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  • अतीक के बेटे अली से पूछा 2027 में परिवार से कौन लड़ेगा चुनाव जवाब देने के बजाय साध ली चुप्पी

    अतीक के बेटे अली से पूछा 2027 में परिवार से कौन लड़ेगा चुनाव जवाब देने के बजाय साध ली चुप्पी

    झांसी। प्रयागराज की अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद को कड़ी सुरक्षा के बीच देर रात झांसी जेल वापस लाया गया। सुबह पुलिस सुरक्षा के बीच अली को झांसी से प्रयागराज ले जाया गया था जहां अदालत की कार्यवाही पूरी होने के बाद पुलिस टीम उसे लेकर वापस झांसी पहुंची। जेल लौटने के दौरान सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए थे और जेल परिसर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती रही।

    अली अहमद के झांसी पहुंचने की सूचना मिलते ही जेल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस वाहन के जेल परिसर के पास पहुंचते ही सुरक्षाकर्मियों ने अली को अपने घेरे में ले लिया। इसके बाद उसे बिना किसी रुकावट के सीधे जेल के भीतर ले जाया गया। सुरक्षा को देखते हुए पुलिसकर्मी लगातार उसके आसपास मौजूद रहे और मीडिया की पहुंच को भी सीमित रखा गया।

    जेल के बाहर मौजूद पत्रकारों ने अली अहमद से बातचीत करने की कोशिश की। इसी दौरान उससे पूछा गया कि क्या वह सरकार से कुछ कहना चाहता है। इस सवाल के जवाब में अली ने बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। उसने कहा कि सफर लंबा था और वह कुछ नहीं कहना चाहता। इसके बाद वह सुरक्षाकर्मियों के घेरे में जेल के अंदर चला गया।

    पत्रकारों ने अली से आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भी सवाल किया। उससे पूछा गया कि चुनाव में परिवार की ओर से कौन मैदान में उतर सकता है। इस सवाल पर अली ने कोई जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी। उसने चुनाव या परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी।

    इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वाहन को अंदर की ओर ले जाने की प्रक्रिया पूरी की। पुलिस घेरे में अली को जेल परिसर के भीतर ले जाया गया और मीडिया से उसकी संक्षिप्त बातचीत भी वहीं समाप्त हो गई।

    प्रयागराज से झांसी तक अली की आवाजाही के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और जेल प्रशासन सतर्क नजर आया। अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद उसे वापस झांसी जेल लाया गया है। जेल के बाहर मौजूद मीडिया की ओर से पूछे गए सवालों में उसकी यात्रा और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े सवाल प्रमुख रहे लेकिन अली ने चुनाव को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की।

    अली अहमद के इस संक्षिप्त बयान के बाद जेल के बाहर मौजूद पत्रकारों के बीच भी चर्चा रही। हालांकि उसने अपने परिवार की ओर से चुनाव लड़ने वाले संभावित व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं कहा। फिलहाल वह झांसी जेल में वापस पहुंच चुका है और अदालत की कार्यवाही के बाद उसकी वापसी पुलिस सुरक्षा में पूरी हुई।

  • UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!

    UP की सियासत में बड़ा धमाका तय? 10–15 मई के बीच कैबिनेट विस्तार की हलचल तेज… कई मंत्रियों की कुर्सी पर संकट, नए चेहरे करेंगे एंट्री!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से टल रहा कैबिनेट विस्तार अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार, 10 से 15 मई के बीच योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है, जिससे राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की पूरी संभावना है।

    बताया जा रहा है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जहां संगठन और सरकार दोनों में बड़े स्तर पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। इसी के साथ भाजपा नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी में है, जिसकी घोषणा कैबिनेट विस्तार के आसपास की जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रिमंडल में कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की भूमिका में बदलाव या उन्हें संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। प्रदर्शन के आधार पर विभागों में फेरबदल भी तय माना जा रहा है।

    जातीय संतुलन साधने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ओबीसी और दलित वर्ग से नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है, वहीं ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी कुछ नए नामों पर विचार किया जा रहा है। करीब एक दर्जन नामों पर मंथन जारी है, हालांकि अंतिम सूची अभी तय नहीं हुई है।

    इसके अलावा, सहयोगी दलों को भी साधने की रणनीति पर काम चल रहा है। अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, ताकि गठबंधन में संतुलन बना रहे। साथ ही महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिसके तहत 3 से 4 महिला विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 2027 के लिए मजबूत राजनीतिक आधार तैयार करना है।

    अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन मंत्रियों की भूमिका में बदलाव किया जाता है, क्योंकि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।