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  • वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    नई दिल्ली । दुनिया की प्राचीन दार्शनिक और सभ्यतागत परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 से 4 नवंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय ‘अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विचारक, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और ज्ञान परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे। कार्यक्रम में अदाणी फाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी भी शामिल होंगी और अपने विचार रखेंगी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिक दृष्टिकोण को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

    इस सम्मेलन में प्राचीन दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि नई तकनीक विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को किस तरह आसान बना सकती है। इसके साथ ही ज्ञान की अलग-अलग परंपराओं के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए वाराणसी को चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले नगरों में शामिल है। सदियों से वाराणसी शिक्षा, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन ज्ञान परंपराओं का ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में विभिन्न सभ्यताओं के विचारों पर चर्चा के लिए इस शहर को उपयुक्त स्थान माना गया है।

    संगोष्ठी का आधार यह विचार है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उनका समाधान केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से संभव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और तेजी से बदलती तकनीक जैसी चुनौतियों के बीच नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार नेतृत्व और सांस्कृतिक समझ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन विषयों को दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान यूनानी दार्शनिक अरस्तू और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों के साथ हिंदू, बौद्ध, जैन, कैथोलिक और इस्लामी परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं में मौजूद समानताओं और उनके बीच के अंतर पर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। विशेष रूप से सद्गुण आधारित नैतिकता, सुशासन और सत्ता तथा शक्ति के उचित एवं नैतिक इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    आयोजन के मुख्य सत्र 2 और 3 नवंबर को होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, विषय आधारित चर्चाएं और तुलनात्मक दर्शन से जुड़े संवाद आयोजित किए जाएंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था और शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार रखे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, खासकर एआई आधारित भाषा और संवाद उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान और विचारों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

    सम्मेलन का अंतिम दिन यानी 4 नवंबर सांस्कृतिक भ्रमण और ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रतिभागी गंगा घाटों का भ्रमण करेंगे और गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल सारनाथ की यात्रा भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस तरह तीन दिवसीय संगोष्ठी में एक ओर प्राचीन दार्शनिक विचारों और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में उनकी प्रासंगिकता समझने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।

  • शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    शरद पूर्णिमा पर गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से की मुलाकात, शिक्षा की ताकत पर दिया संदेश

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा के अवसर पर अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अदाणी विद्या मंदिर के 14 पूर्व छात्रों से मुलाकात की। इन पूर्व छात्रों ने शिक्षा के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। इनमें डॉक्टर, वकील, आईआईटी इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वैज्ञानिक, पुलिसकर्मी और मर्चेंट नेवी अधिकारी शामिल हैं। इस मुलाकात के दौरान अदाणी ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिभा को सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर युवा अपनी क्षमताओं को पहचानकर आगे बढ़ सकते हैं।

    गौतम अदाणी ने इस मुलाकात को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इन युवाओं की उपलब्धियां दिखाती हैं कि शिक्षा किस तरह जीवन में बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि जब प्रतिभाशाली बच्चों को अवसर मिलता है और शिक्षक उनके सपनों पर भरोसा करते हैं, तो वे अपने लिए नए रास्ते बना सकते हैं। उनके मुताबिक, इन पूर्व छात्रों की जीवन यात्राएं शिक्षा की ताकत और सही मार्गदर्शन के महत्व को सामने लाती हैं।

    अदाणी ने अपने संदेश में 14 युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कहानियों की शुरुआत अदाणी विद्या मंदिर से हुई थी। अलग-अलग पेशों में काम कर रहे ये युवा इस बात का उदाहरण हैं कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अवसर मिलने पर विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने सभी पूर्व छात्रों पर गर्व जताया और उन्हें इसी तरह आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

    अदाणी विद्या मंदिर की स्थापना आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। संस्थान का लक्ष्य बच्चों को सीखने, अपने सपने पूरे करने और अपनी क्षमताओं का विकास करने का अवसर देना है। यहां ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षा दी जाती है, जिनके परिवारों में कई बच्चे पहली बार स्कूल तक पहुंचते हैं।

    यह सह-शिक्षा संस्थान वंचित वर्गों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उनमें सामाजिक जागरूकता और भारतीय मूल्यों के प्रति समझ भी विकसित करना है। संस्थान बच्चों को बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देता है।

    गौतम अदाणी की पूर्व छात्रों से हुई मुलाकात ने शिक्षा के जरिए हासिल की गई उपलब्धियों को सामने रखा। डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों, वैज्ञानिकों और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में पहुंचे इन युवाओं की यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि शिक्षा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल सकती है। साथ ही, शिक्षकों का विश्वास और उचित मार्गदर्शन बच्चों को अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    अदाणी विद्या मंदिर का उद्देश्य वंचित बच्चों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना और उन्हें आर्थिक कठिनाइयों से आगे बढ़ने का अवसर देना है। संस्थान की पृष्ठभूमि और पूर्व छात्रों की उपलब्धियां इसी लक्ष्य से जुड़ी हैं। शरद पूर्णिमा पर आयोजित यह मुलाकात इन युवाओं की सफलता और शिक्षा के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करने का अवसर बनी।

  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण संयंत्रों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए ऐसी प्रतिभाओं की आवश्यकता है, जो जटिल तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनमें सुधार करने की क्षमता रखती हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व केवल मशीनों की बढ़ती क्षमता में नहीं, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करके बेहतर भविष्य तैयार करने में है।

    अहमदाबाद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (चिप्स) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों, तकनीकी चुनौतियों और आवश्यक कौशल पर चर्चा करना था। इसमें विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर इस क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

    सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कानूनी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया। विचार-विमर्श के दौरान वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी ढांचे से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कार्यक्रम में तीन प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की संभावनाओं और देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर केंद्रित रही। दूसरी परिचर्चा में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, जरूरी कौशल और भविष्य में करियर बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई। इन सत्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को कम करने पर जोर दिया गया।

    इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से किया गया। इसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चर्चाओं में शोध को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने आई।

    भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल चिप बनाने वाले संयंत्रों तक सीमित नहीं है। चिप डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता विकसित करना भी देश की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने इस दिशा में प्रयासों को गति दी है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं भी राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से जुड़ी हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से विस्तार ने उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में सेमीकंडक्टर तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

    अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करने की योजना घोषित की है। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग में कार्यरत पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना तथा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है।

  • अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    अदाणी पावर के मुनाफे में 141.5% की छलांग, दूसरी तिमाही में कमाई बढ़कर 7,019 करोड़ रुपये के पार

    नई दिल्ली । अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 141.5 प्रतिशत बढ़कर 7,019.32 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी ने 2,906.46 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी की आय और परिचालन से जुड़े प्रमुख आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब देश में बिजली की मांग और अधिकतम बिजली खपत में वृद्धि देखने को मिली है।

    दूसरी तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व 39.4 प्रतिशत बढ़कर 19,950.60 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 14,307.79 करोड़ रुपये था। इस दौरान ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की कमाई यानी ईबीआईटीडीए 45.7 प्रतिशत बढ़कर 8,743.22 करोड़ रुपये रही। वहीं, परिचालन से प्राप्त राजस्व 29.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17,014.06 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। निरंतर परिचालन से ईबीआईटीडीए में 18.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 6,320.97 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच अदाणी पावर का शुद्ध लाभ लगभग दोगुना होकर 11,885.92 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में कुल राजस्व 36 प्रतिशत बढ़कर 39,272.90 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेरसिंह बी. ख्यालिया ने कहा कि कंपनी लाभप्रदता और परियोजनाओं को लागू करने के मामले में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में घरेलू कोयला आधारित बिजली उत्पादन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की बिजली मांग 11.5 प्रतिशत बढ़कर 502 अरब यूनिट हो गई। कुल बिजली आपूर्ति में कोयला और लिग्नाइट आधारित उत्पादन की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत रही। इसी दौरान देश की अधिकतम बिजली मांग 18 प्रतिशत बढ़कर 270 गीगावाट तक पहुंच गई। बिजली की बढ़ती जरूरतों का असर कंपनी की बिक्री पर भी दिखाई दिया।

    अदाणी पावर की बिजली बिक्री दूसरी तिमाही में बढ़कर 26.4 अरब यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 23.7 अरब यूनिट थी। कंपनी का प्लांट लोड फैक्टर यानी पीएलएफ 62.8 प्रतिशत से बढ़कर 70.1 प्रतिशत हो गया। पीएलएफ से पता चलता है कि किसी बिजली संयंत्र की उपलब्ध उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया। कंपनी की कुल परिचालन क्षमता 18,150 मेगावाट रही।

    दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों के तहत बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़कर 23.4 अरब यूनिट हो गई। इस श्रेणी में प्रति यूनिट प्राप्त टैरिफ भी 12.7 प्रतिशत बढ़कर 6.4 रुपये रहा। इसके विपरीत, अल्पकालिक और मर्चेंट बाजार में प्रति यूनिट प्राप्ति 33.1 प्रतिशत बढ़कर 7.2 रुपये हो गई, लेकिन इस श्रेणी में बिक्री की मात्रा 43 प्रतिशत घट गई। कंपनी के मुताबिक, अतिरिक्त खुली क्षमता को मध्यम अवधि के बिजली आपूर्ति अनुबंधों में स्थानांतरित किए जाने के कारण ऐसा हुआ।

    कंपनी का मानना है कि बिजली की बढ़ती मांग, औद्योगिक गतिविधियों और शहरीकरण से आने वाली तिमाहियों में क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, भविष्य का प्रदर्शन बिजली की मांग, उत्पादन, बिक्री और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का दूसरी तिमाही में मुनाफा 145 प्रतिशत उछला, आय 51 प्रतिशत बढ़कर 10,239 करोड़ रुपये पहुंची

    नई दिल्ली । अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 145 प्रतिशत बढ़कर 1,364 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय 51 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 10,239 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। ट्रांसमिशन और ऊर्जा समाधान कारोबार में बेहतर प्रदर्शन को कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया गया है।

    कंपनी के परिचालन से प्राप्त आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में यह सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 7,167 करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में कंपनी का एबिटडा 67 प्रतिशत बढ़कर 3,548 करोड़ रुपये हो गया, जबकि ऑपरेशनल एबिटडा में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3,070 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। ये आंकड़े कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में सुधार को दर्शाते हैं।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में भी कंपनी ने मुनाफे और आय के मोर्चे पर बढ़त दर्ज की। अप्रैल से सितंबर की अवधि में कंपनी का समेकित मुनाफा सालाना आधार पर 137 प्रतिशत बढ़कर 2,600 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, इस दौरान कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,092 करोड़ रुपये दर्ज की गई। कंपनी के प्रबंधन ने पहली छमाही के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन को भविष्य की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कंदर्प पटेल के अनुसार, पहली छमाही के दौरान वित्तीय प्रदर्शन के साथ परिचालन गतिविधियों में भी मजबूती रही। उन्होंने बताया कि विजाग और सतारा में रणनीतिक ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों का अधिग्रहण कंपनी की विस्तार योजना का हिस्सा है। इन परिसंपत्तियों के जुड़ने से कंपनी की सक्रिय ऑर्डर बुक लगभग 87,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह ऑर्डर बुक भविष्य में परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मुंबई के बिजली वितरण कारोबार में भी कंपनी ने वृद्धि दर्ज की। प्रबंधन के अनुसार, इस कारोबार में बेची गई बिजली की इकाइयों में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं, स्मार्ट मीटरिंग कारोबार के तहत लगाए गए मीटरों की कुल संख्या बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ हो गई है। स्मार्ट मीटरिंग कंपनी के ऊर्जा समाधान कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसमें बढ़ती गतिविधियां आय में योगदान दे रही हैं।

    कंपनी ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी एमएसईडीसीएल के साथ 2.5 गीगावाट की चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति से संबंधित एक बड़ा अनुबंध भी हासिल किया है। प्रबंधन के मुताबिक, यह समझौता विभिन्न स्रोतों से ऊर्जा जुटाने और ग्राहकों को बिजली आपूर्ति बेहतर बनाने की कंपनी की क्षमता को मजबूत करता है। हालांकि, इस अनुबंध से होने वाली अतिरिक्त आय का विस्तृत ब्योरा जारी आंकड़ों में नहीं दिया गया है।

