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  • जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच

    जबलपुर हाईकोर्ट में बार अध्यक्ष के व्हाट्सऐप अकाउंट बैन का मामला, मेटा ने कहा विवाद अधिवक्ता और व्हाट्सऐप के बीच


    मध्य प्रदेश।
    के जबलपुर हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट बंद किए जाने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि विवाद का संबंध सीधे तौर पर व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच है तथा इसमें मेटा की कोई भूमिका नहीं है। अदालत ने व्हाट्सऐप कंपनी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

    सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच के समक्ष हुई। मेटा की ओर से अधिवक्ता मयंक उपाध्याय अदालत में पेश हुए, जबकि वरुण पाठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यवाही में शामिल हुए। मेटा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में विवाद व्हाट्सऐप और याचिकाकर्ता के बीच का है। वहीं, भारत संघ की ओर से अधिवक्ता सचिन जैन मौजूद रहे। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल और अधिवक्ता गुंचा रसूल ने पक्ष रखा।

    याचिका के अनुसार, मृगेंद्र सिंह का व्हाट्सऐप अकाउंट 23 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया था। उनका कहना है कि अकाउंट बंद करने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया और न ही इसकी वजह बताई गई। सिंह के मुताबिक, वह कई वर्षों से इस नंबर का इस्तेमाल कर रहे थे। उनके पेशे से जुड़े कई जरूरी काम इसी अकाउंट के माध्यम से किए जाते थे। इनमें कानूनी कामकाज, मामलों का प्रबंधन, मुवक्किलों से बातचीत और केस से संबंधित दस्तावेजों का आदान-प्रदान शामिल था।

    मृगेंद्र सिंह ने याचिका में बताया कि अकाउंट बंद होने वाले दिन ही उन्होंने ऐप के माध्यम से इसकी समीक्षा करने का अनुरोध किया था। हालांकि, उनके अनुसार इस प्रक्रिया से कोई समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि अकाउंट बंद होने से उनके नियमित पेशेवर कामकाज पर असर पड़ा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत देने की मांग की है। उनका पक्ष है कि डिजिटल माध्यम से होने वाला संवाद बाधित होने से कानूनी कार्यों को संचालित करने में परेशानी होती है।

    याचिकाकर्ता ने अकाउंट बंद किए जाने को संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन बताया है। इसके अलावा, उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के पालन में भी कथित चूक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत के निपटारे के लिए निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया। ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।

    मेटा और व्हाट्सऐप के संबंधों का मुद्दा भी इस मामले में सामने आया। मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक ने वर्ष 2014 में व्हाट्सऐप के अधिग्रहण की घोषणा की थी और उसी वर्ष यह प्रक्रिया पूरी हुई थी। व्हाट्सऐप एलएलसी मेटा की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। इसके बावजूद सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से कहा गया कि मौजूदा विवाद में उसकी सीधी भूमिका नहीं है।

    हाईकोर्ट ने फिलहाल व्हाट्सऐप को अपना जवाब पेश करने का अवसर दिया है। मृगेंद्र सिंह ने याचिका में अपना अकाउंट बहाल करने, राहत प्रदान करने और कथित नियम उल्लंघन के संबंध में भारत संघ को उचित कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। अब 15 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कंपनी का पक्ष सामने आने की उम्मीद है।

  • विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के महोबा में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब दो मिनट से अधिक समय के इस वीडियो में कुछ युवतियां और महिलाएं एक अधिवक्ता को घेरती और पकड़ती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में अधिवक्ता की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर दो नामजद युवतियों और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, यह मामला किसी पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।

    कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें दो लोगों को नामजद किया गया है, जबकि सात अन्य की पहचान अभी की जानी है। पुलिस मामले की जांच के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला शांत हो गया था। आरोप है कि बाद में उसी पुराने विवाद को लेकर दोबारा कहासुनी हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और अधिवक्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई।

    घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में कई महिलाएं और युवतियां अधिवक्ता के आसपास दिखाई देती हैं। कुछ लोग उन्हें पकड़ते हुए नजर आते हैं और उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दृश्य भी दिखाई देता है। वीडियो की अवधि करीब दो मिनट 12 सेकेंड बताई गई है। पुलिस अब वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया पर किसी घटना का वीडियो तेजी से प्रसारित होने के बाद पुलिस के सामने उसकी सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से पुलिस वायरल वीडियो के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मामले में पुलिस ने अभी घटना के पीछे के पूरे विवाद और मारपीट की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर पुराने विवाद के बाद दोबारा कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों से संबंधित तथ्यों को जांच में शामिल कर रही है।

    वहीं, महोबा के अलावा जालौन में भी दो परिवारों के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। कोतवाली जालौन क्षेत्र के मोहल्ला पहलवान बड़ा में दो परिवारों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर कथित तौर पर लाठी-डंडों और रॉड से मारपीट हुई। पीड़ित सुलखान यादव ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसके साथ और बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भतीजे के साथ भी मारपीट की गई।

    शिकायत के अनुसार घटना रात करीब 10 बजे हुई। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ा और दोनों पर हमला किया गया। पीड़ित ने गंभीर चोट लगने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत

    इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष के लिए रोमांचक मुकाबला, उपाध्यक्ष और सह सचिव पद पर बड़ी जीत


    इंदौर । इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव परिणाम बुधवार देर रात घोषित किए गए। लंबे और रोमांचक मुकाबले के बाद अध्यक्ष पद पर मनीष यादव विजयी हुए। उपाध्यक्ष, सचिव और सह सचिव पदों पर भी नवनिर्वाचितों ने अपने मजबूत प्रदर्शन से जीत दर्ज की। चुनाव में कुल 1914 मतदाता शामिल हुए।

    अध्यक्ष पद का मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। शुरुआत में गौरव श्रीवास्तव आगे चल रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, मनीष यादव ने 17वें राउंड में बढ़त बना ली और 20वें राउंड तक उसे बनाए रखा। अंततः मनीष यादव 512 वोटों के साथ 20 वोटों के अंतर से जीत गए। गौरव श्रीवास्तव को 492 वोट मिले। अन्य प्रत्याशियों में जीपी सिंह को 406, मनीष जैन को 282 और पवन जोशी को 95 मत मिले।

    उपाध्यक्ष पद पर अभिषेक तुगनावत ने शुरुआत से ही स्पष्ट बढ़त बनाए रखी और एकतरफा जीत दर्ज की। उन्हें 858 मत प्राप्त हुए, जबकि उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी अपूर्वा शुक्ला को 311, धर्मेंद्र साहू को 232, मधुसूदन यादव को 216 और भावना साहू को 162 वोट ही मिले।

    सचिव पद के चुनाव में तीन प्रमुख प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। मतों की बार-बार अदला-बदली के बीच मनीष गडकर 652 वोट लेकर विजयी हुए। उनके प्रतिद्वंद्वी गोविंद राय को 582 और निलेश मनोरे को 533 मत प्राप्त हुए। सह सचिव पद पर अमित राज ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 1027 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ज्ञानेंद्र शर्मा को 739 वोट ही मिल सके। एग्जीक्यूटिव मेंबर के रूप में राहुल पांचाल, तेजस जैन, अमन मालवीय, रश्मेंद्र सूर्यवंशी और अर्निक जैन चुने गए।

    परिणाम घोषित होते ही बार परिसर में समर्थकों ने जीत का जश्न मनाया। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने कहा कि वे अधिवक्ताओं की समस्याओं, सुविधाओं और हाईकोर्ट परिसर से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाएंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज द्विवेदी और मीडिया प्रभारी अजय मिश्रा के अनुसार, मतदान सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक हुआ। इसके बाद शाम 7 बजे से मतगणना शुरू हुई, जो देर रात करीब 1 बजे तक चली। इस चुनाव ने बार एसोसिएशन में नई ऊर्जा और उत्साह पैदा कर दिया है।