Tag: Adhik Maas

  • पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

    पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में Purushottam Maas को अत्यंत पवित्र और विशेष महीना माना जाता है। यह अवधि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए शुभ कार्य कई गुना फल देते हैं, लेकिन इसी के साथ वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के दौरान घर में रखी कुछ वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और परिवार की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    सबसे पहले जिन चीजों से बचने की सलाह दी गई है, वे हैं टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां। घर में किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पारिवारिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नदी या पवित्र जल में विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी इस पवित्र माह में अशुभ माने गए हैं। घर में रखे सूखे पौधे न केवल वातावरण की ताजगी को कम करते हैं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। इसके स्थान पर हरे-भरे पौधे, विशेषकर तुलसी का पौधा, अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

    वास्तु शास्त्र में टूटे-फूटे कांच के बर्तनों को भी अशुभ बताया गया है। ऐसे बर्तन घर में रखने से आर्थिक परेशानियों और बाधाओं का संकेत मिलता है। इसलिए पुरुषोत्तम मास में इन्हें तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि घर में समृद्धि और स्थिरता बनी रहे।

    इसी तरह बंद पड़ी या खराब घड़ियां भी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। समय रुकना प्रगति में बाधा का संकेत माना जाता है, और वास्तु के अनुसार यह परिवार के विकास और तरक्की को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसी घड़ियों को या तो ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से हटा देना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के वातावरण को भी शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किया गया हर छोटा सुधार भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।

    कुल मिलाकर यह पवित्र महीना भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है, और साथ ही यह समय घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने और सकारात्मकता बढ़ाने का भी संदेश देता है।

  • दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप

    दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार हर कुछ वर्षों में एक विशेष महीना आता है, जिसे Adhik Maas या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह महीना सामान्य 12 महीनों से अलग होता है और इसे अतिरिक्त (13वां) महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने को कोई नाम नहीं मिल पाया, तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ बनाया। इसी कारण यह महीना विष्णु भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसे “अक्षय पुण्य” प्राप्त करने वाला समय भी कहा जाता है। इसलिए भक्तजन इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।

    हालांकि, जितना यह महीना पुण्यदायी माना गया है, उतना ही इसमें कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए, अन्यथा उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

    इस महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत को शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह, नए निर्माण कार्य या बड़े निवेश से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा, इस अवधि में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। ब्रह्मचर्य का पालन और संयमित जीवनशैली अपनाना इस माह का मुख्य नियम माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन इस महीने में वर्जित माना गया है। ऐसा करने से आध्यात्मिक पुण्य कम होने की बात कही जाती है।

    इसी तरह झूठ बोलना, धोखा देना, किसी का धन हड़पना या बुरे कर्म करना इस महीने में कई गुना पाप का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय को आत्ममंथन और सुधार का अवसर माना जाता है।

    दान-पुण्य को इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि दान का दिखावा नहीं करना चाहिए और न ही अशुद्ध या खराब वस्तुओं का दान करना चाहिए।

    कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे भी शास्त्रीय नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    कुल मिलाकर Adhik Maas को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का महीना माना गया है, जिसमें सही आचरण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

  • इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?

    इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?


    नई दिल्ली।
    हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 (Vikram Samvat 2083) खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास (Jyeshtha month) इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना ‘अधिक मास’ (Adhik Maas 2026) कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है।


    कब पड़ेगा अधिकमास 2026?

    पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा। इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी।


    अधिकमास क्यों आता है?

    – अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का। हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है।


    अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?

    अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है।


    इस दौरान ना करें ये काम

    अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए।


    क्या खास है पुरुषोत्तम मास?

    अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

  • 2026 में पड़ेगा ज्येष्ठ अधिकमास 13 महीने का साल धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से विशेष संयोग"

    2026 में पड़ेगा ज्येष्ठ अधिकमास 13 महीने का साल धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से विशेष संयोग"


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 एक विशेष खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है जिसमें साल 13 महीनों का होगा। इस वर्ष में ज्येष्ठ अधिकमास अधिक मास पड़ने वाला है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जो धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार यह संयोग अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जा रहा है। इसके साथ ही सिंहस्थ कुंभ से पहले का समय विशेष फलदायक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।

    अधिकमास क्या है

    हिंदू पंचांग के अनुसार हर 2-3 वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है जिसे अधिकमास अधिकार मास या मलमास कहा जाता है। यह अतिरिक्त महीना तब जुड़ता है जब सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता और चंद्र मास और सौर मास की गति में अंतर पैदा हो जाता है। इस कारण पंचांग की गणना में एक और महीना जुड़ता है ताकि यह अंतर संतुलित किया जा सके।

    अधिकमास का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि इस महीने में किए गए व्रत तप पूजा और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास के कारण यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    धार्मिक दृष्टि से अधिकमास का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास का महीना अत्यंत पवित्र और पुण्य फलदायक होता है। इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों व्रत साधना और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान पुरुषोत्तम की पूजा के लिए जाना जाता है। इस दौरान लोग तीर्थ यात्रा भजन कीर्तन पूजा और दान आदि पुण्य कार्य करते हैं जो उनके जीवन में आशीर्वाद और समृद्धि लेकर आते हैं।

    पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास का विशेष धार्मिक महत्व है और यह माह करीब 58-59 दिनों तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक कार्यों और पुण्य कार्यों को बढ़-चढ़कर किया जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस महीने के दौरान विशेष रूप से भगवान पुरुषोत्तम की साधना की जाती है।

    क्या करें इस माह में

    इस महीने में किए जाने वाले कुछ विशेष धार्मिक कार्यों में शामिल हैं धार्मिक अनुष्ठान और पूजन जैसे भजन कीर्तन भागवत और अन्य धार्मिक कार्य।तीर्थ यात्रा पर जाना और पवित्र नदियों में स्नान करना। विशेषकर शिप्रा नदी में स्नान करने और महाकालेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करने की परंपरा है।ब्राह्मणों को दान देना और गरीबों की सहायता करना। इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण करने के लिए भी विशेष पूजा करते हैं।

    यह पुण्य कार्य पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ का महीना एक विशेष समय होता है और अधिकमास के दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनमोल माना जाता है। विशेष रूप से सिंहस्थ कुंभ से पहले आने वाला यह माह आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत लाभकारी है।

    ज्येष्ठ अधिकमास का खगोलीय संयोग

    वर्ष 2026 का ज्येष्ठ अधिकमास विशेष खगोलीय संयोग का हिस्सा है। इस दौरान सूर्य और चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि अतिरिक्त महीना जोड़ने की आवश्यकता होती है। इस समय का प्रभाव पूरे साल में पड़ता है और 2026 का यह अधिकमास विशेष रूप से एक आदर्श समय माना जा रहा है जब विभिन्न धार्मिक कार्यों के जरिए जीवन में सुख समृद्धि और शांति प्राप्त की जा सकती है।

    साल 2026 के इस 13 महीने के पंचांग में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का एक नया अध्याय शुरू होगा जो भविष्य में आने वाले कुंभ मेले से पहले एक बेहद महत्वपूर्ण संयोग रहेगा। इस समय को धार्मिक अनुष्ठानों और पुण्य कार्यों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है और लोग इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।