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  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

    गेहूं उत्पादन के बाद अब भंडारण में भी एमपी का दम 35 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साथ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल


    नई दिल्ली । देश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन के लिए पहचान बना चुका मध्य प्रदेश अब सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता के मामले में भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 34.94 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इस उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल हो गया है और पंजाब हरियाणा राजस्थान गुजरात तमिलनाडु तेलंगाना तथा ओडिशा जैसे कई बड़े कृषि राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

    राज्यसभा में उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में यह जानकारी सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 3493.80 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 34.94 लाख मीट्रिक टन सरकारी खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। यह क्षमता प्रदेश में खरीदे गए गेहूं धान और अन्य खाद्यान्नों के सुरक्षित भंडारण तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्र सरकार के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय खाद्य निगम राज्य एजेंसियों और अन्य व्यवस्थाओं को मिलाकर देशभर में कुल 55493.76 हजार मीट्रिक टन यानी लगभग 5.55 करोड़ मीट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण क्षमता उपलब्ध है। इसमें अकेले मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 6.3 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र में मध्य प्रदेश की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    भंडारण क्षमता के मामले में प्रदेश से आगे केवल उत्तर प्रदेश बिहार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का स्थान आता है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश पिछले कुछ वर्षों में गेहूं उत्पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में भी लगातार अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। अब पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध होने से खरीदे गए अनाज के सुरक्षित संरक्षण और समय पर वितरण में भी आसानी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक गोदामों और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं के विस्तार से अनाज की बर्बादी कम होगी और किसानों से खरीदी गई उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी और जरूरत के समय विभिन्न राज्यों तक खाद्यान्न की आपूर्ति भी सुचारु रूप से की जा सकेगी।

    मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि राज्य के कृषि और खाद्य प्रबंधन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उत्पादन के साथ साथ भंडारण क्षमता में हुई यह बढ़ोतरी प्रदेश को देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का और अधिक मजबूत स्तंभ बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

  • सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

    सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई


    अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पड़ोसी राज्यों से सस्ते धान को अपने यहां खपाने की बिचौलियों की सुनियोजित साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश की सीमाओं से लगे बलरामपुर जिले में प्रशासन की सख्ती के चलते अब तक 11,300 क्विंटल धान और 48 वाहन जब्त किए जा चुके हैं। जब्त किए गए धान की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह धान जब्त नहीं किया जाता तो इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच दिया जाता। इससे बिचौलियों को भारी मुनाफा होता और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।

    समर्थन मूल्य का अंतर बना वजह
    इस पूरे मामले की जड़ राज्यों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP का अंतर है। झारखंड में धान की खरीद 2,450 रुपये प्रति क्विंटल उत्तर प्रदेश में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल जबकि छत्तीसगढ़ में सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है यानी छत्तीसगढ़ में प्रति क्विंटल लगभग 700 रुपये अधिक का लाभ मिल रहा है। इसी अंतर का फायदा उठाने के लिए बिचौलिये यूपी और झारखंड से धान खरीदकर छत्तीसगढ़ में बेचने की तैयारी कर रहे थे।

    सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी

    बलरामपुर जिला तीन राज्यों की सीमा से लगा होने के कारण बिचौलियों के लिए आसान रास्ता बनता रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी। धान की अवैध ढुलाई में लगे ट्रकों, पिकअप वाहनों और ट्रैक्टरों की जांच की गई। इसी दौरान बड़ी मात्रा में धान जब्त किया गया और 48 वाहनों को कब्जे में लिया गया।

    किसानों के हक की रक्षा
    प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सरकारी नुकसान रोकने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी थी। यदि बाहरी राज्यों का धान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच जाता, तो असली किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत होती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है कि समर्थन मूल्य का लाभ केवल राज्य के वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों या बाहरी धान की किसी भी सूरत में अनुमति नहीं दी जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती जिलों में पुलिस, राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार गश्त और जांच करेंगी। उपार्जन केंद्रों पर भी सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि बाहरी धान की पहचान की जा सके।सरकार का मानना है कि ऐसी सख्ती से न केवल बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों में भी भरोसा बढ़ेगा कि उनकी फसल सही दाम पर सुरक्षित रूप से खरीदी जाएगी।इस पूरे अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। MSP का फायदा गलत तरीके से उठाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।