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  • भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन

    भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन


    नई दिल्ली । दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आने वाले वर्षों में भी अपनी विकास गति बनाए रखेगा। चीन के डालियान शहर में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग यानी समर दावोस में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कृषि और टेक्नोलॉजी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत न केवल वैश्विक विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान देगा बल्कि नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के जरिए नई आर्थिक संभावनाओं का केंद्र भी बनेगा।

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने भारत को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ती रहेगी। उनके अनुसार भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन चुका है और इसकी विकास यात्रा दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    डुसेक ने कहा कि समर दावोस का उद्देश्य दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगी बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास को भी नई दिशा देंगी।

    वहीं पद्मश्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर रतन लाल ने भारत की कृषि क्षमता को देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी।

    प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना और भूमि के टिकाऊ प्रबंधन को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकें भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, सस्ती और सटीक हो सकेगी। इससे किसानों को अपनी जमीन और फसल की जरूरतों के अनुरूप सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, तकनीकी नवाचार और मजबूत कृषि आधार देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समर दावोस में हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार केवल उद्योग और सेवाएं नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक से सशक्त कृषि भी होगी। यही संयोजन भारत को आने वाले दशक में वैश्विक विकास का सबसे बड़ा केंद्र बना सकता है।

  • लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर

    लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली :भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में किसानों की आय को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया जिसमें यह पूछा गया कि क्या सरकार अपने उस लक्ष्य में सफल रही है जिसमें किसानों की आय को दोगुना करने की बात कही गई थी इस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विस्तार से जवाब दिया और सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभाव को सामने रखा

    सरकार की ओर से बताया गया कि कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना लागत कम करना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है सरकार ने यह भी बताया कि कृषि बजट में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है वर्ष 2013 14 में यह बजट 21 हजार करोड़ रुपये के आसपास था जो अब बढ़कर वर्ष 2025 26 में एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है

    सरकार ने यह भी दावा किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हजारों किसानों की सफल कहानियों का संकलन तैयार किया है जिसमें लगभग 75 हजार किसानों की आय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दोगुनी या उससे अधिक होने का उल्लेख किया गया है ये कहानियां कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती हैं

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार किसान परिवारों की औसत मासिक आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है वर्ष 2012 13 में यह आय लगभग 6426 रुपये थी जो वर्ष 2018 19 में बढ़कर 10218 रुपये हो गई इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि किसानों की आय में लगातार सुधार हुआ है हालांकि यह वृद्धि सभी किसानों के लिए समान नहीं है

    इसके अलावा उपभोग व्यय के आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक उपभोग व्यय 1430 रुपये से बढ़कर 4122 रुपये हो गया है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2630 रुपये से बढ़कर 6996 रुपये तक पहुंच गया है यह वृद्धि आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार को दर्शाती है

    सरकार ने किसानों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं भी लागू की हैं जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता बीमा सुरक्षा और पेंशन सुविधा दी जा रही है

    कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार किसानों की आत्महत्या से संबंधित आंकड़ों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के माध्यम से संकलित करती है और इन आंकड़ों को नियमित रूप से प्रकाशित किया जाता है राज्यों द्वारा प्रभावित परिवारों को राहत राशि भी प्रदान की जाती है

    सरकार का कहना है कि फसल विविधीकरण ड्रोन तकनीक प्राकृतिक खेती और कृषि स्टार्टअप जैसे कार्यक्रमों से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं बन रही हैं और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है

     सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं बजट वृद्धि और तकनीकी सुधार के माध्यम से किसानों की आय में सुधार हुआ है हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी इस दिशा में और प्रयासों की आवश्यकता है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके