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  • सड़क पर खुला चैंबर बना खतरा ग्वालियर में बुजुर्ग महिला हादसे का शिकार

    सड़क पर खुला चैंबर बना खतरा ग्वालियर में बुजुर्ग महिला हादसे का शिकार

    ग्वालियर । मध्यप्रदेश के ग्वालियर में नगर निगम की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है जहां एक खुला चैंबर एक बुजुर्ग महिला के लिए जानलेवा साबित हो गया। थाटीपुर थाना क्षेत्र के विवेक आनंद चौराहे पर हुए इस हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार बुजुर्ग महिला अपने घर के पास से गुजर रही थी तभी अचानक उनका पैर सड़क पर बने नवनिर्मित खुले चैंबर में पड़ गया। चैंबर का मुंह खुला होने और गहराई ज्यादा होने के कारण महिला संतुलन खो बैठीं और सीधे उसमें गिर गईं। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए और कुछ ही पलों में वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    महिला के गिरते ही उनकी चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने देखा कि महिला चैंबर के अंदर फंसी हुई है तो तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं पहुंचती तो यह हादसा और भी गंभीर हो सकता था।

    सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। चैंबर का मुंह संकरा होने के कारण महिला को बाहर निकालना आसान नहीं था। साथ ही महिला के घायल होने से स्थिति और भी जटिल हो गई थी। इसके बावजूद टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    हादसे में महिला को शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। रेस्क्यू के तुरंत बाद उन्हें पुलिस वाहन से नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें निगरानी में रखा गया है।

    इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा बनाए गए चैंबरों को बिना ढके छोड़ दिया गया है जो आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। खासकर रात के समय या बारिश के दौरान ऐसे खुले चैंबर किसी भी बड़ी दुर्घटना को जन्म दे सकते हैं।

    लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र के सभी खुले चैंबरों को तुरंत ढका जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। यह हादसा एक बार फिर यह साबित करता है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है और सार्वजनिक सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई जानलेवा साबित हो सकती है।

  • मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत

    मुरैना में मंदिर की छत गिरने से मातम प्रसाद लेने गईं तीन मासूम बच्चियों की दर्दनाक मौत


    मुरैना/मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां मंदिर की छत गिरने से तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चियां मंदिर में प्रसाद लेने गई थीं। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया और गांव में मातम का माहौल बन गया।

    घटना मुरैना जिले के कैलारस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एहरौली गांव की है। यहां स्थित चमड़ा माता मंदिर में रोज की तरह श्रद्धालु पूजा और प्रसाद लेने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मंदिर की छत भरभराकर गिर गई। छत गिरते ही वहां अफरा तफरी मच गई और लोग इधर उधर भागने लगे। मलबे के नीचे कई लोग दब गए।

    प्रसाद लेने गईं तीन बच्चियां छत के नीचे दब गईं। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों बच्चियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य बच्चियां और एक पति पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मलबा हटाने का काम शुरू किया गया और घायलों को बाहर निकाला गया। सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    हादसे की जानकारी मिलते ही कैलारस थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और मलबे का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में मंदिर की जर्जर हालत सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि मंदिर की छत काफी पुरानी थी और लंबे समय से उसकी मरम्मत नहीं कराई गई थी।

    इस हादसे के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि मंदिर की हालत पहले से खराब थी, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि समय रहते मरम्मत कराई जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था।

    घटना के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। जिन परिवारों ने अपनी मासूम बेटियों को खोया है, उनका रो रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता और घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की मांग की है।फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से भी मौके पर अधिकारियों को भेजा गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।