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  • सीमेंट कारोबार में अंबुजा की बड़ी छलांग, देशभर में 30 एमटीपीए क्षमता बढ़ाने की तैयारी, पूर्वी पश्चिमी और उत्तरी भारत पर फोकस

    सीमेंट कारोबार में अंबुजा की बड़ी छलांग, देशभर में 30 एमटीपीए क्षमता बढ़ाने की तैयारी, पूर्वी पश्चिमी और उत्तरी भारत पर फोकस


    नई दिल्ली । देश में सीमेंट कारोबार के विस्तार को लेकर अंबुजा सीमेंट्स ने बड़ी योजना तैयार की है। कंपनी अगले चरण में करीब 14 हजार 500 करोड़ रुपए का निवेश करके अपनी उत्पादन क्षमता में 30 मिलियन टन प्रति वर्ष यानी एमटीपीए की बढ़ोतरी करेगी। इस विस्तार के लिए नए ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स लगाए जाएंगे। कंपनी का मुख्य ध्यान पूर्वी पश्चिमी और उत्तरी भारत के तेजी से विकसित हो रहे बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर रहेगा। अंबुजा सीमेंट्स ने सोमवार को इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्तावित विस्तार के बाद वित्त वर्ष 2030 तक उसकी कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता बढ़कर 155 एमटीपीए हो जाएगी।

    अदाणी समूह का हिस्सा अंबुजा सीमेंट्स फिलहाल देशभर में 113.5 एमटीपीए उत्पादन क्षमता के साथ कारोबार कर रही है। कंपनी के पास 24 इंटीग्रेटेड सीमेंट प्लांट और 24 ग्राइंडिंग यूनिट हैं। नए निवेश के जरिए कंपनी अपने विनिर्माण नेटवर्क को और मजबूत करने के साथ ही प्रमुख बाजारों के नजदीक उत्पादन सुविधाएं विकसित करना चाहती है। अदाणी समूह के सीमेंट कारोबार के सीईओ विनोद बहेटी के मुताबिक विस्तार का उद्देश्य केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना नहीं है बल्कि कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाना भी है। क्लिंकर और ग्राइंडिंग क्षमता के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करके कंपनी अपने उत्पादन और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करेगी।

    कंपनी की योजना के तहत पश्चिमी भारत में 15.5 एमटीपीए की नई ग्राइंडिंग क्षमता स्थापित की जाएगी। वहीं पूर्वी भारत में 11.6 एमटीपीए और उत्तरी भारत में 2.9 एमटीपीए की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही क्लिंकर उत्पादन क्षमता में भी बड़ा इजाफा किया जाएगा। असम के उमरांगसो में 4 एमटीपीए की नई क्षमता विकसित होगी। पश्चिमी क्लस्टर के मराठा में भी 4 एमटीपीए और मुंद्रा में 2.3 एमटीपीए की क्लिंकर उत्पादन क्षमता स्थापित करने की योजना है। इससे कंपनी को अपने विस्तारित ग्राइंडिंग नेटवर्क के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    अंबुजा सीमेंट्स का मानना है कि बाजारों के करीब उत्पादन सुविधाएं विकसित होने से परिवहन की दूरी कम होगी और लॉजिस्टिक्स पर होने वाला खर्च घटेगा। इसके अलावा बेहतर उत्पादन व्यवस्था से मैन्युफैक्चरिंग लागत में भी कमी आने की उम्मीद है। कंपनी के सीईओ ने बताया कि विस्तार के जरिए वित्त वर्ष 2028 तक 4 हजार रुपए प्रति मीट्रिक टन की लागत हासिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कंपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ लागत दक्षता और प्रीमियम सीमेंट की बिक्री को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है।

    कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में ही 4.6 एमटीपीए अतिरिक्त क्षमता जोड़ी है। इसमें गुजरात के दहेज में 1.2 एमटीपीए का ब्राउनफील्ड विस्तार शामिल है। उत्तर प्रदेश में 2.4 एमटीपीए क्षमता वाली सलई बनवा ग्राइंडिंग यूनिट और महाराष्ट्र के कलंबोली में 1 एमटीपीए का विस्तार भी पूरा किया गया है। इन परियोजनाओं के बाद कंपनी की कुल उत्पादन क्षमता 113.5 एमटीपीए हो गई है।

