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  • दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब

    दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में 30 अक्टूबर को आयोजित उनके कॉन्सर्ट के दौरान CJP प्रोटेस्ट और फिल्म सतलुज को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। दिलजीत ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ। उनके इस बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़े अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अभिजीत ने दिलजीत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए कहा कि एक मुद्दे पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उनके मन में सिंगर के लिए सम्मान कम हो गया है।

    दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का औरा इंडिया टूर 2026 का कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही पिछले कुछ समय से चल रही आलोचनाओं पर भी बात की। विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब NEET पेपर लीक से जुड़े आंदोलन के दौरान दिलजीत ने कहा था कि उन्हें इस मुद्दे से दूर रखा जाए क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया हुई थी। CJP से जुड़े अभिजीत दिपके ने भी उस समय सिंगर की आलोचना की थी।

    अब दिल्ली के कॉन्सर्ट में दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह चुप हैं तो उन्हें चुप ही रहने दिया जाए। वह सभी का समर्थन करते हैं लेकिन पंजाबियों को लड़ना न सिखाया जाए। उन्होंने फिल्म सतलुज का जिक्र करते हुए कहा कि जिस फिल्म का मंच पर मजाक उड़ाया जा रहा है वह जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़ी कहानी है और उस फिल्म के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है। दिलजीत ने यह भी कहा कि अगर कोई उनसे नफरत करता है तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उनकी तरफ से सभी के लिए प्यार है।

    दिलजीत के इस बयान पर अभिजीत दिपके ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जून में जब प्रोटेस्ट चल रहा था तब दिलजीत की एक बात से उन्हें दुख पहुंचा था। हालांकि उनका कहना था कि यह नाराजगी किसी निजी वजह से नहीं थी। अभिजीत ने बताया कि वह हमेशा से दिलजीत को ऐसे कलाकार के रूप में देखते आए हैं जो जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। यही वजह थी कि उस समय उनकी बात उन्हें थोड़ी चुभ गई थी।

    अभिजीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और आज भी उनका संगीत सुनते हैं। उन्होंने लिखा कि इस साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में दिलजीत के कॉन्सर्ट में भी शामिल हुए थे। उनके मुताबिक वह केवल संगीत सुनने नहीं गए थे बल्कि एक इंसान के तौर पर दिलजीत के प्रति उनके मन में सम्मान भी रहा है।

    अभिजीत ने दिलजीत की तारीफ करते हुए उनके बेबाक अंदाज अपनी बात पर कायम रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की सराहना की। उन्होंने साफ किया कि किसी एक बात पर असहमति या गलतफहमी के कारण उनके मन में दिलजीत के लिए प्यार और सम्मान कम नहीं हुआ है। अंत में उन्होंने दिलजीत से छोटे भाई की गलती समझकर माफ करने की अपील भी की।

    इस तरह कॉन्सर्ट में दिलजीत के बयान और अभिजीत के जवाब के बाद यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों की बातों से साफ है कि असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश भी सामने आया है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर आठवले की नजर, RPI में शामिल होने का फिर दिया ऑफर

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके पर आठवले की नजर, RPI में शामिल होने का फिर दिया ऑफर


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA में शामिल होने का न्योता दिया गया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के प्रमुख रामदास आठवले ने दीपके को अपनी पार्टी से जुड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। आठवले का कहना है कि यदि अभिजीत दीपके उनकी पार्टी में शामिल होते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों और उनके राजनीतिक सपने को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं की भागीदारी जरूरी है।

    रामदास आठवले ने यह बयान नागपुर में मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके भी आंबेडकरवादी हैं और यदि वे उनकी पार्टी के साथ जुड़ते हैं तो संगठन को मजबूती मिल सकती है। आठवले के मुताबिक उन्होंने पहले भी दीपके से पार्टी में आने को कहा था। हालांकि अभी तक अभिजीत दीपके ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि उनकी ओर से पार्टी में शामिल होने का न्योता खुला है और दीपके आने का फैसला करते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब रामदास आठवले ने अभिजीत दीपके को अपनी पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिया हो। इससे पहले अगस्त में भी उन्होंने दीपके को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया यानी RPI में शामिल होने का न्योता दिया था। उस समय आठवले ने कहा था कि बाबासाहेब आंबेडकर के सपनों को साकार करने और उनकी राजनीतिक विचारधारा को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। इसके बाद भी वह कई मौकों पर दीपके को लेकर बयान दे चुके हैं।

