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  • SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं

    SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर धोखाधड़ी (Cyber ​​fraud) के मामलों में यदि वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) की लापरवाही सामने आती है तो पीड़ितों के नुकसान की भरपाई बैंकों को ही करनी होगी। ऐसे मामलों में बैंकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसे कड़े निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत बैंक अधिकारियों की चूक से हुई ठगी में बैंक पीड़ितों को गंवाई गई रकम के बराबर मुआवजा दें और उन पर मुकदमा भी चलाया जाए। अदालत ने जोर देकर कहा कि बैंकों को संभावित शिकार बन सकने वाले खाताधारकों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से तीखा सवाल किया कि किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति के खाते से असामान्य रूप से भारी रकम निकाले जाने पर समय रहते लेन-देन क्यों नहीं रोका जाता?


    रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा

    पीठ ने कहा कि घटना के बाद रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा है। रोकथाम का क्या? जैसे ही संदिग्ध लेन-देन दिखे, उसे फौरन रोका क्यों नहीं जाता? मुख्य न्यायाधीश ने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह की धोखाधड़ी के कई मामलों में बैंक अधिकारियों की कथित संलिप्तता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।


    केवाईसी के नियमों में संशोधनों की समीक्षा होगी

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रस्तावित ‘अपने ग्राहक को जानिए’ (केवाईसी) संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करेगी, जिसके 30 नवंबर तक अधिसूचित और 31 दिसंबर तक लागू होने की उम्मीद है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस नियामक ढांचे में डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को हर्जाना देने का ठोस प्रावधान होना चाहिए। पीठ ने माना कि बैंकों की जवाबदेही तय करने के साथ ‘म्यूल अकाउंट्स’ (ऐसे फर्जी खाते जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने के लिए किया जाता है) पर नकेल कसना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


    मामले घटे, फिर भी हर साल अरबों की चपत

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि अदालती हस्तक्षेप, मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों और जन-जागरूकता से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। इस पर सीजेआई ने ध्यान दिलाया कि इसके बावजूद इस साल देश को लगभग 800 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।नागरिकों के लगातार ठगी का शिकार होने पर हैरानी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि व्यापक अभियानों, मीडिया रिपोर्टों और अदालती आदेशों के बाद भी पढ़े-लिखे लोग जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की कि एक लोकतांत्रिक देश में कोई नागरिक यह कैसे मान लेता है कि उसे मोबाइल पर गिरफ्तार किया जा रहा है? मोबाइल को दीवार पर दे मारिए, गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी।


    सीधी देनदारी तय करने का विरोध जताया

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने न्यायिक निर्देशों के जरिए बैंकों पर सीधी देनदारी तय करने का विरोध किया और दलील दी कि यह विषय नियामक के रूप में आरबीआई के दायरे में आता है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत वित्तीय संस्थानों पर कड़े नियम लागू कर सकती है और इसके लिए प्रत्येक बैंक को अलग से पक्षकार बनाने की आवश्यकता नहीं है।

  • T20 विश्व कप जीत के बाद आलोचकों पर बरसे गौतम गंभीर, बोले- वह ड्रेसिंग रूम के प्रति जवाबदेह, सोशल मीडिया नहीं

    T20 विश्व कप जीत के बाद आलोचकों पर बरसे गौतम गंभीर, बोले- वह ड्रेसिंग रूम के प्रति जवाबदेह, सोशल मीडिया नहीं


    अहमदाबाद।
    टीम इंडिय (Team India) ने आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 (ICC Men’s T20 World Cup 2026) के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया. 8 मार्च (रविवार) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए मुकाबले में भारतीय टीम ने कीवियों को जीत के लिए 256 रनों का टारगेट दिया था. टारगेट का पीछा करते हुए कीवी टीम 19 ओवर में 159 रनों पर ही पैक हो गई.

    इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Head Coach Gautam Gambhir) ने आलचकों पर जमकर निशाना साधा. गंभीर ने कहा कि वह ड्रेसिंग रूम में मौजूद लोगों के प्रति ही जवाबदेह हैं. उनकी जिम्मेदारी केवल टीम और सपोर्ट स्टाफ तक ही है, साथ ही सोशल मीडिया की आलोचना उन्हें प्रभावित नहीं करती. गंभीर ने टी20 विश्व कप में भारत की खिताबी जीत दिग्गज खिलाड़ियों वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ को समर्पित की.

    गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘मेरी जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर लोगों के लिए नहीं है. मेरी जिम्मेदारी उन 30 लोगों के लिए है जो ड्रेसिंग रूम में हैं.’ गंभीर 2007 में भारत के पहले टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे. अब 2026 में कोच के तौर उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।

    गौतम गंभीर कहते हैं, ‘कोच उतना ही अच्छा होता है जितनी अच्छी उसकी टीम. खिलाड़ी ही मुझे ऐसा कोच बनाते हैं जो मैं हूं.’ भारत की जीत में विकेटकीपर संजू सैमसन (89 रन), ओपनर अभिषेक शर्मा (52 रन) और ईशान किशन (54 रन) की आक्रामक बल्लेबाजी ने बड़ी भूमिका निभाई।

    गौतम गंभीर ने कहा कि भारतीय क्रिकेट में अब ट्रॉफी को प्राथमिकता देनी चाहिए, व्यक्तिगत रिकॉर्ड को नहीं. गंभीर कहते हैं, ‘हमने बहुत समय तक माइलस्टोन्स के जश्न मनाए. माइलस्टोन्स मायने नहीं रखते, ट्रॉफी मायने रखती है. मैं यह खिताब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण को समर्पित करता हूं. राहुल भाई ने भारतीय क्रिकेट के लिए जो कुछ किया है, उसके लिए. वहीं वीवीएस लक्ष्मण ने जिस तरह से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) का नेतृत्व किया है, उसके लिए गौतम गंभीर ने भारतीय टीम की निडर और साहसी बल्लेबाजी की भी जमकर तारीफ की. गंभीर कहते हैं, ‘हमें अब हार का डर छोड़ना होगा. 120 रन बनाकर आउट होना ठीक है. हमारी ताकत साहस और हिम्मत है. सेमीफाइनल और फाइनल में 250-250 रन बनाना इसका प्रमाण है।

    कप्तान सूर्यकुमार यादव ने गौतम गंभीर के नेतृत्व की तारीफ की और उनके साथ भरोसे और समझ को रेखांकित किया. सूर्या कहते हैं, ‘मैंने कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) में चार साल गौतम गंभीर की कप्तानी में खेला. कभी बहस नहीं हुई क्योंकि हमारी प्राथमिकता हमेशा टीम की जीत रही।

    गौतम गंभीर ने सूर्यकुमार यादव की सराहना की और दोहराया कि ट्रॉफी जीतना व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण है. गंभीर कहते हैं, ‘सूर्या ने मेरा काम आसान किया. अब हमारी जिम्मेदारी ट्रॉफी जीतने की है, उपलब्धियों का जश्न मनाने की नहीं.’भारत की टीम निडर, साहस और मेहनत के दम पर टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीतने में सफल हुई. कोच गौतम गंभीर ने यह जीत खिलाड़ियों की मेहनत और ट्रॉफी की अहमियत के नाम समर्पित की।