    इसके अलावा पंजाब के बठिंडा में 1.2 एमटीपीए और राजस्थान के जोधपुर पेन्ना इंटीग्रेटेड यूनिट में 2 एमटीपीए क्षमता जोड़ी गई है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल 3.2 एमटीपीए क्षमता स्थिर हो चुकी है और वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में इनके उत्पादन में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। बिहार के वारिसलीगंज में 2.4 एमटीपीए क्षमता वाली ग्राइंडिंग यूनिट भी इसी अवधि में चालू की जाएगी। कंपनी का अनुमान है कि मार्च 2027 के अंत तक उसकी कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 119 एमटीपीए तक पहुंच सकती है।

    अधिग्रहण के बाद से 30 सितंबर 2026 तक अंबुजा सीमेंट्स 11 क्षमता विस्तार परियोजनाएं पूरी कर चुकी है। इनके माध्यम से कंपनी ने 16.3 एमटीपीए सीमेंट उत्पादन क्षमता और 9 एमटीपीए क्लिंकर उत्पादन क्षमता जोड़ी है। अब 14 हजार 500 करोड़ रुपए के नए निवेश के जरिए कंपनी सीमेंट उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने और आने वाले वर्षों में बढ़ती मांग का लाभ उठाने की तैयारी कर रही है।

  • विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में अदाणी ग्रुप की बड़ी भूमिका, डॉ. प्रीति अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बताया अहम

    विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में अदाणी ग्रुप की बड़ी भूमिका, डॉ. प्रीति अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बताया अहम


    नई दिल्ली । भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने गरीबी कुपोषण अशिक्षा और देश के अंतिम छोर तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ उद्योग जगत को भी आगे आकर काम करना होगा। उनके मुताबिक अदाणी समूह बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए देश की विकास यात्रा में योगदान देने की दिशा में काम कर रहा है।

    डॉ. प्रीति अदाणी वाराणसी में आयोजित आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान विषय पर विश्व संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में समाज के कल्याण और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने पर जोर दिया गया है। आज के दौर में भी कारोबार और उद्योगों को इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके अनुसार व्यवसायों को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि व्यवसायों के संचालन में स्थिरता को केंद्र में रखना जरूरी है। स्वार्थ से पहले कर्तव्य को महत्व देने की भारतीय परंपरा आज भी प्रासंगिक है। डॉ. अदाणी ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का बड़ा प्रतीक बन चुका है। योग शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है। इसी तरह मोटा अनाज यानी मिलेट्स भी भारतीय खानपान की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। आज दुनिया में इसे पोषण जलवायु अनुकूलता और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    डॉ. प्रीति अदाणी ने सतत विकास के लिए अदाणी समूह की निवेश प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने गुजरात के खावड़ा में विकसित किए जा रहे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट का विशेष रूप से जिक्र किया। यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसकी प्रस्तावित क्षमता सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 30 गीगावाट बिजली उत्पादन की है।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को केवल कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे वास्तविक कामकाज और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल करना होगा। उनके मुताबिक किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसकी आर्थिक लागत या उत्पादन क्षमता से तय नहीं होती बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उससे समाज और पर्यावरण को कितना लाभ मिलता है।

    डॉ. अदाणी ने उद्योग जगत से दीर्घकालिक सोच अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत के विकास के साथ सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय संतुलन भी जरूरी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उद्योगों को ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान देना होगा जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्थायी लाभ सुनिश्चित करें।

  • अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

    समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी।

    कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।

    वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।

    आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • 10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

    10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

     नई दिल्ली । Adani Group के अमेरिका में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख नेताओं और व्यापारिक विशेषज्ञों ने इसे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया है। उनका मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत और कॉर्पोरेट प्रभाव का बड़ा संकेत है।

    भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व सलाहकार Ajay Bhutoria ने इस निवेश को अमेरिका के इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर बताया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिका में रोजगार बढ़ाने, ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीकों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    हाल के घटनाक्रमों में अदाणी समूह को कानूनी मोर्चे पर भी राहत मिलने की खबरों ने निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। इसे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी विश्वसनीयता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों के लिए कानूनी स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस घटनाक्रम से निवेश माहौल को मजबूती मिल सकती है।

    अमेरिका में यह प्रस्तावित निवेश कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में इस निवेश को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण अमेरिका में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में अदाणी समूह की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पहले से ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर चुकी है।

    यह निवेश भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विदेशी निवेश और रोजगार को लेकर चल रही बहस के बीच इस पहल को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल बाजार नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाली ताकत के रूप में भी उभर रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना पूरी तरह लागू होती है तो आने वाले वर्षों में यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन सकती है। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को भी नया विस्तार मिलेगा। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश जगत में भारत की बढ़ती भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?

    अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?




    नई दिल्ली । अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने दिवालिया जेपी सीमेंट कॉर्पोरेशन के लिए 580 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। इस प्रक्रिया में दूसरी बोली लगाने वाली माई होम ग्रुप ने 300 करोड़ रुपये का ऑफर देकर खुद को बाहर कर लिया है।

    क्रेडिटर्स के अनुसार कंपनी का लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये तय किया गया है, जबकि अंबुजा सीमेंट का मौजूदा ऑफर इससे काफी कम है। इसी कारण लेनदार अब अडानी ग्रुप से अधिक राशि की मांग को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

    डील अटकने की वजह
    रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी बाधा लिक्विडेशन वैल्यू और बोली के बीच का अंतर है। लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये है, जबकि अंबुजा का ऑफर 580 करोड़ रुपये है—यानी लगभग 300 करोड़ रुपये कम।

    लिक्विडेशन वैल्यू वह राशि होती है, जो कंपनी की संपत्तियों को अलग-अलग बेचने पर मिल सकती है। आम तौर पर इससे कम बोली मिलने पर लेनदार टुकड़ों में बिक्री को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस मामले में वे अभी भी अडानी ग्रुप से बेहतर ऑफर की उम्मीद कर रहे हैं।

    जेपी सीमेंट पर कर्ज
    आधिकारिक जानकारी के अनुसार जेपी सीमेंट पर कुल कर्ज 3,361 करोड़ रुपये है। इसमें 2,892 करोड़ रुपये सुरक्षित लेनदारों का और 469 करोड़ रुपये असुरक्षित लेनदारों का कर्ज शामिल है। कंपनी को जुलाई 2024 में दिवालिया घोषित किया गया था और यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू हुआ था।

    पहले भी कम ऑफर खारिज
    पिछले वर्ष नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) ने 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जिसे क्रेडिटर्स ने बेहद कम बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।

    जेपी सीमेंट की संपत्तियां
    जेपी सीमेंट के पास सालाना 5 मिलियन टन उत्पादन क्षमता है। इसके अलावा कंपनी के पास दो कैप्टिव पावर प्लांट हैं आंध्र प्रदेश में 35 मेगावाट का चालू प्लांट और 25 मेगावाट का निर्माणाधीन प्लांट। कर्नाटक के शाहाबाद में 1.2 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट प्लांट फिलहाल बंद है, साथ ही 60 मेगावाट का पावर प्लांट भी मौजूद है।

    अडानी ग्रुप का पिछला रिकॉर्ड
    हाल ही में NCLT ने अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को जेपी एसोसिएट्स के लिए मंजूरी दी थी। उस प्रक्रिया में NARCL के पास 85% वोटिंग शेयर होने के बावजूद उसने अडानी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि वेदांता ने उससे 3,400 करोड़ रुपये अधिक का प्रस्ताव दिया था।
    अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंबुजा सीमेंट अपना ऑफर बढ़ाती है या नहीं। यदि बोली लिक्विडेशन वैल्यू के करीब नहीं पहुंचती, तो कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बेचने की संभावना बन सकती है। फिलहाल लेन-देन और बातचीत जारी है।

