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  • प्रभास और ओम राउत की नई फिल्म की खबर कितनी सच? जानिए क्यों फिर चर्चा में आई ‘आदिपुरुष’ वाली जोड़ी

    प्रभास और ओम राउत की नई फिल्म की खबर कितनी सच? जानिए क्यों फिर चर्चा में आई ‘आदिपुरुष’ वाली जोड़ी


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार प्रभास और फिल्ममेकर ओम राउत की जोड़ी एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें तेजी से वायरल हुईं कि दोनों साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म आदिपुरुष के बाद एक नए प्रोजेक्ट के लिए दोबारा साथ आ सकते हैं। इस खबर ने प्रभास के फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी क्योंकि आदिपुरुष को लेकर रिलीज से पहले काफी उम्मीदें थीं। हालांकि फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की ओर से मिली प्रतिक्रिया बेहद मिश्रित रही थी। अब सामने आई ताजा जानकारी इन अटकलों को अलग दिशा देती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रभास और ओम राउत की किसी नई फिल्म को लेकर फिलहाल कोई प्रोजेक्ट तय नहीं है। Times Now Navbharat ने भी अपनी रिपोर्ट में इन दोनों के दोबारा साथ काम करने की खबरों को अफवाह बताया है।

    प्रभास और ओम राउत ने पहली बार आदिपुरुष के लिए साथ काम किया था। यह फिल्म रामायण से प्रेरित कहानी पर आधारित थी और इसमें प्रभास ने राघव की भूमिका निभाई थी। कृति सैनन जानकी और सैफ अली खान लंकेश के किरदार में नजर आए थे। फिल्म को बड़े बजट और भव्य विजुअल्स के साथ तैयार किया गया था। रिलीज से पहले इसके टीजर और प्रमोशनल सामग्री को लेकर जबरदस्त चर्चा थी लेकिन बाद में इसके विजुअल इफेक्ट्स किरदारों के लुक और संवादों को लेकर सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई। फिल्म के संवादों और कुछ दृश्यों को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ।

    आदिपुरुष के शुरुआती दौर में फिल्म को लेकर उम्मीदें इसलिए भी काफी ज्यादा थीं क्योंकि प्रभास बाहुबली के बाद देशभर में अपनी पहचान बना चुके थे। ओम राउत इससे पहले तान्हाजी जैसी सफल ऐतिहासिक फिल्म का निर्देशन कर चुके थे। ऐसे में दोनों के साथ आने को लेकर दर्शकों को एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद थी। लेकिन आदिपुरुष की रिलीज के बाद फिल्म को लेकर उम्मीदों और दर्शकों की प्रतिक्रिया के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया। इसके बाद प्रभास और ओम राउत के दोबारा साथ आने की संभावना को लेकर समय समय पर सोशल मीडिया पर अटकलें लगती रही हैं।

    अब वायरल हो रही नई खबर ने एक बार फिर इसी चर्चा को हवा दी है। हालांकि उपलब्ध ताजा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से साफ किया गया है कि प्रभास और ओम राउत के बीच फिलहाल किसी नए प्रोजेक्ट की योजना नहीं है। इसलिए इस समय दोनों के री-यूनियन की खबर को आधिकारिक घोषणा के तौर पर देखना सही नहीं होगा। जब तक अभिनेता या निर्देशक की टीम की तरफ से कोई पुष्टि नहीं आती तब तक यह केवल सोशल मीडिया और मनोरंजन रिपोर्ट्स से जुड़ी अटकल ही रहेगी।

    वहीं प्रभास इस समय कई बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर व्यस्त हैं। उनकी फिल्मों की लाइनअप लगातार चर्चा में बनी हुई है। इनमें स्पिरिट खास तौर पर सुर्खियों में है जिसे संदीप रेड्डी वांगा निर्देशित कर रहे हैं। फिल्म को लेकर रिलीज डेट से जुड़ी अटकलों के बीच निर्माताओं ने 5 मार्च 2027 की रिलीज डेट पर कायम रहने की पुष्टि की है। इससे यह भी साफ होता है कि प्रभास के पास फिलहाल बड़े प्रोजेक्ट्स की लंबी सूची है।

    ऐसे में प्रभास और ओम राउत की जोड़ी की वापसी की खबर भले ही फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गई हो लेकिन अभी इसे सच मानने की कोई आधिकारिक वजह नहीं है। आदिपुरुष के बाद दोनों के करियर अलग दिशा में आगे बढ़ चुके हैं और फिलहाल किसी नए प्रोजेक्ट में साथ आने की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में अगर दोनों किसी फिल्म की घोषणा करते हैं तो निश्चित तौर पर यह खबर फिल्म इंडस्ट्री और प्रभास के फैंस के लिए बड़ी चर्चा बन सकती है।

  • नितेश तिवारी की फिल्म रामायण और आदिपुरुष की विजुअल प्रस्तुति के बीच दिखा बड़ा सिनेमाई अंतर

    नितेश तिवारी की फिल्म रामायण और आदिपुरुष की विजुअल प्रस्तुति के बीच दिखा बड़ा सिनेमाई अंतर


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा में पौराणिक महाकाव्य रामायण पर आधारित फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच हमेशा से भारी उत्सुकता रही है। आगामी समय में रिलीज के लिए प्रस्तावित निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण के टीजर और शुरुआती झलकियों के सामने आने के बाद से ही इसकी तुलना वर्ष 2023 में प्रदर्शित हुई फिल्म आदिपुरुष से की जा रही है। दोनों फिल्मों के दृश्यों, किरदारों के पहनावे और स्पेशल इफेक्ट्स के उपयोग में बड़ा सिनेमाई और कलात्मक अंतर देखने को मिल रहा है।

    पूर्व में प्रदर्शित आदिपुरुष को उसके अत्यधिक आधुनिक संवादों और एनीमेशन जैसे प्रतीत होने वाले विजुअल इफेक्ट्स के कारण दर्शकों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके विपरीत, नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण के दृश्यों को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और पौराणिक विवरणों के अधिक निकट माना जा रहा है। तस्वीरों और वीडियो फुटेज के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दोनों फिल्मों का दृश्य दृष्टिकोण एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है।

    धार्मिक और पौराणिक संदर्भों के चित्रण में भी दोनों फिल्मों में स्पष्ट भिन्नता नजर आती है। भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप को दर्शाने वाले दृश्यों में नई फिल्म में शांत और प्रामाणिक आभा का प्रयोग किया गया है, जबकि पुरानी फिल्म में अंतरिक्ष और ग्रहों के बीच अत्यधिक एनिमेटेड संरचना दिखाई गई थी। इसी प्रकार, भगवान राम और माता सीता के भावनात्मक दृश्यों में सादगी और भारतीय मर्यादा का ध्यान रखा गया है, जबकि आदिपुरुष में इन दृश्यों को आधुनिक और नाटकीय मोड़ दिया गया था।

    लंकापति रावण के चरित्र चित्रण और उसके दरबार के विजुअल्स को लेकर भी बड़ा बदलाव देखा गया है। नई प्रस्तुति में रावण के किरदार को पारंपरिक भारतीय राजसी लुक और सुनहरी भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, आदिपुरुष में इस किरदार को हॉलीवुड शैली का डार्क विलेन लुक दिया गया था, जिसे भारतीय दर्शकों ने स्वीकार नहीं किया था। युद्ध और राक्षसी चरित्रों के दृश्यों में भी नई फिल्म में जमीनी वास्तविकता और धूल-मिट्टी के प्रभाव को प्राथमिकता दी गई है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों की मांग मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर भी पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रदेश के सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र और कला विशेषज्ञ इस प्रकार की फिल्मों में प्रामाणिकता बनाए रखने पर विशेष जोर देते रहे हैं। इस नई फिल्म के दृश्यों में रुद्राक्ष, सूती वस्त्रों और मिट्टी के आश्रमों का प्रयोग करके वनवास के समय की स्वाभाविकता को बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

    फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों की सफलता उनके यथार्थवादी दृष्टिकोण और सांस्कृतिक संवेदनाओं पर निर्भर करती है। अत्यधिक डिजिटल इफेक्ट्स और पश्चिमी शैली का अंधानुकरण अक्सर दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव को कमजोर कर देता है। नई फिल्म के निर्माण में पौराणिक विवरणों और प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण का संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है, जिसकी प्रतिक्रिया आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर दिखाई देगी।