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  • अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला

    अजनार नदी के बाद यमुना की सफाई में जुटे 'बिट्टू तबाही', साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा निकाला


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की अजनार नदी से सफाई अभियान की शुरुआत कर चर्चा में आए सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ अब दिल्ली की यमुना नदी के किनारे सफाई अभियान चला रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में अपने पहले सफाई अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स के साथ मिलकर करीब साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा किया है। इस अभियान का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो अब चर्चा में है।

    यमुना किनारे चलाए गए अभियान के दौरान फूल-मालाओं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक और अन्य तरह का कचरा हटाया गया। बिट्टू के मुताबिक, सफाई अभियान में स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कचरे को एकत्र करने में टीम की मदद की।

    यमुना किनारे जमा था कचरे का ढेर

    दिल्ली पहुंचने के बाद बिट्टू तबाही ने यमुना किनारे की स्थिति को अपने वीडियो में दिखाया। उनके अनुसार, घाट और आसपास के इलाके में बड़ी मात्रा में फूल-मालाएं, पूजा सामग्री, प्लास्टिक तथा अन्य कचरा जमा था।

    धार्मिक आयोजनों और रोजमर्रा की गतिविधियों के बाद पूजा सामग्री और अन्य सामान नदी के किनारे या आसपास छोड़े जाने से वहां कचरा जमा होने की समस्या सामने आती रही है। बिट्टू ने इसी स्थान से अपनी सफाई ड्राइव शुरू की। अभियान के दौरान स्थानीय लोग और वॉलंटियर्स भी उनके साथ जुड़ते गए।

    साढ़े चार घंटे में 585 किलो कचरा हटाने का दावा

    बिट्टू तबाही ने सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में बताया कि दिल्ली में यह उनकी पहली क्लीनअप ड्राइव थी। उनके अनुसार, करीब साढ़े चार घंटे चले अभियान में टीम ने कुल 585 किलो कचरा हटाया।

    उन्होंने बताया कि यह अभियान वर्ल्ड क्लीनअप डे से जुड़ी गतिविधियों के तहत आयोजित किया गया। तीन दिन चलने वाली इस मुहिम में अलग-अलग स्थानों पर सफाई अभियान के साथ लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की योजना बनाई गई थी। बिट्टू ने सफाई अभियान में सहयोग करने वाले स्थानीय लोगों और वॉलंटियर्स का आभार भी जताया।

    सफाई में स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया हाथ

    अभियान के दौरान आसपास रहने वाले कुछ लोग भी सफाई टीम के साथ जुड़ गए। किसी ने कचरा उठाने में मदद की तो किसी ने उसे एक स्थान पर एकत्र करने का काम किया।

    बिट्टू का कहना है कि जब स्थानीय लोग खुद सफाई अभियान का हिस्सा बनते हैं तो उसका असर केवल एक दिन की सफाई तक सीमित नहीं रहता। इससे दूसरे लोगों को भी सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने के प्रति जागरूक होने का संदेश मिलता है।

    अजनार नदी से मिली पहचान

    सुरेंद्र सिंह चौधरी को ‘बिट्टू तबाही’ नाम से पहचान मध्य प्रदेश की अजनार नदी की सफाई के दौरान मिली। उन्होंने नदी किनारे जमा गंदगी और कचरे को खुद हटाते हुए वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए थे। धीरे-धीरे उनके सफाई अभियान ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    उनके अभियान की चर्चा द ओशन क्लीनअप के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट तक पहुंचने की बात भी सामने आई थी। इसके बाद उन्हें संगठन के साथ काम करने का न्योता मिलने की जानकारी सामने आई।

    अब दूसरे राज्यों तक अभियान ले जाने की तैयारी

    अजनार नदी के बाद बिट्टू तबाही अपनी सफाई मुहिम को दूसरे राज्यों तक ले जाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल कचरा हटाना नहीं, बल्कि लोगों को नदियों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करना भी है।

    दिल्ली में अभियान शुरू करने के बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों को मुहिम से जोड़ने की बात कही है। उनका मानना है कि स्थानीय लोग जब सफाई अभियान में सीधे भागीदारी करते हैं तो उसका प्रभाव अधिक व्यापक हो सकता है।

    गुरुग्राम के खेड़की दौला में अगला अभियान

    दिल्ली के बाद बिट्टू तबाही ने अपने अगले पड़ाव की जानकारी भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि अब उनकी सफाई मुहिम गुरुग्राम पहुंचेगी। उन्होंने गुरुग्राम के खेड़की दौला का जिक्र करते हुए लोगों से अगली सफाई ड्राइव में शामिल होने की अपील की है।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने किया समर्थन

    यमुना किनारे सफाई अभियान का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बिट्टू तबाही के प्रयास की सराहना की। कई लोगों ने उन्हें अभियान जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ यूजर्स ने सकारात्मक टिप्पणियों के साथ दिल और फायर इमोजी भी साझा किए।

    हालांकि, नदी और सार्वजनिक स्थानों की सफाई के साथ वहां दोबारा कचरा न पहुंचे, यह सुनिश्चित करना भी चुनौती है। ऐसे अभियानों के साथ लोगों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता


    काठमांडू।
    नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

    आपदा के बाद कई इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की खबरों ने महामारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालना भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

    यह प्राकृतिक आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।

    तेज बहाव में कई इलाकों में घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

    शवों के सड़ने से बढ़ी चिंता

    आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

    प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ मलबे में फंसे लोगों की तलाश और दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन व्यवस्था बनाए रखना और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना।

    सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश

    नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

    नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    शवगृहों में जगह कम, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा

    बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

    लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने रिश्तेदारों के मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत

    नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है।

    वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव और पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

    रेस्क्यू के साथ अब स्वास्थ्य संकट से निपटने की चुनौती

    नेपाल में राहत अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आपदा का दूसरा पहलू सामने आ रहा है। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है और दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल के लिए सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि स्वच्छता, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

  • 6 साल बाद फिर बीजिंग से प्योंगयांग के लिए पहली ट्रेन रवाना

    6 साल बाद फिर बीजिंग से प्योंगयांग के लिए पहली ट्रेन रवाना


    बीजिंग। करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद चीन और उत्तर कोरिया के बीच यात्री ट्रेन सेवा एक बार फिर शुरू हो गई है। गुरुवार को बीजिंग रेलवे स्टेशन से दोनों देशों की राजधानियों को जोड़ने वाली पहली ट्रेन रवाना हुई। इससे चीन और उत्तर कोरिया के बीच लोगों के आवागमन और संपर्क बढ़ाने की दिशा में नया कदम माना जा रहा है।

    चीनी रेलवे प्राधिकरण के अनुसार ट्रेन K27 शुक्रवार शाम 6:07 बजे उत्तर कोरिया की राजधानी Pyongyang पहुंचेगी। यह ट्रेन लगभग 24 घंटे 41 मिनट का सफर तय करेगी और रास्ते में चीन के सीमावर्ती शहर Dandong में ठहरेगी, जो China और North Korea के बीच प्रमुख सीमा शहर है।

    चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देश “मैत्रीपूर्ण पड़ोसी” हैं और सीमा पार यात्री ट्रेन सेवा फिर से शुरू होने से लोगों के बीच संपर्क और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन दोनों देशों के बीच यात्रा और संवाद को आसान बनाने के लिए मजबूत सहयोग का समर्थन करता है।

    हालांकि ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक उत्तर कोरिया अभी भी विदेशी पर्यटकों के लिए लगभग बंद है। कुछ सीमित अपवादों में रूस के पर्यटन समूहों को विशेष व्यवस्थाओं के तहत प्रवेश दिया जा रहा है।

    रेलवे प्राधिकरण के नोटिस के अनुसार बीजिंग और प्योंगयांग के बीच चलने वाली यह ट्रेन सप्ताह में चार दिन—सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार दोनों दिशाओं में संचालित होगी। बीजिंग की एक ट्रैवल एजेंसी ने बताया कि गुरुवार की यात्रा के लिए टिकट पूरी तरह बिक चुके थे और फिलहाल ये केवल बिजनेस वीजा धारकों के लिए उपलब्ध थे, जबकि 18 मार्च की यात्रा के लिए टिकट अभी भी मिल रहे हैं।

    चीनी सरकारी समाचार एजेंसी Xinhua News Agency के मुताबिक छोटा मार्ग डैंडोंग-प्योंगयांग भी दोनों दिशाओं में रोजाना संचालित होगा। इस रूट की पहली ट्रेन गुरुवार सुबह 10 बजे डैंडोंग से रवाना हुई और शाम 6:07 बजे प्योंगयांग पहुंचने का कार्यक्रम है।

    इससे पहले उत्तर कोरिया की सरकारी एयरलाइन Air Koryo ने 2023 में चीन के लिए अपनी उड़ानें फिर से शुरू की थीं। एयरलाइन फिलहाल Beijing और प्योंगयांग के बीच मंगलवार और शनिवार को सप्ताह में दो बार सेवाएं संचालित कर रही है।

    ट्रेन सेवा की बहाली को दोनों देशों के बीच परिवहन संपर्क और संबंधों में धीरे-धीरे बढ़ती सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।