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  • अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी

    अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी


    नई दिल्ली। अडाणी समूह की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 20 गीगावाट (GW) परिचालन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। खास बात यह है कि इस क्षमता का अधिकांश हिस्सा नए ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से विकसित किया गया है।

    कंपनी के अनुसार, वर्तमान में एजीईएल हर वर्ष 52 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है, जो भारत की कुल बिजली खपत का लगभग तीन प्रतिशत है। यह उत्पादन न्यूयॉर्क शहर की सालभर की बिजली जरूरत या मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली खपत के लगभग बराबर माना जा रहा है।

    बुधवार को जारी बयान में कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उसने 5,051 मेगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। कंपनी का दावा है कि चीन के बाहर किसी भी ऊर्जा कंपनी द्वारा एक वर्ष में जोड़ी गई यह सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है।

    इस उपलब्धि पर एजीईएल के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा कि 20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति, अनुशासित कार्यान्वयन और टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी आज अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर इतनी स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है, जो मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली आवश्यकता के बराबर है।

    कंपनी ने भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया है। एजीईएल वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटा (GWh) बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने की तैयारी कर रही है। अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट-घंटा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की योजना को गति मिलेगी।

    अडाणी ग्रीन एनर्जी वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास, स्वामित्व और संचालन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।

  • अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं।

    अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है।

    अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

    जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।

  • अदाणी पोर्ट्स का बड़ा कदम, जेएएल रिजॉल्यूशन प्लान के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स का 1,500 करोड़ में अधिग्रहण

    अदाणी पोर्ट्स का बड़ा कदम, जेएएल रिजॉल्यूशन प्लान के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स का 1,500 करोड़ में अधिग्रहण


    नई दिल्ली । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने जेएएल रिजॉल्यूशन प्लान के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए 1,500 करोड़ रुपये की डील को अंतिम रूप दिया है। यह समझौता जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के साथ किया गया है, जो राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण द्वारा मंजूर समाधान योजना का हिस्सा है। इस कदम को कॉर्पोरेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक ढांचे को अधिक मजबूत बनाना है।

    इस समझौते के तहत अदाणी पोर्ट्स जेपी फर्टिलाइजर्स की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी, जिससे कंपनी को कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण प्राप्त होगा। यह इकाई लगभग 243 एकड़ भूमि का स्वामित्व रखती है, जिसे भविष्य में लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह भूमि उत्तर भारत में औद्योगिक विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण के लिए रणनीतिक दृष्टि से काफी अहम है।

    कंपनी का कहना है कि यह अधिग्रहण उसकी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत वह मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है। अदाणी पोर्ट्स का लक्ष्य वर्ष 2031 तक अपने लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या बढ़ाकर 16 करना और भंडारण क्षमता को लगभग चार गुना तक विस्तारित करना है। इस अधिग्रहण को उसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिससे कंपनी को उत्तर भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    यह पूरा लेनदेन कर्ज में डूबी जेएएल की परिसंपत्तियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। समाधान योजना को पहले ही नियामकीय मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे लागू करने की दिशा में तेजी लाई जा रही है। इस प्रक्रिया में अदाणी पोर्ट्स एक प्रमुख कार्यान्वयन इकाई के रूप में कार्य कर रही है। कंपनी के अनुसार यह सौदा निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किए जाने की उम्मीद है, जिससे समाधान योजना को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।

    इस डील को प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि संबंधित न्यायिक निकाय ने भी समाधान योजना को बरकरार रखा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह अधिग्रहण कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं के सभी आवश्यक चरणों को पूरा करने के बाद आगे बढ़ रहा है।

    इसके साथ ही अदाणी समूह की एक अन्य इकाई ने भी जेएएल से जुड़े कुछ अन्य परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए समझौते किए हैं, जिसमें पावर क्षेत्र से जुड़े हिस्सेदारी और ऊर्जा उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। यह संकेत देता है कि समूह का ध्यान केवल बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ऊर्जा और औद्योगिक अवसंरचना के क्षेत्र में भी अपने विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है।

    कुल मिलाकर यह अधिग्रहण न केवल अदाणी पोर्ट्स के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करेगा, बल्कि उत्तर भारत में औद्योगिक और भंडारण ढांचे को भी नया आयाम देगा। यह सौदा आने वाले समय में क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है, जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।

  • जेपी एसोसिएट्स विवाद में वेदांता की हार, अदाणी के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ..

    जेपी एसोसिएट्स विवाद में वेदांता की हार, अदाणी के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ..

    नई दिल्ली।भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक बड़े और जटिल दिवाला मामले में महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहां जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के अधिग्रहण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में वेदांता लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। इस फैसले के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता लगभग साफ हो गया है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया अध्याय शुरू हो गया है।
    मामले में वेदांता लिमिटेड ने उस निर्णय को चुनौती दी थी जिसमें कर्जदाताओं की समिति ने अदाणी एंटरप्राइजेज के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। वेदांता का दावा था कि उसकी वित्तीय पेशकश अधिक आकर्षक थी और उसने बेहतर मूल्य की बोली लगाई थी। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में उसे उचित महत्व नहीं दिया गया।
    हालांकि, अपीलेट ट्रिब्यूनल ने वेदांता की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कर्जदाताओं की समिति द्वारा लिया गया निर्णय उनके व्यावसायिक विवेक पर आधारित था, जिसमें केवल बोली की राशि ही नहीं बल्कि अन्य कई कारकों को भी ध्यान में रखा गया था। अदालत ने यह भी पाया कि पूरी दिवाला प्रक्रिया में किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता नहीं हुई है।
    इस मामले में पहले निचली अदालत ने भी अदाणी एंटरप्राइजेज के 14,000 करोड़ रुपये से अधिक के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी, जिसके बाद वेदांता ने लगातार कानूनी चुनौती दी। लेकिन विभिन्न स्तरों पर राहत न मिलने के बाद अब स्थिति लगभग स्पष्ट हो गई है।
    कर्जदाताओं की समिति ने इस पूरे मामले में केवल वित्तीय आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि नकद भुगतान क्षमता, योजना को लागू करने की क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता जैसे कई पहलुओं पर विचार किया। इसी आधार पर अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली को प्राथमिकता दी गई, जिसे सबसे अधिक समर्थन प्राप्त हुआ था।
    जयप्रकाश एसोसिएट्स पर भारी कर्ज का बोझ लंबे समय से बना हुआ है, जिससे कंपनी दिवाला प्रक्रिया में शामिल हो गई थी। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई बड़े क्षेत्र की संपत्तियां मौजूद हैं, जिनका मूल्य काफी अधिक माना जाता है। इसी कारण इस मामले में कई बड़ी कंपनियों ने रुचि दिखाई थी।
    वेदांता का कहना था कि उसकी पेशकश कुल मूल्य के लिहाज से अधिक थी, लेकिन अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दिवाला प्रक्रिया में केवल उच्च बोली ही निर्णायक कारक नहीं होती। इसके साथ ही यह भी माना गया कि समिति ने पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया है।
    इस फैसले के बाद अब अदाणी एंटरप्राइजेज के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना मजबूत हो गई है। यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर में दिवाला समाधान प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहां कानूनी और आर्थिक दोनों पहलुओं का गहरा असर देखने को मिला है।
    कुल मिलाकर यह निर्णय न केवल एक बड़े कॉर्पोरेट विवाद का अंत करीब लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दिवाला मामलों में केवल वित्तीय आंकड़े ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक रणनीति और कार्यान्वयन क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है।
  • दौलत की दौड़ में अडानी आगे: अंबानी को पीछे छोड़ बढ़ा वैश्विक रुतबा

    दौलत की दौड़ में अडानी आगे: अंबानी को पीछे छोड़ बढ़ा वैश्विक रुतबा

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    नई दिल्ली। दुनिया के अरबपतियों की ताजा रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। गौतम अडानी अब संपत्ति के मामले में मुकेश अंबानी से आगे निकल गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार अडानी 18वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि अंबानी 20वें नंबर पर खिसक गए हैं। अडानी की दौलत में उछाल, अंबानी को झटका इस साल गौतम अडानी की संपत्ति में करीब 10.9 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिससे उनकी कुल नेटवर्थ 95.4 अरब डॉलर हो गई। वहीं मुकेश अंबानी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। Reliance Industries के शेयरों में गिरावट के चलते उनकी संपत्ति 16.7 अरब डॉलर घटकर 91 अरब डॉलर रह गई है। 200 अरब डॉलर क्लब में कौन आगे दुनिया के टॉप अरबपतियों में अभी भी टेक दिग्गजों का दबदबा है, एलन मस्क करीब 654 अरब डॉलर के साथ शीर्ष परजेफ बेजोस और लैरी पेज समेत कई दिग्गज 200 अरब डॉलर क्लब में शामिलइस साल किस पर हुई ‘पैसों की बारिश’ 2026 में सबसे ज्यादा कमाई करने वालों में: माइकल डेल (36.6 अरब डॉलर की बढ़त)एलन मस्क (34.9 अरब डॉलर की बढ़त)जॉन तु (29.4 अरब डॉलर का इजाफा)किसे हुआ सबसे ज्यादा नुकसान इस साल सबसे ज्यादा दौलत गंवाने वालों में: बर्नार्ड अर्नॉल्ट (43.6 अरब डॉलर की गिरावट)स्टीव बाल्मर (19 अरब डॉलर नुकसान)मुकेश अंबानी (16.7 अरब डॉलर की कमी)इसके अलावा बिल गेट्स और वॉरेन बफेट जैसे दिग्गजों की संपत्ति में भी गिरावट दर्ज की गई है। गौतम अडानी ने तेजी से बढ़ती संपत्ति के दम पर न सिर्फ मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ा है, बल्कि वैश्विक अरबपतियों की सूची में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह बदलाव बाजार के उतार-चढ़ाव और कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा असर दिखाता है।

  • अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका

    अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका


    वाशिंगटन।
    गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अडानी (Sagar Adani) ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (US Securities and Exchange Commission-SEC) के खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज करने के लिए न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट (New York Federal Court) में याचिका दायर की है। अडानी की ओर से सबसे बड़ी दलील यह है कि इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र ही नहीं बनता। वकीलों के मुताबिक, कथित लेन-देन अमेरिका के बाहर हुआ, बॉन्ड किसी अमेरिकी एक्सचेंज में लिस्डेट नहीं थे और दोनों आरोपी भारत में रहते हैं, इसलिए इस मामले को अमेरिकी कानून के तहत नहीं सुना जाना चाहिए।


    750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड पर उठे सवाल

    अडानी ग्रुप की ओर से कहा गया है कि जिस 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को लेकर मामला बनाया गया है, वह नियम 144A के तहत जारी किया गया था। यह बॉन्ड पहले गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेचा गया और बाद में कुछ हिस्से को संस्थागत खरीदारों को रीसेल किया गया। रॉयटर्स के मुताबिक अडानी पक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में अमेरिका की सीधी भागीदारी नहीं थी, इसलिए SEC का हस्तक्षेप उचित नहीं है।


    निवेशकों को नुकसान नहीं, केस कमजोर

    अडानी की याचिका में यह भी कहा गया है कि SEC अब तक यह साबित नहीं कर पाया है कि किसी भी निवेशक को इस सौदे से आर्थिक नुकसान हुआ हो। कंपनी के अनुसार, ये बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो चुके हैं और निवेशकों को मूलधन के साथ ब्याज भी पूरा लौटाया जा चुका है। ऐसे में “नो लॉस” की स्थिति में मुकदमे की वैधता पर सवाल उठता है।


    रिश्वतखोरी के आरोपों को किया खारिज

    अडानी ने रिश्वतखोरी के आरोपों को भी निराधार बताया है। उनका कहना है कि SEC के पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि न तो गौतम अडानी और न ही सागर अडानी का इस बॉन्ड इश्यू से कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित किया गया है।


    ‘भ्रामक बयान’ नहीं, सामान्य कॉर्पोरेट भाषा

    SEC ने जिन बयानों को भ्रामक बताया है, जैसे ESG प्रतिबद्धताएं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस, उन्हें अडानी पक्ष ने “पफरी” यानी सामान्य कॉर्पोरेट बयान करार दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे सामान्य दावे निवेशकों को गुमराह करने की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता।

    अडानी ग्रुप ने इस पूरे मामले को कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि अमेरिकी अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश और नियामक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बड़ा उदाहरण बन सकता है।

  • अडानी टॉप-20 अरबपतियों की सूची से बाहर… एलन मस्क और मुकेश अंबानी को भी बड़ा झटका

    अडानी टॉप-20 अरबपतियों की सूची से बाहर… एलन मस्क और मुकेश अंबानी को भी बड़ा झटका


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर एलन मस्क (World’s Richest man Elon Musk) और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी (Asia’s Richest man, Mukesh Ambani), दोनों को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। दोनों ब्लूमबर्ग बिलेनियर लिस्ट में मंगलवार के टॉप लूजर रहे। एलन मस्क की संपत्ति 13.48 अरब डॉलर कम हो गई तो मुकेश अंबानी के नेटवर्थ में 4.37 अरब डॉलर की कमी आई। अडानी 313 मिलियन डॉलर गंवाने के बाद 85.4 अरब डॉलर के साथ टॉप-20 से बाहर हो गए हैं। अंबानी के पास अभी 103 अरब डॉलर की संपत्ति है।


