Tag: AAIB

  • एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान से जुड़ी एक घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में पायलट-इन-कमांड के साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की जांच में नॉन-नेगेटिव परिणाम आने और उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई कम होने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में नागर विमानन महानिदेशालय से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद दिल्ली पहुंचने पर विमान के दोनों क्रू सदस्यों की मेडिकल स्क्रीनिंग की गई थी। दोनों के ब्रेथलाइजर टेस्ट के परिणाम संतोषजनक पाए गए। हालांकि, साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की पहचान के लिए किए गए परीक्षण में पायलट-इन-कमांड का शुरुआती सैंपल नॉन-नेगेटिव मिला, जबकि को-पायलट का परिणाम नेगेटिव रहा।

    इसके बाद पुष्टि के लिए दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों के रक्त नमूने पैथोलॉजिकल लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेशन टेस्ट भी नॉन-नेगेटिव आया, जबकि को-पायलट के दोनों परीक्षणों में परिणाम नेगेटिव रहे। एएआईबी ने इस तथ्य को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में विशेष रूप से दर्ज किया है।

    जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है। इसी वजह से रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है। एएआईबी ने डीजीसीए से मामले में आवश्यक प्राथमिक कार्रवाई करने को कहा है।

    एयर इंडिया ने भी घटना की जांच में सहयोग करने की बात कही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा, फिटनेस अथवा नियमों के अनुपालन में किसी भी तरह की चूक को स्वीकार नहीं किया जाएगा। एयर इंडिया ने घटना के बाद अपने सभी पायलटों की स्वैच्छिक जांच शुरू करने की जानकारी भी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक फुकेत में उड़ान से पहले विमान की जांच की गई थी। इस निरीक्षण के दौरान कोई नई तकनीकी गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। विमान में केवल एक ऐसा आइटम दर्ज था, जिसे पहले से ही मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट के तहत नोट किया गया था। उड़ान दल ने विमान के चारों ओर किए गए वॉक-अराउंड निरीक्षण के दौरान भी किसी अतिरिक्त खराबी की सूचना नहीं दी।

    यह उड़ान एआई-2379 के रूप में संचालित हो रही एयरबस ए320 थी। 4 अगस्त को ओडिशा के ऊपर लगभग 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम काम करना बंद कर गए। इसके बाद विमान की ऊंचाई में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार विमान ने शुरुआत में 372 फीट की अतिरिक्त ऊंचाई हासिल की, लेकिन इसके बाद अपनी निर्धारित ऊंचाई से 292 फीट नीचे चला गया। इस घटना के दौरान विमान में कुल 145 लोग मौजूद थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू सदस्य और दो पायलट शामिल थे।

    घटना के बाद कम से कम 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। विमान को मुख्य रूप से ओवरहेड स्टोरेज डिब्बों और सीलिंग पैनलों के हिस्से में नुकसान पहुंचा। एएआईबी की विस्तृत जांच में अब तकनीकी खराबी, संचालन संबंधी परिस्थितियों और क्रू से जुड़े पहलुओं की आगे जांच की जा रही है।

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।