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  • अध्यक्ष ने घर में लगवा लिया ऑफिस का AC! स्वच्छता सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

    अध्यक्ष ने घर में लगवा लिया ऑफिस का AC! स्वच्छता सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर सरकारी संपत्ति के उपयोग और प्रशासनिक फैसलों तक कई घटनाएं चर्चा में हैं। कहीं रैंकिंग सुधारने के लिए नाली पर अस्थायी जालियां लगाकर फोटो खिंचवाए गए, तो कहीं नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचने का आरोप लगा। वहीं एक मंत्री के बंगले में निकले सांप और स्वास्थ्य विभाग के एक विवादित अधिकारी को मिले वित्तीय अधिकार भी सुर्खियों में हैं।

    स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए ‘जुगाड़’, फोटो खिंचते ही हट गईं जालियां
    मध्य प्रदेश को अक्सर ‘अजब-गजब’ प्रदेश कहा जाता है और टीकमगढ़ की एक घटना ने इस कहावत को फिर चर्चा में ला दिया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करने की कोशिश में नगर पालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। बताया जा रहा है कि एक मोहल्ले की खुली नाली को अस्थायी रूप से लोहे की जालियों से ढंक दिया गया। मौके पर सफाईकर्मी से झाड़ू लगवाई गई और फोटो-वीडियो शूट किए गए। लेकिन जैसे ही रिकॉर्डिंग पूरी हुई, जालियां वापस हटा ली गईं। मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय कांग्रेस पार्षद ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो वायरल होने के बाद नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक सफाई सुधारने के बजाय केवल सर्वेक्षण के लिए दिखावटी इंतजाम किए गए।

    इंदौर में पानी पड़ते ही उतर गया सौंदर्यीकरण का रंग
    देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले Indore में भी स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों के बीच गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया है। सड़कों के डिवाइडरों पर कराए गए रंग-रोगन का निरीक्षण करने पहुंचे भाजपा पार्षद Rajendra Rathore ने पाया कि रंग पर पानी डालते ही वह उखड़ने लगा। हल्की रगड़ से भी पुताई खराब होती दिखाई दी। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों और ठेकेदारों को मौके पर बुलाया गया। पार्षद ने कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है।

    नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचा, फिर मचा बवाल
    भिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।


    भिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मंत्री के बंगले में निकला सात फीट लंबा सांप
    छतरपुर में राज्य मंत्री Dilip Ahirwar के सरकारी बंगले में करीब सात फीट लंबा सांप निकलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर सर्पमित्र मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू किया। हालांकि घटना से ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी की हुई, जो सर्पमित्र ने सांप को पकड़ने के बाद मजाकिया अंदाज में की। उन्होंने कहा कि यह “मंत्री जी के खाते-पीते घर का सांप” है। यह टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद लोग मुस्कुरा पड़े और बाद में यह बात शहरभर में चर्चा का विषय बन गई।

    रिश्वत प्रकरण के बाद भी मिले वित्तीय अधिकार
    भोपाल से सटे एक जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक अधिकारी को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी पर पहले रिश्वत लेने के आरोप लगे थे और मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंचा था। हालांकि बाद में उन्हें अदालत से कुछ राहत मिली, जिसके बाद विभागीय स्तर पर उन्हें फिर से वित्तीय अधिकार सौंप दिए गए। इस फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात की जाती है, ऐसे में इस तरह के फैसलों को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।