    क्यों आई गिरावट

    दरअसल एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के शेयरों में मंगलवार को 4 पर्सेंट से अधिक की गिरावट आई। मस्क की संपत्ति का अधिकांश हिस्सा टेस्ला के शेयरों से आता है। इस वजह से उनकी संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई। वहीं, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों भी 4 पर्सेंट से अधिक की गिरावट हुई। इसलिए इनकी दौलत भी घट गई। हालांकि, दोनों की रैंकिंग में कोई फर्क नहीं पड़ा। मुकेश अंबानी ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 18वें स्थान पर काबिज हैं और मस्क टॉप पोजीशन पर।

    दुनिया दूसरे सबसे रईस शख्स लैरी पेज को 1.80 अरब डॉलर का झटका लगा है। अब इनके पास 270 अरब डॉलर की संपत्ति है।


    जेफ बेजोस को 7.18 अरब डॉलर का फायदा

    तीसरे नंबर पर काबिज जेफ बेजोस को 7.18 अरब डॉलर का फायदा हुआ। अब इनकी संपत्ति 262 अरब डॉलर हो गई है। सर्गेई ब्रिन को 1.64 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और अब वह 251 अरब डॉलर के साथ चौथे नंबर पर हैं। पांचवे नंबर पर काबिज लैरी एलिसन को 576 मिलियन डॉलर का फायदा हुआ है। उनकी संपत्ति अब 246 अरब डॉलर रह गई है।

    जुकरबर्ग दुनिया के अमीरों की लिस्ट में अब छठे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति में 677 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। अब इनकी कुल संपत्ति 233 अरब डॉलर हो गई है। फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट सातवें नंबर पर हैं और उनकी संपत्ति अब 22 मिलियन डॉलर घटकर 207 अरब डॉलर रह गई है। स्टीव बाल्मर को 1.83 अरब डॉलर का फायदा हुआ है। अब इनकी संपत्ति 167 अरब डॉलर है।

    जेनसेन हुआंग 155 अरब डॉलर के साथ ब्लूमबर्ग इंडेक्स में 9वें स्थान पर हैं। इन्हें 686 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है। 10वें स्थान पर वॉरेन बफेट हैं। इनकी कुल संपत्ति 82.2 मिलियन डॉलर बढ़कर 150 अरब डॉलर हो गई है।

  • राजनीति का सुखद पल… शरद पवार के घर डिनर में राहुल, अजित, अडानी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी हुए शामिल

    राजनीति का सुखद पल… शरद पवार के घर डिनर में राहुल, अजित, अडानी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी हुए शामिल


    नई दिल्ली।
    राजधानी दिल्ली (Capital Delhi) में राजनीतिक गलियारों की शाम बुधवार बेहद ख़ास रही. एनसीपी–एसपी प्रमुख शरद पवार (NCP-SP chief Sharad Pawar) के आवास पर दलगत सीमाओं से परे कई नेता डिनर के लिए जुटे. इस डिनर में देश के उद्योगपति भी नज़र आए. यह मुलाकात उनके 85वें जन्मदिन (85th Birthday) से ठीक एक दिन पहले हुई और माहौल पूरी तरह निजी रहा.

    शरद पवार एक दिग्गज नेता हैं, जो लंबे समय से सियासत करते आ रहे हैं और उनके डिनर आयोजन में मौजूद नेताओं की लिस्ट ने इसे और ख़ास बना दिया. इस डिनर आयोजन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हुए. सबसे ज्यादा ध्यान इस आयोजन में उद्योगपति गौतम अडानी की मौजूदगी ने खींचा, क्योंकि राजनीति और व्यापार के ऐसे मेलजोल के मौके कम देखने को मिलते हैं.

    इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी शामिल हुए. प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद यह पहला मौका होगा जब मुख्यमंत्री रेड्डी किसी बड़े राजनीतिक आयोजन में दिखे। एक और दिलचस्प दृश्य देखने मिला कि शरद पवार के भतीजे और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार भी इस डिनर में शामिल दिखाई दिए. अजित पवार के इस आयोजन में शामिल होना दर्शाता है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दोनों के व्यक्तिगत रिश्ते राजनीति की सीमाओं से परे चलते हैं।

    शरद पवार ने छह दशक से अधिक समय तक राजनीति में सक्रिय रहकर लगभग हर दल के नेताओं से मजबूत संबंध बनाए हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, रक्षा मंत्री और कृषि मंत्री जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने न केवल एडमिनिस्ट्रेटिव क्षमता दिखाई, बल्कि अपनी राजनीतिक समझ के कारण सम्मान भी हासिल किया।