Tag: affordability

  • जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    नई दिल्ली ।जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल बाजार में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देश में तीन करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ। इस अवधि में वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही, जबकि इससे एक साल पहले समान अवधि में यह पांच प्रतिशत से भी कम थी।

    ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साई गिरिधर के अनुसार, जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की वृद्धि दर करीब चार गुना तक बढ़ी है। उनके मुताबिक, वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ना यानी अफोर्डेबिलिटी मौजूदा समय में मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है।

    उनका कहना है कि जीएसटी में बदलाव के बाद छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों की ऑन-रोड लागत में स्थायी कमी आई। इन वाहन श्रेणियों पर बड़ी संख्या में उपभोक्ता निर्भर हैं। कीमतों में कमी का असर सिर्फ पहले से तय खरीद को आगे लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बाजार में नए ग्राहकों की भागीदारी भी बढ़ी।

    साई गिरिधर के मुताबिक, इस बदलाव के बाद पहली बार वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के साथ लंबे समय से खरीद टाल रहे ग्राहक भी दोबारा शोरूम पहुंचने लगे। इससे ऑटो बाजार में मांग का दायरा बढ़ा है और कई श्रेणियों में बिक्री के मजबूत आंकड़े सामने आए हैं।

    उन्होंने पिछले त्योहारी सीजन में दिखाई दी मजबूत मांग को भी इसी बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि यह तेजी केवल मौसमी गतिविधि नहीं रही। उनके अनुसार, मांग में आया बदलाव अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

    ऑटो क्षेत्र में जीएसटी 2.0 के असर को उन्होंने मौसमी के बजाय संरचनात्मक बताया। इसी वजह से बीते एक साल में उद्योग की अलग-अलग वाहन श्रेणियों ने अपने मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इससे बाजार में उपभोक्ता मांग के विस्तार के संकेत मिले हैं।

    दोपहिया वाहनों को व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है। गिरिधर ने बताया कि इस श्रेणी ने 2018 के बाद का अपना सर्वोच्च स्तर फिर हासिल किया है। इससे बड़े उपभोक्ता वर्ग के बीच वाहन खरीदने की क्षमता और रुचि में सुधार का संकेत मिलता है।

    यात्री वाहन बाजार में भी बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा कई वाहन श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेज रही।

    उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को भी ऑटो क्षेत्र में बढ़ती खपत से जोड़ा और कहा कि किफायती वाहन उपलब्ध कराने पर जोर देने से मांग और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है। हालांकि, उद्योग के सामने चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

    वाहन निर्माता कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उद्योग के लिए बढ़ी हुई मांग को बनाए रखना कीमतों और लागत के संतुलन पर भी निर्भर करेगा।

    पिछले एक साल के अनुभव को लेकर उद्योग का कहना है कि वाहन बाजार में मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे प्रभावी कारकों में से एक साबित हुई है। जीएसटी 2.0 के बाद बढ़ी खरीद क्षमता ने ऑटो रिटेल को नई गति दी है।

  • नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।

    रेलवे ने साधारण नॉन-एसी गैर-उपनगरीय सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है। सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1251 किलोमीटर से 1750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है और 1751 किमी से 2250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास जिसमें स्लीपर फर्स्ट क्लास एसी चेयर कार एसी 3-टियर एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है।

    बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए जैसे कि 500 ​​किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।
    तेजस राजधानी राजधानी शताब्दी दुरंतो वंदे भारत हमसफर अमृत भारत तेजस महामना गतिमान अंत्योदय गरीब रथ जन शताब्दी युवा एक्सप्रेस नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं जहां लागू हो एस मेमू को छोड़कर सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।

    रिजर्वेशन फीस सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा।