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  • शिवपुरी में डीएपी खाद की बड़ी खेप जब्त: 79 बोरी अवैध परिवहन करते पकड़े गए दो आरोपी, FIR दर्ज

    शिवपुरी में डीएपी खाद की बड़ी खेप जब्त: 79 बोरी अवैध परिवहन करते पकड़े गए दो आरोपी, FIR दर्ज


    मध्‍यप्रदेश । शिवपुरी जिले में कृषि विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने डीएपी खाद के अवैध परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 79 बोरी खाद जब्त की है। कार्रवाई के दौरान दो व्यक्तियों को बिना वैध दस्तावेजों के खाद का परिवहन करते हुए पकड़ा गया। मामले में कृषि विभाग की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार निगरानी अभियान चला रहा है। इसी क्रम में तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा के निर्देश पर कृषि, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने फतेहपुर रोड स्थित गीता पब्लिक स्कूल के समीप विशेष जांच अभियान चलाया। रात करीब 9:15 बजे टीम ने संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान ग्राम बलेरा निवासी राजेश यादव के मैसी ट्रैक्टर को रोका गया। तलाशी लेने पर ट्रैक्टर में आईपीएल कंपनी की डीएपी खाद की 47 बोरियां मिलीं। इसके बाद टीम ने भोगरीपुरा निवासी अभिषेक रावत के महिंद्रा पिकअप वाहन की जांच की, जिसमें 32 बोरियां डीएपी खाद बरामद हुईं। दोनों वाहनों से कुल 79 बोरी खाद जब्त की गई।

    अधिकारियों ने मौके पर दोनों आरोपियों से खाद खरीदने और परिवहन करने से संबंधित बिल, रसीद, ई-टोकन अथवा अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि, दोनों ही व्यक्ति कोई दस्तावेज नहीं दिखा सके। पूछताछ में उन्होंने दावा किया कि खाद किसी किसान से खरीदी गई है, लेकिन इस संबंध में भी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक का बिना दस्तावेज परिवहन गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है। कृषि विभाग की टीम ने मौके पर पंचनामा तैयार किया और खाद के नमूने भी लिए। इसके बाद पूरी खेप को पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

    कृषि विभाग का कहना है कि बिना वैध दस्तावेजों के उर्वरक का भंडारण, परिवहन अथवा बिक्री करना उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत दंडनीय अपराध भी माना जाता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

    वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने राजेश यादव और अभिषेक रावत के खिलाफ उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाद कहां से लाई गई थी और इसे किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के लिए निर्धारित उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध परिवहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

  • खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी

    खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त: सूचना देने पर मिलेगा ₹1000 का इनाम, हेल्पलाइन जारी


    मध्‍य प्रदेश । खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक नई पहल की है। खाद की कालाबाजारी, नकली उर्वरकों की बिक्री, अधिक कीमत वसूली और अवैध भंडारण जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने पूरे प्रदेश में “इन्फॉर्मर इंसेंटिव स्कीम” लागू की है। इस योजना के तहत ऐसी गतिविधियों की सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जांच में शिकायत सही पाए जाने पर ₹1000 का प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

    कृषि विभाग का मानना है कि खरीफ मौसम में उर्वरकों की मांग बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी और अनियमितताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। ऐसे में आम नागरिकों और किसानों की भागीदारी से निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सरकार ने लोगों को सीधे सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।

    योजना के तहत किसान, आम नागरिक, व्यापारी या कोई भी व्यक्ति खाद से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी विभाग को दे सकता है। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन भी दिया गया है ताकि लोग बिना किसी डर के शिकायत दर्ज करा सकें। शिकायतें मुख्यमंत्री किसान हेल्पलाइन नंबर 155253 पर दर्ज कराई जा सकती हैं। यह हेल्पलाइन कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सक्रिय रहेगी।

    कृषि विभाग के अनुसार सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई जाएगी। कलेक्टर के निर्देशन में गठित टीम शिकायत की सत्यता की पुष्टि करेगी। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है और संबंधित मामले में जब्ती, कार्रवाई या दोष सिद्ध होता है, तो सूचना देने वाले व्यक्ति को ₹1000 की प्रोत्साहन राशि सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाएगी।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रावधान कृषि वर्ष 2026-27 के बजट से किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पहल से खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो सकेंगे।

    इसी बीच खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर प्रदेश में खाद वितरण और बिक्री में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि कई जिलों से किसानों और किसान संगठनों की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें डीएपी, एसएसपी और अन्य उर्वरकों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक दरों पर बेचे जाने के आरोप लगाए गए हैं।

    पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर पुराने स्टॉक की खाद को नई बढ़ी हुई दरों पर बेचा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि पूरे प्रदेश में खाद वितरण व्यवस्था की विशेष जांच कराई जाए, किसानों से कथित रूप से अधिक वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

    खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता और मूल्य नियंत्रण को लेकर सरकार और प्रशासन की निगरानी अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में इस योजना के परिणाम किसानों और कृषि क्षेत्र पर सीधे प्रभाव डाल सकते हैं।

  • खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली

    खाली कुर्सियों से कैसे होगा किसान कल्याण, जीतू पटवारी का पीएम मोदी को पत्र, MP के कृषि विभाग में हजारों पद खाली


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में कृषि व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर राज्य के कृषि और उससे जुड़े विभागों में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाया है। पटवारी ने मुख्यमंत्री Mohan Yadav द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है, तब केवल घोषणाओं से किसानों का भला संभव नहीं है।

    अपने पत्र में पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकारी उदासीनता के कारण प्रदेश का कृषि तंत्र कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए जो प्रशासनिक ढांचा होना चाहिए, वह ही अधूरा पड़ा है। ऐसे में “कृषक कल्याण वर्ष” जैसी घोषणाएं जमीन पर प्रभावी साबित नहीं होंगी।

    पटवारी ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में कुल 14,537 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 8,468 पद खाली पड़े हैं। यानी विभाग का लगभग 60 प्रतिशत स्टाफ मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पद रिक्त होने से किसानों तक सरकारी योजनाएं सही तरीके से नहीं पहुंच पा रही हैं।

    उन्होंने खास तौर पर ‘ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी’ जैसे अहम पदों का जिक्र करते हुए कहा कि इनकी कमी के कारण खेत स्तर पर किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है। साथ ही फसल नुकसान का सर्वे, मृदा परीक्षण और Soil Health Card Scheme जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन भी प्रभावित हो रहा है।

    पटवारी ने अपने पत्र में कृषि से जुड़े अन्य विभागों की स्थिति भी सामने रखी।

    उनके अनुसार उद्यानिकी विभाग में 3,079 पदों में से 1,459 पद खाली हैं, जो लगभग 47 प्रतिशत हैं। मत्स्य पालन विभाग में 1,290 पदों में से 722 पद रिक्त हैं। पशुपालन एवं डेयरी विभाग में 7,992 पदों में से 1,797 पद खाली बताए गए हैं। इसके अलावा खाद्य विभाग के जिला कार्यालयों में 598 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 245 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं कृषि अभियांत्रिकी विभाग में 1,065 पदों में से 557 पद खाली पड़े हैं।

    इस मुद्दे पर पटवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चौहान लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संस्थागत ढांचे पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

    पटवारी के अनुसार वर्तमान सरकार भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी व्यवस्था कमजोर बनी हुई है।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया कि मध्य प्रदेश के कृषि और उससे जुड़े विभागों में खाली पदों की तत्काल समीक्षा कराई जाए और राज्य सरकार को जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कृषि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए जमीनी स्तर पर संस्थागत क्षमता बढ़ाने की राष्ट्रीय रणनीति तैयार करने की भी मांग की।

    पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि मध्य प्रदेश का किसान पहले ही मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे में सरकारी विभागों में खाली पदों की वजह से उसे आवश्यक सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और किसानों के हित में ठोस कदम उठाएगी।

    पटवारी द्वारा भेजे गए इस पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी भेजी गई है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में कृषि व्यवस्था और सरकारी भर्तियों को लेकर बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश

    भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश


    भोपाल। प्रदेश में पराली जलाने वालों पर प्रशासन की सख्ती बढ़ने वाली है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह संकेत शुक्रवार को बैरसिया के दौरे के दौरान दिए। उन्होंने एसडीएम आशुतोष शर्मा को निर्देश दिए कि गेहूं और चने की कटाई के बाद कृषि विभाग के साथ गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करें। किसानों को बताया जाए कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है।

    कलेक्टर ने बैरसिया तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का निरीक्षण किया और कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर असंतोष जताया और तहसीलदार को निर्देश दिए कि ग्रामवार कार्यक्रम बनाकर पटवारियों को सक्रिय किया जाए ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके।

    कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के समय पर निराकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े प्रकरणों का समय सीमा में शत-प्रतिशत निपटारा किया जाए और बैरसिया तहसील का प्रदर्शन राज्य औसत से कम न हो।

    दौरे के दौरान कलेक्टर ने नगर पालिका बैरसिया के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। प्रभारी सीएमओ ने जानकारी दी कि नगर में अमृत 2.0 और कायाकल्प योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य जारी हैं। कलेक्टर ने बसई तालाब के पास माड़ा इमली क्षेत्र और तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब की जल ग्रहण क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएं और जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि वर्षा ऋतु में तालाब अपनी पूरी क्षमता के अनुसार जल संचय कर सके।

