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  • भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड, 225 तक हथियार बनाने की क्षमता, जल-थल-नभ से जवाब देने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन और पाकिस्तान की ओर से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं में इजाफा कर रहा है. भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक नई रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे किए गए हैं.

    भारत के पास 190 न्यूक्लियर वॉरहेड

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब करीब 190 परमाणु वॉरहेड मौजूद हैं. भारत ने अपने एटमी पावरबैंक को बेहद एडवांस और पावरफुल बना लिया है. रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के पास करीब 140 से 225 परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में ‘वेपन-ग्रेड प्लूटोनियम’ (परमाणु ईंधन) तैयार हो चुका है. इसमें भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के ध्रुव रिएक्टर की अहम भूमिका रही है.

    नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब 3 तरीके (न्यूक्लियर ट्रायड) से परमाणु हमला करने वाले 9 अलग-अलग सिस्टम पूरी तरह तैयार और चालू हैं. भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 और जगुआर लड़ाकू विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और सटीक निशाना लगाने के लिए आधुनिक एविओनिक्स से लैस रखा गया है.

    वहीं, अग्नि सीरीज (अग्नि-1 से लेकर अग्नि-5) और पृथ्वी मिसाइलें भारत की जमीन से मार करने वाली बड़ी ताकत हैं. अग्नि-5 की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है, जो पूरे एशिया और चीन के दूर के हिस्सों तक मार कर सकती है. इसके अलावा रिपोर्ट्स ये भी हैं कि भारत अग्नि 6 मिसाइल भी बना रहा है, जिसकी रेंज 12000 किलोमीटर तक है. इसके अलावा ब्रह्मोस सुपरसॉनिक मिसाइलों को भी न्यूक्लियर वॉरहेड से लैस किया जा सकता है.

    समुद्र से भी मार कर सकता है भारत

    इसके अलावा समुद्र में भी दुश्मनों पर हमला करने के लिए भारत ने कमर कस रखी है. भारत की स्वदेशी एटमी एनर्जी से चलने वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत और इस कैटेगरी की अन्य पनडुब्बियां समुद्र की गहराइयों में तैनात रहकर दुश्मन पर दूसरा जवाबी हमला करने की काबिलियत रखती हैं.

    इतन ही नहीं, अब भारत अपनी मिसाइलों को स्पेशल सीलबंद डिब्बों (कैनिस्टर) में रख रहा है. वहां ये लंबे वक्त तक सुरक्षित रहती हैं. इससे इन्हें सड़क या रेल मार्ग से कहीं भी ले जाना बेहद आसान होता है, और हमले का आदेश मिलते ही इन्हें कुछ ही मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है.

    कई शहरों पर गिराए जा सकते हैं परमाणु बम!

    इसके अलावा, भारत Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle तकनीक पर भी काम कर रहा है, जिससे एक ही मिसाइल से एक साथ अलग-अलग शहरों या ठिकानों पर कई परमाणु बम गिराए जा सकते हैं.

    हालांकि, भारत सरकार अपने परमाणु हथियारों के बारे में कभी कोई आधिकारिक बयान नहीं देती. लेकिन DRDO अक्सर उन हथियारों के बारे में जानकारी देता है, जिन्हें वह विकसित कर रहा है. भारत की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज की है. यानी भारत खुद से पहले दुश्मन पर न्यूक्लियर अटैक नहीं करेगा. लेकिन अगर दुश्मन हिमाकत करता है तो भारत के 190 परमाणु हथियार दुनिया के नक्शे से दुश्मन देश का सफाया कर देंगे.

  • खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    नई दिल्ली । खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केवल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई लोग मानते हैं कि सकारात्मक वातावरण और ऊर्जा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या प्रशिक्षण स्थल की दिशाओं का संतुलन व्यक्ति के आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार ये तीनों दिशाएं मिलकर अग्नि तत्व का क्षेत्र बनाती हैं। अग्नि तत्व को ऊर्जा, उत्साह, साहस और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि यह क्षेत्र संतुलित और दोषमुक्त हो तो खिलाड़ी के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है और वह अपने लक्ष्य पर अधिक एकाग्रता के साथ काम कर पाता है। इससे मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साहस और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा का संतुलित होना खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में बैठकर भोजन करना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जाती है।

    दक्षिण दिशा को यश, सम्मान और पहचान की दिशा माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यदि इस दिशा में किसी प्रकार का दोष हो तो व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता या पहचान मिलने में कठिनाई आ सकती है। वहीं यदि यह दिशा संतुलित रहे तो खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ सामाजिक सम्मान और पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ने की बात कही जाती है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं।

    दक्षिण-पूर्व दिशा को संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संतुलन व्यक्ति को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    अग्नि कोण में रसोई का होना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व के स्वाभाविक स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। वहीं इस क्षेत्र में जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं, अत्यधिक नीले या काले रंग का उपयोग तथा अनावश्यक पानी की व्यवस्था करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यताओं के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    वास्तु शास्त्र को मानने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा या पेशेवर खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें अपने घर या अभ्यास स्थल की इन दिशाओं को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तुदोष से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि खेलों में सफलता का सबसे बड़ा आधार नियमित अभ्यास, अनुशासन, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ही है, जबकि वास्तु संबंधी उपाय व्यक्तिगत आस्था और मान्यता का विषय हैं।