    कारोबार के अलग-अलग क्षेत्रों में दूसरी तिमाही के नतीजे भी सामने आए। ट्रांसमिशन कारोबार की परिचालन आय सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,521 करोड़ रुपये रही। बिजली वितरण कारोबार, जिसमें एईएमएल और एमयूएल शामिल हैं, की आय दो प्रतिशत बढ़कर 3,181 करोड़ रुपये हो गई। स्मार्ट मीटरिंग से आय 129 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 267 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि ऊर्जा समाधान कारोबार से आय 2,197 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

    शेयर बाजार में अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का शेयर बीएसई पर 1,293 रुपये के भाव पर बंद हुआ। उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, शेयर का पिछले 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,789 रुपये और न्यूनतम स्तर 804.70 रुपये रहा है। कंपनी के तिमाही नतीजों में मुनाफे, आय और परिचालन लाभ में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि भविष्य का प्रदर्शन परियोजनाओं के क्रियान्वयन और कारोबार के विस्तार पर निर्भर करेगा।

  • मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में अदाणी सीमेंट ने 15,000 सीमेंट बैग से बनाई मां दुर्गा की 70 फीट ऊंची आकृति

    मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में अदाणी सीमेंट ने 15,000 सीमेंट बैग से बनाई मां दुर्गा की 70 फीट ऊंची आकृति


    नई दिल्ली ।
    नवरात्रि और दुर्गा पूजा 2026 के अवसर पर अदाणी सीमेंट ने मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में मां दुर्गा को समर्पित एक अनूठी कलाकृति तैयार की है। 15,000 सीमेंट बैग की मदद से बनाई गई इस विशाल आकृति के माध्यम से आस्था, शक्ति और विश्वास का संदेश देने का प्रयास किया गया है। कंपनी की इस पहल को ‘जहां विश्वास, वहां शक्ति’ नाम दिया गया है। इस रचना की खासियत इसका आकार और इसे तैयार करने का तरीका है, जिसमें हजारों सीमेंट बैग मिलकर देवी दुर्गा की एक विशाल छवि बनाते हैं।

    यह कलाकृति 70 फीट लंबी और 70 फीट चौड़े क्षेत्र में तैयार की गई है। इसमें अंबुजा सीमेंट और एसीसी के बैगों का इस्तेमाल करते हुए कुल 750 टन सीमेंट का प्रतीकात्मक उपयोग किया गया। इस पूरी रचना को आकार देने में लगभग 12,600 मानव-घंटों का सामूहिक श्रम लगा। कर्मचारियों ने सीमेंट बैगों को निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित करके देवी की आकृति तैयार की। इस प्रक्रिया में अलग-अलग बैगों को इस तरह रखा गया कि वे मिलकर एक संपूर्ण और स्पष्ट छवि का रूप ले सकें।

    इस स्थापना की सबसे खास बात यह है कि जमीन से देखने पर सीमेंट के बैग अलग-अलग इकाइयों की तरह नजर आते हैं, लेकिन ऊंचाई से देखने पर उनका संयोजन मां दुर्गा की विशाल आकृति में बदल जाता है। इस कलाकृति में देवी का मुकुट, आंखें, दस भुजाएं और उनका व्यापक स्वरूप बारीकी से उकेरा गया है। अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित किए गए बैगों के माध्यम से देवी की पूरी छवि तैयार की गई है। इस तरह यह रचना छोटे-छोटे तत्वों के सामूहिक संयोजन से एक बड़ी कलात्मक प्रस्तुति बनाने का उदाहरण पेश करती है।

    कंपनी ने कलाकृति को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और उसके अंतिम स्वरूप को एक डिजिटल फिल्म में दर्ज किया है। इसमें शुरुआत में कर्मचारियों को जमीन पर सीमेंट बैग व्यवस्थित करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद कैमरा धीरे-धीरे ऊपर उठता है और अलग-अलग बैगों से बनी मां दुर्गा की पूरी आकृति सामने आती है। इस फिल्म में निर्माण प्रक्रिया के साथ कलाकृति का हवाई दृश्य भी शामिल किया गया है। इसे डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर साझा करने की योजना है।

    अदाणी सीमेंट के अनुसार, इस अभियान में उसके दो प्रमुख ब्रांड अंबुजा सीमेंट और एसीसी को एक साझा रचनात्मक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। अभियान में ‘शक्ति’ को अंबुजा सीमेंट की मजबूती के वादे से जोड़ा गया है, जबकि ‘विश्वास’ एसीसी की नौ दशकों पुरानी विश्वसनीयता और विरासत का प्रतीक है। मां दुर्गा की छवि को इस प्रस्तुति का केंद्र बनाया गया है, जिन्हें शक्ति, संरक्षण और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

