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  • बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग

    बड़ा तालाब संरक्षण के नाम पर जमीन छिनने का डर, भोपाल में किसानों की पदयात्रा, BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग


    नई दिल्ली। भोपाल मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध तेज होने लगा है। प्रस्तावित योजना में 66 गांवों की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव किए जाने की आशंका से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि खेती की जमीन को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने का प्रस्ताव उनकी आजीविका पर असर डाल सकता है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने अपनी जमीन बचाने और प्रस्तावित बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए पदयात्रा शुरू की। किसान मुगालिया छाप से नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने नीलबड़ में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। पुलिस की ओर से पहले से व्यवस्था किए जाने की वजह यह बताई गई कि पिछली बार किसान भोपाल शहर तक पहुंच गए थे।

    किसानों की मुख्य मांग है कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग पहले की तरह खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि जिस जमीन पर किसान वर्षों से खेती कर रहे हैं उसी से उनके परिवारों का भरण पोषण होता है। यदि इन जमीनों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में शामिल कर दिया गया तो खेती करने और भविष्य में जमीन का उपयोग करने को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। इसलिए मास्टर प्लान में कोई भी बदलाव करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनी जानी चाहिए।

    किसान अनोखी सिंह पटेल ने आरोप लगाया कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि का लैंडयूज बदलने का प्रस्ताव किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि वे बड़ा तालाब के संरक्षण के महत्व को समझते हैं लेकिन इसके नाम पर कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से पहले स्थानीय लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्षों से खेती कर रहे परिवारों के भविष्य को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। इसी वजह से किसान प्रस्तावित ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि निर्धारित था। इसके बाद वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया। अब मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव की आशंका को लेकर किसान विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि नई योजना तैयार करते समय पुराने प्रावधानों और किसानों की आजीविका पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

    किसानों ने भोजताल संरक्षण जोन-1 यानी BIZ-1 और जोन-2 यानी BIZ-2 को हटाने की मांग भी उठाई है। किसान अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक खेती उनकी आय का प्रमुख स्रोत है और कृषि भूमि का उपयोग कृषि के लिए ही बनाए रखना जरूरी है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीनों को दूसरी श्रेणियों में शामिल किया जाता है तो उनके सामने भविष्य में कई तरह की व्यावहारिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार किया जाए और उनकी आपत्तियों का उचित समाधान निकाला जाए।

    किसानों का एक बड़ा सवाल ग्रामसभाओं में सहमति लेने को लेकर भी है। उनका आरोप है कि वर्ष 2031 के मास्टर प्लान की प्रक्रिया के दौरान नए ड्राफ्ट को तैयार करने में पंचायतों से सहमति लेने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मौजूदा प्रस्ताव में संबंधित गांवों की सहमति नहीं ली गई। किसान चाहते हैं कि पहले सभी 66 गांवों में ग्रामसभाएं आयोजित की जाएं और प्रस्तावित भू-उपयोग पर विस्तार से चर्चा हो। उनका कहना है कि किसानों की समस्याएं और आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल मास्टर प्लान को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है और वे अपनी मांगों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें

    जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें


    मध्यप्रदेश । देवास जिले के सोनकच्छ थाना क्षेत्र के देवगुराड़िया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। खेत बखरने के दौरान हुए इस विवाद में डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    घायलों की पहचान निर्भय गुर्जर, जितेंद्र गुर्जर और शांतिलाल गुर्जर के रूप में हुई है। पीड़ितों के अनुसार वे अपने खेत में बखरने का कार्य कर रहे थे, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन पर डंडों तथा धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

    घायलों ने आरोप लगाया कि आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और इसी विवाद के चलते हमला किया गया। शांतिलाल गुर्जर का कहना है कि वह विवाद शांत कराने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और मारपीट कर घायल कर दिया।

    हमले में तीनों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इनमें एक घायल के सिर पर 20 से अधिक टांके लगाने पड़े। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने खेत में खड़े ट्रैक्टर में तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।