  • अडानी का US के साथ सेटलमेंट…. दो केस खत्म करने के बदले 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियां

    अडानी का US के साथ सेटलमेंट…. दो केस खत्म करने के बदले 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियां


    वाशिंगटन।
    अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अडानी (Gautam Adani) पर अमेरिका (America) में दो तरह के कानूनी मामले चल रहे हैं। अब अमेरिकी अधिकारी इन मामलों को खत्म करने की तैयारी में हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का न्याय विभाग भारतीय अरबपति गौतम अडानी पर लगे रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के सभी आपराधिक मामलों को वापस ले रहा है।


    क्या है पूरा मामला?

    साल 2024 के अंत में, अमेरिका के शेयर बाजार नियामक ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ (SEC) ने भारत के दिग्गज कारोबारी गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर एक गंभीर आरोप लगाया था। ये दोनों अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शीर्ष पदों पर हैं।


    रिश्वत का आरोप:

    SEC का आरोप था कि अडानी ग्रुप ने भारत में एक बहुत बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का सरकारी ठेका ऊंचे दामों पर हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर (सैकड़ों मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने का वादा किया था।


    निवेशकों से धोखाधड़ी:

    इसी दौरान, कंपनी ने वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी शेयर बाजार) के निवेशकों से अरबों डॉलर का फंड भी जुटाया। निवेशकों को यह भरोसा दिलाया गया था कि कंपनी में रिश्वतखोरी को रोकने के लिए सख्त नियम हैं और टॉप मैनेजमेंट ने वादा किया था कि कोई भी गलत काम नहीं होगा। SEC के मुताबिक, निवेशकों से यह बात छिपाना अमेरिकी कानूनों के तहत धोखाधड़ी है।


    सेटलमेंट और जुर्माना

    अब अमेरिकी सरकार इस मामले को सुलझाने यानी सेटलमेंट के लिए राजी हो गई है। कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार: गौतम अडानी 60 लाख डॉलर का जुर्माना भरेंगे। उनके भतीजे सागर अडानी 1 करोड़ 20 लाख डॉलर (लगभग $12 मिलियन) का जुर्माना भरेंगे।

    अहम बात:
    इस समझौते में यह शामिल है कि अडानी अपनी गलती या अपराध स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अडानी ग्रुप ने शुरुआत में भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया था।


    आपराधिक मामले (क्रिमिनल केस) रद्द होने की संभावना

    न्यूयॉर्क में दोनों पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के क्रिमिनल चार्ज भी लगे थे। द न्यूयॉर्क टाइम्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अब इन आपराधिक मामलों को भी रद्द किया जा सकता है।


    ऐसा क्यों हो रहा है?:

    इसके पीछे एक बड़ा कारण अमेरिका में हुए राजनीतिक बदलाव को माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद गौतम अडानी ने उनकी खूब तारीफ की थी।

    मार्च 2025 में, ट्रंप सरकार ने ‘फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट’ (FCPA) पर रोक लगा दी थी। यह वह कानून है जो अमेरिकी कंपनियों या निवेशकों से जुड़े विदेशी व्यापार में रिश्वतखोरी को रोकता है। इस कानून पर रोक लगने से ही यह तय माना जा रहा था कि अडानी के खिलाफ चल रहा केस कमजोर पड़ जाएगा।


    क्या है 10 अरब डॉलर और 15 हजार नौकरियों का ऑफर?

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अडानी की लीगल टीम ने वाशिंगटन में अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस दौरान वकीलों ने सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा- उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे केस को खत्म कर देता है, तो अडानी समूह अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर (लगभग 90 हजार करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा। इसके अलावा, इस निवेश के जरिए अमेरिका में 15,000 नई नौकरियां पैदा की जाएंगी।


    डोनाल्ड ट्रंप के वकील की एंट्री

    इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब गौतम अडानी ने अपना केस लड़ने के लिए एक नई लीगल टीम उतारी। इस टीम का नेतृत्व ‘रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर’ कर रहे हैं। रॉबर्ट जे. गिफ्रा कोई आम वकील नहीं हैं, बल्कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी (पर्सनल) वकीलों में से एक हैं।


