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दिल्ली में तिरंगा यात्रा से पहले अभिजीत दीपके के घर पहुंची पुलिस, प्रदर्शन को लेकर दिया नोटिस
नई दिल्ली । दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन और तिरंगा यात्रा से पहले पुलिस ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के ठिकाने पर पहुंचकर उन्हें नोटिस दिया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कनॉट प्लेस में तिरंगा यात्रा निकालने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के कारण मार्च निकालने से बचने के लिए कहा गया है।16 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस की एक टीम अभिजीत दीपके के पास पहुंची। पुलिस ने उन्हें प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी। बताया गया कि टीम में लगभग 15 से 20 पुलिसकर्मी शामिल थे। उस समय दीपके दिल्ली के झंडेवालान इलाके में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के प्रवक्ता अनीश गवांडे के आवास पर ठहरे हुए थे।पुलिस ने अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 के तहत नोटिस दिया। अधिकारियों ने बताया कि कनॉट प्लेस में किसी भी तरह की तिरंगा यात्रा के लिए अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस की ओर से यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया।पुलिस ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने और मार्च के लिए अनुमति नहीं मिलने के कारण यात्रा या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जाना चाहिए। यदि इसके बावजूद कोई मार्च निकाला जाता है, तो इसे लागू नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।नोटिस देने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम अभिजीत दीपके के ठिकाने से लौट गई। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, नोटिस सौंपने के बाद टीम वहां से रवाना हुई। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर लागू प्रतिबंधों और अनुमति संबंधी स्थिति स्पष्ट की।कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को लेकर भी जानकारी सामने आई। बताया गया कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने 16 और 17 अक्टूबर के लिए सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है। इसी दौरान संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने की बात कही गई। ऐसे में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा के आयोजन को लेकर पुलिस ने आयोजकों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी।इस घटनाक्रम से पहले अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया था। इसमें उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास महात्मा गांधी हैं और देश के युवा हमेशा उनके दिखाए रास्ते पर चलेंगे। उन्होंने शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलने की बात कही।दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना बताया गया है। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने और धारा 163 लागू होने का हवाला देते हुए तिरंगा यात्रा नहीं निकालने को कहा। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दीपके को नोटिस दिए जाने के बाद पुलिस टीम वहां से लौट चुकी है। -

अभिजीत दिपके का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप, हिरासत का पूरा वीडियो जारी करने और कानूनी अधिकारों के हनन पर मांगा जवाब
नई दिल्ली । सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर हिरासत के दौरान अपने बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस से संबंधित घटनाक्रम का पूरा वीडियो सार्वजनिक करने की मांग की है। दिपके का कहना है कि हिरासत के दौरान उन्होंने कई बार अपने चचेरे भाई से बात करने, दो मिनट के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने और अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी गई। उनका आरोप है कि पुलिस ने घटना का केवल संपादित वीडियो जारी किया है, जबकि पूरा वीडियो सामने आने से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।पत्रकारों से बातचीत में दिपके ने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस को अपनी कार्रवाई पर भरोसा है, तो उसे बिना किसी बदलाव के पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करनी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि हिरासत के दौरान उनके साथ क्या हुआ और क्या उन्हें अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करने दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि पूरी रिकॉर्डिंग जारी करने के बजाय संपादित वीडियो क्यों दिखाया जा रहा है।
दिपके ने विशेष रूप से अपने वकील से संपर्क करने की अनुमति नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि गिरफ्तारी या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में कानूनी सहायता प्राप्त करना महत्वपूर्ण अधिकार है, लेकिन उन्हें अपने वकील से बात करने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके माता-पिता और वकीलों को यह जानकारी नहीं दी कि उन्हें कहां रखा गया है और किस पुलिस थाने में ले जाया गया है।
दिपके के अनुसार, पुलिसकर्मी सुबह करीब 3:30 बजे गिरफ्तारी से संबंधित कागजात लेकर उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि पुलिस उनके परिवार की परिस्थितियों से परिचित थी, क्योंकि उस समय परिवार उनकी दादी के निधन के दुख से गुजर रहा था। इस स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए और कहा कि परिवार पहले ही एक बड़े सदमे का सामना कर रहा था।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि ऐसी परिस्थिति में अपने माता-पिता को गिरफ्तारी की सूचना देना कितना उचित होता, खासकर जब उन्हें लंबे समय तक जेल में रहने की आशंका बताई जा रही थी। दिपके ने कहा कि पुलिस उनसे माता-पिता से बात करने के लिए कह रही थी, लेकिन दूसरी ओर उनके परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि उन्हें किस थाने या जेल में रखा गया है। उन्होंने इस घटनाक्रम को अपने और अपने परिवार के लिए मानसिक प्रताड़ना बताया।
दिपके ने पुलिस की कार्रवाई में महिला अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि पुरुष पुलिस अधिकारियों पर छेड़छाड़ के आरोपों की संभावना के कारण महिला अधिकारियों को आगे किया गया हो सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या महिला अधिकारियों की मौजूदगी पुलिस की कार्रवाई का बचाव करने के उद्देश्य से थी। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने आशंका व्यक्त की है और किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को महिला अधिकारियों को आगे रखने के कारण स्पष्ट करने चाहिए। दिपके ने महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की बात करते हुए कहा कि वह और उनके सहयोगी सभ्य तथा शिक्षित लोग हैं और महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं। उन्होंने दिल्ली पुलिस से पूरे वीडियो को सार्वजनिक करने और हिरासत से जुड़े घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग दोहराई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
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सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई
नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियां भारत की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन का माहौल है, जबकि दिल्ली के एक हिस्से में कुछ अराजक तत्व अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने प्रदर्शन को फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी तरह विफल रहा।संबित पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है और टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, उसे भारत की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, देश में शांति बनी हुई है और सुशासन के साथ व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के एक कोने में अराजक तत्वों की ओर से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह पूरी तरह फ्लॉप रहा और इसका उद्देश्य सफल नहीं हुआ।
प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पात्रा ने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश और राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आगजनी कराने, मारपीट की स्थिति पैदा करने और सड़कों पर संघर्ष कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा प्रवक्ता के आरोपों के रूप में सामने आईं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में किसी अलग जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।
भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश सफल नहीं हुई और इसे भीड़तंत्र पर लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस तरह की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया था, वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने प्रदर्शन के आयोजन और उसके प्रभाव को लेकर अपनी पार्टी का विरोध स्पष्ट किया।
सीजेपी का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। प्रदर्शन को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया इसी घटनाक्रम के संदर्भ में आई है। संबित पात्रा ने अपने बयान में प्रदर्शन को देश की व्यापक स्थिति का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया और कहा कि जंतर-मंतर पर दिखाई दे रही गतिविधियां भारत की कहानी नहीं हैं।
भाजपा की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा, व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। पात्रा ने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन कायम है तथा राजधानी में कथित अराजक गतिविधियों के जरिए स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। इस तरह सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराया और आगजनी, मारपीट तथा राजधानी को बंधक बनाने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में विपक्ष या प्रदर्शन आयोजकों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
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दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं
नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के दो अन्य नेताओं आशुतोष रांका तथा सौरभ दास को दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के इरादे से मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के कारण तीनों नेता हवाई अड्डे से बाहर निकलकर प्रदर्शन स्थल तक भी नहीं पहुंच सके।हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत दीपके का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, “मैं अरेस्ट होने के लिए ही आया हूं। कर लो अरेस्ट।” दीपके ने विमान के अंदर से एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “आ जाओ, कर लो अरेस्ट। यह अराजकता है। ऐसा तो इंदिरा गांधी के समय में भी नहीं हुआ। मैं डरने वाला नहीं हूं।” उनके इस बयान के बाद हिरासत की कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में आ गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों नेताओं को हिरासत में लेने के लिए दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों को विमान के अंदर भेजा गया था। उनकी मौजूदगी में पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिया। इसके बाद तीनों को एक वैन में बैठाकर वहां से ले जाया गया। हालांकि, उन्हें हिरासत में लेने के बाद पुलिस किस स्थान पर लेकर गई, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। उनकी हिरासत के स्थान और आगे की कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विरोध जताया। पार्टी ने इस कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो साझा कर तीनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी और पुलिस के कदम को शर्मनाक बताया। पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीजेपी के नेता मुंबई से दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। हिरासत को लेकर पार्टी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया।
इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘काला आपातकाल’ लागू होने का आरोप लगाया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए।
आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद किए और ट्रेनें रद्द कीं। उन्होंने इन कदमों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित मेट्रो स्टेशनों के नाम, ट्रेनों की संख्या और बंद रहने की अवधि का विवरण नहीं दिया गया है। इस तरह सीजेपी नेताओं की हिरासत का मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। एक ओर अभिजीत दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई, वहीं सीजेपी ने अपने नेताओं की हिरासत का विरोध किया और आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए।
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अभिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।
अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।
दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।
दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।
आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।
आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।
Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।
वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।
अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।
दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।
दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।
आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।
आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।
Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।
वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।
अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।
दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।
दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।
आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।
आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।
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अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…
नई दिल्ली । अभिजीत सावंत और अरिजीत सिंह ने साल 2005 के आसपास अपने संगीत करियर की शुरुआत की, लेकिन दोनों का सफर आगे चलकर बिल्कुल अलग दिशा में गया। एक ओर अभिजीत सावंत रियलिटी शो जीतने के बाद अचानक घर-घर में पहचान बनाने वाले गायक बन गए, वहीं अरिजीत सिंह ने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगीतकारों और कंपोजर्स के साथ काम किया। अब अभिजीत ने दोनों के शुरुआती दौर की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं।अभिजीत सावंत ने बताया कि रियलिटी शो जीतने के बाद उन्हें बहुत कम समय में बड़ी लोकप्रियता मिल गई थी। उस दौर में वह लगातार लोगों की नजरों में थे और उनके करियर को लेकर उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। दूसरी तरफ अरिजीत उस समय लाइमलाइट से काफी दूर थे। वह स्टूडियो में जाकर संगीत से जुड़े अलग-अलग काम कर रहे थे और अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।
अभिजीत के मुताबिक, शुरुआती वर्षों में अरिजीत को बतौर गायक वह पहचान नहीं मिली थी, जो बाद में उन्हें हासिल हुई। उन्होंने बताया कि अरिजीत ने करीब एक दशक तक म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। इस दौरान उन्होंने कई संगीतकारों और म्यूजिशियंस के साथ काम किया और धीरे-धीरे अपनी क्षमता को मजबूत किया।
अपने उस दौर को याद करते हुए अभिजीत ने कहा कि अगर उस समय दोनों की लोकप्रियता की तुलना की जाए, तो वह खुद काफी ज्यादा लोकप्रिय थे, जबकि अरिजीत को बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि, दोनों के सामने मौजूद चुनौतियां अलग थीं। अभिजीत पर अचानक मिली लोकप्रियता को बनाए रखने का दबाव था, जबकि अरिजीत को लंबे समय तक अपनी पहचान बनाने के लिए इंतजार और मेहनत करनी पड़ी।
अभिजीत ने यह भी बताया कि अरिजीत ने उन वर्षों का इस्तेमाल अपने संगीत अनुभव को मजबूत करने में किया। उन्होंने संगीतकारों के साथ लगातार काम किया और इसी प्रक्रिया में अपनी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद उन्हें बतौर प्लेबैक सिंगर बड़े अवसर मिलने लगे और उनकी आवाज ने अलग पहचान बनानी शुरू की।
अरिजीत सिंह के करियर में फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। हालांकि इससे पहले भी वह फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड कर चुके थे, लेकिन इस गीत ने उन्हें देशभर में बड़ी पहचान दिलाई। अभिजीत ने भी माना कि ‘तुम ही हो’ अरिजीत के करियर में ऐसा गाना साबित हुआ, जिसने उनकी पहचान को पूरी तरह बदल दिया।
अभिजीत ने अरिजीत की सफलता को केवल मेहनत से जोड़ने के बजाय किस्मत के पहलू का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि किसी खास गाने का किसी कलाकार की आवाज तक पहुंचना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, हर कलाकार का अपना समय और अपना सफर होता है।
अभिजीत ने यह भी कहा कि दर्शकों को केवल सफल व्यक्ति की उपलब्धियों को देखकर दूसरे लोगों की कमियां नहीं निकालनी चाहिए। उनके मुताबिक, हर कलाकार अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करता है और हर किसी की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए लोगों को अलग-अलग कलाकारों के सफर को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
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अभिजीत दीपके ने विपक्ष पर उठाए सवाल, कहा- चुनाव में गड़बड़ी मानते हैं तो फिर लगातार हिस्सा क्यों लेते हैं
नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को लगता है कि चुनाव सही तरीके से नहीं हो रहे हैं, तो वह लगातार ऐसे चुनावों में हिस्सा क्यों ले रहा है। दीपके ने कहा कि विपक्ष को संभवतः इस बात का डर है कि चुनाव से दूर रहने पर उसका राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो सकता है।दीपके ने कहा कि एक तरफ विपक्ष चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाता है और दूसरी तरफ उन्हीं चुनावों में लगातार हिस्सा लेता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों और चुनाव में भागीदारी के बीच विरोधाभास दिखाई देता है। उन्होंने विपक्ष से देश और लोकतंत्र को राजनीतिक अस्तित्व से ऊपर रखने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी दल को चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है, तो उसे अपने रुख पर स्पष्टता दिखानी चाहिए। दीपके के मुताबिक, चुनावों में लगातार भाग लेने से लोगों के बीच यह संदेश जा सकता है कि चुनावी प्रक्रिया सामान्य और प्रतिस्पर्धी है, जबकि विपक्ष खुद उस पर सवाल उठा रहा है।
दीपके ने विपक्षी दलों की आंतरिक स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को तोड़ा जा रहा है और पार्टियों में विभाजन हो रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे माहौल में केवल चुनाव लड़ते रहना राजनीतिक ताकत को बनाए रखने का पर्याप्त तरीका नहीं है। उन्होंने विपक्ष से व्यापक लोकतांत्रिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपने रुख पर विचार करने को कहा।
अपनी बात समझाने के लिए दीपके ने चुनावों की तुलना क्रिकेट के एक फिक्स मैच से की। उन्होंने कहा कि ऐसे मैच में हर कैच जानबूझकर नहीं छोड़ा जाता। कुछ कैच पकड़े भी जा सकते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवर तक ले जाया जा सकता है, जिससे लोगों को मुकाबला बराबरी का दिखाई दे।
दीपके ने इसी उदाहरण के आधार पर दावा किया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो, तो विपक्ष को कुछ स्थानों पर जीत भी मिल सकती है। उनके मुताबिक, ऐसी जीतें विपक्ष को चुनाव लड़ते रहने के लिए पर्याप्त हो सकती हैं और इससे लोगों के बीच वास्तविक प्रतिस्पर्धा होने का विश्वास बना रह सकता है। यह उनका चुनावी प्रक्रिया को लेकर दिया गया तर्क है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि चुनावों को कथित तौर पर तय या प्रभावित मानता है तो उसे उसी प्रक्रिया का हिस्सा बने रहने के बजाय अपने रुख पर विचार करना चाहिए। दीपके ने विपक्ष से राजनीतिक अस्तित्व की चिंता से आगे बढ़कर देश और लोकतंत्र के बारे में सोचने की अपील की।
दीपके की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आई है। इससे पहले उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी और 48 घंटे का समय देने की बात कही थी। उनका ताजा बयान भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों और विपक्ष की चुनावी रणनीति पर केंद्रित है।
उन्होंने विपक्ष से कहा कि यदि उसे चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो उसे लगातार उसमें भाग लेने के बजाय स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। दीपके का कहना है कि चुनाव में भागीदारी जारी रखने से उस व्यवस्था को वैधता मिलती है, जिस पर विपक्ष स्वयं सवाल उठा रहा है। उन्होंने इसी आधार पर विपक्ष की चुनावी रणनीति और राजनीतिक अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
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महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया
नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर में आदिवासी छात्राओं ने छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखीं। अभिजीत दीपके के साथ हुई बातचीत के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल में रहने की परिस्थितियों, बुनियादी सुविधाओं, छात्रवृत्ति, वॉशरूम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित यौन शोषण और प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आई कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि आदिवासी आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी निजता और सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।
भंडारा के एक आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा भी बातचीत के दौरान सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि वहां करीब 15 लड़कियों को एक ही कमरे में रखा जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में जगह की कमी के अलावा वॉशरूम से जुड़ी परेशानियों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ छात्राओं को ऐसी जांच से गुजरना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने अपनी नाराजगी और असहजता व्यक्त की। हालांकि, सामने रखे गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।
छात्राओं ने कथित यौन शोषण से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को ही आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
हॉस्टल की समस्याओं में केवल सुरक्षा और जांच से जुड़े मुद्दे ही शामिल नहीं थे। छात्राओं ने छात्रवृत्ति, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की। उनका कहना था कि सरकारी आदिवासी स्कूलों और आवासीय संस्थानों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
इन शिकायतों के बीच अभिजीत दीपके ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों से उनकी परेशानियों और हॉस्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया है। इसके लिए आपसी संपर्क और जानकारी जुटाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।
अभिजीत दीपके ने 17 सितंबर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से करने की बात कही गई है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों और आवासीय विद्यालयों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।
आदिवासी छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हॉस्टल की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं, छात्राओं की सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़े आरोपों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन आरोपों की जांच और संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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गणेश चतुर्थी पर अभिजीत सावंत ने रिलीज किया ‘गण धाव रे’ भक्ति गीत, बेटियों अहाना और समीरा ने भी दी अपनी आवाज
नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी के मौके पर गायक अभिजीत सावंत ने अपना नया भक्ति गीत ‘गण धाव रे’ रिलीज किया है। इस गाने की खास बात यह है कि इसमें उनकी दोनों बेटियां अहाना और समीरा भी उनके साथ जुड़ी हैं। दोनों ने गाने में बैकग्राउंड वोकल्स दिए हैं। अभिजीत के लिए यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है, क्योंकि उनकी संगीत यात्रा में पहली बार वह अपनी दोनों बेटियों के साथ एक ही गाने के लिए आवाज देते नजर आए हैं।अभिजीत सावंत ने बताया कि दोनों बेटियों के साथ ‘गण धाव रे’ रिकॉर्ड करना उनके लिए भावुक पल था। उन्होंने कहा कि गाने में बेटियों का उनके साथ होना बप्पा का दिव्य संयोग है। उनके मुताबिक, तीनों का एक साथ किसी गाने के लिए अपनी आवाज देना उनकी संगीत यात्रा का अलग अनुभव है और यह प्रोजेक्ट उनके दूसरे कामों से काफी अलग है।
गाने को साझा करते हुए अभिजीत ने गणेश चतुर्थी और बप्पा के साथ लोगों के अलग-अलग रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का बप्पा के साथ अपना एक खास रिश्ता होता है। कोई उन्हें दोस्त मानता है, कोई परिवार का हिस्सा और कोई मुश्किल समय में सहारा मानता है। अभिजीत के अनुसार, ‘गण धाव रे’ के जरिए इसी रिश्ते को महसूस करने का मौका मिलेगा।
अभिजीत ने यह भी कहा कि बेटियों की आवाज जुड़ने के कारण यह गाना उनके लिए केवल एक भक्ति गीत नहीं रह गया, बल्कि परिवार के साथ संजोकर रखने वाली याद बन गया है। इस तरह गणेश चतुर्थी पर रिलीज हुआ यह गीत उनके लिए संगीत और परिवार, दोनों से जुड़ा खास प्रोजेक्ट बन गया है।
अभिजीत सावंत को ‘इंडियन आइडल’ के पहले सीजन से घर-घर में पहचान मिली थी। शो के जरिए उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और इसके बाद उनकी संगीत यात्रा आगे बढ़ी। साल 2005 में उनका पहला सोलो एल्बम ‘आपका अभिजीत सावंत’ रिलीज हुआ। इसी साल उन्होंने फिल्म ‘आशिक बनाया आपने’ के लिए प्लेबैक सिंगिंग की और ‘मर जावां मिट जावां’ गाना गाया।
इसके बाद साल 2007 में उनका दूसरा एल्बम ‘जुनून’ रिलीज हुआ। करीब छह साल बाद 2013 में उन्होंने अपना तीसरा स्टूडियो एल्बम ‘फरीदा’ पेश किया। संगीत के अलावा अभिजीत ने अभिनय में भी हाथ आजमाया। साल 2009 में उन्होंने फिल्म ‘लॉटरी’ से एक्टिंग डेब्यू किया। इसके बाद वह ‘तीस मार खान’ में भी छोटे अपीयरेंस में नजर आए।
हाल ही में अभिजीत सावंत ‘इंडियन आइडल’ के मंच पर दोबारा दिखाई दिए थे। 4 जुलाई को शो के 75वें एपिसोड यानी डायमंड जुबली स्पेशल में पहले सीजन के कंटेस्टेंट्स का रीयूनियन हुआ था। इस दौरान अभिजीत सावंत और अमित सना करीब 22 साल बाद एक बार फिर मंच पर साथ नजर आए। गणेश चतुर्थी पर ‘गण धाव रे’ की रिलीज के साथ अभिजीत ने अब अपनी बेटियों को भी इस संगीत यात्रा का हिस्सा बनाया है।
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MPSC छात्र की आत्महत्या के बाद अभिजीत दीपके परिवार से मिलेंगे, कर्ज और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके MPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र के परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। छात्र ने पुणे में खुदकुशी कर ली थी। पुलिस को शक है कि कर्ज से परेशान होकर यह कदम उठाया गया है। मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के रूप में हुई है।दीपके ने गुरुवार को पोस्ट किया, ‘मैं MPSC के एक छात्र प्रथमेश देशमुख के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहा हूं, जिन्होंने कल आत्महत्या कर ली थी।’ खबर है कि सीजेपी पदाधिकारी सौरभ दास भी नोएडा पहुंच रहे हैं, जहां वह प्रशासन की तरफ से 5 लाख का नोटिस पाने वाले छात्र अक्षत से मुलाकात करेंगे।
पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने बताया कि मृतक प्रथमेश देशमुख एमपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए पुणे के नवी पेठ इलाके में किराये के मकान में रह रहा था। उन्होंने बताया कि वह सुबह कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया, जिसके बाद कुछ निवासियों ने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या का सही समय पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सुसाइड नोट मिला
पुलिस ने जानकारी दी है, ‘देशमुख कथित रूप से आर्थिक दबाव में था और उसे कई लोगों के करीब ढाई लाख रुपये लौटाने थे। उसका परिवार भी आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। उसने एक नोट छोड़ा है, जिसमें लोगों से लिए कर्ज और लौटाई जा चुकी रकम के बारे में जानकारियां दी गईं हैं।’बताया गया कि दो पन्नों के इस नोट में 8-19 लोगों के नाम लिखे हैं। पुलिस यह पता लगाने के लिए उसके परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है कि उसने पैसे क्यों उधार लिए थे और मामले की जांच जारी है।
छत्रपति संभाजीनगर में हो रहा है प्रदर्शन
मंगलवार को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC में कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। खास बात है कि यह दीपके का गृहनगर भी है। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आयोग में शीर्ष पदों पर साफ छवि वाले अधिकारियों को नियुक्त किया जाए। इससे पहले सोमवार को पुणे में भी प्रदर्शन हुआ था और देशमुख ने पुणे में ही आत्महत्या की है।इसके अलावा प्रदर्शनकारी पूर्व में हुई परीक्षाओं पर भी सवाल उठा रहे हैं और जांच की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद हुई परीक्षाओं को लेकर भी संदेह है। एक छात्र ने कहा था, ‘हमें पता होना चाहिए कि आखिर क्या हो रहा है। मैं चार साल से पढ़ाई कर रहा हूं और परीक्षाएं दे रहा हूं। आज पैसे वाले लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।’