Tag: Agitation

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम


    नई दिल्ली ।
    देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

    इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

    अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

    संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

    उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

  • भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर देश भर के छात्रों का असंतोष एवं आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेही तय करने और परीक्षार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब अपने अत्यंत नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच, छात्रों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय एक बड़ा संबल मिला जब फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के हक में अपनी आवाज बुलंद की।

    सिनेमाई पर्दे पर ‘सुपर 30’ जैसी शिक्षा केंद्रित फिल्म में एक शिक्षक की जीवंत भूमिका निभाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने सोनम वांगचुक का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और विचारणीय वीडियो साझा किया है। इस डिजिटल संदेश के साथ अभिनेता ने देश के युवा परीक्षार्थियों द्वारा झेले जा रहे अभूतपूर्व मानसिक तनाव और अवसाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि एक शिक्षक के किरदार को जीने के दौरान उन्हें बेहद करीब से यह समझने का अवसर मिला था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के अनिश्चित माहौल में छात्र किस प्रकार के मानसिक आघात और दबाव का सामना करने को विवश हैं।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की सफल फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार का किरदार निभाया था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी बच्चों को आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करते हैं। इस वास्तविक जीवन पर आधारित चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के कारण ही अभिनेता छात्रों की समस्याओं और उनके शैक्षणिक संघर्षों को इतनी संवेदनशीलता और गहराई के साथ महसूस कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस परीक्षा संकट के समय वह मूकदर्शक बने रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    साझा किए गए वीडियो में गंभीर स्वास्थ्य गिरावट के बावजूद बिस्तर पर लेटे हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की सामूहिक अंतरात्मा और जिम्मेदार अधिकारियों पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने अत्यंत क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की इन प्रशासनिक विफलताओं के कारण अब तक लगभग 20 युवा परीक्षार्थी अत्यंत आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो चुके हैं। मेधावी छात्र अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन के अनमोल वर्ष परीक्षाओं की निष्पक्ष तैयारी में लगा देते हैं, लेकिन अंत में उन्हें यह पता चलता है कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया ही लीक या फिक्सिंग की भेंट चढ़ चुकी थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने इस कुप्रथा को पूरे समाज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। उन्होंने सचेत किया कि यदि योग्यता के बजाय नकल और भ्रष्टाचार के माध्यम से अयोग्य लोग चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश पा लेंगे, तो भविष्य में देश के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। यही नियम अभियंताओं और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस बीच, मनोरंजन जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिससे इस छात्र आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय आयाम मिल गया है।