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  • पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    पंजाब चुनाव से पहले AAP में बगावत, 40 उम्मीदवारों की सूची आते ही दो विधायकों ने छोड़ी पार्टी..

    नई दिल्ली । पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार दो दिनों में बड़ा झटका लगा है। पार्टी की ओर से 31 अक्टूबर को 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी किए जाने के अगले ही दिन उसके दो मौजूदा विधायकों ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने वाले नेताओं में पटियाला जिले की सनौर विधानसभा सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना सीट से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा शामिल हैं। दोनों के फैसले से चुनाव से पहले पार्टी के भीतर असंतोष और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    दोनों विधायकों के इस्तीफे की जानकारी 1 नवंबर को सामने आई। हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा है। वहीं चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की घोषणा की। दोनों विधायकों के नाम 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई आम आदमी पार्टी की पहली सूची में शामिल नहीं थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    दोनों नेताओं ने चंडीगढ़ में रविवार शाम 4:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने की जानकारी दी थी। इसमें उनके पार्टी छोड़ने के फैसले और इसके पीछे के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई गई। उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की भी चर्चा सामने आई, हालांकि इस्तीफे के समय तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। इसलिए उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

    हरमीत सिंह पठानमाजरा और आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ और उनके विधानसभा क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई के मुद्दे पर उन्होंने सरकार तथा पार्टी नेतृत्व के कामकाज पर सवाल उठाए थे। इस घटनाक्रम के बाद उनके और भगवंत मान सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी थी। इसके बाद उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने का मामला भी चर्चा में आया था।

    चेतन सिंह जौड़ामाजरा समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, सितंबर 2024 में मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी बदलाव हुए। पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को आम आदमी पार्टी में शामिल करने और उन्हें समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने के बाद जौड़ामाजरा की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।

    दूसरी ओर, हरमीत सिंह पठानमाजरा लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों को लेकर चर्चा में रहे हैं। सितंबर 2025 में बाढ़ की स्थिति और अपने क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने सरकार के सामने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि क्षेत्र में नदी-नालों की सफाई और बाढ़ से बचाव के लिए पर्याप्त कदम उठाने की जरूरत है। इस मुद्दे पर उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद सामने आए थे। बाद के घटनाक्रम में उनकी सरकारी सुरक्षा वापस लिए जाने की बात भी सामने आई थी।

    पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने पहले ही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 31 अक्टूबर को घोषित पहली सूची में 40 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम शामिल किए गए थे। पार्टी ने चुनाव से काफी पहले उम्मीदवारों की घोषणा करके अपनी तैयारियों को गति देने की कोशिश की है। हालांकि, सूची जारी होने के अगले ही दिन दो मौजूदा विधायकों के इस्तीफे ने पार्टी के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और 2027 में होने वाले चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के दो विधायकों का पार्टी छोड़ना चुनावी तैयारियों के बीच महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की आगे की राजनीतिक गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आप की पहली सूची जारी, 40 उम्मीदवारों को टिकट; धूरी से लड़ेंगे भगवंत मान

    नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। पार्टी ने इस सूची में 40 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। सबसे प्रमुख नाम पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का है, जिन्हें धूरी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया है। पार्टी की ओर से जारी सूची में माझा, दोआबा और मालवा क्षेत्रों की विभिन्न विधानसभा सीटों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही कई महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।

    आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पंकज कुमार गुप्ता की ओर से 31 अक्टूबर को उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। इसमें प्रत्याशियों के नाम के साथ उनके विधानसभा क्षेत्र और निर्वाचन क्षेत्र की संख्या का भी उल्लेख किया गया है। पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर चुनावी तैयारियों की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    माझा और दोआबा क्षेत्र में इन उम्मीदवारों को टिकट
    पार्टी की पहली सूची के अनुसार, बटाला विधानसभा सीट से अमनशेर सिंह (शेरी कलसी), अजनाला से कुलदीप सिंह धालीवाल और अमृतसर दक्षिण से डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर को उम्मीदवार बनाया गया है। तरनतारन सीट से हरमीत सिंह संधू और खेमकरण से सरवन सिंह धुन चुनाव लड़ेंगे।

    दोआबा क्षेत्र में नकोदर सीट से इंदरजीत कौर मान, करतारपुर से बलकार सिंह, दसूया से करमबीर सिंह घुम्मन और उर्मर से जसवीर सिंह राजा गिल को टिकट दिया गया है। होशियारपुर से ब्रह्म शंकर शर्मा जिंपा, चब्बेवाल से ईशांक कुमार चब्बेवाल, गढ़शंकर से जय किशन सिंह रौड़ी और बलाचौर से संतोष कटारिया को प्रत्याशी घोषित किया गया है।

    रूपनगर और लुधियाना की सीटों पर भी नाम तय
    रूपनगर विधानसभा सीट से दिनेश चड्ढा और एसएएस नगर से कुलवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। फतेहगढ़ साहिब से लखबीर सिंह राय, अमलोह से गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग और समराला से जगतार सिंह दयालपुरा चुनाव मैदान में होंगे।

    लुधियाना क्षेत्र की कई सीटों पर भी पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए हैं। लुधियाना पूर्वी से दलजीत सिंह ग्रेवाल भोला, आत्म नगर से कुलवंत सिंह सिद्धू और लुधियाना केंद्रीय से अशोक प्रशार पप्पी को टिकट दिया गया है। लुधियाना पश्चिम से संजीव अरोड़ा, लुधियाना उत्तर से चौधरी मदन लाल बग्गा और पायल से मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को उम्मीदवार बनाया गया है।

    मालवा क्षेत्र में भी उम्मीदवारों की घोषणा
    मालवा क्षेत्र की सीटों पर निहाल सिंह वाला से मनजीत सिंह बिलासपुर, बाघा पुराना से अमृतपाल सिंह सुखानंद और मोगा से अमनदीप कौर अरोड़ा को प्रत्याशी घोषित किया गया है। धर्मकोट से देविंदर जीत सिंह लाडी ढोस, जलालाबाद से जगदीप कंबोज गोल्डी और फाजिल्का से नरिंदरपाल सिंह सावना को टिकट मिला है।

    इसके अलावा मुक्तसर से जगदीप सिंह काका बराड़, कोटकपूरा से कुलतार सिंह संधवां और जैतो से अमोलक सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। तलवंडी साबो से बलजिंदर कौर, सरदूलगढ़ से गुरप्रीत सिंह बनावाली, भदौड़ से लभ सिंह उगोके और मेहल कलां से कुलवंत सिंह पंडोरी को चुनाव मैदान में उतारा गया है।

    धूरी से भगवंत मान, पटियाला से अजीतपाल सिंह को टिकट
    सूची में अमरगढ़ विधानसभा सीट से जसवंत सिंह गज्जन माजरा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं धूरी से मुख्यमंत्री भगवंत मान चुनाव लड़ेंगे। पटियाला विधानसभा सीट से अजीतपाल सिंह को टिकट दिया गया है। सूची में इंदरजीत कौर मान, संतोष कटारिया, डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा और बलजिंदर कौर सहित महिला उम्मीदवारों को भी जगह दी गई है।

    इस तरह आम आदमी पार्टी ने पंजाब की 40 विधानसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी से उम्मीदवार बनाए जाने के साथ पार्टी ने अपनी पहली सूची में विभिन्न क्षेत्रों और विधानसभा सीटों को प्रतिनिधित्व दिया है।

  • AAP का आरोप…. दिल्ली एयरपोर्ट पर CM भगवंत मान को 3 घंटे तक रोका… 50 हजार का जुर्माना लगाया?

    AAP का आरोप…. दिल्ली एयरपोर्ट पर CM भगवंत मान को 3 घंटे तक रोका… 50 हजार का जुर्माना लगाया?


