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  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि सरकार इन सभी समझौतों की जांच कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि समीक्षा के बाद कुछ फैसलों का असर जल्द सामने आ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन समझौतों में बदलाव किया जाएगा और किन्हें समाप्त करने पर विचार होगा।

    नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।

    BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।

    भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।

    हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।

    इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।

    ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।

    फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।

  • वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील

    वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल पर अमेरिका की नजर, ट्रंप बोले- यह दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल डील


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक ऐसा समझौता किया है, जिसके तहत करीब 65 अरब बैरल तेल भंडार पर अमेरिका का नियंत्रण होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस समझौते की जानकारी दी और इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील बताया।

    ट्रंप के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है- जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!”

    मादुरो की गिरफ्तारी के बीच हुआ ऐलान

    अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था। इसके बाद मादुरो पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी से जुड़े संघीय आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी।

    इस बीच अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर ट्रंप प्रशासन पर दबाव भी बढ़ रहा है। ईरान में करीब छह महीने से युद्ध जारी है और फिलहाल इसके खत्म होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे हालात में अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल किया है। अगस्त की शुरुआत तक इस भंडार में 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था।

    मादुरो को हटाने के बाद वेनेजुएला पर बढ़ा फोकस

    जनवरी में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को दोबारा वेनेजुएला भेजने और वहां मौजूद तेल भंडार का इस्तेमाल करने की बात कही थी।

    ट्रंप का आरोप रहा है कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था। उनका तर्क था कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेशी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था, जिनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थीं।

    303 अरब बैरल का भंडार, फिर भी उत्पादन सिर्फ 1%

    वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। अनुमान के मुताबिक देश की जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक यह दुनिया के कुल तेल भंडार का करीब 17% है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के कई हिस्सों में बिना इस्तेमाल हुए तेल की खोज अभी भी जारी रहती है, जबकि वेनेजुएला के भूमिगत तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही चिन्हित किया जा चुका है और उसके बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    हालांकि, कमजोर बुनियादी ढांचे और अन्य समस्याओं के कारण इतना बड़ा भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला दुनिया के कुल तेल उत्पादन का सिर्फ 1% ही उत्पादन कर पाता है।