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  • इजरायल अब युद्ध से इतर AI और सेमीकंडक्टर तकनीक बढ़ाने पर दे रहा जोर, जानें क्या है प्लान?

    इजरायल अब युद्ध से इतर AI और सेमीकंडक्टर तकनीक बढ़ाने पर दे रहा जोर, जानें क्या है प्लान?


    तेलअवीव।
    इजरायल (Israel) अब मिडिल ईस्ट (Middle East.) के युद्ध मोर्चों पर पारंपरिक सैन्य रणनीति के बजाय बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), संचार प्रणालियों और अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक (Cutting-edge Semiconductors Technology) पर निर्भर रहने की तैयारी कर रहा है। इजरायली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने खुलासा किया है कि आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय रणनीतिक श्रेष्ठता बंदरगाहों या रेलवे गलियारों पर नहीं, बल्कि उन्नत प्रौद्योगिकी पर आधारित होगी। अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य के युद्ध मैदान पर सैनिकों के बजाय बड़ी टेक कंपनियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इजरायल मध्य पूर्व में विकसित हो रहे रणनीतिक आर्थिक गलियारों की ‘वास्तविक रीढ़’ के रूप में प्रौद्योगिकी और संचार अवसंरचना ( Communication Infrastructure ) को देख रहा है।


    IMEC और I2U2 को नया नजरिया

    वहीं, इस नई सोच के तहत इजराइल भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और I2U2 समूह जैसी पहलों को पूरी तरह नए नजरिए से देख रहा है। इजरायली अधिकारी अमेरिकी चिप दिग्गज एनवीडिया समेत वैश्विक टेक कंपनियों के साथ बढ़ते सहयोग पर जोर दे रहे हैं। इजरायल खुद को भारत, खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी का प्रवेश द्वार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जहां ये कंपनियां अपने अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर रही हैं।


    ईरान पर इजरायल की स्पष्ट रणनीति

    ईरान के साथ चल रहे तनाव पर इजरायली अधिकारियों ने साफ किया कि इजरायल का लक्ष्य तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है। उनका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को ‘पीढ़ीगत रूप से कमजोर’ करना है। अधिकारियों ने बताया कि लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास के लिए विशाल औद्योगिक आधार जरूरी होता है। इजरायल इसी आधार को निशाना बना रहा है ताकि ईरान इजरायल की हवाई सुरक्षा को भेद सकने वाली मिसाइलें विकसित न कर सके।

    इसके अलावा ईरानी सैन्य नेतृत्व और प्रॉक्सी समूहों के कमांडरों को लक्ष्य बनाना भी ऑपरेशनल क्षमता को बाधित करने की रणनीति का हिस्सा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब नेतृत्व लगातार छिपने, जगह बदलने और नई कम्युनिकेशन लाइनें बनाने में लगा रहता है, तो उसकी परिचालन क्षमता तेजी से घट जाती है।


    भारत से IRGC पर कार्रवाई की अपील

    इजरायली पक्ष ने भारत से बड़े राजनयिक प्रयास के तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की है। अधिकारियों ने कहा कि इजरायल इस मुद्दे को भारतीय अधिकारियों के समक्ष कई बार उठा चुका है और उम्मीद करता है कि भारत आधिकारिक तौर पर IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित करे। उन्होंने बताया कि अब तक 44 देश IRGC के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया के फैसले और यूरोपीय संघ की पहल का जिक्र किया।


    हमास पर भी भारत से उम्मीद

    7 अक्टूबर के हमले के बाद इजराइल ने भारत से हमास को भी आतंकवादी संगठन घोषित करने की अपील दोहराई है। भारत ने हमले की कड़ी निंदा की थी, लेकिन अब तक हमास को आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। इसी दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची का हालिया नई दिल्ली दौरा इजरायली पक्ष की चिंता का विषय बना हुआ है, जहां उन्होंने भारत को ‘भरोसेमंद दोस्त’ बताया था।

    दूसरी ओर इजरायली अधिकारी पूरे टकराव को क्षेत्रीय रणनीतिक और ऊर्जा प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देख रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता को कम करने और उसके क्षेत्रीय सैन्य प्रभाव को सीमित करने के इजरायली लक्ष्य काफी हद तक हासिल हो चुके हैं।

  • भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा

    भारत कनाडा साझेदारी का नया अध्याय: यूरेनियम सप्लाई पर समझौता, रक्षा और एनर्जी सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा


    नई दिल्ली । भारत और कनाडा के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते का दौर शुरू हो गया है। सोमवार को हैदराबाद हाउस दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात हुई । इस बैठक में भारत को यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति रक्षा ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर मुहर लगी।

    यूरेनियम सप्लाई समझौता

    पीएम कार्नी के दौरे का मुख्य उद्देश्य 10 साल का यूरेनियम सप्लाई समझौता है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 3 अरब डॉलर है। कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है और भारत अपनी तेजी से बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए अधिक यूरेनियम खरीदना चाहता है। 2013 में लागू भारत-कनाडा न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट के बाद यह कदम दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करेगा।

    व्यापार और निवेश में बढ़ावा

    बैठक के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत-कनाडा के बीच 50 बिलियन डॉलर के व्यापार का लक्ष्य है। कृषि कृषि प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा में सहयोग को बढ़ावा देने के साथ ही भारत में पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी।

    रक्षा और सुरक्षा सहयोग

    दोनो देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की। रक्षा उद्योगों समुद्री डोमेन जागरूकता और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए भारत-कनाडा रक्षा संवाद स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

    नवाचार और तकनीकी सहयोग

    पीएम मोदी ने बताया कि दोनों देशों की नवाचार साझेदारी वैश्विक समाधानों को जन्म देगी। AI क्वांटम सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा क्रिटिकल मिनरल्स पर हस्ताक्षरित समझौता आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन मजबूत करेगा। अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स और उद्योगों को जोड़ने के प्रयास भी तेज होंगे।

    ऊर्जा और पर्यावरण

    ऊर्जा क्षेत्र में अगली पीढ़ी की साझेदारी स्थापित की जाएगी जिसमें हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर विशेष जोर रहेगा। पीएम मोदी ने कहा “भारत-कनाडा की साझेदारी दुनिया को नए वैश्विक समाधान देने में सक्षम होगी। यह सहयोग केवल ऊर्जा या रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि नवाचार तकनीकी और वैश्विक विकास के कई क्षेत्रों को छूएगा।

  • नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन: 88 देशों ने एआई के भविष्य के लिए किए हस्ताक्षर, भारत की ऐतिहासिक जीत


    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय इंडिया एआई इम्पैक्ट शुक्रवार को एक ऐतिहासिक मोड़ पर संपन्न हुआ, जब 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणापत्र ने न केवल एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के भविष्य को दिशा देने का काम किया, बल्कि भारत के बढ़ते कूटनीतिक प्रभाव को भी वैश्विक मंच पर मजबूती से प्रस्तुत किया।

    भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
    भारत के लिए यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पिछले साल पेरिस में हुए ‘एआई एक्शन समिट’ में अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों ने यूरोपीय नियामक दृष्टिकोण का हवाला देते हुए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था। लेकिन नई दिल्ली में भारत ने इन सभी देशों को एक मंच पर लाने में सफलता हासिल की। भारत का मुख्य उद्देश्य एआई का “लोकतंत्रीकरण” करना है, ताकि यह तकनीक केवल कुछ बड़ी कंपनियों या व्यक्तियों के हाथों में न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

    नई दिल्ली डिक्लेरेशन के मुख्य पहलू
    इस घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर सहमति जताई है, जो एआई के प्रभाव और उपयोग को वैश्विक स्तर पर बेहतर और सुरक्षित बनाएंगे:

    डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर:
    इस चार्टर के तहत एआई के बुनियादी संसाधनों तक सभी की पहुंच को बढ़ावा दिया जाएगा, साथ ही स्थानीय नवाचारों को भी समर्थन मिलेगा।

    ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स:
    यह एक व्यावहारिक मंच होगा जो एआई के सफल उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनाने और पुनरावृत्त करने में मदद करेगा।

    ट्रस्टेड एआई कॉमन्स:
    एआई प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों, बेंचमार्क और सर्वोत्तम प्रथाओं का साझा संग्रह बनाया जाएगा।

    इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स:
    वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा।

