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  • भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

    भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर विकसित करेंगे लेजर हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा क्षेत्र में भविष्य की तकनीकों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। दोनों देश अब मिलकर अगली पीढ़ी के आधुनिक हथियार सिस्टम विकसित और निर्मित करेंगे। इसमें लेजर आधारित हथियार, गाइडेड एनर्जी वेपन और अत्याधुनिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिन्हें भविष्य की ‘स्टार वॉर्स’ तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।

    यह महत्वपूर्ण पहल राजनाथ सिंह के सियोल दौरे के दौरान सामने आई। इस दौरान उन्होंने दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त निर्माण और उभरती रक्षा तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मिलकर रक्षा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश भविष्य के एडवांस रक्षा सिस्टम संयुक्त रूप से विकसित और उत्पादित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

    सूत्रों के अनुसार, भारतीय कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और दक्षिण कोरिया की Hanwha Co. Ltd. के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों के तहत गाइडेड एनर्जी वेपन, लेजर डिफेंस सिस्टम और ऑटोमेटिक एयर डिफेंस प्लेटफॉर्म को मिलकर विकसित और निर्मित किया जाएगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, गाइडेड एनर्जी वेपन भविष्य की युद्ध तकनीक मानी जाती है। यह लेजर या उच्च ऊर्जा किरणों के जरिए दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल और हवाई खतरों को पलभर में नष्ट करने में सक्षम होती है। दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियां पहले से ही इस दिशा में काम कर रही हैं और अब भारत भी इस तकनीक की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    राजनाथ सिंह ने दक्षिण कोरिया के रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन के मंत्री ली योंग-चुल से भी मुलाकात की। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में भी साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।

    इस दौरान भारत-कोरिया रक्षा उद्योग व्यापार गोलमेज सम्मेलन का आयोजन भी किया गया, जिसमें दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन में रक्षा निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

    इसी बीच भारत की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। निबा लिमिटेड द्वारा विकसित ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर’ ने ओडिशा के चांदीपुर में सफल लाइव-फायरिंग ट्रायल किया। इस सिस्टम ने 150 और 300 किलोमीटर की दूरी तक रॉकेट दागकर सटीक निशाना साधा।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 300 किलोमीटर की दूरी से दागे गए रॉकेट ने लक्ष्य के मात्र 2 मीटर के दायरे में निशाना लगाकर अपनी उच्च सटीकता साबित की। इसे भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग आने वाले समय में एशिया की रणनीतिक ताकतों के संतुलन पर भी असर डाल सकता है। आधुनिक तकनीक आधारित हथियार प्रणालियों का यह साझा विकास भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

  • इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर

    इजरायल के सामने कितनी देर तक टिक सकता है ईरान, देखें दोनों की मिलिट्री पावर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है. आज यानी शनिवार को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले किए. इसके बाद पूरे इलाके में हालात तेजी से बदल गए. इजरायल ने इसे प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक बताया और कहा कि संभावित हमले के खतरे को रोकने के लिए यह कार्रवाई की गई है. जबकि ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान इस्फहान कोम और खोर्रमाबाद समेत कई शहरों में इजरायल की ओर से मिसाइल और एयर स्ट्राइक की गई है. बताया जा रहा है कि इजरायल की और से ईरान पर हुए अचानक हमले में अमेरिका भी शामिल था.

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाकर तबाह कर दिया गया. हालांकि अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं है उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. इसी हमले के बीच एक बार फिर यही सवाल सामने आ गया है कि अगर ईरान और इजरायल के बीच यह टकराव लंबा चलता है तो सैन्य ताकत के मामले में कौन भारी पड़ सकता है.

    ईरान इजरायल में सैनिकों की संख्या में कौन आगे?

    अगर ईरान और इजरायल की बात करें तो सक्रिय सैनिकों की संख्या में ईरान आगे बताया जाता है. ईरान के पास करीब 6 लाख तक एक्टिव सैन्य बल और करीब 3.5 लाख रिजर्व सैनिक हैं. जबकि इजरायल के पास करीब 1.7 लाख सक्रिय सैनिक है. हालांकि इजरायल के पास 4.5 लाख प्रशिक्षित रिजर्व फोर्स है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है. वहीं संख्या के मामले में भले ही ईरान आगे दिखाई देता है लेकिन ट्रेनिंग तकनीक और ऑपरेशन के एक्सपीरियंस में इजरायल को बड़ा माना जाता है.

    एयर पावर पर पकड़ किसकी मजबूत

    वायु सेना की बात करें तो इजरायल के पास 600 से ज्यादा आधुनिक लड़ाकू विमान है जिनमें एफ 35 जैसे स्टेल्थ जेट शामिल है. यह जेट रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं और एडवांस हथियारों से लैस है. दूसरी और ईरान के पास करीब 500 से कुछ ज्यादा विमान हैं लेकिन ईरान के जेट कई पुराने मॉडल के है. ईरान पर बैन के कारण उसे अपग्रेड और मेंटेनेंस में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में हवा में मुकाबले की स्थिति में इजरायल ईरान के मुकाबले बहुत ज्यादा मजबूत है. वहीं ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसकी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल मानी जाती है. उसके पास हजारों की संख्या में अलग अलग रेंज की मिसाइल है जो क्षेत्रीय स्तर पर इजरायल के लिए बड़ा खतरा बन सकती है. वहीं इजरायल के पास संख्या कम जरूर है लेकिन उसकी मिसाइल तकनीक काफी उन्नत है और कुछ मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.

    ईरान और इजरायल के रक्षा बजट में बड़ा अंतर

    अगर दोनों देशों के रक्षा बजट की बात करें तो इजरायल हर साल अपने सैन्य बजट पर ईरान से कई गुना ज्यादा खर्च करता है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आंकड़ों के अनुसार इजरायल ने 2024 में करीब 46.5 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किया था. उसे अमेरिका से सैन्य सहायता भी मिलती है. दूसरी ओर ईरान का बजट सीमित है और वह कम लागत वाली रणनीतियों जैसे मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर ज्यादा ध्यान देता है. वहीं इजरायल का मल्टी लेयर एयर डिफेंस सिस्टम उसकी सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है. आयरन डोम जैसे सिस्टम कम दूरी की मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने के लिए जाने जाते हैं. इसके अलावा मध्यम और लंबी दूरी की इंटरसेप्टर क्षमता भी उसके पास है. ईरान के पास भी घरेलू और रूसी तकनीक पर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम हैं लेकिन तकनीकी रूप से वे इजरायल के मुकाबले कमजोर माने जाते हैं.