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  • सावन में आगर-मालवा बना शिवमय, विशाल कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव

    सावन में आगर-मालवा बना शिवमय, विशाल कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव

    मध्य प्रदेश :  के आगर-मालवा में सावन माह के अवसर पर आयोजित विशाल कलश यात्रा में आस्था और श्रद्धा का बड़ा जनसमागम देखने को मिला। विधायक मधु गेहलोत के आह्वान पर आयोजित इस यात्रा में हजारों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर हिस्सा लिया। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और जय भोलेनाथ के जयघोष से शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया।

    विशाल कलश यात्रा की शुरुआत पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर से हुई। यात्रा रवाना होने से पहले यहां धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद महिलाओं और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के साथ यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुई। सावन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी मुख्य आकर्षण रही।

    यात्रा के दौरान आगर-मालवा के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और धार्मिक जयघोषों से वातावरण शिवमय बना रहा। बड़ी संख्या में महिलाओं के सिर पर सजे कलशों ने यात्रा की भव्यता को और बढ़ाया।

    इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी भोपाल से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने कार्यक्रम में शामिल महिलाओं और श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने सावन के दौरान आयोजित इस धार्मिक आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने धार्मिक आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का माध्यम बताते हुए कार्यक्रम से जुड़े श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। वर्चुअल संबोधन के दौरान उन्होंने महिलाओं की बड़ी भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन मौजूदगी से आयोजन को अतिरिक्त महत्व मिला।

    कलश यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रदेश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।

    बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर परिसर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सावन के धार्मिक माहौल में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लोगों में उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के दौरान धार्मिक अनुशासन और सामूहिक भागीदारी के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया।

    आयोजन में जनप्रतिनिधियों के साथ सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों की भी सहभागिता रही। महिलाओं और युवतियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने कलश यात्रा को व्यापक स्वरूप दिया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर सामूहिक आस्था का प्रदर्शन किया।

    सावन के दौरान निकाली गई इस विशाल कलश यात्रा ने आगर-मालवा में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ा। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।

    कार्यक्रम के दौरान शहर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। पुरानी कृषि उपज मंडी से बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर तक निकली यात्रा में श्रद्धालुओं की सहभागिता और जयघोष लगातार सुनाई देते रहे। आयोजन ने सावन की धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक सहभागिता और सामूहिक एकता का संदेश भी प्रस्तुत किया।

  • बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल

    बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल


    मध्यप्रदेश अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने और उसे निजी बैंक खातों में जमा करने के आरोपों ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिन के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी कहां हुई कितनी राशि का मामला है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर के संचालन के लिए पहले से शासकीय प्रबंध समिति मौजूद है जिसके पदेन अध्यक्ष संबंधित एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम से एक निजी समिति बनाई गई। आरोप है कि इस समिति के सदस्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से नकद राशि और चांदी के रूप में दान लेने लगे तथा अपनी अलग रसीदें जारी करते रहे। बताया जा रहा है कि चांदी के अलावा मिलने वाली नकद राशि सरकारी खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की जाती रही।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी समिति के रहते निजी समिति आखिर कैसे बनाई गई और तीन वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उसका संचालन कैसे चलता रहा। शिकायतों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम और बाद में पदस्थ अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस व्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब जांच की आंच केवल समिति तक सीमित नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

    मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों में लगभग 170 श्रद्धालुओं द्वारा चांदी दान किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन उसके बाद कितने लोगों ने दान दिया कितना चढ़ावा आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि समिति का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हालांकि समिति के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी और सहमति से ही समिति का गठन किया गया था तथा उसका विधिवत पंजीयन भी कराया गया था।

    शिकायत के आधार पर गठित जांच समिति कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें गर्भगृह में लगाए गए चांदी के वास्तविक उपयोग की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसे सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सरकारी मंदिर में निजी समिति का गठन नियमों के अनुरूप था या नहीं।

    मां बगलामुखी मंदिर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पहले से 27 सरकारी दान पेटियां और ऑनलाइन दान की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में समानांतर निजी व्यवस्था चलने से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर चढ़ावे के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का।