Tag: ABVP

  • DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    DUSU चुनाव नतीजों पर निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर निशाना, मंच साझा करने को लेकर कसा तंज

    नई दिल्ली । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को लेकर तंज कसते हुए उनके हालिया कार्यक्रमों और मंच साझा करने को लेकर टिप्पणी की। दुबे ने कहा कि राहुल गांधी को सुनने के लिए लोग तैयार नहीं हैं और उन्हें कलाकारों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत हासिल की। यश डबास अध्यक्ष, रिया छावड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में कुल मतदान 40.46 प्रतिशत रहा।

    नतीजों के बाद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि देशभर में ‘झूठ की गूंज’ चल रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सुनने के लिए कोई आने को तैयार नहीं है। दुबे ने राहुल गांधी के चुनावी प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि वह 100 से ज्यादा चुनाव हार चुके हैं। यह संख्या उनके बयान का हिस्सा है।

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के हालिया मंच साझा करने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने नेहा राठौर के साथ मंच साझा किया। इसके बाद इंदौर में एक स्टैंडअप कॉमेडियन के साथ भी वह मंच पर नजर आए।

    इसी संदर्भ में निशिकांत दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब राहुल गांधी को राखी सावंत के साथ भी मंच साझा करना पड़ेगा। उनका यह बयान DUSU चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी पर की गई राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया।

    दुबे ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक बनाने के लिए कलाकारों का सहारा लेने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रमों में कलाकारों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने DUSU चुनाव परिणाम को भी युवाओं के राजनीतिक रुझान से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

    DUSU चुनाव के परिणामों में अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले। सचिव पद पर रिया छावड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह 16,615 वोट के साथ विजयी रहे।

    इस तरह केंद्रीय पैनल के चार पदों में से तीन पर ABVP उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया। चुनाव परिणाम के बाद छात्र राजनीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।

    निशिकांत दुबे ने DUSU परिणामों के अलावा झारखंड में SIR की प्रक्रिया को लेकर भी राज्य सरकार पर आरोप लगाए। सारठ में SIR प्रक्रिया के दौरान 34 लोगों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के सवाल पर उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में प्रक्रिया के दौरान जो गड़बड़ियां हो रही हैं, उन्हें सरकार खुद करवा रही है।

    उन्होंने सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह बेहतर काम कर रहे हैं। दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता SIR की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने झारखंड में MMDR बिल के विरोध सहित कई राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

  • DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    DUSU चुनाव में ABVP ने तीन पद जीते, राजीव शुक्ला बोले- विपक्ष साथ लड़ता तो बदल सकता था नतीजा

    नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद ABVP के खाते में गए, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। परिणाम सामने आने के बाद छात्र राजनीति के साथ-साथ राजनीतिक दलों के बीच भी इस चुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने जीत दर्ज की। उन्हें 24,576 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। इस तरह डबास ने 2,053 वोटों के अंतर से अध्यक्ष पद अपने नाम किया। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी विजयी रहीं, जबकि संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की।

    उपाध्यक्ष पद का परिणाम हालांकि बाकी तीन पदों से अलग रहा। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP के ईशु मौर्या को 16,910 वोट मिले, जबकि NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट प्राप्त हुए। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और इस बार उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

    चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 40.46 रहा। चार केंद्रीय पदों के लिए हुए मुकाबले में ABVP ने तीन सीटों पर जीत हासिल की, जबकि NSUI किसी भी केंद्रीय पद पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। वर्ष 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI चार प्रमुख पदों में से कोई भी पद हासिल नहीं कर पाई है।

    नतीजों के बाद कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने चुनाव को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जुड़े छात्र संगठनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। उनके अनुसार, अगर ये संगठन एक साथ चुनाव मैदान में उतरते तो परिणाम अलग हो सकता था और इंडिया गठबंधन से जुड़े पक्ष को अधिक सफलता मिल सकती थी।

    राजीव शुक्ला की प्रतिक्रिया के बाद DUSU चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चा का एक और पहलू सामने आया। उनके बयान का आधार यह था कि अलग-अलग उम्मीदवारों के मैदान में होने से संबंधित वोटों का बंटवारा हुआ और इसका चुनावी परिणाम पर असर पड़ा।

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को छात्र राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय के केंद्रीय पैनल के चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव जैसे पदों के लिए मुकाबला होता है। इन चुनावों में छात्र मुद्दों के साथ विभिन्न छात्र संगठनों की राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई देती है।

    इस बार चुनाव के दौरान छात्रों से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में रहे। इनमें हॉस्टल, पीजी व्यवस्था और सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। चुनाव परिणामों ने एक ओर ABVP को तीन केंद्रीय पद दिए, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने अलग तस्वीर पेश की।

    इस परिणाम के बाद छात्र संगठनों के बीच रणनीति और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि अलग-अलग संगठनों के प्रदर्शन और वोटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक नेताओं की व्याख्या उनके अपने आकलन पर आधारित है। DUSU के ताजा परिणामों ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में अलग-अलग संगठनों की स्थिति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’

    DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कहा- ‘मुंह पर करारा तमाचा’


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की है। ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए हैं। वहीं उपाध्यक्ष पद पर पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। कांग्रेस से संबद्ध NSUI केंद्रीय पैनल की चारों सीटों में से कोई भी नहीं जीत सकी।

    चुनाव परिणाम सामने आने के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति पर निशाना साधने का आधार बनाया। भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने कहा कि डूसू का परिणाम राहुल गांधी के लिए ‘मुंह पर करारा तमाचा’ है। उन्होंने दावा किया कि नतीजों ने राहुल गांधी की ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति को खारिज कर दिया है।

    ‘युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं’ वाला नैरेटिव खारिज हुआ : भाजपा

    भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे कि देश के युवा राष्ट्रवादी विचारों से दूर जा रहे हैं और नई पीढ़ी झूठ एवं साजिश की राजनीति को पसंद कर रही है। यादव ने कहा कि डूसू चुनाव के नतीजे इस विमर्श को खारिज करते हैं।

    उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, वाम दल और उनके पूरे तंत्र की ओर से जिस राजनीतिक विमर्श को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही थी, डूसू के परिणामों ने उसे ध्वस्त कर दिया है। यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र पढ़ने आते हैं, इसलिए यहां का चुनाव व्यापक युवा रुझानों को भी दर्शाता है।

    ‘डूसू का नतीजा राहुल के खिलाफ Gen Z का जनादेश’

    सिद्धार्थ यादव ने डूसू चुनाव परिणाम को राहुल गांधी के खिलाफ ‘Gen Z का जनादेश’ बताया। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति को ‘झूठ और नकारात्मक प्रचार’ की राजनीति बताते हुए कहा कि छात्र मतदाताओं ने इसे खारिज किया है।

    यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कई जगहों पर ‘झूठ की गूंज’ सुनाने का काम कर रहे हैं और पूछा कि क्या उन्हें छात्रों की ओर से उठ रही ‘सच की हुंकार’ की आवाज सुनाई दे रही है।

    अमित शाह बोले- युवा शक्ति को राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला न बनाया जाए

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ABVP की जीत पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के हर हिस्से से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं और यहां का जनादेश पूरे भारत के युवाओं के मन का प्रतिबिंब होता है। शाह ने ABVP की जीत को उन ताकतों के लिए संदेश बताया, जो युवाओं को अपने एजेंडे के लिए ‘प्रयोगशाला’ में बदलना चाहती हैं।

    शाह ने कहा कि देश का युवा ‘राष्ट्र प्रथम’ की विचारधारा के साथ खड़ा है। उन्होंने ABVP की जीत का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे संगठन के कार्यकर्ताओं को छात्र हित और राष्ट्र निर्माण से जुड़े काम आगे बढ़ाने की ऊर्जा मिलेगी।

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी ABVP की जीत को सकारात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के भरोसे से जोड़ते हुए इसका स्वागत किया।

