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  • US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक

    US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपने राजनीतिक संदेश के प्रचार के लिए सरकारी खजाने से चलाए जा रहे टीवी विज्ञापनों पर रोक लगानी होगी। न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत (Federal Court) ने रविवार रात प्रशासन को आदेश दिया कि ऐसे सभी विज्ञापन तुरंत बंद किए जाएं, जो अब भी प्रसारित होने बाकी हैं। खास बात यह है कि प्रशासन पहले ही कह चुका था कि विज्ञापन अभियान (Advertising campaign) जल्द खत्म होने वाला है। इसके बावजूद अदालत ने साफ कर दिया कि रविवार रात प्रसारित होने वाले विज्ञापनों समेत बाकी सभी विज्ञापनों को भी रद्द करना होगा।


    जनता के पैसे से राजनीतिक प्रचार पर उठे सवाल

    यह पूरा मामला उन टीवी विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर करदाताओं के लाखों डॉलर खर्च किए गए। इन विज्ञापनों के जरिए ट्रंप के राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। इस खर्च पर सवाल उठाते हुए एक गठबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस गठबंधन में गैर-दलीय निगरानी संगठन कॉमन कॉज (Common Cause) भी शामिल था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकारी धन का इस तरह इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है और इसे सार्वजनिक धन का अनुचित इस्तेमाल माना जाना चाहिए।


    प्रशासन को विज्ञापन रोकने के लिए मिला साफ आदेश

    न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत की जज जेनिफर एल. रोचोन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया। उन्होंने अस्थायी रोक लगाने का आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रशासन को बचे हुए सभी टीवी विज्ञापन रद्द करने होंगे। इस आदेश में उन विज्ञापनों को भी शामिल किया गया, जिनका प्रसारण रविवार रात होना था। यानी प्रशासन की ओर से विज्ञापन अभियान खत्म करने की घोषणा के बावजूद अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया कि कोई भी बाकी विज्ञापन प्रसारित न हो।


    अब सरकारी खर्च और राजनीतिक संदेश के इस्तेमाल पर नजर

    इस मामले ने सरकारी धन के इस्तेमाल और राजनीतिक प्रचार के बीच की सीमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत करने वाले संगठनों का कहना है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता, जिसे वे किसी राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने का अनुचित तरीका मानते हैं। अदालत के आदेश का तत्काल असर यह है कि प्रशासन को बचे हुए विज्ञापनों को रोकना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह आदेश अस्थायी रोक के तौर पर जारी किया गया है। मामले में आगे क्या होता है, यह न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरणों पर निर्भर करेगा।

  • चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर मचा बवाल, ‘गर्लफ्रेंड देगी 0% इंटरेस्ट’ वाले दावे पर महिला सम्मान को लेकर उठे सवाल

    चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर मचा बवाल, ‘गर्लफ्रेंड देगी 0% इंटरेस्ट’ वाले दावे पर महिला सम्मान को लेकर उठे सवाल

    नई दिल्ली । चेन्नई मेट्रो में लगे एक विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी को बढ़ावा देने के लिए लगाए गए इस विज्ञापन में गर्लफ्रेंड की तुलना ब्याज से की गई है। विज्ञापन में दावा किया गया कि गर्लफ्रेंड शायद शून्य प्रतिशत इंटरेस्ट दे, जबकि एफडी पर 14 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है। विज्ञापन का यह अंदाज अब सवालों के घेरे में आ गया है।

    चेन्नई मेट्रो के डिब्बों और परिसरों में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर भी नाराजगी देखने को मिली। विज्ञापन में वित्तीय निवेश को आकर्षक तरीके से पेश करने के लिए निजी रिश्ते का उदाहरण इस्तेमाल किया गया था। लेकिन यही तुलना विवाद की वजह बन गई।

    विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताने वालों का कहना है कि किसी वित्तीय उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं और निजी रिश्तों को इस तरह इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इस तरह की भाषा महिलाओं को एक वस्तु की तरह पेश करती है और सार्वजनिक स्थान पर ऐसे संदेश से महिलाओं की गरिमा प्रभावित हो सकती है।

    मामला राजनीतिक स्तर पर भी पहुंच गया है। डीएमके की सांसद तमिझाची थंगापांडियन ने विज्ञापन पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने मांग की कि इस विज्ञापन को मेट्रो से तत्काल हटाया जाए। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना महिलाओं की प्रतिष्ठा के लिए उचित नहीं है।

    एआईएडीएमके की ओर से भी विज्ञापन पर विरोध जताया गया है। पार्टी की प्रवक्ता कोवाई सत्यन ने इसे लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की और संबंधित क्रेडिट सोसायटी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही। उनका कहना है कि लोगों को ब्याज दर के बारे में जानकारी देने के लिए महिलाओं का अपमान करने वाली भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    विवाद बढ़ने के बाद अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में विज्ञापन प्रदर्शित करने से पहले उनकी भाषा और विषयवस्तु की किस तरह जांच की जानी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग आते-जाते हैं, इसलिए विज्ञापनों की भाषा को लेकर संवेदनशीलता बरतना जरूरी माना जाता है।

    इस पूरे मामले में विज्ञापन की रचनात्मक शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एफडी की ब्याज दर को आकर्षक बनाने के लिए रिश्ते और भावनाओं से जुड़ी तुलना करने की कोशिश की गई, लेकिन इसका संदेश लोगों के एक वर्ग को आपत्तिजनक लगा। इसी वजह से विज्ञापन का उद्देश्य पीछे छूट गया और उसकी भाषा चर्चा का मुख्य विषय बन गई।

    चेन्नई मेट्रो में लगाए गए इस विज्ञापन को लेकर अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विरोध करने वालों का कहना है कि महिलाओं की गरिमा और सम्मान से जुड़े विषयों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विज्ञापनों की समीक्षा होनी चाहिए। वहीं पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि क्या वित्तीय प्रचार के लिए निजी रिश्तों और महिलाओं को इस तरह तुलना का आधार बनाना उचित है।

  • भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक

    भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक


    जयपुर।
    राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Rajasthan Consumer Disputes Redressal Commission) ने अभिनेता सलमान खान (Actor Salman Khan.) को एक बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) पर रोक लगा दी है। यह मामला एक पान मसाला कंपनी के भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) से जुड़ा है। राज्य आयोग ने सलमान खान और कंपनी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शुक्रवार को एक पान मसाला कंपनी और सलमान खान की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई की।


    क्या दलील?

    सलमान खान के वकील ने सुनवाई के दौरान राज्य आयोग को बताया कि जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना समन जारी किए ही जमानती वारंट जारी किया था। अब गैर-जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया में है। यही नहीं जमानती वारंट रद्द करने का अनुरोध की एक अर्जी भी जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के समक्ष लंबित है।


    आयोग ने दी राहत

    इसे ध्यान में रखते हुए राज्य आयोग ने जमानती वारंट तामील होने तक गैर-जमानती वारंट जारी करने से रोक दिया। यही नहीं जिला आयोग को लंबित अर्जी पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का भी निर्देश दिया। बता दें कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जयपुर-द्वितीय ने अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था और उन्हें छह फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया था।


    क्या है मामला?

    यह आदेश शिकायतकर्ता योगेंद्र सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आयोग की ओर से छह जनवरी को अंतरिम रोक के बावजूद एक पान मसाला कंपनी के विज्ञापन अब भी दिखाए जा रहे हैं। दलील दी गई कि यह तो आयोग के आदेश की अवमानना है।


    क्या आरोप?

    मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पान मसाला कंपनी और उसके ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान भ्रामक विज्ञापन कर रहे हैं। इस शिकायत पर आयोग ने 6 जनवरी को उत्पाद के प्रचार और विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बाद में अवमानना याचिका दायर की। फिर दावा किया कि रोक के बावजूद 9 जनवरी को कोटा में नयापुरा स्टेडियम के पास उक्त विज्ञापन वाला एक साइन बोर्ड लगाया गया।