    इस अवसर पर एसडीएम शर्मा ने अपने कार्यालय परिसर में विकसित पार्क का भी निरीक्षण कराया, जिसमें फूल, फल और छायादार पौधे लगाए गए हैं। इसे देखकर कलेक्टर ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के पहल से स्थानीय पर्यावरण और हरियाली बढ़ेगी।

    कलेक्टर का यह दौरा यह संदेश देता है कि कृषि और नगर विकास दोनों क्षेत्रों में सरकारी सक्रियता जारी रहेगी। किसानों को पर्यावरणीय दृष्टि से जागरूक करना, तालाबों और जल स्रोतों का संरक्षण, और स्थानीय विकास परियोजनाओं का समय पर निरीक्षण प्रशासन की प्राथमिकता बनेगा।

  • मुख्यमंत्री के निर्देश पर उज्जैन में फसलों के नुकसान का आंकलन शुरू

    मुख्यमंत्री के निर्देश पर उज्जैन में फसलों के नुकसान का आंकलन शुरू


    उज्जैन । मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में बेमौसम हुई बारिश को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले सहित प्रदेश के सभी जिलों में क्षतिग्रस्त फसलों का आंकलन करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के इस कदम का उद्देश्य किसानों को हुए नुकसान का सही आंकलन कर राहत एवं समर्थन उपलब्ध कराना है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि विगत दिनों मौसम परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण फसलों को हुई क्षति की सूचनाओं को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्र में नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कृषि अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हर प्रभावित किसान तक सही जानकारी और मदद पहुंच सके।

    कलेक्टर ने बताया कि फसल नुकसान की समीक्षा के लिए जिले में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो खेतों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का पता लगा रही हैं। साथ ही किसानों के साथ संवाद कर उन्हें राहत योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकलन जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता दी जा सके।

    स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और पानी की अधिकता के कारण गेहूं, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से निर्देश दिए हैं कि नुकसान का आंकलन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कहा है कि किसी भी किसान को अपने फसल नुकसान के कारण आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए जिला प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रहने और सभी प्रभावित किसानों तक राहत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

    इस निर्देश के बाद उज्जैन जिले में कृषि विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ गया है। अधिकारी किसानों से लगातार संपर्क में हैं और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास कर रहे हैं।

  • सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ

    सीहोर 2026 में होगा ‘कृषि वर्ष’, किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने सड़कों पर उतरेगा कृषि रथ


    सीहोर । सीहोर जिले में वर्ष 2026 को विशेष रूप से ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और नवाचारों की सीधी जानकारी देने के उद्देश्य से जिलेभर में कृषि रथ अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान रबी सीजन के दौरान जिले के हर विकासखंड में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।

    मंगलवार को कलेक्टर बालागुरु के. ने कृषि विभाग के अधिकारियों को राज्य शासन के निर्देशों के अनुरूप कृषि रथों के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की ओर प्रेरित करना है।

    कृषि रथ बताएगा खेती के नए रास्ते
    कृषि रथ के माध्यम से किसानों को जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, उन्नत बीजों का चयन, कीट एवं रोग प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके साथ ही फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्यमिता, ई-तकनीक से जुड़ी योजनाएं और पराली प्रबंधन जैसे अहम विषयों पर भी मार्गदर्शन किया जाएगा।

    अभियान की शुरुआत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कृषि रथों को हरी झंडी दिखाकर की जाएगी, जिससे गांव-गांव तक इसका प्रभावी संदेश पहुंचे।

    जिला और ब्लॉक स्तर पर होगी सख्त निगरानी
    अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में और विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अध्यक्षता में विशेष क्रियान्वयन समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां रथों के संचालन, कार्यक्रमों की रूपरेखा और पूरे अभियान की निगरानी करेंगी।

    तकनीकी विशेषज्ञ देंगे मौके पर समाधान
    प्रत्येक कृषि रथ के साथ एक तकनीकी दल रहेगा, जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे।

    यह दल गांवों में जाकर किसानों की समस्याएं सुनेगा और उन्हें मौके पर ही आधुनिक कृषि समाधान उपलब्ध कराएगा।

    कृषि रथ अभियान की दैनिक प्रगति की जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से किसानों की आय में वृद्धि होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और जिले में नवाचार आधारित खेती को नई दिशा मिलेगी।

    कृषि वर्ष 2026 सीहोर के किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और समृद्धि का नया अध्याय साबित होने की उम्मीद है।