    समाज के उत्थान के लिए एआई का उपयोग
    इस घोषणापत्र में इस बात को स्वीकार किया गया है कि एआई समाज के सभी वर्गों के उत्थान की क्षमता रखता है। इसके लिए सोशल एम्पॉवरमेंट प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को एआई के लाभ मिल सकें। साथ ही, एआई के कारण बदलते रोजगार स्वरूप को ध्यान में रखते हुए, ‘रीस्किलिंग’ और कार्यबल विकास के लिए स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों पर भी सहमति बनी है।

    आगे की चुनौतियाँ और कार्यान्वयन
    हालांकि 88 देशों ने इस डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को वास्तविकता में बदलना होगी, क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक प्रकृति की हैं। कुछ सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) ने शुरुआत में इस घोषणापत्र के कुछ अंशों पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र के (UN) चार्टर से मिलते-जुलते थे। हालांकि, भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक सहयोगी मानते हुए, यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत हो गया।

  • जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा

    जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली/ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत के राजकीय दौरे पर आए राष्ट्रपति लूला से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं उन्होंने बताया कि लूला ने साझा हितों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अपनी गाइडेंस और गर्मजोशी भरी भावनाओं का प्रदर्शन किया उन्होंने यह भी कहा कि आज बाद में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी से भी मुलाकात की और उसके बाद दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक करेंगे विदेश मंत्रालय ने पहले ही बताया था
    कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे प्रधानमंत्री आने वाले गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में लंच होस्ट करेंगे और आपसी हितों के क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर विचार करेंगे जिसमें बहुपक्षीय फोरम में सहयोग रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म ग्लोबल गवर्नेंस और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे शामिल हैं राष्ट्रपति लूला दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट के लिए 18 फरवरी को भारत आए उनके साथ करीब 14 मंत्री और ब्राजील की कंपनियों के टॉप सीईओ का डेलीगेशन भी है जो अपने भारतीय समकक्षों के साथ मीटिंग करेंगे
    यह राष्ट्रपति लूला का भारत का छठा दौरा है वे पहली बार 2004 में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भारत आए थे और आखिरी बार सितंबर 2023 में जी20 समिट के लिए भारत आए थे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला अक्सर मिलते रहे हैं प्रधानमंत्री 7 से 8 जुलाई 2025 तक राजकीय दौरे पर ब्रासीलिया में थे और नवंबर 2025 में जी20 के दौरान जोहान्सबर्ग में भी उनकी मुलाकात हुई भारत और ब्राजील के बीच करीबी और रणनीतिक साझेदारी साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों लोगों के बीच गहरे रिश्तों और खास सेक्टरों में बढ़ते सहयोग पर आधारित है दोनों देश 2006 से रणनीतिक साझेदार हैं
    ब्राजील एलएसी इलाके में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और व्यापार निवेश रक्षा कृषि स्वास्थ्य फार्मास्यूटिकल्स ऊर्जा जिसमें रिन्यूएबल्स जरूरी मिनरल्स रेयर अर्थ मटीरियल्स साइंस टेक्नोलॉजी और नवाचार शामिल हैं जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का जुड़ाव लगातार गहरा होता जा रहा है
    इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एआई स्पेस और लोगों के बीच जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है दोनों देश यूएन रिफॉर्म्स क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद से लड़ने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान विचार रखते हैं विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति लूला का यह राजकीय दौरा दोनों पक्षों को आपसी फायदे के मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और द्विपक्षीय क्षेत्रीय और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर सहयोग को और गहरा करने का अवसर देगा
  • डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    मुंबई। डव सॉफ्ट लिमिटेड, एक तेजी से बढ़ता क्लाउड-कम्युनिकेशन्स और CPaaS प्रदाता, ने CPaaS 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। यह एआई-संचालित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म उद्यमों को यूनिफाइड कम्युनिकेशन इकोसिस्टम के माध्यम से ग्राहक जुड़ाव को सरल, स्वचालित और स्केल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    CPaaS 2.0 व्हाट्सएप, एसएमएस, आरसीएस, इंस्टाग्राम, वॉयस, ईमेल और एआई-संचालित बॉट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर यूनिफाइड वॉलेट द्वारा संचालित है। यह इंटीग्रेटेड अप्रोच बिलिंग को सरल बनाता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और व्यवसायों को एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से स्केल पर कम्युनिकेशन मैनेज करने में सक्षम बनाता है।
    प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग करके नियमित ग्राहक इंटरैक्शन्स को स्वचालित करता है, रिस्पॉन्स टाइम में सुधार करता है और चैनल उपयोग, परफोर्मेंस मेट्रिक्स तथा वॉलेट खपत में वास्तविक समय की दृश्यता प्रदान करता है। इसके वर्कफ्लो स्वचालित रूप से सबसे इफेक्टिव कम्युनिकेशन चैनल का चयन करते हैं, जिससे उद्यम लागतों को अनुकूलित कर सकें, जबकि प्राथमिक चैनल विफल होने पर बिल्ट इन फॉलबैक लॉजिक के माध्यम से मैसेज डिलीवरी सुनिश्चित होता है।
    CPaaS 2.0 दैनिक बिज़नेस कम्युनिकेशन को समर्थन देने के लिए एआई-सक्षम उपयोगिता टूल्स का एक सूट भी पेश करता है। इनमें सर्वे, कैलेंडरिक्स, सपोर्टिक्स, वॉयसएक्स, रिमाइंडरबॉक्स, डायनामिक पीडीएफ और डॉकएआई शामिल हैं, जो उद्यमों को फीडबैक कलेक्शन, अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग, कस्टमर सपोर्ट, वॉयस एंगेजमेंट, रिमाइंडर और पसंदीदा चैनलों पर पर्सनलाइज्ड दस्तावेज़ डिलीवरी को स्वचालित करने में सक्षम बनाते हैं।
    उन्नत उद्यम आवश्यकताओं के लिए, CPaaS 2.0 व्यवसायों को अपना खुद का एजेंटिक एआई बनाना संभव बनाता है, जो दोहराव वाले प्रश्नों को संभाल सकता है, सहायता टीमों की मदद कर सकता है और वर्कफ्लो को स्वचालित कर सकता है। एआई-सहायता प्राप्त एजेंट्स को सुझाए गए उत्तर, वार्तालाप सारांश और बुद्धिमान रूटिंग के साथ समर्थन प्रदान किया जाता है, जो स्केल पर उत्पादकता और ग्राहक अनुभव में सुधार करने में मदद करता है।
    लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए, राहुल भानुशाली, निदेशक, डव सॉफ्ट लि., ने कहा, “CPaaS 2.0 के साथ, फोकस व्यवसायों को कम्युनिकेशन को सरल बनाने में मदद करने पर है, जबकि एआई का उपयोग संचालन दक्षता और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह प्लेटफॉर्म कई चैनलों, बुद्धिमान वर्कफ्लो और एआई-संचालित टूल्स को इस तरह एक साथ लाता है जो जटिलता को कम करता है और उद्यमों के लिए स्केलेबल विकास को समर्थन देता है।”
    डव सॉफ्ट लिमिटेड प्लेटफॉर्म नवाचार, सुरक्षा और बुद्धिमत्ता-आधारित संचार क्षमताओं में निवेश करना जारी रखे हुए है। कंपनी उद्यमों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और तकनीकी भागीदारों के साथ निकट सहयोग कर रही है ताकि विकसित होते व्यवसाय संचार आवश्यकताओं का समाधान किया जा सके। इसके समाधान मिशन-क्रिटिकल उपयोग मामलों का समर्थन करने के लिए बनाए गए हैं, जहां विश्वसनीयता, अनुपालन, पारदर्शिता और विश्वास सर्वोपरि हैं, भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों में।

  • AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी

    AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स (Artificial Intelligence (AI) and Robotics) समेत नई तकनीक अपनाने पर जोर के बावजूद दुनियाभर की टेक कंपनियों (Tech Companies) ने 2024 के मुकाबले 2025 में करीब 20 फीसदी कम छंटनी की। इस दौरान अमेरिकी कंपनी इंटेल (American company Intel) ने दो बार में सर्वाधिक 27,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने पहली बार अप्रैल, 2025 में 22,000 और जुलाई, 2025 में 5,000 छंटनी की थी।

    लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल भारत समेत दुनियाभर की 257 टेक कंपनियों ने 1,22,549 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। यह आंकड़ा 2024 में 551 कंपनियों से निकाले गए 1,52,922 कर्मचारियों की तुलना में 19.86 फीसदी कम है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर 1,193 कंपनियों ने 2,64,320 लोगों की छंटनी की थी, जबकि 2022 में 1,064 संस्थाओं ने 1,65,269 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर की टेक कंपनियों में एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर) काफी ज्यादा है। साथ ही, कुशल पेशेवरों की कमी के बावजूद टेक कंपनियों में लगातार छंटनी चिंता की बात है। 


    कंपनियों की खर्च में कटौती का नतीजा

    विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक एट्रिशन रेट और कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रहीं टेक कंपनियों में छंटनी की कई वजहें हैं। वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ वॉर के बीच मंदी की बढ़ती आशंका ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जो कमाई के मोर्चे पर जूझ रही हैं। इसके अलावा, कई देशों में तनाव के बाद आपूर्ति शृंखला से जुड़ीं समस्याओं और महंगाई बढ़ने के कारण लागत वृद्धि से जूझ रहीं कंपनियां खर्च में कटौती कर रही हैं, जिसका असर छंटनी के रूप में दिख रहा है।

    इन कंपनियों में सबसे ज्यादा निकाले
    इंटेल…2025 में दो बार में 22,000 कर्मचारियों को बाहर निकाला।
    माइक्रोसॉफ्ट…कुल 15,000 पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाया।
    अमेजन…वैश्विक स्तर पर 14,000 कर्मचारियों की नौकरी गई।
    एचपी…दो बार में 8,000 लोगों की छंटनी की गई।
    सेल्सफोर्स…4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया।
    मेटा…खर्च में कटौती का हवाला देकर 3,600 पेशेवरों की छंटनी।


    टीसीएस से लेकर जोमैटो ने भी की छंटनी

    भारत में बीते साल टाटा समूह की कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने सबसे ज्यादा 12,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग और स्किल मिसमैच का हवाला देकर इतनी बड़ी संख्या में छंटनी की थी, जिसे लेकर विरोध भी हुआ था।टीसीएस के अलावा 2025 में 29 छोटी-बड़ी कंपनियों ने भी करीब 6,995 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इनमें सबसे ज्यादा 1,000 लोगों की छंटनी ओला इलेक्ट्रिक ने की थी। जोमैटो में भी 600 और कार्स24 में 520 लोगों की नौकरी गई थी।

  • महिलाओं की अश्लील फोटोज बना रहा AI, सरकार ने चेतावनी

    महिलाओं की अश्लील फोटोज बना रहा AI, सरकार ने चेतावनी


    नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने एक्स को सख्त चेतावनी दी है। केंद्र ने कहा है कि ग्रोक एआई महिलाओं की अश्लील फोटो बना रहा है। इसलिए इन्हें तुरंत हटाया जाए। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने एलन मस्क के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के मुख्य अनुपालन अधिकारी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में कहा है कि ग्रोक की तत्काल व्यापक समीक्षा करें और अवैध सामग्री तक पहुंच को हटा दें या डिसेबल कर दें।

    क्यों जताई चिंता
    सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पत्र में कहा गया कि आपके द्वारा विकसित और एक्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई सेवा ग्रोक का इस्तेमाल महिलाओं की अश्लील या अपमानजनक तस्वीरें और वीडियो बनाने में हो रहा है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल गलत चीजों को प्रकाशित करने या साझा करने के लिए किया जा रहा है। इससे महिलाओं आ अभद्र ढंग से अपमान हो रहा है।

    पत्र में आगे कहा गया है कि ऐसा व्यवहार प्लेटफॉर्म-स्तरीय सुरक्षा उपायों और सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है। यह प्रासंगिक कानूनों के उल्लंघन में एआई तकनीक के गंभीर दुरुपयोग की तरह है।

    रिपोर्ट देने के लिए भी कहा
    मंत्रालय ने एक्स से तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है। नोटिस में खासकर ‘ग्रोक’ के दुरुपयोग से तैयार अश्लील, नग्न, आपत्तिजनक एवं यौन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाली सामग्री के होस्टिंग, निर्माण, प्रकाशन, प्रसारण, साझा करने या अपलोड करने पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है।

    हो सकती है कानूनी कार्रवाई
    मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसा होने पर मंच, उसके जिम्मेदार अधिकारियों तथा कानून का उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं के खिलाफ बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    आदेश के मुताबिक, ऐसी स्थिति में कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, आईटी नियमों, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और अन्य लागू कानूनों के तहत की जाएगी.