    नई दिल्ली।
    पंजाब (Punjab) में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने वाले हैं। इसे देखते हुए पंजाब की राजनीति गरमा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने आरोप लगाया है कि पेरिस (Paris) में एक फूड ट्रेड फेयर से लौटते समय 19 अक्टूबर की देर रात पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) को दिल्ली एयरपोर्ट (Delhi Airport) पर तीन घंटे तक रोककर रखा गया। उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। AAP के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने ये आरोप लगाए हैं।

    आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार भगवंत मान को अपमानित करने और पंजाब की गरिमा को ठेस पहुंचाने की एक सोची-समझी कोशिश है। पन्नू ने आरोप लगाया, “जब मुख्यमंत्री पेरिस से लौटकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्हें जानबूझकर रोका गया। बहाने बनाए गए कि उनका सामान अभी आ रहा है या अभी चेक हो रहा है। ये सरासर झूठ थे। तीन घंटे बाद जब भगवंत मान को जाने दिया गया तो उन पर 50,000 रुपये का चालान काट दिया गया।”


    चालान क्यों काटा गया?

    पन्नू ने आगे कहा, “तीन घंटे बाद जब भगवंत मान अपना सामान गाड़ी में रखकर निकलने ही वाले थे तो अधिकारी दौड़ते हुए उनके पास आए और कहा कि उन पर ऊपर से भारी दबाव है। इसके बाद उन्होंने 50,000 रुपये का एक बेतुका चालान काट दिया। यह पंजाब की पहचान और गरिमा पर सीधा हमला है।” पन्नू ने यह नहीं बताया कि जुर्माना किस वजह से लगाया गया।


    हाईकोर्ट से मिली थी भगवंत मान को मंजूरी

    आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने भगवंत मान की पेरिस यात्रा के लिए मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पंजाब सरकार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गई। हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि केंद्र ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह राजनीतिक पहलू या दृष्टिकोण क्या है। पन्नू ने बताया कि मान की फ्रांस यात्रा को मंजूरी देते समय हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पंजाब के मुख्यमंत्री को उचित प्रोटोकॉल दिया जाए, लेकिन केंद्र सरकार की दुर्भावना इतनी थी कि पेरिस में मौजूद कॉन्सल जनरल भी उनसे मिलने नहीं आए।

    पन्नू ने कहा, “क्या कभी किसी मुख्यमंत्री को इस तरह हवाई अड्डे पर तीन घंटे तक रोका गया है? क्या कभी किसी मुख्यमंत्री का 50,000 रुपये का चालान काटकर अपमान किया गया है? ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि भगवंत सिंह मान एक पंजाबी हैं, पंजाब के मुख्यमंत्री हैं और पंजाब की बेहतरी के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।”

    पन्नू ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पंजाब और पंजाबी पहचान को कमजोर करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। चाहे किसानों को डेढ़ साल तक दिल्ली की सीमाओं पर रोके रखना हो या पंजाब के हक का फंड रोक देना हो, केंद्र सरकार ने लगातार हर स्तर पर पंजाब का गला घोंटने की कोशिश की है।”

  • अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आम आदमी पार्टी से उनके पुराने संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    अजिंक्य शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के अलिबाग के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उनका संबंध महाराष्ट्र के लातूर से भी बताया गया है। शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। राजनीति में आने से पहले वह पुणे की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में नौकरी करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करना शुरू किया था। तकनीकी शिक्षा के बाद राजनीति में उनकी सक्रियता ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचाया।

    अजिंक्य शिंदे का आम आदमी पार्टी से भी जुड़ाव रहा है। वह महाराष्ट्र में पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश संयोजक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें गोवा में आम आदमी पार्टी का सह-प्रभारी भी बनाया गया था। उनके सोशल मीडिया खातों पर वर्ष 2024 तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में की गई पोस्ट मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सीजेपी में उनकी मौजूदा भूमिका और आम आदमी पार्टी में पहले निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण दोनों संगठनों के बीच संभावित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को अपने आप में दोनों दलों के बीच सीधे संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    सीजेपी में अजिंक्य शिंदे को 6 अगस्त 2026 को घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान राष्ट्रीय संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया था। यह पद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सार्वजनिक रूप से शिंदे को दीपके का मार्गदर्शक बताया है। इससे पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और नेतृत्व से जुड़े संबंधों का संकेत मिलता है। संगठन में उनकी जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं रही। जून से 25 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शनों में भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों के समन्वय और पर्दे के पीछे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की जानकारी सामने आई है।