    कंपनी का कहना है कि इस पहल के जरिए सीमेंट को केवल भवन और बुनियादी ढांचे के निर्माण से जुड़ी सामग्री के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास, शक्ति और समर्पण जैसी भावनाओं से जोड़कर भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर तैयार की गई यह कलाकृति परंपरा और सामूहिक प्रयास के महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही, यह अंबुजा सीमेंट और एसीसी की पहचान को एक साथ सामने लाने का माध्यम भी बनी है।

  • केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला, अडानी को ‘भाई’ और जय शाह को ‘भतीजा’ बताते हुए लगाए कई गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि नई सरकार के आने के बाद भाई-भतीजावाद खत्म होगा और देश में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भाई-भतीजावाद का सबसे बड़ा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हैं।

    केजरीवाल ने कहा कि मोदी का एक ‘भाई’ है, जिसका नाम अडानी है। उनके मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में अगर किसी एक व्यक्ति ने सबसे ज्यादा आर्थिक तरक्की की है तो वह अडानी हैं। इसी तरह उन्होंने जय शाह को प्रधानमंत्री का ‘भतीजा’ बताते हुए कहा कि इस अवधि में किसी युवा ने सबसे ज्यादा तरक्की की है तो वह जय शाह हैं। केजरीवाल ने इन उदाहरणों के आधार पर मोदी सरकार पर भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

    उन्होंने कहा कि 12 साल के शासन के बाद जनता को यह देखना चाहिए कि उसे क्या हासिल हुआ। केजरीवाल ने दावा किया कि इस दौरान मीडिया और चुनाव व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। उन्होंने राजनीतिक दल बदलने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले विधायक या नेता के पार्टी बदलने को अनैतिक माना जाता था, लेकिन अब बड़े पैमाने पर दल-बदल और सरकारें गिराने की घटनाओं को राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश किया जाता है।

    केजरीवाल ने कहा कि विधायकों और सांसदों के दल बदलने तथा सरकारों को गिराने की घटनाओं को ‘चाणक्य नीति’ बताना गलत है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई और इसके लिए पैसे तथा केंद्रीय जांच एजेंसियों के इस्तेमाल के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यों को रणनीति नहीं बल्कि देश के साथ विश्वासघात के रूप में देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने आयकर विभाग में संयुक्त आयुक्त की नौकरी छोड़कर झुग्गियों में काम किया और करीब 10 साल वहां लोगों के बीच बिताए। केजरीवाल ने कहा कि उनका उद्देश्य व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि देश में बदलाव लाना था। उन्होंने कहा कि अगर लोकपाल आंदोलन के समय ही लोकपाल कानून बना दिया जाता तो राजनीतिक दल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    एसआईआर और मतदाता सूची के मुद्दे पर भी केजरीवाल ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में बैठे अधिकारी पूरे देश की मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की शक्ति रखते हैं और बिना पर्याप्त जांच के किसी मतदाता का नाम हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    केजरीवाल ने कहा कि 12 साल किसी भी देश के इतिहास में कम अवधि नहीं होती। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को मिली सीटों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने लंबे समय में देश को विकास के अलग स्तर पर पहुंचाया जा सकता था। उन्होंने अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, रेलवे और विमानन क्षेत्र को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और दावा किया कि कई क्षेत्रों की स्थिति खराब हुई है।

    अंत में केजरीवाल ने कहा कि देश के सामने मौजूद मुद्दों पर जनता को सवाल पूछने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षित काम नहीं किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी नुकसान पहुंचा है।

  • कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    नई दिल्ली ।अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार को कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल अदाणी आरोग्य मंदिर के शिलान्यास के मौके पर इसे पश्चिम बंगाल के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ के इस्तेमाल पर भी केंद्रित होगा।

    गौतम अदाणी ने अस्पताल की शुरुआत के अवसर को विशेष दिन बताते हुए कहा कि 2,000 बेड वाला यह गैर-लाभकारी संस्थान आधुनिक मेडिकल कॉलेज, उन्नत शोध और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाओं से जुड़ा होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ को इसमें महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा, जिससे बंगाल में चिकित्सा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अदाणी आरोग्य मंदिर बंगाल के प्रति समूह की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसके तहत विश्वस्तरीय भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में योगदान देने की बात कही गई है।

    शिलान्यास कार्यक्रम में गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनका आभार भी जताया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की प्रस्तावित सुविधाओं और इसके सामाजिक उद्देश्य को लेकर जानकारी साझा की।

    अदाणी के अनुसार अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय और गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्थान होगा। इसमें कुल 2,000 बेड होंगे। इनमें से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। ऐसे लोग जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं, उनके लिए इन बेड की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।

    अस्पताल के केंद्र में एक मेडिकल कॉलेज भी होगा। इसके साथ उन्नत शोध और चिकित्सा देखभाल से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गौतम अदाणी ने कहा कि इस व्यवस्था से बंगाल में कुशल स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने की नींव रखी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के निर्माण में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। उनके अनुसार इस संस्थान से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    गौतम अदाणी ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल में समूह के व्यापक निवेश की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि 2035 तक बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

    प्रस्तावित निवेश में कई अलग-अलग क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली ट्रांसमिशन और वितरण, सड़कें, पुल और रोपवे के साथ ग्रीन सीमेंट तथा हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    अदाणी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस परियोजना के साथ राज्य में बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। 2,000 बेड वाला अदाणी आरोग्य मंदिर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए प्रस्तावित 1,000 बेड की व्यवस्था को भी प्रमुख हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा और उन्नत शोध के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    इस तरह शिलान्यास कार्यक्रम में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, शोध, डिजिटल तकनीक और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सामने रखी गई। साथ ही पश्चिम बंगाल में 2035 तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना भी बताई गई।

  • अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    अदाणी पावर का ईएसजी स्कोर बढ़कर 66 अंक हुआ, एनएसई सस्टेनेबिलिटी ने कंपनी की ‘एस्पायरिंग’ रेटिंग बरकरार रखी

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी निजी ताप विद्युत उत्पादक कंपनी अदाणी पावर लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि उसके पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन यानी ईएसजी प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है। कंपनी का ईएसजी स्कोर पिछले मूल्यांकन के 65 अंक से बढ़कर 66 अंक हो गया है। कंपनी के अनुसार, इस सुधार के साथ उसने भारतीय ताप विद्युत, मिश्रित ईंधन और एकीकृत ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के बीच अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी है।

    कंपनी को एनएसई सस्टेनेबिलिटी के नवीनतम आकलन में एक बार फिर ‘एस्पायरिंग’ श्रेणी में रखा गया है। एनएसई सस्टेनेबिलिटी सेबी-पंजीकृत ईएसजी रेटिंग प्रदाता और एनएसई इंडिसीज की सहायक कंपनी है। यह सूचीबद्ध कंपनियों के पर्यावरणीय, सामाजिक और प्रशासनिक प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है।

    अदाणी पावर के अनुसार, ईएसजी स्कोर में हुआ सुधार स्थिरता से जुड़ी पहलों और परिचालन दक्षता बढ़ाने के प्रयासों का परिणाम है। कंपनी ने बताया कि उसने अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक वाले कम उत्सर्जन संयंत्रों के उपयोग को बढ़ाया है। इसके साथ लगातार उत्सर्जन की निगरानी करने वाली प्रणालियों, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों, जल संरक्षण उपायों और अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी पहलों को भी मजबूत किया गया है।

    सामाजिक क्षेत्र में कंपनी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर केंद्रित कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य शिविर और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका बढ़ाने वाली परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी के मुताबिक इन पहलों का उद्देश्य उसके परिचालन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के जीवन स्तर में सुधार करना है।

    एनएसई सस्टेनेबिलिटी हर वर्ष भारत की 500 सूचीबद्ध कंपनियों का मूल्यांकन करता है। इसके माध्यम से निवेशकों और अन्य हितधारकों को कंपनियों की दीर्घकालिक मूल्य सृजन क्षमता तथा ईएसजी प्रदर्शन का स्वतंत्र आकलन उपलब्ध कराया जाता है।

