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  • अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप

    अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने भारत पर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादी संगठनों का कथित तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए इसे ‘डोभाल सिद्धांत’ करार दिया।

    पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार जमील ने दावा किया कि भारत अपनी रणनीति के तहत आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का कथित समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    मुक्ति वाहिनी और एलटीटीई का भी किया जिक्र

    13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में अपने संबोधन के दौरान जमील ने भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 1971 में मुक्ति वाहिनी और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को भारत से मिले कथित समर्थन का जिक्र किया।

    उन्होंने अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) की मौजूदगी के दौरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आसपास भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास संचालित किए जाने का भी उल्लेख किया। जमील ने इन घटनाओं को पाकिस्तान में भारत की कथित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।

    ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी जताई चिंता

    जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ब्रह्मोस मिसाइलों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

    हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसे भारत की सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा बताना भी सही नहीं है।

    जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु संघर्ष के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक संयम के कारण स्थिति को संभाला जा सका। ये उनके आरोप और आकलन हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों पर भी उठाए सवाल

    जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आकलन का हवाला देते हुए भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों की तैनाती के जरिए भारत अपनी सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की अलग से जांच जरूरी है।

    2022 की ब्रह्मोस दुर्घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया

    जमील ने मार्च 2022 में भारतीय वायु सेना की एक ब्रह्मोस मिसाइल के गलती से लॉन्च होने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान पर जानबूझकर किए गए हमले के रूप में पेश किया।

    दरअसल, मार्च 2022 में एक मिसाइल तकनीकी प्रक्रिया के दौरान गलती से लॉन्च हो गई थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में जाकर गिरी थी। भारत ने इस घटना को आकस्मिक मिसाइल प्रक्षेपण बताया था और मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

    जमील के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान में भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमताओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और जानबूझकर अस्थिरता फैलाने जैसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप

    उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई FIR, दूसरी महिलाओं से संबंध रखने के आरोप


    देहरादून। उत्तराखंड की महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने धोखाधड़ी, कथित प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी और अन्य गंभीर आरोप लगाए हैं। मंत्री ने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का भी जिक्र किया है। इस बीच, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रेखा आर्या ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने पक्ष में बात रखी। वीडियो में वह भावुक नजर आईं। उन्होंने बताया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें अपनी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला लिया। हालांकि, ऑडियो में कथित तौर पर कही गई बातों और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    पहली शादी छिपाने और प्रताड़ना के आरोप

    एफआईआर के मुताबिक, रेखा आर्या ने आरोप लगाया है कि गिरधारी लाल साहू ने शादी के समय अपनी पहली शादी की जानकारी उनसे छिपाई थी। उन्होंने पति के दूसरी महिलाओं से संबंध होने का भी दावा किया है। शिकायत में शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, जान से मारने की धमकी देने तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

    मंत्री ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए कहा कि उसमें कथित तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश से जुड़ी बातें सामने आईं। उनके अनुसार, रिकॉर्डिंग सुनने के बाद वह भीतर तक विचलित हो गईं। इसके बाद उन्होंने अपनी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी सत्यता की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए ही हो सकेगी।

    कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

    रेखा आर्या ने अपने पति पर कंपनी के निदेशक पद से उन्हें हटाने के लिए उनके हस्ताक्षरों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है। शिकायत के अनुसार, इस मामले में दस्तावेजों के साथ कथित छेड़छाड़ की गई। मंत्री ने इसे अपने खिलाफ किए गए गलत कामों में से एक बताया है।

    अपने वीडियो संदेश में रेखा आर्या ने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनने के बाद उन्हें लगा कि अपनी और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे घरेलू हिंसा या किसी भी तरह की प्रताड़ना को चुपचाप सहन न करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लें।

    उन्होंने कहा कि किसी भी महिला को डर या दबाव में अन्याय सहने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    15 अक्टूबर को दर्ज हुई FIR

    जानकारी के मुताबिक, देहरादून के कैंट थाना पुलिस ने रेखा आर्या की शिकायत पर 15 अक्टूबर 2026 को एफआईआर संख्या 0158 दर्ज की। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, मारपीट, धोखाधड़ी, महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल, पूर्व विवाह छिपाकर दोबारा शादी करने, विवाहित महिला के साथ क्रूरता, जानबूझकर अपमान और आपराधिक धमकी देने से संबंधित आरोप शामिल हैं।

    एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं 3(1)(r), 3(1)(s) और 3(2)(va) भी लगाई गई हैं।

    पहले भी विवादों में आए थे गिरधारी लाल साहू

    गिरधारी लाल साहू इसी साल जनवरी में भी विवादों में आए थे। उस समय बिहार की लड़कियों को लेकर उनके कथित बयान के सार्वजनिक होने के बाद विरोध प्रदर्शन हुए थे। विवाद बढ़ने पर साहू ने अपने बयान को लेकर सफाई दी थी।

    अब रेखा आर्या की शिकायत के बाद मामला फिर चर्चा में है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई इस प्रकरण में अहम होगी।

  • बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    नई दिल्ली। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में कथित हंगामे और घटना से जुड़े भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के पवित्र परिसर में राजनीतिक नारे लगाए, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित हुआ। उसने पुलिस से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपी। कमेटी ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

    गुरुद्वारे की मर्यादा भंग करने का आरोप

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र परिसर के भीतर राजनीतिक नारे लगाए। कमेटी के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से गुरुद्वारे का धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ और गुरु घर की पवित्रता एवं मर्यादा का उल्लंघन हुआ।

    कमेटी ने मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही घटना से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले की भी जांच की मांग उठाई गई है।

    पुलिस के गुरुद्वारे में प्रवेश पर ‘आप’ ने उठाए सवाल

    इस विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि गुरुद्वारों के दरवाजे जरूरतमंद लोगों को आश्रय देने के लिए हमेशा खुले रहते हैं।

    वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए गुरुद्वारे के भीतर दाखिल हुई थी। इस मुद्दे पर रविवार शाम आप कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

    कालका बोले- मुख्य दरबार हॉल में नहीं गई थी पुलिस

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पुलिस के प्रवेश को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गुरुद्वारे के मुख्य दरबार हॉल में प्रवेश नहीं किया था। उनके मुताबिक, पुलिस ने परिसर के भीतर से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया था।

    हालांकि, कालका ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों को वर्दी में गुरुद्वारा परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करना चाहिए था। इस तरह उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति भी जाहिर की।

    पुलिस ने वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित करने की बात कही

    नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले में स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मी उस साझा रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने के स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं।

    पुलिस उपायुक्त ने आरोप लगाया कि घटना से संबंधित वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित किए गए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

    फिलहाल, बंगला साहिब गुरुद्वारे की घटना को लेकर DSGMC और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कमेटी की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा


    पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की कथित खामियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद हालात हिंसक हो गए। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं।

    धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर घायल

    रिपोर्ट्स के अनुसार, लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान हुए एक धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके में उसका हाथ उड़ गया। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके जबड़े की भी सर्जरी करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 5,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें करीब 90 प्रतिशत नाबालिग छात्र बताए जा रहे हैं।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मंगलवार को देशभर में आंदोलन के समर्थन में रैलियां आयोजित होने की उम्मीद है, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों की मांगों को बताया जायज

    फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देशव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने की कोशिश के तहत हड़ताल कर रहे स्कूली छात्रों की शिकायतों को “जायज” बताया है। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने मंत्रियों को छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर काम करने और अक्टूबर 2026 के अंत तक प्रस्ताव तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है।

    400 से 500 स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित

    फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण करीब 400 से 500 उच्च विद्यालयों में कक्षाएं पूर्ण या आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 विद्यालयों में आगजनी या तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हिंसा में शिक्षा विभाग के 85 कर्मचारी घायल हुए हैं। मंत्री ने मौजूदा स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब मोंटपेलियर, नांत और मार्सिले सहित कई प्रमुख शहरों तक फैल चुका है। छात्र शिक्षा के गिरते स्तर में सुधार के साथ स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

    फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन के अनुसार, देश के करीब 3,700 विद्यालयों में से लगभग 735 विद्यालय इस उग्र आंदोलन से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं।

    प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधाओं में सुधार पर जोर

    प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इसमें कक्षाओं का सुचारू संचालन, स्कूलों में सुविधाओं का सुधार और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार विद्यालयों में तोड़फोड़ करने वालों से ही हुए नुकसान की भरपाई कराने संबंधी विधेयक को भी जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। ओवैसी ने इसकी वजह साफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव और SIR को लेकर अपनी अलग मांगें सामने रखीं।

    ‘मैं INDIA का हिस्सा नहीं, तो मेरा क्या काम’
    ओवैसी से जब पूछा गया कि वह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए, तो उन्होंने कहा कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं उसका हिस्सा नहीं हूं, तो किस्सा ही खत्म। मैं उसका हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम।”

    हालांकि, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के बावजूद ओवैसी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था और SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया है।

    CEC के चयन में CJI को शामिल करने की मांग
    ओवैसी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की मौजूदा प्रक्रिया कार्यपालिका के पक्ष में है और इसमें बदलाव होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि CEC की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।