    10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले तीन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शिंदे की भूमिका और अहम हो गई। अभिजीत दीपके ने अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन को अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इस घोषणा के बाद शिंदे को प्रदर्शन की कमान संभालने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। संगठनात्मक प्रबंधन और पहले के प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

    अब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में अजिंक्य शिंदे की भूमिका पर नजर रहेगी। सीजेपी के शीर्ष नेताओं की हिरासत के बीच उन्हें कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और आंदोलन की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के बीच पार्टी अपने कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

  • SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे

    SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के 6 अक्टूबर के प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली है। AAP ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन अलग तरीके से जारी रखेगी और इसे किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि जनता से जुड़ा मुद्दा मानती है।

    संसद भवन परिसर में सोमवार को मीडिया से बातचीत में AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर का प्रदर्शन INDIA गठबंधन का है, इसलिए आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं होगी।

    संजय सिंह ने कहा, “जहां तक कल के प्रदर्शन की बात है, तो ये INDIA गठबंधन का प्रोटेस्ट है। इसलिए आम आदमी पार्टी इसका हिस्सा नहीं है। हम इस लड़ाई को अपने तरीके से लगातार लड़ रहे हैं।”

    पार्टी बैनर के बिना आंदोलन की बात

    AAP नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि AAP अपने प्रदर्शन में पार्टी का बैनर तक इस्तेमाल नहीं कर रही है, क्योंकि उसका मानना है कि यह देश के नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए।

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि CJP और वाम दल समेत कई संगठन अलग-अलग स्थानों पर SIR के खिलाफ अपने स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति के तहत इस मुद्दे को उठा रही है।

    30 सितंबर की विपक्षी बैठक में भी नहीं पहुंची थी AAP

    AAP ने 30 सितंबर को हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। उस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की थी। बैठक के बाद INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को अपने सांसदों के साथ चुनाव आयोग तक मार्च करने और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का फैसला किया था।

    इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD नेता तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया था। AAP के साथ DMK भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई थी।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने

    SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में तीन सदस्यीय आयोग के भीतर किसी विभाजन के दावों को खारिज किया है और कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

    AAP की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी SIR के मुद्दे से पीछे नहीं हट रही है। उसका कहना है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी, लेकिन 6 अक्टूबर को होने वाले INDIA गठबंधन के संयुक्त प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेगी।

  • राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    राघव चड्ढा और AAP में वोटर लिस्ट विवाद, दिल्ली में नाम जुड़ने पर चड्ढा ने तंज के साथ आरोपों का दिया जवाब

    नई दिल्ली ।पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने और दिल्ली की मतदाता सूची में नाम जुड़ने को लेकर बीजेपी सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद चड्ढा ने पलटवार करते हुए पार्टी पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि AAP की हालत ऐसी हो गई है कि उन्हें सपने में भी वह भूत की तरह नजर आते हैं और पार्टी लगातार उनके नाम का जिक्र करती रहती है।

    राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी की स्थिति की तुलना एक ऐसी एक्स गर्लफ्रेंड से की, जिसे उसका बॉयफ्रेंड छोड़कर आगे बढ़ चुका है, लेकिन वह अब भी उसके प्यार में है। इसी दौरान उन्होंने तंज करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि कहीं कोई दिलजला आशिक की तरह उनकी याद में अपनी नसें न काट ले। चड्ढा ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी की चिंता रहती है।

    दरअसल, पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से अपना नाम गायब होने के बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण उनका नाम वोटर लिस्ट में शिफ्टेड कैटेगरी में डाल दिया। चड्ढा का कहना था कि पार्टी छोड़ने के बाद से AAP उन्हें लगातार निशाना बना रही है।

    चड्ढा ने यह भी कहा था कि ऐसा लगता है कि वह अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को परेशान कर रहे हैं। उनके मुताबिक पार्टी के लोग दिन-रात उनके बारे में सोच रहे हैं और उन पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं।

    इसके बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम जुड़ने को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। AAP की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राजिंदर नगर के संबंधित पोलिंग पार्ट में 746 मतदाता थे। बाद में राघव चड्ढा का नाम 747वें मतदाता के रूप में जुड़ा।

    सौरभ भारद्वाज के अनुसार राजिंदर नगर की मतदाता सूची में सीरियल नंबर 747 पर राघव चड्ढा, पिता सुनील चड्ढा और उम्र 37 साल दर्ज है। उन्होंने चड्ढा के तीन सितंबर के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने पंजाब में दोबारा मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने की बात कही थी। भारद्वाज ने चुनाव आयोग से पूछा कि जब ड्राफ्ट सूची में 746 नाम थे तो 747वां नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया।

    AAP प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने भी इस मामले में राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक चड्ढा ने 26 अगस्त को दिल्ली में वोट बनवाने के लिए फॉर्म-6 दाखिल किया था और दो सितंबर को उनका आवेदन मंजूर हो गया। ढांडा ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद तीन सितंबर को चड्ढा पंजाब सरकार पर उनका वोट कटवाने का आरोप लगा रहे थे।

    राघव चड्ढा ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की सभी लागू गाइडलाइंस और तय प्रक्रिया का पालन किया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि उनका नाम नियमों के तहत जोड़ा गया। कार्यालय के मुताबिक 26 अगस्त को फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया गया था और सात दिन की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद दो सितंबर को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी ने आवेदन मंजूर किया।

    मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार आवेदन मंजूर होने के बाद संबंधित नाम मसौदा मतदाता सूची की अंतिम क्रम संख्या के बाद डेटाबेस में दिखाई देता है। अंतिम मतदाता सूची पुनरीक्षण अवधि पूरी होने और सभी दावों तथा आपत्तियों के निपटारे के बाद प्रकाशित की जाएगी।

  • सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    सपा के साथ आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री से INDIA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के सामने नई चुनौती

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले ही साथ चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दे चुके हैं, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की संभावित एंट्री ने विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि अगर सपा और आप के बीच सीटों को लेकर सहमति बनती है तो कांग्रेस के सामने गठबंधन के भीतर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

    सियासी हलकों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए करीब 15 से 20 सीटें देने पर विचार कर सकती है। इस संभावना को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह के बीच हुई मुलाकातों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यूपी की चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।

    संजय सिंह और अखिलेश यादव की इसी साल अप्रैल में मुलाकात हुई थी। इसके बाद 23 अगस्त को भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर सकती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन के बीच आप को साथ लाने की कोशिश कांग्रेस के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि 2027 में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद है। ऐसे में दोनों दलों को एक ही गठबंधन में लाने का फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।

    इसके अलावा आम आदमी पार्टी के INDIA गठबंधन से दूरी बनाने वाले बयानों ने भी स्थिति को जटिल बनाया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आप की उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष चुनावी भूमिका नहीं रही थी। पार्टी ने यूपी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे और समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था।

    2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को कुल 3 लाख 47 हजार 187 वोट मिले थे। हालांकि उसका प्रदर्शन व्यापक रूप से प्रभावी नहीं रहा, लेकिन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उसे अपेक्षाकृत अधिक मत मिले थे। रुधौली में आप उम्मीदवार को 24,367 और खलीलाबाद में 25,123 वोट मिले थे।

    इसके अलावा लोनी, साहिबाबाद, नोएडा और मोहनलालगंज जैसे क्षेत्रों में भी पार्टी के उम्मीदवारों को पांच हजार से अधिक वोट मिले थे। यही कारण है कि आगामी चुनाव में आप इन क्षेत्रों को संभावित सीट दावेदारी के आधार के रूप में देख सकती है। यदि सपा इन क्षेत्रों में आप को जगह देती है तो सीट बंटवारे की प्रक्रिया में कांग्रेस की भूमिका और रणनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी।

    2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था। चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता भी की थी। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था।

    ऐसे में उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और आप के संभावित समीकरण को लेकर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। यदि आप की गठबंधन में औपचारिक एंट्री होती है तो सीटों के बंटवारे के साथ-साथ तीनों दलों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और चुनावी रणनीति को लेकर भी बातचीत करनी होगी। फिलहाल सपा और आप के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने यूपी की विपक्षी राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।

  • सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सियासी घमासान, केजरीवाल ने बीजेपी पर लगाया राजनीतिक बदले का आरोप


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP से जुड़े कथित टेंडर घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ACB की कार्रवाई के बाद राजधानी की राजनीति गरमा गई है। जांच एजेंसी ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं। कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।

    मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं के विस्तार और सुधार से संबंधित बताया गया है। आरोप है कि इन परियोजनाओं के लिए जारी टेंडर की शर्तों में बदलाव किए गए और निर्धारित नियमों तथा प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर 11 मई 2024 को मामला दर्ज किया गया था।

    जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों तथा अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी क्रम में ACB ने छह लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की है। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी ने मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है, क्योंकि वह दिल्ली सरकार में मंत्री रह चुके हैं और आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं।

    आम आदमी पार्टी ने गिरफ्तारी की टाइमिंग और मामले में सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता अनुराग ढांडा ने कहा कि जिस टेंडर को मामले का आधार बनाया जा रहा है, वह अक्टूबर 2022 में हुआ था। उनका दावा है कि उस समय सत्येंद्र जैन पहले से ही एक अन्य मामले में जेल में थे। इसी आधार पर पार्टी ने जैन की भूमिका को लेकर जांच एजेंसी के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक दबाव का हिस्सा है। AAP नेताओं का कहना है कि विपक्ष से जुड़े नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाना चाहिए। पार्टी ने मामले में लगाए गए आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

    सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जैन को दोबारा गिरफ्तार कराया गया है। केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख करते हुए जेल में उनके साथ कथित व्यवहार पर भी सवाल उठाए।

    केजरीवाल ने दावा किया कि जैन के खिलाफ पिछला मामला भी गलत था और मौजूदा मामले में भी जांच आगे बढ़ने के बाद आरोप सही साबित नहीं होंगे। उनके बयान के बाद AAP और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।

    दूसरी ओर, ACB की कार्रवाई का आधार दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच है। जांच एजेंसी ने जिन आरोपों के आधार पर गिरफ्तारियां की हैं, उनकी पुष्टि आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगी। फिलहाल मामला जांच के स्तर पर है और गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका तथा टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी है।

    इस कार्रवाई ने दिल्ली में सरकारी टेंडर, भ्रष्टाचार के आरोप और जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को फिर सामने ला दिया है। अब मामले में आगे होने वाली जांच और अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि आरोपों से जुड़े तथ्यों और गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका के संबंध में क्या स्थिति सामने आती है।

  • पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती

    पंजाब में AAP का हिंदू वोटों पर फोकस! राम शो और शिव भजन से साधेगा सियासी समीकरण, BJP की बढ़ी चुनौती


    नई दिल्ली । पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी ने अपनी रणनीति का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब तक पंथक मुद्दों के जरिए सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाली आम आदमी पार्टी हिंदू मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत भगवान श्रीराम पर आधारित हमारे राम नाटक के मंचन और भगवान शिव को समर्पित भजन संध्याओं का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 7 अगस्त को मोहाली से हमारे राम के मंचन की शुरुआत की। इसके बाद प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसके आयोजन की तैयारी है। इसे पंजाब की बदलती राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की यह पहल केवल भगवान श्रीराम तक सीमित नहीं है। इससे पहले भगवान शिव के नाम पर एक शाम शिव के नाम भजन संध्या कार्यक्रम की शुरुआत भी की जा चुकी है। इन आयोजनों को पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने की योजना है। बताया गया है कि राज्य के 22 शहरों में शिव भजन संध्याओं का आयोजन किया जाएगा। वहीं हमारे राम के कुल 41 मंचन किए जाने की तैयारी है। पंजाब कैबिनेट ने इसी साल जनवरी में हमारे राम के 40 शो कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर 41 कर दी गई। इस नाटक में अभिनेता आशुतोष राणा रावण की भूमिका निभा रहे हैं।

    राजनीतिक नजरिए से देखें तो पंजाब में आम आदमी पार्टी की यह रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में हिंदू मतदाताओं की आबादी करीब 39 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है और कई शहरी व सीमावर्ती क्षेत्रों में उनका चुनावी प्रभाव काफी अहम है। पठानकोट, होशियारपुर, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, फाजिल्का और मोहाली जैसे क्षेत्रों में हिंदू मतदाताओं की भूमिका चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है। ऐसे में आम आदमी पार्टी का धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के जरिए इन इलाकों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का प्रयास राजनीतिक तौर पर खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पंजाब की राजनीति में हिंदू वोटरों को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत आधार माना जाता रहा है। हाल के चुनावों में भी भाजपा ने हिंदू बहुल और शहरी इलाकों में अपनी स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़कर 18.6 प्रतिशत पहुंचा था। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रोपड़ जैसे कंडी बेल्ट के क्षेत्रों में भी भाजपा का प्रभाव देखने को मिला। ऐसे में आम आदमी पार्टी की ओर से राम और शिव से जुड़े कार्यक्रमों को इन इलाकों तक ले जाना चुनावी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राजनीतिक मामलों के जानकारों के मुताबिक पंजाब में कोई भी राजनीतिक दल हिंदू मतदाताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यही वजह है कि आम आदमी पार्टी अब पंथक राजनीति के साथ हिंदू मतदाताओं तक भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि पार्टी इन आयोजनों को सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने की पहल के तौर पर पेश कर रही है। आयोजकों के अनुसार हमारे राम के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के सत्य, धर्म, दया और सद्भावना के आदर्शों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आम आदमी पार्टी की रणनीति में आगे भी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूमिका बढ़ती दिखाई दे रही है। भगवान शिव के नाम पर होने वाली भजन संध्याओं के अलावा अगले साल फरवरी तक संत श्री गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती के अवसर पर भी विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। इससे साफ है कि पार्टी पंजाब के अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक समूहों तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

    अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी की यह रणनीति चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है। एक तरफ भाजपा हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रहेगी तो दूसरी ओर आप पंथक मुद्दों के साथ हिंदू वोटरों को भी साधने की कोशिश करेगी। ऐसे में पंजाब में आने वाले चुनाव से पहले हिंदू और पंथक वोटों का समीकरण किस दिशा में जाता है यह राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

  • Arvind Kejriwal I आप का दावा, भारत में ब्लॉक हुआ केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट, मेटा से मांगा जवाब

    Arvind Kejriwal I आप का दावा, भारत में ब्लॉक हुआ केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट, मेटा से मांगा जवाब


    नई दिल्ली ।
    आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि उसके राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। पार्टी का कहना है कि इस संबंध में उन्हें एक नोटिस भी मिला है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अकाउंट को किस वजह से रोका गया और इसे दोबारा कब तथा कैसे बहाल किया जाएगा। इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि उनका इंस्टाग्राम अकाउंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने कई बार संबंधित सोशल मीडिया कंपनी से फोन और ईमेल के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार कंपनी ने न तो कार्रवाई का कारण बताया और न ही अकाउंट दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।

    आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं और लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी का कहना है कि विपक्षी नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें कई ऐसे लोगों के संदेश और फोन कॉल भी मिले हैं, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर इसी तरह की कार्रवाई की शिकायत की है। उनका कहना है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति का भी अकाउंट इसी प्रकार बंद किया गया है, तो वह उनसे संपर्क करे ताकि ऐसे सभी मामलों को एक साथ उठाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और उपयोगकर्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके अकाउंट पर कार्रवाई किस आधार पर की गई।

    पार्टी का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म आज राजनीतिक संवाद और जनसंपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक प्रतिनिधि या आम नागरिक के अकाउंट पर कार्रवाई पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। बिना स्पष्ट कारण बताए अकाउंट प्रतिबंधित किए जाने से कई तरह के सवाल खड़े होते हैं और इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निष्पक्षता पर भी चर्चा शुरू हो जाती है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होने वाली कार्रवाई और उसके नियम लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। विभिन्न देशों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस जारी है। भारत में भी इस प्रकार के मामलों पर समय-समय पर राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं।

    फिलहाल आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठा रही है और मेटा से स्पष्टीकरण की मांग कर रही है। दूसरी ओर, इस मामले में आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अकाउंट पर की गई कार्रवाई का वास्तविक कारण क्या है और आगे इसकी स्थिति क्या होगी।