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  • पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया जिले में आयोजित करम उत्सव के एक कार्यक्रम में कुर्मी समुदाय को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2025 के कुर्मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय से किए गए वादों को सरकार पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। आंदोलन के दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुर्मी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक के दौरान भी घोषणा कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कुर्मी समुदाय के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया और समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का काम किया। यह आरोप शुभेंदु अधिकारी की ओर से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कुर्मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी।

    उन्होंने बताया कि समुदाय के विकास के लिए इस वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाने की बात भी कही गई है। सरकार की ओर से कुर्मी समुदाय के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।

    कुर्मी समुदाय की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा शामिल है। समुदाय की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जाता रहा है। इसके अलावा कुर्माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी इससे जुड़े प्रमुख मुद्दों में रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने सत्ता संभालने के बाद कुर्मी समुदाय के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।

    कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों की वापसी की घोषणा के साथ सरकार ने समुदाय के विकास और भाषाई पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख सामने रखा है। हालांकि, मामलों को वापस लेने की घोषणा के बाद संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए इसे लागू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में कुर्मी समुदाय से जुड़े मामलों की वापसी, विकास के लिए बजट प्रावधान और भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिशों का उल्लेख किया गया।

    पुरुलिया में हुई घोषणा के बाद कुर्मी समुदाय से जुड़े पुराने आंदोलन और उसकी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। सरकार के फैसले का केंद्र बिंदु 2025 के आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना है। इसके साथ ही विकास और भाषा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।

    कुर्मी समुदाय के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को आने वाले समय में बढ़ाने की बात भी कही गई है। अब मामलों की वापसी और अन्य घोषणाओं को लागू करने के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, फिर आंदोलन की तैयारी; MPSC अभ्यर्थियों के साथ महाराष्ट्र में उतरेंगे मैदान में

    मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक दीपके और CJP के अन्य नेता महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। पार्टी ने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की भाजपा नीत सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।

    CJP ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि अभिजीत दीपके और पार्टी के अन्य नेता MPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होंगे। इससे पहले कुछ MPSC अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र स्थित दीपके के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी।

    24 सितंबर तक का दिया अल्टीमेटम

    CJP ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। पार्टी के अनुसार यदि 24 सितंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो अभ्यर्थियों से बातचीत के लिए राज्यव्यापी दौरा किया जाएगा।

    MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद जारी वीडियो संदेश में दीपके ने कहा कि वह और CJP अभ्यर्थियों की लड़ाई में उनके साथ हैं और इस्तीफा होने तक उनका समर्थन जारी रहेगा।

    प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद गरमाया मुद्दा

    MPSC परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 28 वर्षीय प्रथमेश देशमुख की पुणे में मौत के बाद यह मुद्दा चर्चा में आया था। उसके पास मिले कथित सुसाइड नोट में करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का उल्लेख था। इसके बाद CJP ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कदम उठाया।

    अभिजीत दीपके ने इसी सप्ताह प्रथमेश देशमुख के परिजनों से भी मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि देशमुख नौकरी हासिल कर परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण अभ्यर्थियों पर दबाव बढ़ रहा है और इसे व्यवस्था की विफलता बताया।

    जंतर-मंतर आंदोलन के बाद फिर सक्रिय CJP

    इससे पहले अभिजीत दीपके दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। करीब एक महीने पहले उन्होंने आंदोलन के ‘सीजन-2’ का संकेत देते हुए कहा था कि देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर फिर आंदोलन शुरू किया जा सकता है।

    मनोज जरांगे को भी दिया समर्थन

    इस बीच दीपके ने महाराष्ट्र में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मनोज जरांगे को भी समर्थन दिया है। वह शुक्रवार को जरांगे से मिलने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार से जरांगे की मांगों पर बातचीत करने की अपील की।

    दीपके ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं के पास दूसरे लोगों से मिलने का समय है, लेकिन जरांगे से बातचीत क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जरांगे के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    CJP के नए ऐलान के बाद MPSC अभ्यर्थियों का आंदोलन और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दीपके की राजनीतिक सक्रियता आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सीजेपी ने दिया दो दिनों में दूसरा अल्टीमेटम


    नई दिल्ली ।
    देश में पेपर लीक मामले को लेकर पिछले दिनों चले बड़े जनांदोलन के बाद एक बार फिर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन की आहट तेज हो गई है। जंतर-मंतर से संसद तक चले प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने केंद्र सरकार को दो दिनों के भीतर दूसरी बार कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन का साफ कहना है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज पुलिस मुकदमे तुरंत वापस नहीं लिए गए, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

