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  • किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक

    किसानों के हित में बड़ा कदम: समर्थन मूल्य पर 2625 रुपए में खरीदी, तारीख बढ़ाकर 23 मई तक


    भोपाल । भोपाल में किसानों को राहत देते हुए मोहन यादव ने गेहूं उपार्जन की अंतिम तिथि बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। पहले जहां यह प्रक्रिया 9 मई तक निर्धारित थी, अब इसे बढ़ाकर 23 मई कर दिया गया है। इस फैसले से उन किसानों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त और किसानों के अनुकूल हों, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्रों पर पीने के पानी, छायादार बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही किसानों को यह सुविधा भी दी गई है कि वे अपने जिले के किसी भी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेच सकते हैं, जिससे उनकी सुविधा और विकल्प दोनों बढ़े हैं।

    गेहूं खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों की उपज खरीदी जा सके। इसके अलावा तौल प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, नेट कनेक्शन, कूपन और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी केंद्रों पर उपलब्ध कराई गई हैं। उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं, जिससे किसानों को बेहतर अनुभव मिल सके।

    राज्य सरकार किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद रही है, जिसमें 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। यह दर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से तय की गई है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि वे स्वयं भी उपार्जन केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं, ताकि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। इस कदम से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और अधिकारियों पर बेहतर काम करने का दबाव भी रहेगा।
    सरकार का यह फैसला किसानों के हित में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और उपार्जन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित हो सकेगी।

  • विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान

    विकास में किसानों की भागीदारी मजबूत,चार गुना मुआवजे से बदलेगी आर्थिक तस्वीर ,सीएम का बड़ा बयान


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भूमि अधिग्रहण और किसानों के हितों को लेकर एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अब प्रदेश में जमीन देने वाले किसानों को चार गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। इस फैसले को सरकार की विकास नीति और किसान हितैषी दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसानों को केवल मुआवजा देना नहीं बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में भागीदार बनाना है ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसानों को उनकी जमीन के बदले पर्याप्त और संतोषजनक मुआवजा मिलेगा तो वे न केवल अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएंगे बल्कि नई जमीन खरीदने या अन्य निवेश करने में भी सक्षम होंगे। इससे उनकी आजीविका सुरक्षित होगी और वे भविष्य को लेकर अधिक आत्मविश्वास महसूस करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और लंबे समय से लंबित प्रकरणों का समाधान भी शीघ्र हो सकेगा।

    सीएम ने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई परियोजनाएं सड़क निर्माण पुल रेलवे और बांध जैसे बड़े विकास कार्य अक्सर भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित होते रहे हैं। लेकिन अब जब किसानों को चार गुना मुआवजा मिलेगा तो इन परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराना आसान होगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में किसानों को प्रदान करेगी। यह एक बड़ी आर्थिक राशि है जो सीधे तौर पर किसानों के खातों में पहुंचेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि भूमि देने वाले किसान परिवारों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    इस फैसले को राज्य में कृषि और विकास के बीच संतुलन बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर सरकार विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहती है वहीं दूसरी ओर किसानों के हितों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ साथ विकास कार्यों को गति देने वाला साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस योजना का जमीनी स्तर पर किस तरह क्रियान्वयन होता है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कितनी तेजी से मिल पाता है।