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  • बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    नई दिल्ली ।बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी बायोकॉन लिमिटेड को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नोटिस मिला है। इसमें कर की बकाया राशि के साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। कंपनी को यह नोटिस आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम-2 स्थित जीएसटी कार्यालय से जारी किया गया है। कंपनी ने इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी देते हुए बताया कि नोटिस में कुल देनदारी के रूप में 3.2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गई है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस आदेश का उसके वित्तीय और परिचालन कामकाज पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

    नोटिस में 1.85 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में, 1.17 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में और 18.52 लाख रुपये जुर्माने के रूप में शामिल हैं। कर विभाग की ओर से कंपनी पर कई तरह की अनियमितताओं से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इनमें विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड को की गई जीरो-रेटेड आपूर्ति के संबंध में जरूरी एंडोर्समेंट दस्तावेज जमा नहीं करना शामिल है। इसके अलावा इनपुट टैक्स के गलत रिवर्सल और इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूशन क्रेडिट के दावों में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।

    जीरो-रेटेड आपूर्ति के तहत कुछ निर्धारित परिस्थितियों में वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर कर का प्रभाव अलग होता है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों और कर संबंधी नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। बायोकॉन को मिले नोटिस में इन्हीं प्रक्रियाओं से संबंधित कथित कमियों को आधार बनाया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश के खिलाफ सुधार याचिका दाखिल करने या अपील करने की तैयारी कर रही है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मामले का उसके वित्तीय या परिचालन प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    इसी बीच, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष विज्ञापन से जुड़े मामले में संबंधित अभिनेताओं से जवाब प्राप्त होने की जानकारी दी है। विभाग ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ सहित कुछ अभिनेताओं से प्रतिबंधित तंबाकू संबंधी उत्पादों के प्रचार को लेकर जवाब मांगा था। इन अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस के बाद विभाग को उनके जवाब मिल गए हैं। अब आगे की कार्रवाई से पहले सभी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का एक और अवसर दिया जाएगा।

    महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि विभाग आगे कोई निर्णय लेने से पहले संबंधित लोगों को सुनवाई का एक और मौका देगा। उन्होंने विज्ञापन करने वाले लोगों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके प्रचार अभियान कानून के अनुरूप हों। विभाग का रुख है कि किसी उत्पाद का विज्ञापन करते समय लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है।

    मुंडे ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24 तथा वर्ष 2018 के विज्ञापन नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विज्ञापन संबंधी नियम सभी खाद्य उत्पादों पर लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति या कारोबारी इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझें।

  • दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    दूरदर्शन की रामायण ने रचा था कमाई का इतिहास, 78 एपिसोड से विज्ञापन बाजार में आया बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । टेलीविजन के शुरुआती दौर में कुछ ऐसे धारावाहिक आए, जिन्होंने केवल मनोरंजन तक अपनी पहचान सीमित नहीं रखी, बल्कि पूरे टीवी उद्योग के काम करने के तरीके को बदल दिया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ भी ऐसा ही धारावाहिक था, जिसने प्रसारण के दौरान दर्शकों की जबरदस्त दिलचस्पी हासिल की और कमाई के मामले में भी नया रिकॉर्ड बनाया।

    दूरदर्शन पर प्रसारित इस धारावाहिक के कुल 78 एपिसोड थे। इसके प्रसारण के दौरान देशभर में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। उस समय टेलीविजन घरों में मनोरंजन का प्रमुख माध्यम बन रहा था और रामायण ने दर्शकों के बीच ऐसी जगह बनाई कि इसके प्रसारण के दौरान लोगों की दिनचर्या तक प्रभावित होने लगी थी।

    पुराने आंकड़ों के अनुसार, पहली बार प्रसारण के समय रामायण को करीब 4 करोड़ लोगों ने देखा था। इसकी लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं रही। धारावाहिक को 53 देशों में प्रसारित किया गया और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी इसे बड़ी संख्या में दर्शक मिले।

    उपलब्ध आंकड़ों में बताया गया है कि दुनिया भर में रामायण को 65 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा। इसी वजह से इसे अपने दौर के सबसे अधिक देखे जाने वाले पौराणिक टेलीविजन धारावाहिकों में शामिल किया जाता है। दोबारा प्रसारण के दौरान भी इसकी लोकप्रियता देखने को मिली और नई पीढ़ी के दर्शकों ने भी इसे काफी पसंद किया।

    रामायण की सफलता का असर इसकी कमाई पर भी दिखाई दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले टेलीकास्ट के दौरान इस धारावाहिक ने दूरदर्शन के लिए करीब 23 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह आंकड़ा उस दौर के टेलीविजन बाजार को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

    इस कमाई में विज्ञापनों की बड़ी भूमिका रही। धारावाहिक की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कई बड़े ब्रांड इससे जुड़े। कोलगेट, हिंदुस्तान लीवर और अरविंद मफतलाल जैसे ब्रांड्स ने इसके साथ विज्ञापन किए। रामायण के जरिए टेलीविजन कार्यक्रमों के साथ विज्ञापन जोड़ने की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ीं।

    उस दौर में टेलीविजन धारावाहिकों के साथ विज्ञापनों का कारोबार आज की तरह व्यापक नहीं था। रामायण की लोकप्रियता ने कंपनियों को यह समझने का मौका दिया कि किसी लोकप्रिय कार्यक्रम के साथ जुड़कर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसके बाद टेलीविजन पर विज्ञापन बाजार के विस्तार का रास्ता और मजबूत हुआ।

    रामायण की सफलता इसलिए भी खास रही क्योंकि इसने एक साथ कहानी, धार्मिक आस्था, दर्शकों की भागीदारी और व्यावसायिक सफलता को जोड़ा। इसके पात्र और कलाकार घर-घर में पहचाने जाने लगे। आज भी इस धारावाहिक से जुड़ी यादें दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

    इसी वजह से रामानंद सागर की रामायण को भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। 78 एपिसोड वाले इस धारावाहिक ने न केवल बड़ी दर्शक संख्या हासिल की, बल्कि कमाई और विज्ञापन के क्षेत्र में भी ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसकी चर्चा दशकों बाद भी होती है।

  • कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन पर टिप्पणी करते हुए उसमें दिखाई गई ड्रेसिंग को लेकर सवाल उठाया है। कृति सेनन का यह विज्ञापन एक ज्वैलरी ब्रांड से जुड़ा है और इसमें रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हुए उन्हें दिखाया गया है।

    विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन की ड्रेस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने इसे विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा माना। इसी बीच कंगना रनौत ने भी इस विवाद पर अपनी राय सार्वजनिक की।

    कृति सेनन विज्ञापन में इंडो-वेस्टर्न अंदाज के परिधान में नजर आती हैं। विज्ञापन की थीम रक्षाबंधन से जुड़ी है और इसमें भाई-बहन के रिश्ते को त्योहार के संदर्भ में दिखाया गया है। हालांकि, कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और विज्ञापन का यह हिस्सा लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं वैश्विक फैशन को अपनाती हैं और उनके पास पारंपरिक भारतीय परिधानों से लेकर आधुनिक कपड़ों तक कई विकल्प मौजूद हैं।

    इसी संदर्भ में कंगना ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे पहनावे का इस्तेमाल क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल करते हुए पूछा कि जब महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो इस तरह के परिधान को ही क्यों चुना गया।

    कंगना ने अपनी टिप्पणी में यह भी संकेत दिया कि विज्ञापन को जानबूझकर असामान्य तरीके से तैयार किया गया हो सकता है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद कृति सेनन का विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कृति सेनन की ओर से कंगना की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

    रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा तथा सम्मान का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। त्योहार के इसी भाव को ध्यान में रखते हुए कंपनियां हर साल आभूषण, कपड़े, मिठाई और अन्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापन तैयार करती हैं।

    सेलिब्रिटी विज्ञापनों में पहनावे और प्रस्तुति को लेकर विवाद नया नहीं है। कई बार किसी विज्ञापन की थीम, ड्रेसिंग या विजुअल प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं और कुछ ही समय में विज्ञापन व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।

    कृति सेनन के मामले में भी यही देखने को मिला। एक तरफ विज्ञापन की रचनात्मकता और फैशन प्रस्तुति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। कंगना की टिप्पणी ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

    कंगना रनौत पहले भी फिल्म, फैशन, सामाजिक विषयों और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उनके बयानों पर अक्सर समर्थन और आलोचना दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस बार भी उनकी टिप्पणी के बाद कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र विज्ञापन में कृति सेनन की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना के बीच तालमेल का सवाल है। कृति की ओर से इस टिप्पणी पर कोई स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    डेयरी, ड्रिंक्स, तेल और घी समेत कई खाद्य कंपनियां जांच के घेरे में, नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द होने का खतरा

    नई दिल्ली । खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य नियामक ने हाल के महीनों में 150 से अधिक फूड ब्रांड्स और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से भ्रामक विज्ञापनों, बिना पर्याप्त आधार किए गए दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर की गई है।

    नियामक की कार्रवाई में कई बड़े और जाने-पहचाने ब्रांड्स के नाम भी सामने आए हैं। इनमें नेस्ले इंडिया, पेप्सिको, एबॉट इंडिया, रेड बुल इंडिया, डैनोन इंडिया, मॉन्स्टर एनर्जी इंडिया, हेल एनर्जी, मोंडेलेज इंडिया, कोका-कोला इंडिया, डियाजियो, पेरनोड रिकार्ड, फेरेरो इंडिया और केनव्यू जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि नोटिस जारी होना अपने आप में किसी कंपनी को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है। संबंधित कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

    FSSAI की नजर ऐसे विज्ञापनों पर है जिनमें खाद्य और पेय उत्पादों को लेकर ऐसे दावे किए जाते हैं, जिन्हें पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण या निर्धारित नियमों के आधार पर साबित करना जरूरी होता है। इनमें उत्पाद को 100 प्रतिशत प्राकृतिक बताना, किसी तरह की मिलावट नहीं होने का दावा करना, वजन घटाने में प्रभावी बताना या प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने जैसे दावे शामिल हो सकते हैं।

    खाद्य उत्पादों के प्रचार में किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों का उपभोक्ताओं के फैसले पर सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से नियामक ने कंपनियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि विज्ञापन और पैकेजिंग पर दी गई जानकारी वास्तविक, स्पष्ट और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।

    इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेबलिंग से जुड़ा है। पैकेट पर उत्पाद की सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। यदि लेबल पर दी गई जानकारी नियमों के अनुरूप नहीं है या उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकती है, तो नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

    FSSAI ने केवल कंपनियों के पारंपरिक विज्ञापनों तक अपनी निगरानी सीमित नहीं रखी है। खाद्य उत्पादों के प्रचार के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फूड डिलीवरी ऐप और प्रभावशाली लोगों यानी इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से किए जाने वाले दावों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इसका उद्देश्य विज्ञापन के अलग-अलग माध्यमों में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली जानकारी की निगरानी करना है।

    नियामक के अनुसार, खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित मानकों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यदि नोटिस के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं और उल्लंघन साबित होता है, तो संबंधित कारोबारियों पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में विनिर्माण लाइसेंस के निलंबन या रद्द किए जाने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

    इस कार्रवाई से खाद्य कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसके विज्ञापन और पैकेजिंग में दी जाने वाली जानकारी भी नियामकीय निगरानी के दायरे में है। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह जरूरी है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी से देखें।

    FSSAI की कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब खाद्य और पेय कंपनियां अपने उत्पादों को स्वास्थ्य, पोषण और जीवनशैली से जोड़कर बड़े पैमाने पर प्रचारित कर रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक प्रमाण और नियमों के अनुरूप दावे करना कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में नियामक की निगरानी और कार्रवाई से खाद्य विज्ञापनों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।