    मौजूदा कानून के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। ओवैसी लंबे समय से इस व्यवस्था में CJI को शामिल किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है।

    SIR को लेकर भी विरोध
    ओवैसी ने दूसरी बड़ी आपत्ति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR शुरू होने के समय AIMIM ने भी इसका विरोध किया था और पार्टी की ओर से मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज जमा किए गए थे।

    ओवैसी ने SIR की तुलना NRC से करते हुए इसे लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करती और इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।

    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। विपक्षी दल प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर इसका बचाव करता रहा है।

    AAP और DMK भी मंगलवार के प्रदर्शन से दूर
    मंगलवार को दिल्ली में हुए INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AAP और DMK भी शामिल नहीं हुए। हालांकि, AAP ने चुनाव आयोग के खिलाफ आगे होने वाले विरोध प्रदर्शन से दूरी नहीं बनाई है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर होने वाले प्रदर्शन में AAP शामिल होगी।

    उन्होंने कहा कि जब भी सड़क पर विरोध प्रदर्शन होगा, AAP के कार्यकर्ता उसमें शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कांग्रेस और वाम दलों के साथ AAP भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेगी।

    राहुल-प्रियंका ने आकाशवाणी भवन परिसर में दिया धरना
    मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रोकना और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करना शामिल था।

    मार्च को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया। करीब आठ-नौ घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

    चुनाव आयोग बोला- शाम 4 बजे तक नहीं मांगा था समय
    विपक्ष के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार रात अपने पक्ष में स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने उसे बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों से बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया पहले से लागू है और सभी दल इससे अवगत हैं।

    आयोग के अनुसार, जब बैठक की जगह को लेकर जानकारी मिली तो संसद भवन परिसर में बैठक का प्रस्ताव सामने आया। आयोग ने कहा कि उसके प्रोटोकॉल के मुताबिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से बैठक निर्वाचन आयोग परिसर में ही होती है। उसने ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का प्रस्ताव भी दिया था।

    इस तरह एक तरफ INDIA गठबंधन CEC के इस्तीफे और SIR को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, वहीं ओवैसी ने गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने और SIR को खत्म करने की अपनी मांग दोहराई है।

  • सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ

    सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन ने मंगलवार को कई घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर राजनीतिक हलचल बनाए रखी। सुबह चुनाव आयोग की ओर मार्च से शुरू हुआ विरोध दोपहर में आकाशवाणी भवन परिसर में धरने में बदल गया और करीब नौ घंटे बाद रात में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया।

    INDIA ब्लॉक के नेता SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने और ज्ञापन सौंपने की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक का समय नहीं मांगा था।

    सुबह 11 बजे शुरू हुआ मार्च
    मंगलवार सुबह INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता मौजूद थे।

    मार्च को संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेता सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन के कारण पार्लियामेंट स्ट्रीट पर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। राहुल गांधी के हाथ में एक तख्ती भी थी, जिस पर लिखा था- “Gyanesh, it’s done bro.” प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें CEC से मिलने दिया जाए।

    बैरिकेड पर चढ़े राहुल, लहराया तिरंगा
    मार्च रोके जाने के दौरान राहुल गांधी एक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर उसे लहराया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को हिरासत में लेना शुरू किया। हालांकि, उस समय राहुल गांधी को हिरासत में नहीं लिया गया था। इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया।

    प्रियंका से बात की और आकाशवाणी भवन पहुंचे
    राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन के परिसर में मौजूद अपनी बहन प्रियंका गांधी से बातचीत की और फिर रिसेप्शन गेट की ओर बढ़ गए। वहां कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी। इसके बाद राहुल गांधी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर चले गए।

    कुछ देर बाद प्रियंका गांधी भी पुलिस की बस से बाहर आईं और अपने भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गईं। दोनों आकाशवाणी भवन के गेट नंबर-4 के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए। देखते ही देखते कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।

    पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना
    राहुल और प्रियंका के धरने की जानकारी फैलते ही आकाशवाणी भवन के आसपास भीड़ बढ़ने लगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य नेता भी वहां पहुंचे। धरने की तैयारी के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मैट और बाद में गद्दे बिछाए गए। राहुल गांधी ज्यादातर समय बैठे रहे, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस अधिकारियों से बातचीत करती रहीं।

    कुछ समय बाद प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और खाने-पीने का सामान भी पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, चिप्स, भुजिया, चॉकलेट, पानी और सॉफ्ट ड्रिंक के पैकेट मंगाए गए। शाम होने के बाद मच्छर भगाने वाली क्रीम भी धरना स्थल तक पहुंचाई गई।

