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  • AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल

    AAP मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार, ED की बड़ी कार्रवाई से पंजाब की राजनीति में हलचल



    नई दिल्ली। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह ED की टीम ने चंडीगढ़ सेक्टर-2 स्थित उनके सरकारी आवास पर छापेमारी की, जिसके बाद लगभग 10 घंटे लंबी पूछताछ की गई और शाम करीब 5 बजे उन्हें दिल्ली ले जाया गया।

    ED के अनुसार यह मामला करीब 157.12 करोड़ रुपये के कथित फर्जी मोबाइल एक्सपोर्ट, शेल कंपनियों और GST इनपुट क्रेडिट धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अरोड़ा से जुड़ी कंपनियों ने फर्जी खरीद-बिक्री और निर्यात दिखाकर अवैध तरीके से धन की हेराफेरी की और विदेशी कंपनियों के जरिए पैसे की राउंड ट्रिपिंग की गई।

    ED ने हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उनसे जुड़ी संस्थाओं के बैंक खाते, डीमैट होल्डिंग्स और कई अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई 17 अप्रैल को की गई छापेमारी और दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है।

    एजेंसी का दावा है कि 157 करोड़ रुपये के घोषित एक्सपोर्ट में से बड़ी राशि UAE की दो कंपनियों के जरिए घूमाकर वापस भारत लाई गई, जिससे FEMA और GST नियमों के उल्लंघन का संदेह गहराया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED ने आगे की पूछताछ दिल्ली में करने की बात कही है।

    इधर गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि ED का इस्तेमाल पार्टी को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की गई है।

    आप सांसद राघव चड्ढा ने भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसी अपना काम कर रही है और कानून से कोई ऊपर नहीं है।

    फिलहाल संजीव अरोड़ा ED की हिरासत में हैं और मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। यह मामला पंजाब की राजनीति में बड़ा विवाद बन गया है और आने वाले दिनों में इसके और राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

  • बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    बंगाल हत्या कांड पर गरमाई सियासत, AAP ने अमित शाह से पूछा—कहां गई केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था?

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद राजनीतिक माहौल और ज्यादा गरमा गया है। इस घटना को लेकर आम आदमी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने इस हत्या की निंदा करते हुए इसे राज्य की कानून व्यवस्था और केंद्रीय सुरक्षा तंत्र की बड़ी विफलता बताया है।

    AAP की ओर से कहा गया है कि जब राज्य में पहले से ही भारी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, तो इसके बावजूद इस तरह की हत्या होना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी ने पूछा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा बलों के बावजूद यह गोलीबारी कैसे हुई और जिम्मेदारी किसकी तय की जाएगी।

    <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”hi” dir=”ltr”>कहाँ है बंगाल में वो 2.5 लाख केंद्रीय बल, जिसे इसीलिए तैनात किया गया था ताकि कोई घटना न हो? क्या इस गोलीकांड की ज़िम्मेदारी गृह मंत्री लेंगे, जो वहाँ पूरे राज्य की कमान संभाले हुए हैं?<br><br>अगर भाजपा बंगाल के सबसे बड़े नेता के करीबी को भी गोली से नहीं बचा पाई, तो आम जनता को क्या… <a href=”https://t.co/iX0lFDM0vR”>https://t.co/iX0lFDM0vR</a></p>&mdash; Priyanka Kakkar (@PKakkar_) <a href=”https://twitter.com/PKakkar_/status/2052092247286710542?ref_src=twsrc%5Etfw”>May 6, 2026</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>
    इस मामले को लेकर AAP प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए सवाल उठाया है कि क्या गृह मंत्री इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी बड़े राजनीतिक नेता के करीबी को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या हाल होगा। पार्टी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई है।

    यह घटना उस समय हुई जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से यात्रा कर रहे थे और अज्ञात हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। गोलीबारी में उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला मानते हुए जांच शुरू कर दी है और कई एंगल से मामले की पड़ताल की जा रही है।

    हत्या के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अलग-अलग राजनीतिक दल इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। कुछ इसे कानून व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। इस बीच इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार जांच में जुटी है।

    AAP ने अपने बयान में यह भी कहा है कि अगर देश में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती, तो इस तरह की घटनाएं नहीं होतीं। पार्टी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल पुलिस और प्रशासन इस मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।

  • बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान

    बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में शानदार बढ़त के बाद बीजेपी अब सिर्फ जश्न के मूड में नहीं है, बल्कि अगले मिशन की तैयारी में भी जुट गई है। पार्टी ने साफ संकेत दे दिया है कि अब उसका अगला बड़ा राजनीतिक टारगेट पंजाब होगा।

    बंगाल में मिल रही बढ़त को बीजेपी राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि देशभर में बदलते सियासी समीकरणों की शुरुआत है।

    बीजेपी प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब की बारी है, AAP सरकार अपना बोरिया-बिस्तर बांध ले।” इस बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब पंजाब की राजनीति में आक्रामक रुख अपनाने वाली है।

    दिल्ली समेत देशभर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है। पार्टी मुख्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और इस जीत को जनता के भरोसे का नतीजा बताएंगे।

    राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी को नई ऊर्जा देने वाला है। यह जीत आने वाले चुनावों के लिए रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगी, खासकर उन राज्यों में जहां बीजेपी अभी सत्ता से दूर है।

    कुल मिलाकर, बंगाल की जीत ने बीजेपी के हौसले बुलंद कर दिए हैं और अब पार्टी इस लहर को पंजाब तक ले जाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में देश की राजनीति और भी ज्यादा गरमाने वाली है।

  • AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    AAP छोड़ BJP में शामिल हुए सांसद राजिंदर गुप्ता की फैक्ट्री पर छापा, कार्रवाई से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता से जुड़ी कंपनी पर पंजाब में बड़ी कार्रवाई हुई है। उनकी कंपनी ट्राइडेंट ग्रुप की धौला स्थित फैक्ट्री पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने छापेमारी की।

    जानकारी के अनुसार, दोपहर में प्रदूषण विभाग की टीम नौ वाहनों के काफिले के साथ फैक्ट्री परिसर में पहुंची। टीम में लगभग 10 अधिकारी शामिल थे, जो फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर प्लांट और जरूरी दस्तावेजों की गहन जांच कर रहे हैं। यह कार्रवाई बिना किसी पूर्व सूचना के की गई, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रूटीन निरीक्षण है या किसी विशेष शिकायत के आधार पर की गई जांच। इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। इसे राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    उधर, राजिंदर गुप्ता के भाजपा में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। चंडीगढ़ में उनके आवास की दीवारों पर “गद्दार” तक लिखा गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर सुरक्षा बढ़ा दी थी। राजिंदर गुप्ता पंजाब के प्रमुख उद्योगपतियों में गिने जाते हैं और पद्मश्री से सम्मानित भी रह चुके हैं। वे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

  • LS में AAP को लग सकता है बड़ा झटका…. मजीठिया का दावा- इस्तीफा देने को तैयार 2 MP

    LS में AAP को लग सकता है बड़ा झटका…. मजीठिया का दावा- इस्तीफा देने को तैयार 2 MP


    चंडीगढ़।
    आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party- AAP) के लिए पंजाब में सियासी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्यसभा (Rajya Sabha) में अपने सांसदों की बड़ी बगावत का सामना कर रही पार्टी को अब निचले सदन (लोकसभा) में भी बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal- SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि पंजाब से AAP के 2 लोकसभा सांसद भी पार्टी से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।

    बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी में मची भगदड़ केवल उच्च सदन (राज्यसभा) तक सीमित नहीं रहने वाली है। उनके अनुसार, पंजाब में AAP सरकार की कार्यप्रणाली, नेतृत्व की अनदेखी और अंदरूनी कलह से नाराज होकर अब लोकसभा के 2 सांसद भी जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं।

    2024 के लोकसभा चुनावों में पंजाब से आम आदमी पार्टी के केवल 3 सांसद ही जीतकर संसद पहुंचे थे। ये सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर, मलविंदर सिंह कंग और राज कुमार चब्बेवाल हैं। अगर मजीठिया का यह दावा सच साबित होता है और 2 सांसद इस्तीफा दे देते हैं, तो यह लोकसभा में आम आदमी पार्टी के लगभग सफाए के बराबर होगा।

    मजीठिया ने एक पोस्ट में लिखा, ‘एक और दिन, एक और विदाई की तैयारी… सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के 2 लोकसभा सांसद जल्द ही पार्टी छोड़कर जा सकते हैं। ‘बार-बार सफर करने वालों’ की यह सूची बस बढ़ती ही जा रही है।’


    राज्यसभा में लगा करारा झटका

    अकाली दल के नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पंजाब AAP इतिहास के अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। हाल ही में पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने एक साथ बगावत कर दी है। प्रमुख बागी नेता: इनमें पार्टी के मुख्य रणनीतिकार रहे राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह जैसे बड़े चेहरे शामिल हैं, जिन्होंने भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया है।


    पंजाब की भगवंत मान सरकार पर मंडराता खतरा?

    बिक्रम सिंह मजीठिया और अन्य विपक्षी दल इस स्थिति का पूरा राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। मजीठिया ने इस भगदड़ को AAP सरकार के पतन की शुरुआत बताया है। हाल ही में मजीठिया ने कहा है कि सांसदों के बाद अब बड़ी संख्या में AAP के विधायक भी पार्टी छोड़ने की कतार में हैं, जो जल्द ही भाजपा या अन्य दलों में शामिल हो सकते हैं।


    फ्लोर टेस्ट की मांग

    अकाली दल ने दावा किया है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार जल्द ही अल्पमत में आ सकती है। इसके मद्देनजर उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से विधानसभा में ‘फ्लोर टेस्ट’ (बहुमत परीक्षण) कर अपना बहुमत साबित करने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि ‘बदलाव’ का नारा देकर सत्ता में आई AAP की सरकार अब भ्रष्टाचार, लचर कानून-व्यवस्था और गुटबाजी का शिकार हो चुकी है, जिसके चलते उनके अपने ही संस्थापक सदस्य और नेता “डूबते जहाज” से कूद रहे हैं।

    मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस बगावत को सिरे से खारिज करते हुए बागी नेताओं को ‘गद्दार’ करार दिया है। उनका कहना है कि जो लोग छोड़कर गए हैं उनका अपना कोई जनाधार नहीं था और पंजाब सरकार को विधायकों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। हालांकि, 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले यह राजनीतिक अस्थिरता आम आदमी पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। यदि लोकसभा सांसदों के इस्तीफे की खबर हकीकत में बदलती है, तो यह पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक रूप से एक बहुत बड़ा नुकसान साबित होगा।

  • अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट

    अदालत के आदेश के बाद मिला नया घर, अरविंद केजरीवाल परिवार सहित नए बंगले में शिफ्ट


    नई दिल्ली।आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपना नया आवास बदल लिया है और अब वे परिवार सहित लुटियंस दिल्ली स्थित एक सरकारी बंगले में शिफ्ट हो गए हैं। यह नया पता 95, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली है, जो राजधानी के प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में गिना जाता है। केजरीवाल ने स्वयं इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह आवास पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के रूप में निर्धारित नियमों और न्यायिक आदेश के तहत आवंटित किया गया है।

    यह बंगला उच्च श्रेणी के सरकारी आवासों में शामिल है, जिसे आमतौर पर शीर्ष राजनीतिक पदों पर आसीन नेताओं को दिया जाता है। लगभग 5000 वर्ग फीट में फैले इस आवास में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें चार बड़े कमरे, दो खुले लॉन, तीन सर्वेंट क्वॉर्टर और एक गैराज शामिल है। इसके साथ ही एक अलग ऑफिस स्पेस भी बनाया गया है, जहां से राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों को संचालित किया जा सकता है। इस तरह का आवास न केवल रहने के लिए बल्कि आधिकारिक कार्यों के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।

    दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अरविंद केजरीवाल को अपना पूर्व आधिकारिक आवास खाली करना पड़ा था। उस समय यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र भी बना रहा, जब विपक्ष ने उस आवास को लेकर कई सवाल उठाए। इसके बाद कुछ समय तक वे अपनी पार्टी के एक सांसद के आवास पर रह रहे थे। हालांकि, राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को दिल्ली में आवास उपलब्ध कराने के नियम के तहत उन्हें यह नया बंगला प्रदान किया गया है, जिससे उनकी आवास संबंधी स्थिति स्पष्ट हो गई है।

    नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को राजधानी में एक निर्धारित श्रेणी का सरकारी आवास दिया जाता है, ताकि वे अपने संगठनात्मक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित कर सकें। इसी प्रावधान के अंतर्गत केजरीवाल को यह बंगला आवंटित किया गया है। खास बात यह भी रही कि इस आवंटन की प्रक्रिया में न्यायालय के निर्देशों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि उन्हें उनके पद के अनुरूप सुविधाएं मिल सकें।

    इस नए आवास में शिफ्ट होने के साथ ही अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को संगठित रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। लुटियंस दिल्ली का यह इलाका प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां देश के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी निवास करते हैं। ऐसे में यह बदलाव न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। यह घटनाक्रम राजधानी की राजनीति में एक नए अध्याय की ओर इशारा करता है, जहां आने वाले समय में केजरीवाल की सक्रियता और रणनीतियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी

    ‘समोसा’ विवाद के पीछे सियासी दरार? AAP में खटपट की इनसाइड स्टोरी


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी में उभरते युवा चेहरे माने जाने वाले राघव चड्ढा इन दिनों अपनी ही पार्टी के निशाने पर हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाने के साथ-साथ संसद में उनकी भूमिका भी सीमित कर दी है। कभी अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले चड्ढा अब पार्टी के भीतर अलग-थलग नजर आ रहे हैं।

    आतिशी और सौरभ भारद्वाज का हमला

    शुक्रवार को आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर तीखा हमला बोला। आरोप है कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर चड्ढा ने हस्ताक्षर नहीं किए।

    आतिशी ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष एकजुट था तो चड्ढा पीछे क्यों हटे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद में अहम मुद्दों पर वे चुप रहे।

    ‘समोसा’ टिप्पणी पर भी विवाद

    पार्टी नेताओं ने चड्ढा द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों पर भी तंज कसा। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि देश के बड़े मुद्दों की बजाय चड्ढा हवाई अड्डों पर समोसे की कीमत और जूस के पैकेट जैसे विषयों पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि चड्ढा ने इन पर बने मीम्स का स्वागत किया था, लेकिन पार्टी ने इसे गंभीरता की कमी बताया।

    पुरानी नाराजगी भी बनी वजह

    आंतरिक असंतोष की जड़ें 2024 तक जाती बताई जा रही हैं, जब कथित आबकारी मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान चड्ढा आंख के ऑपरेशन के लिए लंदन में थे। इस पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं कि उस समय वे पार्टी के साथ सक्रिय क्यों नहीं दिखे।

    पंजाब की राजनीति का असर

    2022 में पंजाब में जीत के बाद चड्ढा को ‘सुपर सीएम’ कहा जाने लगा था, जिससे स्थानीय नेताओं में असंतोष बढ़ा। बाद में पार्टी नेतृत्व ने पंजाब पर सीधा नियंत्रण मजबूत किया और चड्ढा की भूमिका सीमित होती चली गई।

    चड्ढा की सफाई

    पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा कि जनता के मुद्दे उठाना गलत नहीं है और उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने संकेत दिया कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उनकी जगह राज्यसभा में उप-नेता के तौर पर अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया है।

    क्या BJP जॉइन करेंगे?

    राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चड्ढा भविष्य में भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकते हैं। भगवंत मान ने उन्हें ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ बताया, जबकि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि चड्ढा को खुद तय करना होगा कि उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा।

    हालांकि फिलहाल चड्ढा की ओर से किसी पार्टी में जाने को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी हलकों में अटकलों को तेज कर दिया है।

  • 1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव

    1984 दंगों के वकील एचएस फूलका ने थाना BHP का दामन… AAP से लड़ चुके हैं आम चुनाव


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सीनियर वकील और आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के पूर्व नेता एच.एस. फूलका (H.S. Phoolka) अब भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं। उनकी पहचान 1984 के सिख विरोधी दंगों के वकील के तौर पर रही है। वह लंबे समय तक इस मामले में केस लड़ते रहे हैं। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन पराजय हो गई थी। फूलका ने दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा की ओर से कई सिख चेहरे मौजूद थे। इनमें सीनियर नेता और मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ इस मौके पर मौजूद थे।

    यही नहीं पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और प्रवक्ता अनिल बलूनी भी उपस्थित थे। फूलका को पार्टी में शामिल कराने के पीछे अगले साल होने वाले पंजाब चुनाव को देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि एक सिख चेहरा और वह भी दंगों के वकील रहे नेता को एंट्री देने से भाजपा को फायदा मिल सकता है। भाजपा बीते कई दशकों से राज्य में सिखों के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। अकाली दल के साथ सालों तक गठबंधन में रही भाजपा अब सूबे में अकेली है। ऐसे में हिंदू वोटरों की पार्टी का तमगा मिले रहने से ही भाजपा खुश नहीं होगी। इसीलिए वह चाहती है कि सिखों के बीच भी पैठ बने।

    उनका स्वागत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने अपने इरादे भी स्पष्ट कर दिए और कहा कि इससे भाजपा को पंजाब में ताकत मिलेगी। उनका कहना था कि इससे पंजाब में संगठन भी मजबूत होगा। पहले भी भाजपा ने कई सिख चेहरों को एंट्री दी थी, लेकिन बहुत सफलता अब तक नहीं मिली है। इन नेताओं में कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, रवनीत सिंह बिट्टू आदि प्रमुख हैं। हालांकि अब सिद्धू बाहर हैं। इस मौके पर फूलका ने भी बात की और कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की लीडरशिप में जिस तरह के हालात हैं। उनसे निपटने का दम सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी ही रखते हैं।

    रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ चुनाव लड़े थे फूलका
    फूलका ने कहा, ‘सिखों के मुद्दों पर पीएम मोदी ने निजी तौर पर रुचि दिखाई है। 1984 के दंगों को लेकर मेरे काम की उन्होंने सराहना की है।’ उन्होंने कहा कि भाजपा ने मदन लाल खुराना, सुषमा स्वराज और विजय कुमार मल्होत्रा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सिखों के मसले पर भाजपा ने काफी काम किया था। इसलिए अब मैं उसमें शामिल हो रहा हूं। फूलका ने 2019 का चुनाव लुधियाना से रवनीत सिंह बिट्टू के खिलाफ लड़ा था और हार गए थे। अब रवनीत सिंह बिट्टू भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं और केंद्र में मंत्री हैं।

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा


    नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। आज राजधानी में AQI 500 के पार पहुंच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है और विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। स्थिति के मद्देनजर नेशनल कैपिटल में GRAP 4 लागू कर दिया गया है।

    AAP ने उठाया केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल
    AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “यह सरकार लगभग एक साल से सत्ता में है, लेकिन प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंद कमरे में भी धुंध दिखाई दे रही है। CM को यह नहीं पता कि AQI क्या होता है। एक्सपर्ट्स को आगे आना चाहिए और मुख्यमंत्री को पीछे हट जाना चाहिए।”

    GRAP 4: क्या है नियम
    GRAP-IV के तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में क्लास 5 तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

    क्लास 6 से 11 तक फिजिकल क्लास बंद करने का विकल्प भी राज्य सरकारों को दिया गया है।

    प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
    दिल्ली-NCR में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर संभव हो तो अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली से बाहर जाने पर विचार किया जाए।

    दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण GRAP 4 लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष और AAP का कहना है कि केंद्र और दिल्ली सरकार इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। राजधानीवासियों के लिए फिलहाल सफर और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।