    अध्यक्ष पद पर यश डबास ने 2,053 वोट से जीत दर्ज की

    अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 24,576 वोट मिले। उन्होंने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों के अंतर से हराया। मीणा को 22,523 वोट मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार भी निर्दलीय दीपांशु शौकीन रहे। उन्हें 30,615 वोट मिले। शौकीन पहले NSUI से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे। उन्होंने ABVP के इशू मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले। NSUI के वीर छत्रथ को 4,313 वोट मिले।

    सचिव पद पर रिया छाबड़ी, संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह विजयी

    सचिव पद पर ABVP की रिया छाबड़ी ने 21,650 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। NSUI की नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिले। वहीं संयुक्त सचिव पद पर ABVP के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए और समाजवादी छात्र सभा के विशेष यादव को 15,778 वोट मिले।

    इस तरह ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के पद अपने नाम किए, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया। इस बार के चुनाव में NSUI केंद्रीय पैनल की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी।

    पिछले साल के चुनाव में भी ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों पर जीत दर्ज की थी, जबकि उपाध्यक्ष पद NSUI के खाते में गया था। इस बार उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने ABVP के तीन पदों की बढ़त के बीच चुनाव परिणाम को अलग राजनीतिक तस्वीर दी है।

  • CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा

    CJP के कार्यक्रम में हंगामा, ABVP और BJP युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने दीवार फांदी; पुलिस ने दो को पकड़ा


    नई दिल्ली। जोधपुर में रविवार को CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका के कार्यक्रम के दौरान उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब ABVP और बीजेपी युवा मोर्चा से जुड़े कार्यकर्ता गांधी शांति प्रतिष्ठान परिसर में दीवार फांदकर अंदर पहुंच गए। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े मुद्दों पर किया गया था। आशुतोष रांका कार्यक्रम में संविधान की किताब लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान परिसर के बाहर अचानक विरोध और नारेबाजी का माहौल बन गया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों में शामिल एक व्यक्ति ने कार्यक्रम स्थल के बाहर मौजूद युवक को थप्पड़ मार दिया और इसके बाद हॉल में प्रवेश करने की कोशिश की गई। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मी तुरंत सक्रिय हुए और दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए रातानाडा थाने ले गए।

    पुलिस के मुताबिक दो लोग दीवार फांदकर कार्यक्रम स्थल के भीतर पहुंचे थे। DCP ईस्ट मनीष चौधरी ने बताया कि दोनों को डिटेन किया गया है और उनसे पूरे घटनाक्रम को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि कार्यक्रम स्थल में प्रवेश करने और हंगामा करने के पीछे क्या वजह थी तथा क्या किसी तरह की पूर्व योजना के तहत वहां पहुंचा गया था।

    घटना के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। बताया गया कि ABVP के संयोजक ललित दाधीच और बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता राजवीर बांता को पुलिस मौके से बाहर लेकर गई। हालांकि घटनाक्रम को लेकर दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी।

    यह विवाद ऐसे समय हुआ है जब CJP की ओर से हाल के दिनों में ‘लीगल कॉकरोचेज’ जैसे विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न मुद्दों को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आशुतोष रांका का जोधपुर कार्यक्रम भी इसी सिलसिले का हिस्सा बताया गया। कार्यक्रम में शिक्षा और नई पीढ़ी से जुड़े सवालों पर चर्चा होनी थी लेकिन विरोध और हंगामे के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के साथ कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद आशुतोष रांका को पुलिस सुरक्षा में जोधपुर से जयपुर रवाना किया गया। पुलिस की मौजूदगी में उन्हें शहर से बाहर ले जाया गया ताकि रास्ते में किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

    बताया गया है कि CJP के कार्यकर्ताओं का जोधपुर में आगे भी कार्यक्रम प्रस्तावित था। ऐसे में रविवार की घटना के बाद पुलिस की सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन की कोशिश है कि आगामी कार्यक्रमों के दौरान किसी तरह का विवाद या टकराव न हो। फिलहाल पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

  • बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद

    बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं में इन दिनों ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कहीं धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, कहीं छात्र राजनीति के तेवर प्रशासन को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं घरेलू विवाद में पुलिस खुद विवाद का हिस्सा बन गई है। इन घटनाओं ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है।

    राजधानी भोपाल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर की कथा में उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे। व्यासपीठ से देवकीनंदन ठाकुर ने नरोत्तम मिश्रा की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सनातन धर्म का सेवक तथा भगवान का सच्चा भक्त बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह शिकायत भी कर दी कि डबरा में सुंदर नवग्रह मंदिर बनवाने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने उनकी कथा नहीं करवाई। इस टिप्पणी के बाद कथा पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे और माहौल हंसी-मजाक से भर गया।

    राजनीतिक जानकार इस घटना को सिर्फ एक धार्मिक टिप्पणी नहीं मान रहे हैं। दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं के बीच इसे नरोत्तम मिश्रा के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है और कथावाचक के मंच से मिली यह सार्वजनिक सराहना चर्चा का विषय बनी हुई है।

    उधर शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता का बयान सुर्खियों में आ गया। अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन के विभाग संगठन मंत्री देशराज नरोलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर का ट्रांसफर करवा सकते हैं। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ता नाराज थे। जब तहसीलदार बातचीत के लिए पहुंचे तो नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे सत्ता और संगठन की ताकत दिखाने वाले बयान के रूप में देखा।

    इसी बीच बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। पति-पत्नी के विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद समाप्त कराना था, लेकिन स्थिति उलट गई। बातचीत के दौरान माहौल इतना बिगड़ा कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई। पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिसने पुलिस को बुलाया था, वही पत्नी बाद में अपने पति के बचाव में उतर आई। इस घटना में पुलिसकर्मी और पति दोनों घायल हुए। घटना के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पति-पत्नी के झगड़े में तीसरे व्यक्ति का फंसना अक्सर भारी पड़ जाता है।

    राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री राज्यसभा जाने की कोशिशों में लगे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति विधानसभा सीट खाली कर अपने परिवार के सदस्य को राजनीतिक अवसर दिलाने की थी। हालांकि यह योजना साकार नहीं हो सकी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है।

    प्रदेश की ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीति, प्रशासन और समाज में हर दिन ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो कभी गंभीर संदेश देते हैं तो कभी लोगों को मुस्कुराने का मौका भी दे जाते हैं।

  • जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया

    जेएनयू में फिर टकराव की स्‍थ‍िति बनी, अभाविप का उग्र विरोध सामने आया


    नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर छात्र राजनीति और प्रशासनिक फैसलों को लेकर विवाद के केंद्र में आ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जेएनयू इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्कासन और भारी जुर्माने की कार्रवाई को तानाशाही करार दिया है। संगठन का कहना है कि छात्र आंदोलनों को दबाने के लिए प्रशासन दमनकारी नीतियों का सहारा ले रहा है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    अभाविप के अनुसार, हाल के दिनों में कई छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है, जिसमें निष्कासन और आर्थिक दंड शामिल हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन कदमों के जरिए सक्रिय छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है, उनके शैक्षणिक भविष्य के साथ भी सीधा खिलवाड़ है।

    संगठन ने इन फैसलों को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जुर्माने की राशि इतनी अधिक रखी गई है कि आम छात्र के लिए उसे भर पाना बेहद मुश्किल है। अभाविप जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि कुछ मामलों में जुर्माना करीब 4,83,000 रुपये तक लगाया गया है, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों को डराने और आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

    विरोध जताने के लिए अभाविप कार्यकर्ताओं ने परिसर में दमनकारी आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। संगठन ने इसे प्रतीकात्मक विरोध बताते हुए कहा कि यह उस व्यवस्था के खिलाफ चेतावनी है जो छात्रों के अधिकारों को कुचलने की कोशिश कर रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई मजबूती से जारी रहेगी।

