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  • फार्मर आईडी और सर्वर डाउन से अटकी खाद बुकिंग, सीहोर में बढ़ी मुश्किलें

    फार्मर आईडी और सर्वर डाउन से अटकी खाद बुकिंग, सीहोर में बढ़ी मुश्किलें


    सीहोर। सीहोर जिले में खाद वितरण की नई ई-टोकन व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। सरकार द्वारा खाद वितरण को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिए जाने और इसे फार्मर आईडी से जोड़ने के बाद किसानों को खाद खरीदने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब किसान सीधे दुकानों से खाद नहीं खरीद सकते, बल्कि उन्हें पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी अनिवार्य कर दी गई है।

    इस बदलाव से जिले के किसान नाराज हैं और वे खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अधिकांश के पास अभी तक फार्मर आईडी नहीं बनी है, जिसके कारण वे खाद बुक करने से वंचित रह जा रहे हैं। उनका आरोप है कि बिना तैयारी के इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया, जिससे खेती के सीजन में उन्हें भारी संकट झेलना पड़ रहा है।

    खरीफ फसलों की बुवाई का समय नजदीक होने से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसान अपनी पुरानी उपज बेचकर खेतों की तैयारी कर चुके हैं और अब मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में खाद की तत्काल आवश्यकता होगी, लेकिन नई प्रणाली ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    किसानों का कहना है कि उनके खसरे आधार से लिंक नहीं हैं और कई खातों की केवाईसी भी पूरी नहीं हो पाई है। उनका तर्क है कि पहले सभी किसानों को फार्मर आईडी उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, उसके बाद ही इस तरह की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए थी।

    जिले में करीब 1 लाख 45 हजार किसानों में से केवल 13,445 किसानों ने ही अब तक फार्मर आईडी बनवाई है, जिससे साफ है कि बड़ी संख्या में किसान अभी भी सिस्टम से बाहर हैं। इसके अलावा, तकनीकी समस्याएं भी लगातार सामने आ रही हैं। कई बार सर्वर डाउन होने के कारण ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो पा रही, जिससे किसान पर्ची जनरेट नहीं कर पा रहे हैं।

    किसानों की एक और समस्या यह है कि पर्ची जनरेट होने के बाद भी कई बार सोसायटियों में खाद उपलब्ध नहीं होता। निर्धारित समय में खाद न मिलने पर पर्ची स्वतः समाप्त हो जाती है, जिससे किसानों को दोबारा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

    हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था खाद की कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए लागू की गई है। डीडीए अशोक उपाध्याय के अनुसार, किसान अब घर बैठे खाद बुक कर सकते हैं और लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने बताया कि गांव-गांव में फार्मर आईडी बनाने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था से जुड़ सकें।

  • मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी ने पकड़ी रफ्तार लाखों किसानों को मिल रहा समर्थन मूल्य का लाभ

    मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी ने पकड़ी रफ्तार लाखों किसानों को मिल रहा समर्थन मूल्य का लाभ


    भोपाल । मध्यप्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं उपार्जन का कार्य अब पूरी रफ्तार से शुरू हो गया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के सभी संभागों में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू कर दी गई है और किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

    अब तक प्रदेश में 42 हजार 689 किसानों से 18 लाख 97 हजार 480 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। इसके बदले किसानों को 28 करोड़ 40 लाख रुपए की राशि उनके बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

    मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि बड़ी संख्या में किसान गेहूं विक्रय के लिए आगे आ रहे हैं। अब तक 2 लाख 58 हजार 644 किसानों द्वारा 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार 407 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसान 24 अप्रैल 2026 तक स्लॉट बुक कर सकते हैं।

    प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इन केंद्रों पर छायादार बैठने की व्यवस्था, पेयजल, तौल कांटे, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और सफाई की सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    सरकार द्वारा इस वर्ष किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जा रहा है। यह कदम किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भंडारण और परिवहन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है। अब तक 8 लाख 65 हजार 600 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है और सुरक्षित भंडारण के लिए जूट और पीपी बैग का उपयोग किया जा रहा है।

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए रिकॉर्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। सरकार ने इस बार 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य रखा है, जो पिछले साल से अधिक है। कुल मिलाकर प्रदेश में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है और किसानों को समय पर भुगतान व बेहतर सुविधाएं देकर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।