    राहुल ने कहा- जब तक EC नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा
    दोपहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जब तक चुनाव आयोग INDIA ब्लॉक के सांसदों से मिलने का भरोसा नहीं देता, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि देश के साथ जो किया गया है, वह “देशद्रोह” है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

    चुनाव आयोग ने क्या कहा?
    प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया मौजूद है और उसी के तहत आपसी सहमति से समय तय किया जाना चाहिए।

    बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलने की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अपने परिसर में मिलने की बात कही, जबकि विपक्ष की ओर से अलग स्थान पर मिलने का प्रस्ताव रखा गया था।

    शाम ढली, पुलिस ने बढ़ाई कार्रवाई
    शाम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे। पुलिस प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। रात करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पहले कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।

    आखिर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को पुलिसकर्मी बस तक ले जाते नजर आए। इसके बाद दोनों को किंग्सवे कैंप ले जाया गया, जहां कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग में टकराव
    यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद का हिस्सा है। INDIA ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई है। विपक्ष इसी आधार पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

    मंगलवार का घटनाक्रम इस विवाद को लेकर दिल्ली में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव का अब तक का बड़ा प्रदर्शन रहा। सुबह का मार्च, बैरिकेड पर राहुल गांधी का तिरंगा लहराना, आकाशवाणी भवन में अचानक धरना और करीब नौ घंटे बाद नेताओं की हिरासत ने पूरे घटनाक्रम को दिनभर सुर्खियों में बनाए रखा।

  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल

    जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं समस्‍याएं, बोले- भूमाफियाओं पर तुरंत FIR दर्ज कर भेजें जेल


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि हर शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई होगी और किसी भी पीड़ित के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

    जमीन कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
    जनता दर्शन के दौरान जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ी शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भूमाफियाओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही यह भी कहा कि जनता की शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    करीब 150 लोगों की सुनी समस्याएं
    गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने करीब 150 लोगों से मुलाकात की। वे स्वयं प्रत्येक फरियादी के पास पहुंचे, उनकी समस्याएं सुनीं और प्रार्थना पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

    अधिकारियों को दिया निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश
    मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से कहा कि सभी मामलों का निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। अपराध और भूमि कब्जे से जुड़े मामलों में उन्होंने पुलिस को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

    इलाज के लिए आर्थिक सहायता का दिया भरोसा
    चिकित्सा सहायता से जुड़े प्रार्थना पत्रों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अस्पतालों का इस्टीमेट जल्द तैयार कराने को कहा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस्टीमेट मिलते ही सरकार की ओर से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मरीजों के इलाज में कोई देरी न हो।

    बच्चों को दिया आशीर्वाद और चॉकलेट
    जनता दर्शन में कुछ महिलाएं अपने बच्चों के साथ भी पहुंची थीं। मुख्यमंत्री ने बच्चों से स्नेहपूर्वक मुलाकात की, उन्हें चॉकलेट दी और आशीर्वाद भी दिया।

    गोशाला पहुंचकर की गोसेवा
    जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर की गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश को उनके नाम लेकर पुकारा। परिचित आवाज सुनते ही कई गायें उनके पास आ गईं। मुख्यमंत्री ने उन्हें स्नेहपूर्वक दुलार किया, अपने हाथों से गुड़ खिलाया और गोशाला में मौजूद अन्य गायों व नंदी की भी सेवा की। इस दौरान उन्होंने गोशाला के कर्मचारियों को पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।

  • हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

    हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी करने वाले यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी


    हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी में धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादित बयान के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। पंजागुट्टा थाना पुलिस ने यूट्यूबर अन्वेश के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई हिंदू देवी-देवताओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में की गई है।
    पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में अभिनेत्री और भाजपा नेता कराटे कल्याणी की शिकायत पर अन्वेश के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्होंने हिंदू समाज, धार्मिक मान्यताओं, पूजनीय देवी-देवताओं, संस्कृति और परंपराओं के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां कीं, जिससे सांप्रदायिक तनाव फैलने की आशंका बनी।

    जांच अधिकारियों का कहना है कि यह विवाद एक वीडियो के बाद शुरू हुआ। वीडियो में अन्वेश ने अभिनेत्रियों के पहनावे को लेकर तेलुगु अभिनेता शिवाजी की आलोचना की थी।

    इसी दौरान उन्होंने पौराणिक पात्रों सीता और द्रौपदी को लेकर भी टिप्पणी की, जिस पर विभिन्न संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। फिलहाल अन्वेश के देश से बाहर होने की जानकारी मिली है, जिसके चलते उनकी लोकेशन ट्रैक करने और भारत लौटने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।