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  • स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम

    स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम


    नई दिल्ली। देश की नई पीढ़ी अब सिर्फ पढ़ाई और भविष्य की चिंता तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि अपने आसपास की समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाने लगी है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में स्कूली बच्चों की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन ने इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा किया है। इन तीनों जगहों पर बच्चों ने सड़क स्कूल की व्यवस्था भोजन पानी और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। बच्चों के इन प्रदर्शनों पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अपने भविष्य और बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले बच्चों की हिम्मत को सलाम किया है।
    हमीरपुर में बच्चों की सबसे बड़ी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र के छात्र लंबे समय से खराब रास्ते की परेशानी झेल रहे थे। बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ भर जाने से स्कूल पहुंचना मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता था। इसी समस्या को लेकर छात्र ग्रामीणों के साथ हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों ने करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा की और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना दिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है और करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

    इसी तरह उत्तराखंड के खटीमा में सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के करीब 400 छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया। छात्रों की शिकायत खराब भोजन दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी को लेकर थी। बड़ी संख्या में छात्रों के धरने के बाद मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। इसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल भारती यादव को हटाने के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि छात्र अपनी रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं।

    राजस्थान के बांसवाड़ा में भी छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। कुशलगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बियापाड़ा में शिक्षकों के खाली पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। छात्रों के विरोध को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिला। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से बातचीत की और छह शिक्षकों की डेप्युटेशन के आदेश जारी किए। इसके बाद छात्रों ने स्कूल का ताला खोल दिया।

    इन तीनों घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि अपने भविष्य के लिए लड़ रहे इन बच्चों को उनका सलाम है। उन्होंने खास तौर पर सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी बच्चों को अपने स्कूल तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आवाज क्यों उठानी पड़ रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्रामीण भारत के बच्चों और स्कूलों के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील भी की।

    इन घटनाओं को व्यापक रूप से देखें तो यह केवल तीन स्थानीय विरोध प्रदर्शनों की कहानी नहीं है बल्कि नई पीढ़ी में बढ़ती जागरूकता का संकेत भी है। सड़क हो या स्कूल में शिक्षक भोजन हो या स्वच्छता बच्चे अब अपनी समस्याओं को सामने रखने और प्रशासन से जवाब मांगने का साहस दिखा रहे हैं। इनकी मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं और यही वजह है कि इन प्रदर्शनों ने व्यापक ध्यान खींचा है। तीन अलग-अलग राज्यों में सामने आई इन घटनाओं ने यह संदेश जरूर दिया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर हो रही है।

  • उर्फी जावेद ने तोड़ी चुप्पी, आंदोलन के लिए पैसे लेने के आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक

    उर्फी जावेद ने तोड़ी चुप्पी, आंदोलन के लिए पैसे लेने के आरोपों को बताया झूठ और भ्रामक


    नई दिल्ली। उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार विवाद की वजह वह खबर बनी जिसमें दावा किया गया कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने आंदोलन के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज को पैसे दिए थे और इसी कड़ी में उर्फी जावेद को भी एक लाख रुपये दिए गए। यह दावा सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई लेकिन उर्फी जावेद ने इस पूरे मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह झूठ और भ्रामक बताया।

    उर्फी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल खबर का स्क्रीनशॉट साझा किया और तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक लाख रुपये जैसी छोटी रकम के लिए वह किसी आंदोलन का प्रचार क्यों करेंगी। उर्फी ने कहा कि वह एक सोशल मीडिया पोस्ट या रील के लिए इससे कहीं अधिक फीस लेती हैं और इस तरह के दावों का कोई आधार नहीं है।

    उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उर्फी ने कहा कि यह वही व्यक्ति है जिसने पहले भी उनके बारे में कई झूठे दावे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनके जेंडर और निजी जिंदगी को लेकर फर्जी खबरें फैलाई गई थीं और अब फिर बिना किसी सबूत के उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उर्फी का कहना है कि इस तरह की अफवाहें केवल चर्चा में बने रहने और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए फैलाई जाती हैं।

    उर्फी जावेद ने अपने बयान में साफ कहा कि उन्हें किसी भी तरह का भुगतान नहीं मिला बल्कि ऐसे विवादों की वजह से उनके काम पर असर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की खबरों के बाद कई ब्रांड्स ने उनसे दूरी बना ली है जिससे उनका आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने किसी से पैसे लेकर प्रचार किया है तो वह अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर देंगी और अपनी कमाई के सभी साधन छोड़ देंगी। उनका कहना है कि बिना किसी प्रमाण के किसी की छवि खराब करना गलत है और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    यह पहली बार नहीं है जब उर्फी जावेद को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी उनके धर्म परिवर्तन और नाम बदलने जैसी अफवाहें वायरल हुई थीं जिनका उन्होंने खुलकर खंडन किया था। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला है और उनके बारे में फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह झूठी हैं। उर्फी लगातार यह कहती रही हैं कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली हर जानकारी पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।

    फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं उर्फी जावेद ने सभी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप लगाने वालों को सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी है। सोशल मीडिया पर यह विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है और अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।

  • CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल

    CJP का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी, दिपके फिर धरने पर बैठे, घायल प्रदर्शनकारियों से मिलेंगे केजरीवाल


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का ‘संसद चलो’ आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन वापस नहीं लिया जाएगा और संसद तक मार्च का प्रयास जारी रहेगा। सोमवार को हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारी एक बार फिर जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल पर लौट आए।

    सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित यह प्रदर्शन नीट (NEET) पेपर लीक मामले और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसमें पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया।

    दिपके बोले- आंदोलन जारी रहेगा
    सोमवार देर रात अभिजीत दिपके ने कहा कि आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारी फिर से संसद की ओर मार्च करेंगे और धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। सोमवार को पुलिस द्वारा मंच हटाए जाने के बाद भी प्रदर्शनकारी दोबारा जंतर-मंतर पहुंच गए।

    सोमवार को हुआ था हिंसक टकराव
    दिल्ली पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर से संसद तक निकाला गया मार्च हिंसक हो गया था। पुलिस का दावा है कि इस दौरान 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लाठीचार्ज किया और 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। कुछ पुलिस वाहनों के शीशे टूटने की भी घटनाएं सामने आईं।

    सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति स्थिर
    सफदरजंग अस्पताल की ओर से मंगलवार सुबह जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। हालांकि उनका ब्लड शुगर स्तर अभी भी कम है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, सीरम पोटेशियम 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है तथा एनीमिया और कम ल्यूकोसाइट काउंट की समस्या बनी हुई है।

    डॉक्टरों ने उन्हें ओआरएस और ओरल पोटेशियम दिया है, लेकिन चिकित्सकीय सलाह के बावजूद उन्होंने ड्रिप और ग्लूकोज लेने से इनकार किया है। लंबे अनशन के कारण डिहाइड्रेशन और कमजोरी बनी हुई है, इसलिए उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    दिलजीत दोसांझ ने जताया समर्थन
    गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए।

    RML अस्पताल जाएंगे अरविंद केजरीवाल
    आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वह आंदोलन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से मिलने राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल जाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना पर अपनी प्रतिक्रिया भी देंगे।

    दिल्ली पुलिस ने पांच राज्यों से मांगा सहयोग
    सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को पत्र भेजा है। पत्र में संसद सत्र के दौरान जंतर-मंतर पहुंचने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और आवश्यकता पड़ने पर राज्य की सीमा पर ही रोकने के लिए सहयोग मांगा गया है। पुलिस का कहना है कि संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    धरना स्थल पर फिर जुटे प्रदर्शनकारी
    सोमवार शाम पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से हट गए थे और अभिजीत दिपके केरल हाउस के बाहर धरने पर बैठ गए थे। हालांकि मंगलवार सुबह प्रदर्शनकारी फिर से निर्धारित धरना स्थल पर लौट आए। फिलहाल वहां करीब 100 प्रदर्शनकारी मौजूद बताए जा रहे हैं।

  • यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस

    यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। अमेरिका से 6 जून को दिल्ली पहुंचने वाले Abhijeet Deepke ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को राजधानी में जुटने का आह्वान किया था। शुरुआत में उन्होंने लोगों से कहा था कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उनका स्वागत करने पहुंचें। उनका दावा था कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए समर्थकों की मौजूदगी जरूरी होगी।

    हालांकि, प्रदर्शन से ठीक दो दिन पहले दीपके ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आम यात्रियों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    एयरपोर्ट से हटे, लेकिन आगे का रास्ता अस्पष्ट
    दीपके ने अब कहा है कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाएंगे और समर्थक वहीं एकत्रित हों। यहीं से प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।

    लेकिन आलोचकों और पर्यवेक्षकों का सवाल है कि यदि वास्तव में हजारों या लाखों लोग पहुंचते हैं, जैसा कि CJP दावा कर रही है, तो नई दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील इलाके में व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी? पार्लियामेंट स्ट्रीट और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी कार्यालय, महत्वपूर्ण संस्थान और व्यस्त मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में बड़ी भीड़ के जुटने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अनुमति मिलने तक समर्थक कहां रहेंगे और भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था होगी।

    अनुमति को लेकर सबसे बड़ा सवाल
    पूरा विवाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी केंद्रित है। अब तक CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस या प्रशासन से पहले ही अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दीपके स्वयं दिल्ली पहुंचकर आवेदन देंगे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ घंटों के भीतर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन की अनुमति मिल पाना संभव होगा।

    अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?
    सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन या जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी?

    इस मुद्दे पर न तो दीपके ने और न ही पार्टी के अन्य नेताओं ने कोई स्पष्ट जवाब दिया है। समर्थकों को भी यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना होगा। यही वजह है कि प्रदर्शन से पहले ही पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    फिलहाल, 6 जून के कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके का ‘दिल्ली प्लान’ जमीन पर कितना सफल होता है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।