    सुशासन के क्षेत्र में अदाणी पावर ने बताया कि उसकी विभिन्न बोर्ड समितियों में स्वतंत्र निदेशकों का प्रतिनिधित्व नियामकीय आवश्यकताओं से अधिक है। कंपनी ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों के लिए भी ईएसजी मानकों को अपनाने की बात कही है। इसके पीछे पूरे कारोबारी तंत्र में जिम्मेदार कारोबारी प्रथाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य बताया गया है।

    कंपनी को हाल के वर्षों में कई अन्य वैश्विक और घरेलू स्थिरता रेटिंग्स भी मिली हैं। अदाणी पावर को एसएंडपी ग्लोबल कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट में 100 में से 71 अंक मिले हैं। वहीं एफटीएसई रसेल ने कंपनी को 5 में से 4.3 अंक की रेटिंग दी है।

    इसके अलावा वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने अदाणी पावर को 100 में से 80 अंक दिए हैं। इस स्कोर के आधार पर कंपनी को एजेंसी की ‘लीडरशिप’ श्रेणी में रखा गया है, जिसे उद्योग के औसत स्तर से ऊपर माना जाता है।

    अदाणी पावर के अनुसार ये रेटिंग्स उसके कारोबार और दीर्घकालिक विकास रणनीति में स्थिरता संबंधी सिद्धांतों को शामिल करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। वहीं शेयर बाजार में सोमवार को एनएसई पर अदाणी पावर का शेयर 204.40 रुपये पर बंद हुआ।

  • अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    नई दिल्ली । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने मुंद्रा में समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड यानी खाली कंटेनर यार्ड शुरू करने की घोषणा की है। इस सुविधा के साथ एकीकृत वेयरहाउसिंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य कंटेनर प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने के साथ आयात और निर्यात से जुड़ी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

    प्रस्तावित यार्ड में खाली कंटेनरों के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें कंटेनरों का भंडारण, रखरखाव, निरीक्षण और निर्यातकों तथा कंटेनर फ्रेट स्टेशनों तक उनकी आवाजाही शामिल होगी। कंपनी के अनुसार, एक ही व्यवस्था के तहत इन सेवाओं के उपलब्ध होने से कंटेनरों के संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

    यह पहल कंपनी की एंबिशन 2031 रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत अदाणी पोर्ट्स अपने कंटेनर संचालन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अगले पांच वर्षों में अपने नेटवर्क में 60 लाख टीईयू से अधिक अतिरिक्त कंटेनर हैंडलिंग क्षमता जोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इसमें मुंद्रा पोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

    कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता के अनुसार, मुंद्रा में स्थापित किया जा रहा समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड कंटेनर इकोसिस्टम की दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। इसके संचालन में कंपनी के साथ साझेदार, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और शिपिंग लाइनें भी भूमिका निभा सकती हैं।

    इस सुविधा से कंटेनरों के टर्नअराउंड टाइम को कम करने और उनकी अनावश्यक आवाजाही घटाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, कंटेनरों के बेहतर प्रबंधन से लॉजिस्टिक्स लागत को अनुकूलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि ऐसी सुविधाएं व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    मुंद्रा पोर्ट पहले से ही देश के कंटेनर कारोबार में प्रमुख स्थान रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के कंटेनर बाजार में अदाणी पोर्ट्स की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत बताई गई है। अकेले मुंद्रा पोर्ट देश के करीब 35 प्रतिशत कंटेनर व्यापार को संभालता है। इस वजह से इसे भारत का सबसे बड़ा कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाह माना जाता है।

    कंपनी के मुताबिक, मुंद्रा में हर साल लगभग 16 लाख टीईयू खाली कंटेनरों का प्रबंधन किया जाता है। इस बड़े परिचालन आधार को देखते हुए समर्पित यार्ड की स्थापना से खाली कंटेनरों के भंडारण और आवाजाही के प्रबंधन को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

    अदाणी पोर्ट्स ने कहा कि यह पहल प्रौद्योगिकी आधारित और अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित करने की सरकारी दिशा के अनुरूप है। कंपनी इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मान रही है।

    वर्तमान में एपीएसईजेड 16 रणनीतिक रूप से स्थित बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करता है। कंपनी के पास 136 जहाजों का विविध समुद्री बेड़ा और एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमता है। इसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक एक अरब टन थ्रूपुट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।