    आठवले ने अभिजीत दीपके को अपने समाज से जुड़ा बताते हुए उनके साथ राजनीतिक सहयोग की संभावना जताई है। हालांकि उन्होंने CJP और उसके समर्थकों की कुछ गतिविधियों तथा बयानों पर नाराजगी भी जाहिर की है। इसी महीने की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि अभिजीत दीपके को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे स्पष्ट है कि आठवले एक ओर दीपके को अपनी पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण दे रहे हैं तो दूसरी ओर उनके कुछ राजनीतिक बयानों से असहमति भी जता चुके हैं।

    दूसरी तरफ अभिजीत दीपके पहले दिए गए इस प्रस्ताव पर सरकार और भाजपा के रवैये को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अगस्त में उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए तंज कसा था कि कुछ समय पहले तक उन्हें राष्ट्रविरोधी बताया जा रहा था और अब उन्हें पार्टी में आने का न्योता दिया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हुई थी कि क्या वह भविष्य में किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ेंगे या अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगे।

    अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल उनकी पार्टी का चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है। उनके मुताबिक CJP अभी एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर काम करेगी। इसका अर्थ है कि संगठन फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय अपने मुद्दों को उठाने और सरकार तथा राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने की रणनीति पर ध्यान देना चाहता है।

    रामदास आठवले के ताजा बयान के बाद अभिजीत दीपके के अगले कदम पर नजर रहेगी। फिलहाल उनकी ओर से न्योते को स्वीकार करने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि दीपके अपनी मौजूदा राजनीतिक रणनीति पर कायम रहते हैं या भविष्य में RPI के साथ जुड़ने पर विचार करते हैं।

  • CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था

    CJP आंदोलन की कमान किसके हाथ में थी, अभिजीत दिपके ने बताई अंदर की बात, बोले मैं तो सिर्फ दोनों के निर्देश मानता था


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने आंदोलन और पार्टी के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका लेते थे जबकि वह खुद उनके निर्देशों का पालन करते थे। दिपके के इस बयान ने आंदोलन के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने दोनों नेताओं को अपना भाई और परिवार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया भी दी। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि दिवाली तक पार्टी की ओर से कोई प्रदर्शन आयोजित करने की योजना नहीं है।

    अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर करीब 16 मिनट का वीडियो संदेश जारी किया था। यह वीडियो उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने आंदोलन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और समर्थकों से कुछ समय के लिए विराम लेने की अपील की। दिपके ने कहा कि बाहर से लोगों को भले ही ऐसा लगता रहा हो कि आंदोलन का नेतृत्व वह कर रहे हैं लेकिन वास्तव में कई बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका ही लेते थे। उनके मुताबिक दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है।

    दिपके ने कहा कि सौरव और आशुतोष की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है। उन्होंने दोनों को केवल राजनीतिक सहयोगी नहीं बल्कि अपना भाई और परिवार बताया। दोनों की गिरफ्तारी से उन्हें गहरा भावनात्मक झटका लगा है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने तीनों के बीच के निजी संबंधों का भी जिक्र किया। दिपके ने बताया कि उनका एक अलग व्हाट्सऐप ग्रुप था जिसमें वे एक दूसरे के साथ मीम्स साझा करते थे। उन्होंने कहा कि वह आज भी उस ग्रुप को खोलते हैं तो उन्हें ऐसा महसूस होता है कि दोनों अब भी उनके साथ मौजूद हैं।

    CJP संस्थापक ने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताएं और आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर फिलहाल आराम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिवाली तक पार्टी की ओर से किसी प्रदर्शन की योजना नहीं है। उनके इस ऐलान को मौजूदा परिस्थितियों के बीच आंदोलन की गतिविधियों में अस्थायी विराम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि आगे आंदोलन की रणनीति क्या होगी इस पर उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

    गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुई घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं। आरोप है कि दोनों ने बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया और पहले से हस्ताक्षरित पीस बॉन्ड का उल्लंघन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए जाने की भी बात सामने आई थी। दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है।

    दिपके ने फ्रांस में हुए दंगों से CJP के प्रदर्शन की तुलना पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना। उनके अनुसार दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति और करुणा का रास्ता अपनाया। दिपके ने उनके इस रुख की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि जेल जाने के बाद भी उन्होंने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।

    अभिजीत दिपके के बयान से साफ है कि वह सौरव दास और आशुतोष रांका को आंदोलन की रणनीति और फैसलों में अहम भूमिका निभाने वाला मानते हैं। फिलहाल दिवाली तक प्रदर्शन स्थगित रखने के ऐलान के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि त्योहार के बाद CJP अपनी अगली रणनीति किस तरह तय करती है।

  • टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से मचा हड़कंप, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी, अभिजीत दीपके बोले- पुलिस असली अपराधियों पर ध्यान दे..

    टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से मचा हड़कंप, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली जिम्मेदारी, अभिजीत दीपके बोले- पुलिस असली अपराधियों पर ध्यान दे..

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग की घटना के बाद मामला चर्चा में है। इस हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित और हरमन संधू ने लेने का दावा किया है। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय असली अपराधियों पर ध्यान देना चाहिए। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है।

    दीपके ने अपने बयान में कहा कि छात्रों और कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस को वास्तविक अपराधियों के खिलाफ कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, जब सरकार और पुलिस की प्राथमिकताएं सही तरीके से तय नहीं होतीं, तो ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी अपने नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिए जाने का विरोध कर रही है।

    जुहू में टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग

    यह घटना रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई। जानकारी के मुताबिक, दो अज्ञात हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर चार से पांच राउंड गोलियां चलाईं। इस घटना में अभिनेता सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस और वहां से गुजर रहे ऑटो रिक्शा चालक केवल चौहान घायल हो गए। दोनों को गोलीबारी के दौरान चोटें आईं। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा और जांच से जुड़ी गतिविधियां तेज कर दी गईं।

    हमले के तुरंत बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े अनिल पंडित और हरमन संधू ने कथित तौर पर इसकी जिम्मेदारी ली। उनके नाम से सामने आए संदेश में धमकी दी गई कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में जो लोग उनकी बात नहीं मानेंगे या सलमान खान के साथ काम करेंगे, वे भी निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, इस मामले में हमले के पीछे की परिस्थितियों और आरोपों की जांच की जा रही है।

    हमलावरों की तलाश में मुंबई पुलिस की 15 टीमें
    घटना के बाद मुंबई पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए 15 टीमें गठित की हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है, ताकि हमलावरों और वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक की पहचान की जा सके। कई स्थानों पर नाकेबंदी की गई है और फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू की है। वारदात में इस्तेमाल की गई बाइक बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है, जिसमें एक अज्ञात हमलावर को टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाते देखा जा सकता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार रात अभिनेता से बातचीत कर उनका हाल जाना और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

    अनिल पंडित और हरमन संधू की भूमिका की जांच

    पुलिस के अनुसार, हरियाणा के पानीपत का रहने वाला अनिल पंडित लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा शूटर और विदेश में सक्रिय नेटवर्क का संचालक बताया जाता है। उसे लॉरेंस के छोटे भाई अनमोल बिश्नोई का करीबी भी बताया गया है। हरमन संधू के बारे में जानकारी दी गई है कि वह लंबे समय से विदेश में छिपा हुआ है और गिरोह के शूटरों को निशाने से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने का काम करता है। इस मामले में दोनों के कथित दावों और उनकी भूमिका की जांच महत्वपूर्ण है।

    CJP नेताओं की हिरासत पर भी विवाद
    इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। अभिजीत दीपके का आरोप है कि दोनों को जेल में रखने के लिए अनावश्यक देरी की जा रही है और हिरासत जारी रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस और राज्य के अधिकारियों पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली कार्यवाही में बाधा डालने का आरोप लगाया है।

    सिंह के मुताबिक, लगातार चार दिन तक पेश नहीं होने वाले सरकारी अभियोजक बाद में कार्यवाही में शामिल हुए और कथित धमकी भरे संदेश का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को धमकी मिली है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और आदेश में उसका विवरण दर्ज होना चाहिए। टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की जांच के बीच यह मामला पुलिस की कार्रवाई, सुरक्षा और कानून के पालन को लेकर अलग-अलग सवालों के कारण चर्चा में बना हुआ है।

  • राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा

    राहुल गांधी ने CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर जताया विरोध, अब हाई टी के न्योते से विपक्षी एकजुटता की नई चर्चा


    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के बीच संभावित नजदीकी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी में CJP के नेताओं को आमंत्रित करने की कोशिश की खबर सामने आने के बाद कांग्रेस और इस संगठन के संबंधों को लेकर नए सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इसे दोनों के बीच दोस्ती या किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य नेताओं तक पहुंचने के लिए वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण की मदद लेने की कोशिश की थी। इस घटनाक्रम को विपक्षी एकजुटता की रणनीति और कांग्रेस के बदलते राजनीतिक रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह कांग्रेस की ओर से CJP से संपर्क करने और उसके नेताओं को राहुल गांधी की हाई टी में आमंत्रित करने का फैसला किया गया। इसके लिए प्रशांत भूषण से मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया गया था। प्रशांत भूषण के करीबी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से उनसे संपर्क किया गया था। उस समय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र में थे जबकि CJP के कुछ प्रमुख नेता जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस हिरासत में थे। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दीपके तक पहुंचने की कोशिश की गई लेकिन वह निमंत्रण को लेकर विशेष उत्साहित नहीं थे। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस संपर्क से दोनों पक्षों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होगी या नहीं।

    CJP मई में सोशल मीडिया पर चर्चा में आई थी। इसके बाद जून और जुलाई में संगठन ने परीक्षा में पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के चलते संगठन को व्यापक पहचान मिली। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का एक वर्ग शुरुआत से ही CJP को लेकर संदेह जताता रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं की राय रही है कि यह संगठन आम आदमी पार्टी के प्रभाव में काम करता है या उसके राजनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा सकता है। दूसरी ओर CJP खुद को स्वतंत्र संगठन बताती रही है। अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे अभियान ने दोनों पक्षों के बीच संभावित संवाद की चर्चा को बढ़ा दिया है।

    राहुल गांधी ने हाल ही में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले सभी समूह एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि संगठन और झंडे अलग हो सकते हैं लेकिन संविधान की रक्षा और नागरिक अधिकारों की मांग करने वालों के उद्देश्य समान हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समूह संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है तो कांग्रेस उसका समर्थन करेगी। इस बयान को विपक्षी दलों और अन्य संगठनों को साथ लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराने को अपराध मानने पर सवाल उठाया और युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना की। राहुल गांधी के बयान पर अभिजीत दीपके ने उनका आभार जताया था। इससे दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई। हालांकि CJP सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं हुई थी। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि समान मुद्दों पर समर्थन के बावजूद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तालमेल पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने शुक्रवार 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने समर्थकों से शाम पांच बजे राष्ट्रीय ध्वज के साथ पहुंचने की अपील की है। दूसरे शहरों में भी तिरंगा फहराने का आग्रह किया गया है। अब राजनीतिक नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित मार्च में कितने लोग शामिल होते हैं और कांग्रेस तथा CJP के बीच आगे कोई संवाद होता है या नहीं। फिलहाल हाई टी के निमंत्रण की कोशिश को विपक्षी एकजुटता के संदर्भ में एक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है लेकिन इसे दोनों के बीच नई राजनीतिक दोस्ती का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।

  • सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान

    सौरभ दास और आशुतोष रांका के बाद अभिजीत दीपके की मुश्किलें बढ़ीं, SC/ST एक्ट में केस, 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान


    नई दिल्ली।
    दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी से जुड़े नेताओं और स्वतंत्र पत्रकारों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में स्वतंत्र पत्रकार रोजी और गजेंद्र सिंह के साथ सीजेपी से जुड़े सौरभ दास आशुतोष रांका रत्ना सिंह और अभिजीत दीपके के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं। शिकायत दिल्ली पुलिस के कनॉट प्लेस सब डिवीजन के एसीपी विवेक भगत की ओर से दर्ज कराई गई है। आरोप है कि एसीपी के संबंध में अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होगी।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब सीजेपी से जुड़े नेताओं और पुलिस के बीच विवाद पहले से चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक सौरभ दास और आशुतोष रांका को बुधवार को गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत ने पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दोनों को जंतर मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद प्रवेश करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब एससी एसटी एक्ट के तहत नया मामला दर्ज होने से पार्टी से जुड़े लोगों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

    सौरभ दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में सीजेपी ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर समर्थकों से शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क पहुंचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं और तिरंगा फहराएं। दीपके ने यह भी अपील की कि जो लोग दिल्ली नहीं पहुंच सकते वे अपने शहरों में भी तिरंगा फहराएं। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका को लेकर भी बयान दिया और कहा कि जेल जाने की संभावना से उन्हें चिंता नहीं है। प्रस्तावित मार्च को लेकर अब प्रशासन की व्यवस्था और कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर रहेगी।

    इससे पहले नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आपातकाल लगाना चाहती है तो उसे आधिकारिक रूप से ऐसा करना चाहिए। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसे किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके ने कहा कि सीजेपी एक स्वतंत्र समूह है और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्र रहने का मतलब इंडिया गठबंधन के खिलाफ होना नहीं है।

    विदेशी फंडिंग को लेकर उठे सवालों पर भी दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे के इस दावे पर कि भारत में हाल के कुछ विरोध प्रदर्शनों को विदेश से आर्थिक सहायता मिल रही है उन्होंने कहा कि यदि उनके पास इससे संबंधित सबूत हैं तो उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपना चाहिए। दीपके ने सवाल उठाया कि यदि ऐसे प्रमाण मौजूद हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। फिलहाल सीजेपी से जुड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले और प्रस्तावित तिरंगा मार्च को लेकर स्थिति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

  • मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    मुंबई में प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत, सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया

    नई दिल्ली: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिल्लई ठाणे के दोस्ती वेस्ट काउंटी के बी विंग में रहते थे और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शाम करीब 4:30 बजे शिवाजी पार्क पहुंचे थे। करीब 5 बजे उन्हें सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद उनके दोस्तों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाई गई आपत्तियों से जुड़ी थी। प्रदर्शन शाम करीब 4 बजे शुरू हुआ और शुरुआत में ही बड़ी संख्या में लोग शिवाजी पार्क के आसपास जमा हो गए। प्रदर्शन में युवाओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों ने भी हिस्सा लिया।

    प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और इसके कारण लाखों नागरिकों के मतदान के अधिकार प्रभावित हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे भी लगाए।

    प्रदर्शन के आयोजकों ने एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने, 2025 की मतदाता सूची को फ्रीज करने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने की मांग की। इसके अलावा नागरिक समाज की भागीदारी के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग भी रखी गई। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही।

    प्रदर्शन के दौरान हुई 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की मौत अलग स्वास्थ्य संबंधी घटना के रूप में सामने आई। पिल्लई शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे और करीब आधे घंटे बाद उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों के इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रदर्शन के दौरान उनकी मौत की खबर से वहां मौजूद लोगों को घटना की जानकारी मिली।

  • मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे

    मुंबई के बाद दिल्ली कूच करेगी CJP, दिपके का ऐलान- ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो जंतर-मंतर पर जुटेंगे


    नई दिल्ली। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने अब दिल्ली कूच का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 10 अक्टूबर को देशभर से लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटेंगे। दिपके ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।

    2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अपनी अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में समर्थक वहां पहुंचे। प्रदर्शन में युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले पोस्टर और तिरंगे नजर आए।

    शिवाजी पार्क में जुटी बड़ी भीड़

    शिवाजी पार्क बड़े राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। प्रदर्शन के दौरान तेज गर्मी और बैरिकेडिंग के बावजूद बड़ी संख्या में युवा वहां पहुंचे। दादर स्टेशन और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

    मंच से दिपके ने इसे “जंतर-मंतर 2.0” बताते हुए ‘चलो दिल्ली’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो देशभर के युवा और Gen-Z दिल्ली पहुंचेंगे। CJP की ओर से आगे अन्य शहरों में भी आंदोलन करने की बात कही गई है।

    वोटर लिस्ट को लेकर दिपके के क्या आरोप?