    मीटिंग में 100 स्लाइड का प्रेजेंटेशन

    न्याय विभाग के मुख्यालय में हुई उस बैठक में वकील रॉबर्ट ने अधिकारियों को करीब 100 स्लाइड का एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन दिखाया। शुरुआती स्लाइड्स में उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि अमेरिकी जांच एजेंसियों के पास अडानी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और न ही अमेरिका के पास इस मामले में केस चलाने का अधिकार क्षेत्र बनता है। इसी प्रेजेंटेशन की आखिरी कुछ स्लाइड्स में सरकार को खुश करने के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश और नौकरियों का यह आकर्षक ऑफर पेश किया गया।


    अमेरिकी अधिकारियों का क्या रुख रहा?

    हालांकि अमेरिकी वकीलों और न्याय विभाग ने आधिकारिक तौर पर यह कहा कि इस 10 अरब डॉलर के ऑफर का इस कानूनी मामले के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन, न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मीटिंग में मौजूद कम से कम एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस निवेश के ऑफर पर बेहद ‘सकारात्मक प्रतिक्रिया’ दी थी। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों के भीतर अमेरिका ने अडानी पर लगे क्रिमिनल चार्ज हटाने की योजना बना ली।


    अडानी का कारोबार और पिछला विवाद

    गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयले के व्यापार से अपनी किस्मत बनाई थी। धीरे-धीरे उन्होंने ग्रीन एनर्जी, रक्षा (डिफेंस) और कृषि जैसे कई बड़े सेक्टर्स में अपना बिजनेस फैला लिया। “ग्रोथ विद गुडनेस” के नारे के साथ, कंपनी ने 20 गीगावाट से ज्यादा का क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो बना लिया है, जिसमें तमिलनाडु का दुनिया के सबसे बड़े सोलर पावर प्लांट में से एक भी शामिल है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी बनना है।

  • हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी

    हरित ऊर्जा से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, भारत के भविष्य को नई दिशा दे रहा अदाणी ग्रुप: गौतम अदाणी

    नई दिल्ली । एक बड़े उद्योग सम्मेलन के दौरान अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के भविष्य को लेकर अपनी रणनीति और विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि समूह ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम कर रहा है जो आने वाले वर्षों में देश के डिजिटल और स्वच्छ विकास की मजबूत नींव साबित होगा। उनके मुताबिक, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीकी ढांचे में किया जा रहा निवेश भारत को नई दिशा देने वाला है।

    उन्होंने बताया कि गुजरात के खावड़ा क्षेत्र में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा पहले ही शुरू किया जा चुका है और इसे भारत की ऊर्जा व्यवस्था में बदलाव लाने वाला कदम माना जा रहा है। उनका कहना था कि आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा देश की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल होगी और भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन और हरित ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है। उनका मानना है कि भविष्य में वही देश सबसे मजबूत होंगे जो ऊर्जा और तकनीक दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन पाएंगे। इसी सोच के साथ समूह लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।

    उन्होंने डेटा सेंटर को भी भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बताया। उनके अनुसार, भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर को देखते हुए मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसी दिशा में देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े डेटा सेंटर कैंपस तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे डिजिटल क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का भविष्य केवल मशीनों और सर्वर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें लाखों युवाओं की भागीदारी होगी। इंजीनियर, तकनीशियन, ऑपरेटर और स्किल्ड प्रोफेशनल्स इस बदलाव की असली ताकत बनेंगे। इसी वजह से समूह कौशल विकास और नई तकनीकों से जुड़ी ट्रेनिंग पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

    सामाजिक विकास को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि देश का भविष्य तभी मजबूत होगा जब तकनीकी विकास के साथ समाज का हर वर्ग आगे बढ़े।

    अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा ऐसी जगहों पर निर्माण किया जहां पहले संभावनाएं बेहद कम थीं। उनका मानना है कि चुनौतियों के बीच ही सबसे बड़े अवसर छिपे होते हैं और भविष्य उन्हीं का होता है जो नई सोच और बड़े विजन के साथ आगे बढ़ते हैं।