    इस पूरे विवाद की ताजा वजह सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई बनी है। शीर्ष अदालत की चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर हुए पुलिस बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर विचार करते हुए पुलिस को मौजूदा प्राथमिकियों की जांच जारी रखने की इजाजत दी है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन युवाओं का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्होंने केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और हिरासत में लिए गए ऐसे निर्दोष लोगों को रिहा किया जाए।

    अदालत के इस रुख के सामने आते ही सीजेपी ने केंद्र सरकार पर अपनी सहमति और लिखित आश्वासनों से पीछे हटने का बड़ा आरोप लगाया है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि पच्चीस जुलाई को सरकार के साथ हुई वार्ता के दौरान यह लिखित भरोसा दिया गया था कि सभी प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले पूरी तरह रद्द किए जाएंगे और किसी भी छात्र के खिलाफ आगे कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसी ठोस आश्वासन के आधार पर ही राष्ट्रव्यापी आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया गया था।

    संगठन का आरोप है कि अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी तंत्र ने प्राथमिकियों को बनाए रखने का कड़ा विरोध नहीं किया, जिससे अब भाजपा शासित राज्यों की पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर शिकंजा कसने का रास्ता मिल गया है। अगर सरकार की मंशा साफ होती, तो वह अपने प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकती थी। सरकार का यह ढुलमुल रवैया लाखों युवाओं के भविष्य और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

    उल्लेखनीय है कि जून महीने में नई दिल्ली में शुरू हुआ यह आंदोलन जुलाई के मध्य तक बेहद उग्र रूप ले चुका था। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भारी झड़प में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति बिगड़ती देख सरकार ने दो दौर की द्विपक्षीय बातचीत की थी, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके अलावा मृतक छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अभयदान देने का समझौता हुआ था। अब उस समझौते के टूटने की आशंका ने एक बार फिर देश के युवाओं और छात्रों को उद्वेलित कर दिया है।

  • भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर देश भर के छात्रों का असंतोष एवं आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेही तय करने और परीक्षार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब अपने अत्यंत नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच, छात्रों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय एक बड़ा संबल मिला जब फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के हक में अपनी आवाज बुलंद की।

    सिनेमाई पर्दे पर ‘सुपर 30’ जैसी शिक्षा केंद्रित फिल्म में एक शिक्षक की जीवंत भूमिका निभाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने सोनम वांगचुक का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और विचारणीय वीडियो साझा किया है। इस डिजिटल संदेश के साथ अभिनेता ने देश के युवा परीक्षार्थियों द्वारा झेले जा रहे अभूतपूर्व मानसिक तनाव और अवसाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि एक शिक्षक के किरदार को जीने के दौरान उन्हें बेहद करीब से यह समझने का अवसर मिला था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के अनिश्चित माहौल में छात्र किस प्रकार के मानसिक आघात और दबाव का सामना करने को विवश हैं।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की सफल फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार का किरदार निभाया था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी बच्चों को आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करते हैं। इस वास्तविक जीवन पर आधारित चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के कारण ही अभिनेता छात्रों की समस्याओं और उनके शैक्षणिक संघर्षों को इतनी संवेदनशीलता और गहराई के साथ महसूस कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस परीक्षा संकट के समय वह मूकदर्शक बने रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    साझा किए गए वीडियो में गंभीर स्वास्थ्य गिरावट के बावजूद बिस्तर पर लेटे हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की सामूहिक अंतरात्मा और जिम्मेदार अधिकारियों पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने अत्यंत क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की इन प्रशासनिक विफलताओं के कारण अब तक लगभग 20 युवा परीक्षार्थी अत्यंत आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो चुके हैं। मेधावी छात्र अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन के अनमोल वर्ष परीक्षाओं की निष्पक्ष तैयारी में लगा देते हैं, लेकिन अंत में उन्हें यह पता चलता है कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया ही लीक या फिक्सिंग की भेंट चढ़ चुकी थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने इस कुप्रथा को पूरे समाज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। उन्होंने सचेत किया कि यदि योग्यता के बजाय नकल और भ्रष्टाचार के माध्यम से अयोग्य लोग चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश पा लेंगे, तो भविष्य में देश के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। यही नियम अभियंताओं और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस बीच, मनोरंजन जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिससे इस छात्र आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय आयाम मिल गया है।