    इस पूरे विवाद के केंद्र में CPO (चीफ प्रॉक्टर ऑफिस) मैनुअल भी है, जिसे लेकर अभाविप शुरू से ही विरोध जता रही है। संगठन का कहना है कि यह मैनुअल जेएनयू जैसे खुले और लोकतांत्रिक माहौल वाले विश्वविद्यालय के लिए खतरा है। अभाविप के मुताबिक, इसके प्रावधान छात्रों की स्वतंत्रता को सीमित करते हैं और प्रशासन को अत्यधिक अधिकार देते हैं। संगठन ने मांग की है कि इस मैनुअल को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।

    अभाविप नेताओं का आरोप है कि प्रशासन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कठोर नियमों का सहारा ले रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को संवाद और सहयोग के जरिए चलाया जाना चाहिए, न कि दंड और निष्कासन के जरिए। संगठन ने साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रवादी छात्र किसी भी तरह की कायराना कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं। हालांकि, अभाविप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विरोध के नाम पर अराजकता और तोड़-फोड़ का समर्थन नहीं करती। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय की सार्वजनिक संपत्ति उसकी धरोहर है और उसे नुकसान पहुंचाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। इस दौरान अभाविप ने वामपंथी छात्र संगठनों पर परिसर में तोड़-फोड़ की राजनीति करने का आरोप लगाया और उसकी कड़ी निंदा की।

    अभाविप जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने प्रशासन की कार्रवाई को गुंडागर्दी करार देते हुए कहा कि छात्रों को डराने की रणनीति अब काम नहीं आने वाली है। उन्होंने कहा कि निष्कासन और भारी जुर्मानों के आदेशों को जलाकर संगठन ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह इन फैसलों को स्वीकार नहीं करता। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो विरोध और तेज हो सकता है। मयंक पंचाल ने कहा कि उनका मुख्य विरोध उस ढांचे के खिलाफ है, जिसमें छात्रों को निष्कासित कर उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने निष्कासित छात्रों की तत्काल बहाली और लगाए गए जुर्मानों को वापस लेने की मांग दोहराई। उनके अनुसार, यह पूरे परिसर के लोकतांत्रिक माहौल का सवाल है।

    इस घटनाक्रम ने जेएनयू में एक बार फिर प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। जहां एक ओर छात्र संगठन इसे अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस दौरान अभाविप ने अंत में दोहराया कि वह सामान्य छात्रों के हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ उसकी लड़ाई अंतिम निर्णय तक जारी रहेगी और वह किसी भी स्तर पर छात्रों की आवाज को दबने नहीं देगा।

  • साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी

    साबरमती हॉस्टल के बाहर लगे नारे हेट स्पीच में आए, छात्र संघ और ABVP के बीच जुबानी जंग, प्रशासन ने दिल्ली पुलिस को शिकायत दी


    नई दिल्ली। जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। यह घटना 5 जनवरी 2020 की हिंसक रात की छठी बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई।

    जेएनयू प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना। सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 30-35 छात्र इस नारेबाजी में शामिल थे, जिसमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान और शुभम शामिल हैं।

    प्रशासन ने दिल्ली पुलिस के वसंत कुंज थाने को शिकायत पत्र भेजकर FIR दर्ज करने और मामले की गहन जांच की मांग की। पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और नारे जानबूझकर और दोहराए गए, जो सामान्य अभिव्यक्ति नहीं बल्कि सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं।

    छात्र संघ अध्यक्ष ने कहा कि यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि 5 जनवरी की हिंसक रात और ABVP के कथित हमले को याद करने के लिए एक सभा थी। उन्होंने हिंसा और भड़काऊ विचारधारा की निंदा की और कहा कि नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    वहीं, ABVP ने कड़ा विरोध जताया। दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि नारे लगाने वाले छात्रों की मानसिकता हिंदुओं और हिंदू धर्म के खिलाफ है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक कोई औपचारिक शिकायत प्रशासन की ओर से प्राप्त नहीं हुई है।

    जेएनयू प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच के बीच अंतर बहुत बारीक होता है। विश्वविद्यालय के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह शैक्षणिक माहौल और परिसर की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और विवादास्पद गतिविधियों से दूर रहें, ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।