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  • WhatsApp पर किसान को सरकारी योजना की जानकारी देगा AI सत्य नडेला ने समझाया भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य

    WhatsApp पर किसान को सरकारी योजना की जानकारी देगा AI सत्य नडेला ने समझाया भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य


    नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और सीईओ सत्य नडेला ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते अवसरों को लेकर अहम बात कही है। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि AI का फायदा केवल बड़ी कंपनियों या तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित न रहे बल्कि इसका लाभ भारत के किसानों कारोबारियों और अलग अलग समुदायों तक भी पहुंचे। नडेला के मुताबिक किसी भी सामान्य उपयोग वाली तकनीक की वास्तविक क्षमता इस बात से तय होती है कि उसका इस्तेमाल कितने व्यापक स्तर पर लोग कर सकते हैं और उसके विकास में कितने लोग योगदान दे सकते हैं।

    सिएटल में आयोजित आईडियाज4इंडिया फोरम में बोलते हुए नडेला ने AI के विकास के साथ राष्ट्रीय संप्रभुता ज्ञान पर नियंत्रण और मानव निगरानी जैसे विषयों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग अलग हिस्सों को इस तकनीक से लाभ मिलना चाहिए और उन्हें इसके विकास में योगदान देने का अवसर भी मिलना चाहिए। उनके मुताबिक AI को व्यापक स्तर पर उपयोगी बनाने के लिए तकनीक की पहुंच के साथ भरोसे और नियंत्रण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के महावाणिज्य दूतावास की ओर से इंडियन अमेरिकन टेक CEO फोरम के तहत किया गया था। इसमें भारतीय मूल के 40 से अधिक CEO और CTO शामिल हुए। AI के अलावा क्वांटम कंप्यूटिंग सेमीकंडक्टर एयरोस्पेस क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी इसमें हिस्सा लिया।

    नडेला ने AI की उपयोगिता समझाने के लिए दिल्ली में देखे गए एक प्रदर्शन का उदाहरण भी दिया। इसमें एक भारतीय डेवलपर ने GPT मॉडल को भाषा सेवाओं के साथ जोड़कर ऐसी व्यवस्था तैयार की थी जिसके जरिए ग्रामीण किसान WhatsApp पर स्थानीय भाषा में सरकारी योजना से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकता था। यह व्यवस्था किसान को सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाने और जरूरी कागजी कार्रवाई में मदद करने के लिए तैयार की गई थी।

    नडेला के मुताबिक इस उदाहरण की खासियत यह थी कि AI को केवल तकनीकी प्रयोग के तौर पर नहीं बल्कि आम व्यक्ति की जरूरत से जोड़कर देखा गया। यदि ऐसी तकनीक स्थानीय भाषा में उपलब्ध हो और सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं की जानकारी समझने में मदद करे तो इससे उन लोगों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है जो तकनीकी संसाधनों या भाषा की वजह से कई बार पीछे रह जाते हैं।

    उन्होंने AI से जुड़े व्यापक इकोसिस्टम पर भी विचार करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार आने वाले समय में AI का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यह अलग अलग आकार के कारोबारों और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों तक कितनी व्यापकता से पहुंचता है। भारत के लिए यह अवसर केवल AI का इस्तेमाल करने तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे उत्पाद और सेवाएं विकसित करने से भी जुड़ा है जिन्हें दुनिया के दूसरे बाजारों में इस्तेमाल किया जा सके।

    नडेला ने देशों और कंपनियों के लिए अपने ज्ञान पर नियंत्रण बनाए रखने की जरूरत भी बताई। उनका कहना था कि AI के क्षेत्र में भागीदारी ऐसी होनी चाहिए जिससे देश और कारोबार सुरक्षित महसूस करें और किसी दूसरी इकाई की तकनीकी क्षमता पर पूरी तरह निर्भर न हों। साथ ही उन्होंने पेशेवरों से अपनी क्षमताओं पर दोबारा विचार करने की अपील की क्योंकि AI काम करने के तरीकों को तेजी से बदल रहा है।

  • डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा

    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।
    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है। हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।
    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।
    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है। इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।
    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।
    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।
  • MP क्रूज हादसा: 29 यात्रियों की नाव पलटी, 9 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी..

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    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।

    नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है।

    हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।

    नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है।

    इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।

    हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

    यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।

    इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी।