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  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका

    अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका


    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके इन दिनों मुंबई में हैं, जहां वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह चेहरे पर रुमाल से नकाब बांधकर सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उन्होंने इस दौरान बताया कि कई महीनों बाद उन्हें इस तरह अकेले सड़क पर चलने का मौका मिला है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने के बाद अभिजीत दीपके काफी चर्चित हो चुके हैं। उनके समर्थकों और आलोचकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में आम लोगों की तरह सार्वजनिक जगहों पर अकेले घूमना उनके लिए आसान नहीं रहता। मुंबई में जब ट्रैफिक जाम के कारण उनकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी, तब उन्होंने कार से उतरकर पैदल चलने का फैसला किया।

    दीपके ने इस दौरान अपने चेहरे को रुमाल से ढक लिया था। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने इस पल को कैमरे में रिकॉर्ड किया और उनसे सड़क पर अकेले चलने के अनुभव के बारे में पूछा। इस पर दीपके ने खुशी जताते हुए कहा कि कई महीनों बाद वह इस तरह सड़क पर अकेले चल रहे हैं। उन्होंने ट्रैफिक रुकने की स्थिति को ही उनके लिए पैदल चलने का मौका बनने वाला कारण बताया।

    दीपके ने कहा कि सड़क पर कोई उनके साथ नहीं है और इस तरह अकेले चलना उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने इसे अच्छा अनुभव बताया। चेहरे पर नकाब लगाने की वजह से वह कुछ समय के लिए आम लोगों की तरह सड़क पर पैदल चल सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके और उनके संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर से मुंबई में करने की घोषणा की गई है। संगठन की ओर से मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की योजना बताई गई थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।

    दीपके ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से रोका गया तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर उठाई गई है।

    चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    अभिजीत दीपके इससे पहले भी आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनका मुंबई की सड़क पर नकाब लगाकर अकेले पैदल चलना भी चर्चा का विषय बन गया है। उनके मुताबिक, ट्रैफिक जाम की वजह से मिला यह मौका उन्हें कई महीनों बाद सामान्य तरीके से सड़क पर चलने का अनुभव दे गया।

  • Form-6 से SIR का अतिरिक्त कॉलम हटने पर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘पहले क्यों जरूरत थी?’

    Form-6 से SIR का अतिरिक्त कॉलम हटने पर अभिजीत दीपके का तंज, बोले- ‘पहले क्यों जरूरत थी?’


    नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में ऑनलाइन Form-6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। आयोग के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आयोग के फैसले से जुड़ी खबर साझा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तंज कसा और लिखा- “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?”

    Form-6 में अब अतिरिक्त घोषणा जरूरी नहीं

    चुनाव आयोग के मुताबिक, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां नए मतदाता पंजीकरण के लिए ऑनलाइन Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा अब नहीं भरनी होगी। यह बदलाव 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की मौजूदगी में हुई पूर्ण आयोग की बैठक के बाद किया गया।

    आयोग के अनुसार, Form-6 के साथ जोड़ी गई अतिरिक्त घोषणा SIR की प्रक्रिया के लिए थी। इसके तहत नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी जाती थी कि वे, उनके माता-पिता या दादा-दादी पहले किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं।

    जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां यह घोषणा फिलहाल उपलब्ध है। वहीं, जहां प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ECINET ऐप और पोर्टल के साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी इसे हटा दिया गया है। अब ऐसे राज्यों में नए मतदाताओं को केवल ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित वैधानिक Form-6 भरना होगा।

    Form-6 में बदलाव पर पहले उठे थे सवाल

    Form-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने Form-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दोनों अधिकारियों ने इस तरह के बदलाव को लेकर कानूनी प्रक्रिया और वैधानिक फॉर्म में संशोधन के अधिकार पर सवाल उठाए थे।

    एक अन्य इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 अलग-अलग मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें Form-6 में बदलाव के अलावा SIR से जुड़े अन्य मुद्दे भी शामिल थे।

    हालांकि, इन रिपोर्टों पर चुनाव आयोग का कहना रहा है कि आयोग के भीतर होने वाली चर्चाएं और मतभेद निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की ओर से लिए जाते हैं।

    दीपके ने सवाल के अंदाज में साधा निशाना

    Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने इसी पुराने विवाद को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने आयोग के फैसले से संबंधित खबर शेयर करते हुए लिखा- “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?”

    उनकी टिप्पणी का आशय इस बात से था कि अगर SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिरिक्त घोषणा को हटाया जा सकता है, तो इसे Form-6 में जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी थी।

    CJP के प्रदर्शन का भी ऐलान

    इस बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक विवाद जारी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने हाल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है।

    अभिजीत दीपके ने यह भी कहा है कि मुंबई पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद उनकी पार्टी CJP 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए इसे नागरिकों की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। दीपके ने कहा है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में CJP गांधी जयंती पर ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेगी।

    इस तरह Form-6 से SIR की अतिरिक्त घोषणा हटाने के चुनाव आयोग के फैसले के बाद एक ओर प्रक्रिया में बदलाव हुआ है, वहीं दूसरी ओर इसी मुद्दे को लेकर आयोग पर पहले उठे सवाल और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में बनी हुई हैं।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दीपके और CJP के अन्य नेता महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

    CJP ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होंगे। इससे पहले कुछ MPSC अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित दीपके के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी।

    24 सितंबर तक का दिया अल्टीमेटम

    CJP ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। पार्टी के अनुसार यदि 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो अभ्यर्थियों से बातचीत के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा।

    MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद जारी वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि वह और CJP अभ्यर्थियों की लड़ाई में उनके साथ हैं और इस्तीफा होने तक उनका समर्थन जारी रहेगा।

    प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मुद्दा

    MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख की पुणे में मौत के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था। उसके पास मिले कथित सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख था। इसके बाद CJP ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कदम उठाया।

    अभिजीत दीपके ने इसी सप्ताह प्रथमेश देशमुख के परिजनों से भी मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि देशमुख नौकरी हासिल कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे व्यवस्था की विफलता बताया।

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद फिर सक्रिय CJP

    इससे पहले अभिजीत दीपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। करीब एक महीने पहले उन्होंने आंदोलन के ‘सीजन-2’ का संकेत देते हुए कहा था कि देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

    मनोज जरांगे को भी दिया समर्थन

    इस बीच दीपके ने महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मनोज जरांगे को भी समर्थन दिया है। वह शुक्रवार को जरांगे से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार से जरांगे की मांगों पर बातचीत करने की अपील की।

    दीपके ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं के पास दूसरे लोगों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जरांगे के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    CJP के नए ऐलान के बाद MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दीपके की राजनीतिक सक्रियता आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन

    बंबई उच्च न्यायालय लिपिक भर्ती परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी का आरोप, अभ्यर्थियों का छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन


    नई दिल्ली ।
    बंबई उच्च न्यायालय में लिपिक पद के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग परीक्षा के दौरान तकनीकी और सर्वर संबंधी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में आई बाधाओं से आक्रोशित कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रणालीगत कमियों के कारण कई उम्मीदवारों को बिना किसी गलती के अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है।

    प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके प्रभावित उम्मीदवारों से मिलने सुराणा नगर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे। अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए दीपके ने परीक्षा को नए सिरे से दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे इस संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे। दीपके ने अधिकारियों पर अभ्यर्थियों की शिकायतों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।

    परीक्षार्थियों के अनुसार, सुबह के सत्र में परीक्षा के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन में पीलापन आने और कीबोर्ड द्वारा काम करना बंद कर देने जैसी गंभीर समस्याएं आईं। कई केंद्रों पर सर्वर की सुस्ती के कारण अभ्यर्थी अपना मूल्यांकन कार्य सुचारू रूप से पूरा नहीं कर सके। अभ्यर्थियों ने आशंका जताई है कि इन तकनीकी खामियों के कारण उनके भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए प्रभावित सत्र की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जानी चाहिए।

    उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से जारी एक आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा का आयोजन तय एजेंसी के माध्यम से कराया गया था। हालांकि, प्रशासन ने माना कि औरंगाबाद और कल्याण जैसे कुछ केंद्रों पर तकनीकी बाधाएं दर्ज की गई हैं। एजेंसी द्वारा संचालित इस प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई के संबंध में उम्मीदवारों को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की औरंगाबाद और नागपुर पीठ के अंतर्गत 1,300 लिपिकीय पदों के लिए यह परीक्षा तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। इसके लिए पूरे राज्य से लगभग 13,000 उम्मीदवार पात्र पाए गए थे, जिनमें से अकेले मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रों पर भाग लिया था। मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों की नजरें भी इस भर्ती मामले के आगामी प्रशासनिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

  • अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग

    अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे शिंदे सेना के नेता, आंदोलन की सराहना की, सुरक्षा देने की भी उठाई मांग


    नई दिल्ली। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके से मिलने नेताओं का सिलसिला जारी है। गुरुवार को शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य (MLC) बच्चू कडू ने छत्रपति संभाजीनगर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और उनके आंदोलन की सराहना की। इससे पहले राज्य सरकार में मंत्री संजय शिरसाट भी दीपके और उनके परिवार से मिल चुके हैं।

    बच्चू कडू ने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल या सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि एक आंदोलनकारी के तौर पर अभिजीत दीपके से मिलने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक आंदोलनकारी के रूप में दूसरे आंदोलनकारी से मिलने आया हूं।” उन्होंने जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन के लिए दीपके को बधाई भी दी।

    धमकियों पर जताई चिंता
    अभिजीत दीपके को कथित तौर पर मिल रही धमकियों के सवाल पर बच्चू कडू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को उन लोगों से बात करनी चाहिए जो ऐसी धमकियां दे रहे हैं और अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है और इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

    संजय शिरसाट ने भी की थी मुलाकात
    इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में मंत्री संजय शिरसाट ने भी दीपके के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने क्षेत्र के निवासी अभिजीत दीपके पर गर्व है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। शिरसाट ने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात करेंगे।

    आंदोलन की खुलकर की तारीफ
    संजय शिरसाट ने बताया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ाई के बाद नौकरी का अवसर मिला था, लेकिन उन्होंने छात्रों के हितों के लिए काम करने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि दीपके ने किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को लेकर आंदोलन किया और उनकी सफलता में समाज के व्यापक समर्थन की बड़ी भूमिका रही। मंत्री ने यह भी कहा कि आंदोलन के बाद छात्रों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई हुई और इस पहल ने राज्य ही नहीं, देशभर में चर्चा बटोरी।