Tag: 90s Bollywood

  • 90 के दशक का काला सच राम गोपाल वर्मा का बड़ा खुलासा क्यों बने थे गुलशन कुमार अंडरवर्ल्ड का निशाना

    90 के दशक का काला सच राम गोपाल वर्मा का बड़ा खुलासा क्यों बने थे गुलशन कुमार अंडरवर्ल्ड का निशाना


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में 1990 का दशक एक ऐसा दौर रहा है जब फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ रचनात्मकता और स्टारडम तक सीमित नहीं थी बल्कि उस पर अंडरवर्ल्ड का गहरा साया भी मंडरा रहा था इसी दौर को याद करते हुए फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं उन्होंने बताया कि उस समय मुंबई का अंडरवर्ल्ड केवल पैसा कमाने तक सीमित नहीं था बल्कि वह फिल्म इंडस्ट्री पर अपना नियंत्रण और दबदबा स्थापित करना चाहता था

    राम गोपाल वर्मा ने लेखक हुसैन ज़ैदी के साथ बातचीत में कहा कि अंडरवर्ल्ड की हर कार्रवाई सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होती थी गैंगस्टर बड़े और असरदार नामों को घुमाकर इंडस्ट्री में डर का माहौल बनाती थी ताकि बाकी लोग अपने आप उनके दबाव में आ जाएं उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शाहरुख खान सलमान खान और राकेश रोशन जैसे बड़े नामों को एडजस्ट करना इसी रणनीति का हिस्सा था।

    उनके अनुसार अंडरवर्ल्ड का मकसद केवल वसूली नहीं था बल्कि सत्ता और कंट्रोल हासिल करना भी था जब कोई बड़ा सितारा या फिल्ममेकर उनकी बात सहमत से मना करता था तो उसे एक उदाहरण बनाने की कोशिश की जाती थी ताकि बाकी लोग डर जाएं यह डर ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता था।

    इसी संदर्भ में उन्होंने साल 2000 में राकेश रोशन पर हुए हमले का जिक्र किया यह हमला फिल्म कहो ना… प्यार है की जबरदस्त कामयाबी के तुरंत बाद हुआ था बताया जाता है कि अंडरवर्ल्ड फिल्म की तारीखों और काम पर कंट्रोल चाहता था और जब इसका विरोध किया गया तो 21 जनवरी 2000 को उनके ऑफिस के बाहर प्रवर्तन की घटना सामने आई हालांकि किस्मत से वह इस हमले में बच गए।

    वहीं 1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या को लेकर भी राम गोपाल वर्मा ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गुलशन कुमार की बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव उन्हें अंडरवर्ल्ड के निशाने पर ले आया था। उनके अनुसार अबू सलेम जैसे अपराधियों के लिए यह घटना अपनी ताकत और पहचान स्थापित करने का एक जरिया भी रही होगी।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गुलशन कुमार ने कथित तौर पर जबरन वसूली की संस्थाओं के आगे झुकने से इनकार कर दिया था और यही उनके खिलाफ साजिश की एक बड़ी वजह बन सकती है उस दौर में जो भी व्यक्ति दबाव के आगे नहीं झुकता था उसे अंजाम देने के लिए तैयार रहना पड़ता था

    यह पूरी घटना उस समय के बॉलीवुड की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है जब फिल्म इंडस्ट्री को सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि अपराध जगत के प्रभाव का भी सामना करना पड़ रहा था राम गोपाल वर्मा के ये खुलेसे न केवल उस दौर की जलनता को सामने लाते हैं बल्कि यह भी बताते हैं कि किस तरह डर और दबाव के जरिए एक पूरी इंडस्ट्री को प्रभावित करने की कोशिश की गई

  • सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..

    सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..


    नई दिल्ली:90 के दशक का बॉलीवुड मीडिया और फैंस के लिए एक ऐसा दौर था, जब फिल्मी सितारों की जिंदगी के बारे में केवल मैगजीन और अखबार ही जानकारी देते थे। सोशल मीडिया के आज के दौर से बिल्कुल अलग उस समय, जो छपता वही सच माना जाता था और सितारों के रिश्तों को अक्सर अलग रंग देकर पेश किया जाता था। इसी समय की यादें साझा करते हुए अभिनेत्री सोमी अली ने हाल ही में एक थ्रोबैक पोस्ट के जरिए बताया कि कैसे उन्हें और जेबा बख्तियार को लेकर मीडिया ने झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की थी।

    सोमी अली ने बताया कि 1993 में उनकी पहली मुलाकात जेबा बख्तियार से हुई थी। दोनों ही पाकिस्तान में जन्मीं थीं, लेकिन सोमी का पालन-पोषण अमेरिका में हुआ। मीडिया ने इसी समानता को आधार बनाकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव की खबरें छापीं, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह अलग थी। असल जिंदगी में उनके बीच कभी कोई राइवलरी नहीं थी। बल्कि दोनों के बीच सम्मान और समझ का रिश्ता था। सोमी ने बताया कि वह उस पहली मुलाकात को आज भी सकारात्मक अनुभव के रूप में याद करती हैं और जेबा के लिए उनके मन में गहरी इज्जत है।

    सोमी अली ने जेबा बख्तियार की खूब तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और अच्छी इंसान हैं और हमेशा खुश रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया की बनाई कहानी कभी सफल नहीं हुई, क्योंकि असल जिंदगी में उनके बीच मित्रता और सहयोग का रिश्ता था। इस खुलासे ने 90 के दशक की फिल्मी दुनिया की मीडिया कल्चर और फैन्स तक पहुंचने वाली कहानियों की सच्चाई को उजागर किया।

    जेबा बख्तियार की फिल्मी पहचान की बात करें तो उन्होंने 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिना’ से लोकप्रियता हासिल की थी। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर और अश्विनी भावे नजर आए थे और निर्देशन रणदीर कपूर ने किया था। भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर बनी इस प्रेम कहानी को दर्शकों ने काफी सराहा।

    इस किस्से ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया से पहले मीडिया की बनाई अफवाहें और टैब्लॉइड कहानियां कितनी प्रभावशाली और कभी-कभी भ्रामक हो सकती थीं। आज के दौर में फैंस सीधे अपने पसंदीदा सितारों से जुड़ सकते हैं, लेकिन उस समय सच्चाई जानने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं था।

  • जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड

    जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड


    मुंबई। बॉलीवुड का 90 का दशक न केवल अपनी सुपरहिट फिल्मों के लिए जाना जाता है बल्कि उस दौर के कलाकारों के बीच की सादगी और अटूट भरोसे के लिए भी याद किया जाता है। उस समय की मशहूर और बेहद ग्लैमरस अभिनेत्री ममता कुलकर्णी भले ही आज फिल्मी दुनिया की चकाचौंध को त्याग कर आध्यात्म की राह पर चल पड़ी हों, लेकिन हाल ही में उनके एक बयान ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। ममता कुलकर्णी ने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ अपने उस दौर के रिश्तों का खुलासा किया है, जो आज के ‘वैनिटी वैन’ कल्चर वाले दौर में थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है।

    ममता कुलकर्णी ने उस दौर की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि पहले का समय आज जैसा नहीं था। आज जहाँ सितारों के पास आलीशान वैनिटी वैन्स होती हैं और वे सेट पर अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं, 90 के दशक में कलाकारों के बीच एक पारिवारिक माहौल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘बाजी’ (1995) की शूटिंग के दौरान आमिर खान और उनके बीच इतनी सहजता थी कि वे अक्सर एक-दूसरे के घरों का उपयोग व्यक्तिगत जरूरतों के लिए करते थे।

    ममता ने एक बेहद निजी वाकया याद करते हुए कहा उन दिनों हमारे पास वैनिटी वैन की लग्जरी नहीं थी। मुझे आज भी याद है कि फिल्म की शूटिंग के वक्त आमिर खान अक्सर मेरे घर आया करते थे। वे बिना किसी झिझक के मेरे बेडरूम का इस्तेमाल अपने कपड़े बदलने और कॉस्ट्यूम चेंज करने के लिए करते थे। आमिर को मेरे बेडरूम में कपड़े बदलते देख न तो मुझे कभी असहजता हुई और न ही उन्हें।” यह खुलासा न केवल आमिर खान की सादगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उस समय सह-कलाकारों के बीच कितना गहरा विश्वास और मर्यादा का रिश्ता हुआ करता था।

    सिर्फ बेडरूम ही नहीं आमिर खान ममता के किचन तक में अपनी पहुंच रखते थे। ममता बताती हैं कि काम खत्म होने के बाद या शूटिंग के ब्रेक के दौरान आमिर खुद किचन में जाकर चाय बनाते थे। उनके बीच किसी भी प्रकार का ‘स्टारडम’ का पर्दा नहीं था। वे एक-दूसरे के साथ एक आम दोस्त की तरह वक्त बिताते थे। ममता के अनुसार, आमिर खान हमेशा से ही बहुत जमीन से जुड़े हुए इंसान रहे हैं और उनका यह व्यवहार उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी।

    हालांकि वर्तमान समय पर बात करते हुए ममता कुलकर्णी थोड़ी भावुक और गंभीर भी नजर आईं। उन्होंने फिल्म जगत में आए बदलावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज तकनीक और चमक-धमक तो बढ़ गई हैॉ लेकिन सादगी और वास्तविक हुनर कहीं पीछे छूट गया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कई प्रतिभाशाली सिंगर्स और कलाकार काम की तलाश में घर बैठे हैं, क्योंकि अब इंडस्ट्री में रिश्तों की गर्माहट की जगह प्रोफेशनल दिखावे ने ले ली है। ममता के इन खुलासों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 90 के दशक का बॉलीवुड भले ही संसाधनों में कम रहा हो, लेकिन रिश्तों और भरोसे के मामले में वह आज से कहीं अधिक समृद्ध था।

  • धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारी तेज, इसी बीच सामने आया सनी देओल से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

    धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारी तेज, इसी बीच सामने आया सनी देओल से जुड़ा दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के दमदार एक्टर सनी देओल एक बार फिर चर्चा में हैं। एक तरफ उनकी आने वाली फिल्म धुरंधर 2 को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है वहीं दूसरी ओर उनके करियर से जुड़ा एक पुराना और रोचक किस्सा सुर्खियों में आ गया है। बताया जा रहा है कि धुरंधर 2 के ट्रेलर की तैयारियां तेज हो चुकी हैं डायरेक्टर ने एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर पर काम शुरू कर दिया है। इसी बीच सनी देओल और जूही चावला से जुड़ी एक अनसुनी कहानी ने लोगों का ध्यान खींच लिया है।

    90 के दशक में सनी देओल न सिर्फ अपने एक्शन बल्कि अपनी गहरी आवाज और इंटेंस रोमांटिक अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में लगभग सभी टॉप एक्ट्रेसेस के साथ काम किया और हर किसी के साथ उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बार बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस जूही चावला ने सनी देओल के साथ किसिंग सीन का रीटेक करने से साफ इनकार कर दिया था?

    जूही चावला ने क्यों किया इनकार

    यह किस्सा है निर्देशक धर्मेश दर्शन की फिल्म लूटेरे का जिसमें सनी देओल और जूही चावला लीड रोल में नजर आए थे। धर्मेश दर्शन ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि फिल्म में एक लिप-लॉक किसिंग सीन था जिसे रीटेक करने की जरूरत पड़ी। लेकिन जूही चावला ने साफ कह दिया कि वह दोबारा यह सीन नहीं करेंगी।इसका कारण था उनका कॉन्ट्रैक्ट। जूही चावला के कॉन्ट्रैक्ट में सिर्फ एक ही किसिंग सीन की शर्त थी और वह उसी पर अडिग रहीं। धर्मेश दर्शन के मुताबिक जूही ने पहले ही यह बात साफ कर दी थी कि वह तय शर्तों से बाहर नहीं जाएंगी।

    मान तो गई थीं लेकिन थीं कन्फ्यूज

    धर्मेश दर्शन ने बताया कि फिल्म का मशहूर गाना मैं तेरी रानी तू राजा राजस्थान के खूबसूरत लोकेशन पर शूट किया गया था। इस गाने में सनी देओल और जूही चावला के बीच एक अहम लिप-टू-लिप सीन फिल्माया जाना था। जूही इसके लिए तैयार तो थीं लेकिन पूरी तरह कन्फ्यूज थीं। इसी वजह से शूटिंग में देरी भी हुई।उन्होंने बताया कि आउटडोर शूट पूरी तरह तैयार था लेकिन उसी दौरान जूही किसी दूसरी फिल्म की शूटिंग के लिए उदयपुर चली गईं जिससे यह सीन और आगे खिसक गया। आखिरकार जब सीन कैमरे के सामने आया तो जूही ने उसे एक ही टेक में पूरा कर दिया।

    पहला टेक ही बना फाइनल
    धर्मेश दर्शन ने कहा जूही ने सीन पूरा किया और अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्त पर कायम रहीं। हमने कभी रीटेक शूट नहीं किया। वही पहला टेक फाइनल कट में गया। उन्होंने उस पल को आज भी बचकाना लेकिन प्यारा बताया।एक तरफ जहां सनी देओल आज भी अपनी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीत रहे हैं वहीं उनके करियर से जुड़े ऐसे किस्से फैंस के लिए हमेशा दिलचस्प बने रहते हैं। अब सभी की नजरें धुरंधर 2 के ट्रेलर पर टिकी हैं जो जल्द ही दर्शकों के सामने आने वाला है।