    दिपके ने चुनावी मतदाता सूची को लेकर कई दावे किए। उनका आरोप है कि दो साल में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने 2024 के करीब 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं और लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच करीब 2 प्रतिशत के वोट शेयर अंतर का हवाला देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का चुनावी नतीजों पर असर पड़ सकता है।

    दिपके ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से करीब 40 हजार वोटर हटाए जाने और तमिलनाडु में करीब एक लाख नाम हटाए जाने का भी दावा किया। पश्चिम बंगाल में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप उन्होंने लगाया। ये आंकड़े और आरोप CJP तथा दिपके के दावे हैं; इनका अंतिम सत्यापन या न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं है।

    दिपके ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करीब 40 लाख वोटर जोड़े गए और इसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी से जोड़ा। बीजेपी समर्थकों की ओर से तेलंगाना, कर्नाटक और झारखंड में विपक्षी दलों की जीत का उदाहरण दिए जाने पर उन्होंने कहा कि अगर मैच फिक्स हो तो हर गेंद नो-बॉल नहीं होती और हर कैच नहीं छूटता।

    CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

    मुंबई प्रदर्शन में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के अलावा उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग रखी। पार्टी ने SIR प्रक्रिया को रोकने और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले वाली मतदाता सूची को बहाल करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन के लिए स्वतंत्र संस्था बनाने की मांग भी सामने रखी गई है।

    दिपके ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की बहस को लेकर भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बीजेपी का लक्ष्य ‘एक देश, एक पार्टी’ की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला देते हुए क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया और शिंदे गुट की शिवसेना को ‘शेल कंपनी’ कहा। ये दिपके के राजनीतिक आरोप हैं।

    प्रदर्शन में फिल्मी हस्तियां भी पहुंचीं

    शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी, निर्देशक विशाल भारद्वाज, फिल्मकार हंसल मेहता, संगीतकार विशाल ददलानी और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी समेत कई लोग मौजूद रहे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया।

    स्थानीय विधायक महेश सावंत ने बताया कि आदित्य ठाकरे की तबीयत खराब होने के कारण वह प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    CJP नेता ने दिल्ली पुलिस को दी चेतावनी

    CJP नेता सौरव दास ने पिछले जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने रवैये में सुधार करे, वरना आंदोलन और तेज किया जाएगा। CJP नेताओं ने इसे ‘जंतर-मंतर सीजन 2’ बताया है।

    वामपंथी कार्यकर्ता शैलेश कांबले ने कहा कि कई वामपंथी संगठन भी आंदोलन में शामिल हुए हैं। वहीं, कानून के छात्र आयान पटेल ने मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताई। मंच से बोलने वाली किशोरी अनुजा ने भी सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

    अब CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अगला प्रदर्शन करने की घोषणा की है। हालांकि, इस प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी स्थिति अलग विषय है और इसमें बदलाव संभव है।

  • 30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब

    30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले उनसे पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल किया गया। जवाब में दीपके ने कहा कि उनकी फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों का आपस में क्या संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ फंडिंग का स्रोत बताने से चुनाव व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ जाएगा। उनके बयान में उन्होंने अपने महंगे जूतों और विदेश यात्रा का भी जिक्र किया।

    दीपके की पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से इसे जेल भरो आंदोलन बताया गया है। हालांकि मुंबई पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क में आयोजन को लेकर 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश और क्षेत्र के साइलेंस जोन होने की स्थिति लागू होती है। इसके बावजूद दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस तरह वह चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं उसी तरह क्या वह अपनी पार्टी की फंडिंग का स्रोत भी सार्वजनिक कर सकते हैं तो दीपके ने सवाल को ही गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी सार्वजनिक रूप से आने वाली फंडिंग की जानकारी बता भी दें तो इससे चुनाव कैसे ठीक हो जाएंगे। उन्होंने फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों के बीच संबंध पर सवाल उठाया।

    इसी बातचीत में उनसे यह भी पूछा गया कि इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संसाधन कहां से आ रहे हैं। इस पर दीपके ने अपने जूतों की कीमत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 30000 रुपये के जूते पहनते हैं और उन्हें यह बताने में कोई शर्म नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका भी जा चुके हैं और वहां से भारत लौटकर अलग-अलग राज्यों में यात्रा करने की क्षमता रखते हैं। उनका कहना था कि अगर वह अमेरिका जाने वाली फ्लाइट ले सकते हैं तो मुंबई से दिल्ली तक भी यात्रा कर सकते हैं।

    फंडिंग के सवाल पर उनका यह जवाब ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर बदलाव शामिल हैं।

    इससे पहले 1 अक्टूबर को दीपके को मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में समर्थकों के साथ तख्तियां लेकर मौजूद रहने के बाद पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मरीन ड्राइव थाने ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। 2 अक्टूबर को भी मुंबई और दिल्ली में चुनाव आयोग से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबर है।

    दीपके ने कहा है कि मुंबई के बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। रिपोर्टों में गोवा बेंगलुरु और कोलकाता समेत अन्य शहरों में प्रदर्शन की योजना का भी उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा है कि अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    इस तरह फंडिंग और आंदोलन के खर्च को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके का जवाब अब चर्चा में है। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता का हवाला देते हुए कहा कि महंगे जूते पहनना या विदेश यात्रा करना अपने आप में पार्टी की फंडिंग के स्रोत का जवाब नहीं है। वहीं पार्टी के आंदोलन और उसकी वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवाल आगे भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

  • असम जाने की तैयारी में थे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका की रिहाई के बाद दौरा रद्द; मुंबई में जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

    असम जाने की तैयारी में थे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका की रिहाई के बाद दौरा रद्द; मुंबई में जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका और उनके साथियों की असम पुलिस हिरासत से रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने असम का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है। दीपके ने पहले घोषणा की थी कि अगर रांका को रिहा नहीं किया गया तो वह सोमवार सुबह असम पहुंचेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

    रांका और उनके साथियों को रविवार को गुवाहाटी में पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई की जानकारी सामने आने के बाद दीपके ने कहा कि वह असल में अगले दिन पुलिस थाने में उनके साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए असम आने वाले थे।

    आशुतोष रांका ने रिहाई के बाद बताया कि पुलिस हिरासत का सिलसिला खत्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सोमवार को उसी स्थान से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जहां से पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गई थी। दीपके की असम आने और प्रदर्शन में शामिल होने की बात पर रांका ने उन्हें जवाब देते हुए ‘सॉरी शक्तिमान’ भी कहा।

    रांका असम में स्कूलों की स्थिति से जुड़े मुद्दे को उठाने के लिए पहुंचे थे। उनका कहना था कि वह राज्य के स्कूलों की स्थिति लोगों के सामने लाना चाहते हैं। इसी दौरान उन्हें और उनके साथ आए 40 से अधिक कार्यकर्ताओं को एक बैठक से पहले हिरासत में लिया गया था।

    यह कार्रवाई गुवाहाटी के चौधरी टीला इलाके में विपक्षी दल असम जातीय परिषद के नेता कुंकी चौधरी के आवास पर होने वाली बैठक से पहले हुई। हिरासत में लिए गए लोगों को असम पुलिस की 10वीं बटालियन के मुख्यालय ले जाया गया था। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।

    रांका ने इस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लेकर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि वे अपने बच्चों के लिए बेहतर स्कूल और युवाओं के लिए रोजगार की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    इसी बीच मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी को एक और झटका लगा। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।

    प्रदर्शन के लिए 26 सितंबर को आवेदन दिया गया था। पुलिस की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि मौजूदा हाईकोर्ट आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत शिवाजी पार्क में सार्वजनिक सभा की अनुमति देने का अधिकार पुलिस विभाग के पास नहीं है।

    इसके बाद अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई तो गांधी जयंती के दिन यानी 2 अक्टूबर को मुंबई में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। इस तरह असम में रांका की हिरासत और रिहाई के बाद जहां दीपके का प्रस्तावित दौरा टल गया, वहीं मुंबई में उनका अगला आंदोलन चर्चा में आ गया है।