  • गुना में अडाणी समूह की सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास, सिंधिया बोले- युवाओं को रोजगार के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर

    गुना में अडाणी समूह की सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास, सिंधिया बोले- युवाओं को रोजगार के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर


    भोपाल।
    केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे युवाओं को अन्य प्रांतों में रोजगार तलाशने नहीं जाना पड़ेगा। बहनों को भी लखपति दीदी बनाकर समृद्धि का लाभ दिलवाया जा रहा है।

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया रविवार को मध्य प्रदेश के गुना जिले में अडाणी समूह की अंम्बुजा सीमेंट फैक्ट्री के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के विकास के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव परिश्रम और निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। गुना के विकास के लिए नई दीप माला प्रज्ज्वलित हो रही है।

    सिंधिया ने कहा कि गुना क्षेत्र में सीमेंट इकाई की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। यह कार्य बहुप्रतिक्षित था। उन्होंने लगभग सौ वर्ष पूर्व सिंधिया परिवार द्वारा इस क्षेत्र में किए गए औद्योगीकरण के प्रयासों का उल्लेख भी किया।

    उन्होंने कहा कि कोटा-बीना लाइन के दोहरीकरण, तात्या टोपे विश्वविद्यालय प्रारंभ करने की पहल, जल प्रदाय योजना और सिंचाई योजनाओं के क्रियान्वयन, गुना से देवास राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा बनाने के लिए 5 हजार करोड़ के व्यय, गुना के लिए 15 किलोमीटर लंबाई के बायपास जैसे कार्य आमजन को सुविधा प्रदान कर रहे हैं। कृषि क्षेत्र में गुना -चाचौड़ा- राघोगढ़ क्षेत्र के किसान पंजाब की तरह पहचान बना रहे हैं।

    इससे पहले केन्द्रीय मंत्री सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुना जिले में अंम्बुजा सीमेंट फैक्ट्री का शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने औद्योगिक विकास, अधोसंरचनात्मक सुदृढ़ीकरण और रोजगार सृजन को नई गति देने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण भी किया।

    प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर, युवाओं के लिए रोजगार प्राथमिकता: मोहन यादव
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सभी तरह के उद्योगों की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार युवाओं के लिए रोजगार को प्राथमिकता देते हुए किसानों, महिलाओं और गरीबों के साथ सभी वर्गों के कल्याण के लिए सक्रिय है। पर्यटन और पशुपालन के क्षेत्र में प्रदेश महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करेगा। गुना क्षेत्र में सीमेंट निर्माण इकाई से डेढ़ हजार लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। अडाणी समूह की ओर से 32 हैक्टेयर भूमि पर इस इकाई की स्थापना के फलस्वरूप 4 मिलीयन टन सीमेंट उत्पादन होगा।

    उन्होंने कहा कि इन विकास कार्यों से गुना जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा आमजन को बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। प्रदेश का ग्वालियर और चंबल अंचल कभी डकैतों की गोलियों से गूंजता था, अब यहां विकास का परचम लहरा रहा है। अब यहां दस्युओं के स्थान पर प्रगति पहचान का माध्यम बनी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। सरकार जनहित के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गुना अंचल के लिए आज होली और दीपावली के त्यौहारों की तरह उल्लास का वातावरण है। इस क्षेत्र में सिंचाई, पानी, बिजली के साथ सभी नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया गया है, जो आगे भी जारी रहेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की महत्वपूर्ण घोषणाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय इस क्षेत्र के विकास के लिए सिंधिया परिवार द्वारा पहल की गई थी। अब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकास को गति दे रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री सिंधिया द्वारा दिए गए सुझावों को मानते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें गुनिया नदी के पुनर्जीवन के लिए 80 करोड़ 22 लाख राशि का प्रस्ताव भारत सरकार की जल शक्ति योजना में भेजने, लक्ष्मण कोपरा से राम नगर टकोदिया तक पहुंच को आसान बनाने के लिए पार्वती नदी पर 42 करोड़ रुपये की लागत से ब्रिज निर्माण और गुना शहर के भुजारिया तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करने की घोषणा शामिल है।

    मध्य प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र हो रहा सशक्त : प्रणव अदाणी

    उद्योगपति प्रणव अदाणी ने कहा कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से विकास को नई रफ्तार मिली है। अधोसंरचना, लॉजिस्टिक, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाओं से मध्य प्रदेश में उद्योग क्षेत्र की मजबूती सुनिश्चित की जा रही है। पीएम गति शक्ति मिशन से औद्योगिक क्षेत्र का वातावरण सशक्त हो रहा है। गत वर्ष भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक लाख हजार करोड़ से अधिक निवेश का संकल्प व्यक्त किया था, जिसे साकार करने के लिए सीमेंट इकाई की आधारशिला रखी जा रही है। प्रथम चरण में एक हजार 60 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जो आगामी चरणों में तीन गुना से अधिक होगा। श्री अदाणी ने मध्य प्रदेश में कटनी, कैमोर सहित अन्य क्षेत्रों में सीमेंट और अन्य इकाइयों की स्थापना की पहल की गई। समूह द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में भी प्रोजेक्ट अमल में लाए जाएंगे।

    कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर जिले के विधायकगण और अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    रोड शो में हुआ भव्य स्वागत

    केन्द्रीय मंत्री सिंधिया और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम से पहले शहर में रोड शो किया। उनके गुना आगमन पर रोड-शो के दौरान नागरिकों ने पुष्पहारों से उनका भव्य स्वागत किया। जिनमें स्थानीय नागरिक, युवा, व्यापारी वर्ग, महिला समाज, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।

  • गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..

    नई दिल्ली। अदाणी समूह ने अपनी विकास रणनीति को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसमें स्थानीय रोजगार सृजन, कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन और कौशल विकास को केंद्रीय भूमिका दी गई है। समूह के चेयरमैन ने यह स्पष्ट किया है कि संगठन की प्रगति अब केवल आर्थिक विस्तार या बड़ी परियोजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि वह कितने लोगों के जीवन को बेहतर बना पा रहा है।

    कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जो किसी भी परियोजना से जुड़ा है, वह केवल एक श्रमिक नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा है। उनके अनुसार जब कोई परियोजना पूरी होती है तो वह सिर्फ एक संरचना नहीं होती, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है।

    उन्होंने यह भी बताया कि समूह की प्राथमिकता अब स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देना है। किसी भी परियोजना में सबसे पहले आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अवसर दिया जाएगा, उसके बाद राज्य स्तर पर और आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों पर विचार किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को सीधे विकास प्रक्रिया से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

    कर्मचारियों के कल्याण को लेकर भी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दूरस्थ और बड़े प्रोजेक्ट स्थलों पर कार्यरत लोगों के लिए बेहतर आवास और सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन जी सकें। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे काम करने वालों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिलना केवल सुविधा नहीं बल्कि एक मूलभूत आवश्यकता है। इसी सोच के साथ संगठन अपने सभी प्रोजेक्ट्स में मानव केंद्रित विकास को प्राथमिकता दे रहा है।

    संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सके। नई प्रणाली के तहत साइट स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होगी और गति में सुधार आएगा। यह कदम बड़े पैमाने पर चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में सहायक होगा।

    इसके अलावा साझेदारी के मॉडल में भी बदलाव किया गया है, जिसमें सीमित लेकिन अधिक सक्षम और विश्वसनीय भागीदारों के साथ काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य बेहतर समन्वय, गुणवत्ता नियंत्रण और तेज निष्पादन सुनिश्चित करना है। यह मॉडल दीर्घकालिक सहयोग और स्थिर विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

    कौशल विकास को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और उन्नति के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं ताकि वे अपने करियर में आगे बढ़ सकें और अधिक जिम्मेदार भूमिकाएं निभा सकें। इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि लोगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

    बड़ी परियोजनाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि ये केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की मजबूती का आधार हैं। इनके माध्यम से देश की ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नया आकार दिया जा रहा है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा