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  • MP में नया कानून: अब गांवों में भी बनेंगी कॉलोनियां, 15% मकान गरीबों के लिए रिजर्व

    MP में नया कानून: अब गांवों में भी बनेंगी कॉलोनियां, 15% मकान गरीबों के लिए रिजर्व


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही मप्र कॉलोनी एक्ट 2026 लागू करने जा रही है, जिसका मकसद शहरों के बढ़ते दबाव को कम करते हुए गांवों में भी व्यवस्थित कॉलोनियों का विकास करना है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अब शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में भी कॉलोनी बनाने के लिए सख्त नियम लागू होंगे। सरकार का दावा है कि इससे अवैध कॉलोनियों पर रोक लगेगी और लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।

    अवैध कॉलोनी पर कड़ा प्रहार, अफसर भी नहीं बचेंगे

    नए कानून में अवैध कॉलोनी बनाने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं। बिना अनुमति कॉलोनी विकसित करने पर 7 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, लापरवाही बरतने वाले सरकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी और उन्हें 3 महीने तक की सजा हो सकती है। यह प्रावधान प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    गरीबों के लिए 15% मकान आरक्षित, सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे घर

    इस एक्ट का सबसे अहम प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए है। हर कॉलोनी में 15% क्षेत्र इन वर्गों के लिए आरक्षित रहेगा। इन मकानों या प्लॉट्स को कलेक्टर द्वारा तय बाजार मूल्य के 90% से अधिक कीमत पर नहीं बेचा जा सकेगा। साथ ही, खरीदार 15 साल तक इन संपत्तियों को बेच या ट्रांसफर नहीं कर पाएंगे।

    कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रेशन और अनुमति अनिवार्य

    अब कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना रजिस्ट्रेशन कॉलोनी विकसित नहीं कर सकेगी। कॉलोनाइजर को जिला या राज्य स्तर पर पंजीयन कराना होगा, जिसकी वैधता 5 साल होगी। इसके अलावा कॉलोनी डेवलप करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। आवेदन के 60 दिन के भीतर फैसला नहीं होने पर 15 दिन बाद अनुमति स्वतः मान्य मानी जाएगी।

    बुनियादी सुविधाएं देना होगी अनिवार्य

    नई कॉलोनियों में सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज, ड्रेनेज, पार्क और खेल मैदान जैसी सुविधाएं देना अनिवार्य होगा। साथ ही पाथ-वे (पैदल मार्ग) बनाना भी जरूरी होगा। कॉलोनाइजर को इन सुविधाओं की गारंटी के लिए बैंक गारंटी या संपत्ति गिरवी रखनी होगी, ताकि अधूरे प्रोजेक्ट्स पर रोक लग सके।

    पुरानी अवैध कॉलोनियों को मिलेगी राहत

    सरकार 2021 से पहले बनी करीब 7 हजार अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की तैयारी में है। इन कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है। इसके लिए निवासियों से विकास शुल्क भी लिया जा सकता है, हालांकि गरीब वर्ग को इसमें छूट दी जाएगी।

    क्यों जरूरी था नया कानून?

    शहरों में जहां कॉलोनी डेवलपमेंट के लिए सख्त नियम लागू हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों में सिर्फ जमीन के बंटवारे के आधार पर कॉलोनियां बस रही थीं। इससे अव्यवस्थित विकास, संकरी सड़कें और सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं। नए कानून से इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

    मेट्रोपॉलिटन रीजन को मिलेगा बढ़ावा

    सरकार ने मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 2025 को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत भोपाल और इंदौर सहित 5 बड़े शहरों में मेट्रोपॉलिटन रीजन विकसित किए जाएंगे। इससे शहरी विस्तार को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

  • पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा

    पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा


    नई दिल्ली केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin (PMAY-G) के तहत अब तक लगभग 3 करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 4.15 करोड़ घरों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 3.90  करोड़ घर स्वीकृत किए गए और 2.99 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं।

    वित्तीय सहायता और लक्ष्य

    सरकार के अनुसार, इस योजना में घरों के निर्माण और लाभार्थियों को समय पर सहायता देने के लिए अब तक कुल 4,03,886 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। योजना का अंतिम लक्ष्य 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घर बनाना है।

    लाभार्थी-आधारित निर्माण

    पीएमएवाई-जी लाभार्थी-आधारित है, यानी परिवार खुद अपने घर का निर्माण करते हैं और वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में जाती है। योजना में घरों की जियो-टैगिंग की जाती है, जिसमें समय और तारीख के साथ फोटो अपलोड की जाती है। इससे रियल-टाइम निगरानी संभव होती है और यह सुनिश्चित होता है कि घर तय मानकों के अनुसार बन रहे हैं।

    एआई और तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता

    योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI मॉडल घरों की दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों जैसी चीजों की पहचान कर सही तस्वीर को मंजूरी के लिए चुनते हैं। इससे केवल पूरी तरह तैयार घरों को ही पूर्ण माना जाता है।
    लाभार्थियों की पहचान आधार आधारित-एआई फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होती है, जिसमें आंख झपकने और मूवमेंट डिटेक्शन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इससे सुनिश्चित होता है कि केवल योग्य लोग ही योजना का लाभ प्राप्त करें।

    अन्य योजनाओं के साथ समन्वय

    पीएमएवाई-जी को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी अन्य योजनाओं के साथ जोड़ा गया है, ताकि लाभार्थियों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

    लगातार प्रगति

    पिछले 10 वर्षों में पीएमएवाई-जी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। हर साल बड़ी संख्या में घरों का निर्माण पूरा हुआ है, जो इसकी स्थिर प्रगति को दर्शाता है। AI और मशीन लर्निंग तकनीकों के इस्तेमाल से निगरानी और ज्यादा सटीक हो गई है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना कम हुई है।