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  • कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    कॉकरोच जनता पार्टी नेताओं ने पीड़ित परिवारों को एक करोड़ मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और कथित तौर पर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग को लेकर पांच सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई जाएगी।

    जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में अभिजीत दीपके के साथ आशुतोष रांका और सौरव दास भी मौजूद थे। बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि संगठन लंबे समय से संबंधित परिवारों के लिए मुआवजे और छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन मांगों को लेकर पांच सितंबर को मार्च निकाला जाएगा।

    दीपके ने मुआवजे की मांग के पीछे परिवारों की आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों में कई लोग सीमित आय वाले हैं और बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज तक लेते हैं। उन्होंने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उनके पिता ने बेटी की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था और अब परिवार आर्थिक तथा पारिवारिक संकट से गुजर रहा है।

    उनका कहना था कि शिक्षा हासिल करने के लिए कोचिंग और अन्य खर्चों में बड़ी रकम लगती है। ऐसे में किसी परिवार के बच्चे के खोने के बाद आर्थिक सहायता उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। संगठन इसी आधार पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता देने की मांग कर रहा है।

    दूसरी प्रमुख मांग छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की है। दीपके ने कहा कि छात्र शिक्षा से जुड़े अपने अधिकारों की मांग करने के लिए सामने आए थे। संगठन का दावा है कि ऐसे मामलों में दर्ज प्राथमिकी वापस होनी चाहिए। पांच सितंबर के प्रस्तावित मार्च में इन्हीं दोनों मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जयपुर में हुई घटना के संदर्भ में भी नेताओं से सवाल किया गया। आशुतोष रांका ने कहा कि ऐसी घटनाओं को लेकर उन्हें अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से पीछे हटने की चिंता नहीं है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटनाक्रम के बाद भी संगठन के लोग राजस्थान के विभिन्न इलाकों में गए और आगे भी लोगों के बीच जाने की योजना है।

    रांका ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य चुनाव में लोगों से वोट मांगना नहीं है। उन्होंने राजस्थान में स्कूलों की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना चाहिए और स्कूलों का संचालन उचित परिस्थितियों में होना चाहिए।

    हिंसा की आशंका से जुड़े सवाल पर अभिजीत दीपके ने अपने और आशुतोष रांका के साथ पहले हुई कथित मारपीट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वे विरोध के दौरान मारपीट का सामना कर चुके हैं और अब सौरव दास की बारी आने की बात कही। हालांकि, संगठन ने पांच सितंबर के कार्यक्रम को शांतिपूर्ण मार्च बताया है।

    सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से पहले किए गए वादों और अदालत में हुई कार्यवाही को संगठन महत्वपूर्ण मानता है। उनका दावा है कि छात्रों से जुड़े मामलों की प्राथमिकी और प्रभावित परिवारों के मुआवजे को लेकर अभी उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुई हैं।

    अब पांच सितंबर का प्रस्तावित मार्च संगठन की अगली बड़ी गतिविधि होगी। इसमें छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये की सहायता की मांग प्रमुख रहेगी। कार्यक्रम के दौरान संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन के सामने रखने की बात कह रहा है।

  • जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी के बीच पार्क में जुटे CJP समर्थकों को रेजिडेंट्स ने बैठक से रोका, पुलिस पहुंची

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी टीम से जुड़ा दिल्ली का एक मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार दीपके अपनी टीम के कुछ सदस्यों और समर्थकों के साथ दिल्ली की एक रेजिडेंट सोसाइटी के पार्क में जंतर-मंतर सीजन 2 की तैयारी को लेकर बैठक कर रहे थे। इसी दौरान सोसाइटी के कई निवासी वहां पहुंच गए और बैठक का विरोध किया।

    बताया गया कि दीपके के साथ सौरभ दास, आशुतोष रंका और कुछ समर्थक मौजूद थे। बैठक के दौरान आगामी कार्यक्रम की रणनीति पर चर्चा की जा रही थी। इसी बीच स्थानीय लोगों को वहां राजनीतिक बैठक होने की जानकारी मिली। इसके बाद कई निवासी पार्क में पहुंचे और टीम से बैठक बंद कर वहां से जाने को कहा।

    स्थानीय लोगों की आपत्ति का आधार यह बताया गया कि सोसाइटी का पार्क निवासियों के घूमने और सामान्य गतिविधियों के लिए है। उनका कहना था कि पार्क में धरना या राजनीतिक प्रदर्शन की योजना नहीं बनाई जानी चाहिए। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिसकर्मियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और दीपके तथा उनके साथ मौजूद लोगों को पार्क से जाना पड़ा।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके जंतर-मंतर सीजन 2 शुरू करने की बात कह चुके हैं। इससे पहले जून में CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। उस दौरान संगठन की ओर से केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था। दीपके ने बाद में आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए थे।

    पार्क में बैठक करने की वजह को लेकर दीपके की ओर से कहा गया कि टीम को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स के साथ बैठक करनी थी। उनके अनुसार इसके लिए इनडोर स्थान तलाशने का प्रयास किया गया था, लेकिन हॉल उपलब्ध कराने में कठिनाई आई। उनका दावा है कि पहले एक हॉल की व्यवस्था हुई थी, लेकिन बाद में वहां भी बैठक की अनुमति नहीं मिली।

    इसके बाद टीम ने सोसाइटी के पार्क में बैठक करने का फैसला किया। दीपके के अनुसार बैठक के दौरान समर्थकों से आंदोलन की आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इसी दौरान उन्होंने समर्थकों से पूछा कि अब किसके इस्तीफे की मांग की जानी चाहिए। समर्थकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया गया।

    पार्क में हुए विरोध के बाद दीपके ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को बैठक करने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इसके पीछे बीजेपी का हाथ होने का दावा किया। उनका आरोप है कि लोगों को CJP से दूरी बनाए रखने के लिए डराया धमकाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    पूरे घटनाक्रम में एक तरफ सार्वजनिक स्थान के इस्तेमाल को लेकर सोसाइटी के निवासियों की आपत्ति सामने आई, तो दूसरी तरफ CJP ने इसे अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को रोकने की कोशिश बताया। मामले में किसी बड़ी झड़प की जानकारी नहीं है और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई।

    अभिजीत दीपके की टीम अब जंतर-मंतर सीजन 2 की आगे की रणनीति पर काम करने की बात कह रही है। ऐसे में दिल्ली में उनके अगले कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, सोसाइटी पार्क की घटना ने राजनीतिक बैठकों के लिए सार्वजनिक और निजी सामुदायिक स्थानों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है

    अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है


    नई दिल्ली । 
    अभिजीत दीपके ने सौरव दास के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि वह देश और विशेष रूप से कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास के एक वीडियो के सामने आने के बाद बार काउंसिल के चेयरमैन ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया था। दीपके के मुताबिक इससे बड़ी संख्या में लॉ छात्रों का भविष्य प्रभावित होने से बच गया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव दास का प्रयास देश के लिए सकारात्मक है और कानून के छात्रों के लिए भी इसका महत्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है तो उसे जानबूझकर परेशान करने की कोशिश क्यों की जानी चाहिए।

    उन्होंने सौरव दास और उनके परिवार से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। दीपके के अनुसार दिल्ली में एक यूट्यूबर सौरव दास के घर में प्रवेश कर गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव और उनके परिवार को इस तरह परेशान करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

    दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों से उनकी निजी गतिविधियों और कामकाज से जुड़े सवाल क्यों किए गए। उन्होंने विशेष रूप से सौरव की मां को इस पूरे मामले में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान करने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

    सौरव दास ने इससे पहले पुडुचेरी में अपने परिवार को पुलिस की ओर से डराए और धमकाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि अधिकारी सौरव दास के रिश्तेदारों के घर जरूर गए थे, लेकिन यह कार्रवाई नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

    पुलिस के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के घर जाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत सौरव दास के रिश्तेदारों के घर भी पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने किसी तरह की धमकी या परेशान किए जाने के आरोपों से इनकार किया था।

    इस पूरे मामले के बीच अभिजीत दीपके ने सौरव दास के काम को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवाज उठाना जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर बदलाव की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए और संबंधित व्यवस्था से जवाब मांगा जाना चाहिए।

    स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभिजीत दीपके ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इस दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

    सौरव दास से जुड़े विवाद में फिलहाल उनके आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वहीं अभिजीत दीपके ने स्पष्ट रूप से सौरव के प्रयासों का समर्थन किया है और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अनावश्यक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर अब नजर रहेगी।

  • सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी में संगठनात्मक स्तर पर असंतोष के स्वर सामने आए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्र आंदोलन में शामिल होने का दावा करने वाले दो युवकों ने शुक्रवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने संगठन के कामकाज और आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    अहमदाबाद से आए मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या ने दीपके के आवास के बाहर पहुंचकर सड़क पर बैठकर विरोध जताया। दोनों युवकों ने दावा किया कि उन्होंने सीजेपी से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन इसके बाद उन्हें संगठन की कोर टीम से मिलने का अवसर नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह तक केंद्रित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह आंदोलन देशभर के युवाओं से जुड़ा हुआ है और इसकी आगे की रणनीति तय करने में आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन शुरू होने के समय इसका कोई स्पष्ट चेहरा नहीं था और उन्होंने तथा कई अन्य स्वयंसेवकों ने जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में योगदान दिया था। उनका कहना था कि इसके बाद उन्होंने सीजेपी की टीम से संपर्क कर बैठक में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संगठन की बैठक में बुलाया नहीं गया।

    ब्रह्मभट्ट ने संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति केवल कुछ रिश्तेदारों और मित्रों के बीच बैठकर तय नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना और उनके सुझाव सुनना जरूरी है।

    प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी में लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि संगठन युवाओं के नेतृत्व और भागीदारी की बात करता है तो आंदोलन से जुड़े युवाओं को भी अपनी राय रखने और संगठन की दिशा तय करने में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान युवकों ने अभिजीत दीपके के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे संगठन में ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते, जिसमें निर्णय सीमित लोगों के स्तर पर लिए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को आगे भी जारी रखने की बात कही और आवास के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा कि युवाओं के नेतृत्व में चलने वाले किसी भी संगठन के लिए पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी सुझाव देने और रणनीति पर चर्चा के लिए आमंत्रित किए जाने की मांग की।

    सीजेपी समर्थकों के इस विरोध से संगठन के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर बहस शुरू होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यही है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को संगठन की बैठकों और रणनीतिक फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा।

  • CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने Cockroach Janta Party (CJP) का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये लिए थे। इन आरोपों पर उर्फी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती दी है।

    हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और चर्चित चेहरों को भुगतान किया था। इसी दावे में उर्फी जावेद का नाम भी शामिल किया गया और आरोप लगाया गया कि उन्हें पार्टी का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये मिले थे। यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पहले आश्चर्य व्यक्त किया और फिर वीडियो जारी कर आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उर्फी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    उर्फी ने आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई गई हो। उन्होंने दावा किया कि पहले भी उनके खिलाफ कई तरह की भ्रामक और असत्य बातें सार्वजनिक की जा चुकी हैं। उर्फी के अनुसार इस तरह के आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके पेशे और सोशल मीडिया से होने वाली आय को समझता है तो वह ऐसे आरोपों पर आसानी से विश्वास नहीं करेगा। उर्फी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि बिना किसी कारण केवल एक लाख रुपये के लिए किसी संगठन का समर्थन करने का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका कहना था कि ऐसे दावे तथ्यों के बजाय केवल अफवाहों पर आधारित हैं।

    उर्फी जावेद ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार CJP का समर्थन करने के बाद कई ब्रांड्स ने उनके साथ व्यावसायिक साझेदारी समाप्त कर दी, जिससे उन्हें वित्तीय हानि उठानी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला, बल्कि इसके विपरीत उनके काम और कमाई पर असर पड़ा है।

    इस मामले में उर्फी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले उसके समर्थन में ठोस प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के केवल दावों के आधार पर खबरें प्रकाशित करने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई।

    उर्फी ने अंत में आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने CJP का समर्थन करने के बदले एक रुपया भी लिया है, तो वह उसी दिन अपना इंस्टाग्राम अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर देंगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उनके करियर और आय का प्रमुख माध्यम है, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना अकाउंट हटाने के लिए तैयार हैं। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

  • अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति और CJP फंड पर उठे सवाल, वित्तीय जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके संगठन से जुड़े वित्तीय एवं कानूनी मामलों को लेकर नया विवाद सामने आया है। गुजरात के सूरत निवासी एक RTI कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और संबंधित कर अधिकारियों से कई बिंदुओं पर विस्तृत जांच कराने की मांग की है। शिकायत में अभिजीत दिपके के पिता की संपत्ति, पार्टी की वैधानिक स्थिति तथा हाल ही में घोषित लीगल डिफेंस फंड के वित्तीय और कर संबंधी पहलुओं की निष्पक्ष जांच का आग्रह किया गया है।

    शिकायत में कहा गया है कि अभिजीत दिपके के पिता महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में यह जानने की आवश्यकता बताई गई है कि परिवार की आय और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर विदेश में उच्च शिक्षा के लिए होने वाले खर्च का प्रबंध किस प्रकार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि इस संबंध में सभी वित्तीय स्रोत वैध हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, जबकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

    विवाद केवल व्यक्तिगत संपत्ति तक सीमित नहीं है। शिकायत में कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि संगठन राजनीतिक दल की तरह सक्रिय दिखाई देता है, इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या उसका पंजीकरण जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत राजनीतिक दल के रूप में हुआ है या नहीं। शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि संगठन की वैधानिक स्थिति की आधिकारिक जांच कर आवश्यक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि कोई संगठन राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर धन जुटा रहा है या बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहा है, तो उसके कानूनी स्वरूप और नियामकीय अनुपालन की पुष्टि होना आवश्यक है। उनका तर्क है कि इससे राजनीतिक वित्तपोषण की पारदर्शिता बनी रहती है और आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होता है।

    इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू लीगल डिफेंस फंड से भी जुड़ा है। यह फंड उन लोगों की कानूनी सहायता के लिए घोषित किया गया था जो विभिन्न मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा चर्चा का विषय बनी। अब शिकायतकर्ता ने इस राशि पर लागू होने वाले कर नियमों और GST अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की है।

    कर अधिकारियों को भेजे गए पत्र में यह आग्रह किया गया है कि संबंधित राशि पर वस्तु एवं सेवा कर के प्रावधान लागू होते हैं या नहीं, तथा यदि लागू होते हैं तो निर्धारित नियमों का पालन किया गया है या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायतकर्ता का मानना है कि बड़ी वित्तीय घोषणाओं के मामलों में कर संबंधी सभी औपचारिकताओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    फिलहाल संबंधित संस्थाओं की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है। यदि चुनाव आयोग और कर विभाग इस मामले में जांच प्रारंभ करते हैं, तो उसके निष्कर्षों से संगठन की वैधानिक स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और कर अनुपालन से जुड़े कई प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है। वहीं, मामले में लगाए गए सभी आरोप अभी जांच और आधिकारिक पुष्टि के अधीन हैं तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।