया विकराल रूप
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि आग लगने के बाद समय पर पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन मदद देर से पहुंची। इस बीच आग तेजी से फैलती गई और एक के बाद एक झोपड़ियां जलने लगीं। बताया गया कि आग एक झोपड़ी से शुरू हुई और कुछ ही देर में पूरी बस्ती को अपनी चपेट में ले लिया। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर कॉल लगाने में भी देरी और तकनीकी दिक्कतों की बात कही है।

    भगदड़ में 6 बच्चे लापता, सर्च ऑपरेशन जारी
    भीषण हादसे के दौरान मची अफरा-तफरी में दो परिवारों के छह बच्चे लापता हो गए हैं, जिनमें एक परिवार के चार और दूसरे के दो बच्चे शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें देर रात तक बच्चों की तलाश में जुटी रहीं और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

    पथराव और हंगामा, प्लॉट मालिक पर आग लगाने के आरोप
    घटना के बाद गुस्साए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर का घेराव कर हंगामा किया और उस पर आग लगवाने का आरोप लगाया। इस दौरान कुछ लोगों ने पथराव भी किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। आरोप है कि प्लॉट मालिक कुछ दिन से झोपड़ियां हटाने के लिए दबाव बना रहा था।

    वीडियो बनाने और ट्रैफिक जाम से बिगड़े हालात
    घटना स्थल पर भीड़ द्वारा वीडियो बनाने और रास्ता बाधित करने से राहत कार्य प्रभावित हुआ। दमकल की गाड़ियां भी जाम में फंस गईं, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन समेत कई लोग घायल हो गए। इसके कारण इलाके में करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    आग पर काबू, राहत और पुनर्वास की तैयारी
    दमकल विभाग ने रात करीब 10 बजे तक आग पर आंशिक नियंत्रण पा लिया। प्रशासन ने आसपास के लगभग 30 घरों को खाली कराया और कई सिलिंडर सुरक्षित बाहर निकाले। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ितों के लिए भोजन व आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।