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  • LPG से हवाई यात्रा तक… 1 सितंबर से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, कार खरीदना भी होगा महंगा

    LPG से हवाई यात्रा तक… 1 सितंबर से बदलेंगे ये 5 बड़े नियम, कार खरीदना भी होगा महंगा


    नई दिल्ली। अगस्त का महीना खत्म होने वाला है और 1 सितंबर से देश में कई अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। इनका असर सीधे आपकी रसोई के बजट, गैस कनेक्शन, हवाई यात्रा और कार खरीदने के खर्च पर पड़ सकता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी और एटीएफ की नई कीमतें जारी करेंगी, जबकि टाटा और हुंडई की कारें महंगी होने की तैयारी में हैं। वहीं, विदेश जाने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन प्रक्रिया भी आसान होने वाली है।

    1. LPG सिलेंडर के दाम बदलेंगे
    हर महीने की पहली तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एलपीजी सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में 1 सितंबर को घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर के नए दाम जारी किए जा सकते हैं। अगस्त में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 202 रुपए की कटौती की गई थी, जबकि 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ था। सितंबर में होने वाला बदलाव सीधे घरेलू बजट पर असर डाल सकता है।

    2. LPG e-KYC के लिए 31 अगस्त तक मौका
    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए e-KYC भी जरूरी है। IOCL, BPCL और HPCL ने e-KYC पूरा करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई थी। अगर तय समय सीमा में e-KYC पूरी नहीं की जाती है, तो आगे गैस सिलेंडर की सुविधा या सब्सिडी से जुड़ी दिक्कत सामने आ सकती है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं की KYC प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, उन्हें समय रहते इसे पूरा करना होगा।

    3. ATF के साथ CNG-PNG के दाम भी बदल सकते हैं
    हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतों में संशोधन करती हैं। सितंबर में भी नई दरें जारी होने की उम्मीद है। ATF महंगा या सस्ता होने का असर एयरलाइंस की परिचालन लागत और आगे चलकर हवाई किराए पर पड़ सकता है। इसके अलावा कुछ शहरों में CNG और PNG की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

    4. टाटा की कारें 25 हजार रुपए तक महंगी
    कार खरीदने वालों को सितंबर से झटका लग सकता है। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड 1 सितंबर 2026 से अपनी कारों और SUV की कीमतों में 25,000 रुपए तक की बढ़ोतरी करने वाली है।

    कंपनी के मुताबिक, यह बढ़ोतरी पेट्रोल-डीजल यानी ICE मॉडल के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी लागू होगी। हालांकि, कीमत में बढ़ोतरी मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। टाटा के अलावा हुंडई मोटर इंडिया ने भी इस साल कारों की कीमतों में तीसरी बार बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

    5. विदेश जाने वालों के लिए एयरपोर्ट पर बदलेगा नियम
    विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर से इमिग्रेशन प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत से विदेश जाने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर स्टांप लगवाने की जरूरत नहीं होगी।

    यात्री मोबाइल पर इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों का समय बचने और प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

    आपकी जेब पर सीधा असर
    सितंबर की शुरुआत में होने वाले इन बदलावों में सबसे सीधा असर LPG, कार और हवाई यात्रा से जुड़ा होगा। वहीं, CNG-PNG और ATF की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर भी आने वाले दिनों में दिखाई दे सकता है।

  • MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित

    MP में दो साल तक फिजूलखर्ची पर लगी रोक…. होटलों में नहीं होंगी सरकारी बैठकें.. हवाई यात्राएं भी की सीमित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों में बड़ी कटौती का फैसला किया है. वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थाओं के लिए मितव्ययिता संबंधी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन निर्देशों के तहत अगले दो वर्षों तक गैर-जरूरी सरकारी खर्चों (Non-Essential Government Expenditures) पर रोक रहेगी और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाएगा.

    नए आदेश के मुताबिक, अधिकारियों की विदेश यात्राएं केवल अत्यावश्यक सरकारी कार्यों तक सीमित रहेंगी. देश के भीतर हवाई यात्रा भी आवश्यकता के आधार पर ही की जाएगी और सभी अधिकारी सरकारी खर्च पर केवल इकोनॉमी क्लास में ही सफर कर सकेंगे.


    होटल में बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं

    वित्त विभाग ने होटलों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर रोक लगा दी है. ऐसे कार्यक्रम अब सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे. जहां संभव होगा, वहां प्रशिक्षण और बैठकों को वर्चुअल माध्यम या वेबिनार के जरिए आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अनावश्यक खर्च से बचा जा सके.


    किराए के वाहनों की संख्या घटेगी

    सरकार ने सभी विभागों को किराए के वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं. इसके लिए व्हीकल पूलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा. दो या अधिक अधिकारियों के लिए अलग-अलग वाहन उपलब्ध कराने के बजाय साझा वाहन व्यवस्था अपनाई जाएगी. यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार दिया जाता है तो उसे दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा.


    दफ्तरों की साज-सज्जा पर भी रोक

    आदेश में अधिकारियों के कार्यालयों और केबिन की सजावट तथा इंटीरियर पर होने वाले अनावश्यक खर्च पर भी रोक लगा दी गई है. विभागाध्यक्षों को इन खर्चों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं.


    नई कंसल्टेंसी सेवाओं पर रोक

    राज्य सरकार ने फिलहाल नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंध करने पर भी रोक लगा दी है. साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने लाभांश की अधिकतम संभव राशि राज्य शासन के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके.

  • विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज

    विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Country’s Largest Airline Indigo) ने बुधवार को कहा कि वह विमान ईंधन की कीमतों में वृद्धि (Jet Fuel Prices Rise) के बाद 2 अप्रैल से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 275 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का संशोधित ईंधन शुल्क लगाना शुरू करेगी। ईंधन शुल्क में इस बढ़ोतरी से विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के हवाई किराए बढ़ने तय हैं। एयरलाइन की यह घोषणा उस दिन आई है, जब विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में संशोधन किया गया और सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों में 25 प्रतिशत की आंशिक बढ़ोतरी का फैसला किया।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में आए उछाल के मद्देनजर एयरलाइन 14 मार्च से ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर 425 रुपये से 2,300 रुपये तक का ईंधन शुल्क वसूल रही है। घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर संशोधित ईंधन शुल्क 275 रुपये से 950 रुपये के बीच होगा।


    कितनी बढ़ोतरी होगी?

    इंडिगो ने एक बयान में कहा कि इंडिगो ने अलग-अलग यात्रा दूरियों के हिसाब से अपने घरेलू ईंधन शुल्क को फिर से निर्धारित किया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मामले में दूरी के आधार पर ईंधन शुल्क 900 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होगा।


    कब से होगी बढ़ोतरी?

    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के लिए पिछले महीने में एटीएफ की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं, जिसके चलते इन मार्गों पर एयरलाइन की ऑपरेशनल कॉस्ट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। ये संशोधित शुल्क 2 अप्रैल को रात 00:01 बजे से लागू होंगे।

    एयरलाइन कंपनियों ने बुधवार को कहा कि विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में आंशिक वृद्धि से घरेलू हवाई यात्रा की लागत को संतुलित रखने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच यह वृद्धि की गई है।

    स्पाइसजेट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि सरकार की जेट ईंधन की कीमतों में केवल आंशिक वृद्धि की अनुमति देने का निर्णय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने बयान में यह भी कहा कि समय पर किये गये इस हस्तक्षेप से हाल के समय के सबसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक संकट में से एक से निपटने में एयरलाइंस को काफी मदद मिलेगी।

    नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के परामर्श से घरेलू विमानन कंपनियों के लिए केवल 25 प्रतिशत यानी 15 रुपये प्रति लीटर की आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि लागू करने का निर्णय लिया है।

    संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया क्षेत्र में हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयरलाइंस पहले से ही हाई ऑपरेशनल कॉस्ट वहन कर रही हैं। इस स्थिति के कारण एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ रही है।

  • ईरान युद्ध का असर… ATF के दामों में 115% से ज्यादा की वृद्धि… महंगा हो सकता है हवाई सफर

    ईरान युद्ध का असर… ATF के दामों में 115% से ज्यादा की वृद्धि… महंगा हो सकता है हवाई सफर


    नई दिल्ली।
    ईरान-इजराल-अमेरिका युद्ध (Iran-Israel-America War) का असर हवाई उड़ानों (Air flights) पर तो दिख ही रहा है अब यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) के बीच भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel- ATF) की कीमतों में 115% से ज्यादा की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दिल्ली में अब ATF की कीमत 1 अप्रैल यानी आज से बढ़कर लगभग 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जबकि पिछले महीने यह करीब 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस तेजी का असर आज एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ीं कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। आज इंडिगो, स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल रहने के आसार हैं।


    क्यों बढ़े एटीएफ के दाम

    एटीएफ के रेट्स में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में आई उथल-पुथल है, जिससे ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। आज भी क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। ब्लूमबर्ग के मुाबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह साढ़े सात बजे के करीब 105.68 डॉलर प्रति बैरल थी और WTI की 102.82 डॉलर पर थी।


    बड़े शहरों में नई कीमतें

    देश के अन्य बड़े शहरों में भी ATF की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। कोलकाता में एटीएफ की कीमत अब करीब 2.05 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में लगभग 99,587 रुपये थी। चेन्नई में यह बढ़कर करीब 2.14 लाख रुपये प्रति किलोलीटर पहुंच गई है, जबकि पहले यह करीब 1 रुपये लाख थी।

    वहीं, मुंबई की बात करें तो यहां ATF की कीमत करीब 1.94 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने लगभग ₹90,451 थी और बड़े शहरों में यह सबसे कम है।


    एयरलाइन कंपनियों पर असर

    इस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों पर पड़ेगा। ईंधन खर्च बढ़ने से उनकी लागत बढ़ेगी, जिसके कारण शेयर बाजार में एयरलाइन कंपनियों के स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।


    यात्रियों की जेब पर पड़ेगा बोझ

    ATF की कीमत बढ़ने का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई देगा। एयरलाइंस अपनी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए हवाई किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे यात्रियों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।

  • Air Taxi in Delhi-NCR: दिल्ली-NCR में चलेगी एयर टैक्सी, 10 मिनट में तय होगा डेढ़ घंटे वाला सफर; इस रूट पर सबसे पहले मिलेगी सुविधाा

    Air Taxi in Delhi-NCR: दिल्ली-NCR में चलेगी एयर टैक्सी, 10 मिनट में तय होगा डेढ़ घंटे वाला सफर; इस रूट पर सबसे पहले मिलेगी सुविधाा


    नई दिल्ली । अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और रोज ऑफिस जाने के लिए लंबा सफर तय करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में भी एयर टैक्सी चलाने का प्लान है और इसक ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया है. एयर टैक्सी चलने के बाद दिल्ली में हर रोज लगने वाले जाम से लोगों को बड़ी निजात मिलेगी. ऐसे में चलिए जानते हैं कि किस रूट के लोगों को सबसे पहले एयर टैक्सी की सुविधा मिलेगी और इसका पूरा प्लान क्या है.

    इस रूट पर 10 मिनट में तय होगा सफर

    अब वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली से गुरुग्राम जाने के लिए सड़क नहीं आसमान का रास्ता लिया जाएगा. ट्रैफिक में फंसे रहने की जगह लोग सीधे हवा में उड़ती टैक्सी से सफर करेंगे. बता दें, भारतीय उद्योग परिसंघ CII की नई रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का प्लान सामने आया है. इस प्लान के तहत दिल्ली, गुरुग्राम और जेवर एयरपोर्ट को हवाई रास्ते से जोड़ा जाएगा. मतलब जिस गुरुग्राम से कनॉट प्लेस पहुंचने में आज एक-डेढ़ घंटा लग जाता है वही सफर सिर्फ 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा.

    कैसी होगी एयर टैक्सी?

    प्लान के मुताबिक, ये एयर टैक्सी असल में छोटी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली गाड़ियां होंगी जो हेलिकॉप्टर की तरह सीधी ऊपर उठेंगी और सीधे तय जगह पर उतर जाएंगी. CII की रिपोर्ट कहती है कि पहले इसे ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा, अगर सब कुछ ठीक रहा तो धीरे-धीरे आम लोगों के लिए इसे शुरू किया जा सकता है.इससे फायदा यह होगा कि ट्रैफिक से छुटकारा मिलेगा, वक्त बचेगा और इलेक्ट्रिक तकनीक होने की वजह से प्रदूषण भी कम होगा.

    आसान नहीं है एयर टैक्सी का रास्ता

    दिल्ली-एनसीआर में एयर टैक्सी का रास्ता इतना आसान नहीं है. दरअसल, दिल्ली का आसमान पहले से ही विमानों से भरा रहता है. ऐसे में एयर टैक्सी उड़ाने के लिए नए नियम, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और खास लैंडिंग जगहें बनानी होंगी. सरकार और विमानन एजेंसियों की मंजूरी के बिना ये सपना हकीकत नहीं बनेगा. रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2028 के बीच इसका ट्रायल शुरू हो सकता है और अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला तो आने वाले सालों में दिल्ली से गुरुग्राम जाना कुछ वैसा हो जाएगा, जैसे आज मेट्रो पर बस फर्क इतना होगा कि मेट्रो जमीन पर चलती है और ये टैक्सी आसमान में उड़ती दिखेगी.

  • फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली

    फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो एयरलाइंस द्वारा बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और लेटलतीफी ने देशभर के हवाई यात्रियों को भारी असुविधा में डाल दिया। 3 से 5 दिसंबर के बीच नए संचालन नियमों के कारण इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स देरी से संचालित हुईं। इन घटनाओं से करीब 3 लाख से अधिक  यात्री प्रभावित हुए।
    DGCA ने एयरलाइन पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया। इसमें मूल जुर्माना ₹1.80 करोड़ और फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन FDTLनियमों का 68 दिनों तक पालन न करने पर प्रतिदिन ₹30 लाख के हिसाब से अतिरिक्त ₹20.40 करोड़ की पेनाल्टी शामिल थी।

    हालांकि लोकलसर्कल्स के ताजा सर्वे में यह सामने आया है कि देश के 292 जिलों से 31,000 से अधिक हवाई यात्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें 61% यात्रियों का मानना था कि यह जुर्माना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है और एयरलाइन की जवाबदेही तय नहीं करता। वहीं 21% यात्रियों ने DGCA की कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि 18% ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

    सर्वे में यात्रियों ने केवल फ्लाइट रद्द होने तक की परेशानी ही नहीं बताई, बल्कि एयरलाइन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। कई यात्रियों का आरोप था कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्हें नियमों के तहत मिलने वाला कैश रिफंड नहीं दिया गया, बल्कि ट्रैवल वाउचर थमाए गए। यात्रियों का कहना है कि वाउचर उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा नहीं करते और सभी के लिए उपयोगी नहीं हैं।इंडिगो एयरलाइंस ने कहा कि वह DGCA के सभी निर्देशों का पालन करेगी और हालिया घटनाओं के बाद आंतरिक स्तर पर संचालन, सिस्टम और प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

    एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक यात्रियों के अधिकारों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और नियामक निगरानी मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।यह मामला एयरलाइन संचालन और नियामक जवाबदेही के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है, साथ ही हवाई यात्रियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में सुधार की मांग को भी उजागर करता है।

  • हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम

    हवाई यात्रा के दौरान पावर बैंक व लिथियम बैटरी डिवाइसेस पर रोक, DGCA ने कड़े किए नियम


    नई दिल्ली।
    अगर आप भी फ्लाइट (Flights) से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दरअसल, भारत ने फ्लाइट (Flights) में पावर बैंक (Power Bank) और लिथियम बैटरी वाली डिवाइसेस (Lithium batteries Devices) को लेकर कड़े नियम लागू किए हैं। डीजीसीए ने फ्लाइट के दौरान फोन या अन्य चीजों को चार्ज करने वाले पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। दुनियाभर में पावर बैंक से आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

    डीजीसीए ने इसको लेकर पिछले साल नवंबर में एक एडइवाजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि पावर बैंक और स्पेयर बैटरी सिर्फ हैंड लगेज में ले जाने की इजाजत होगी। उसे ओवरहेड कपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं। इसके पीछे आग लगने की वजह बताई गई थी और कहा गया था कि आग लगने पर उसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है।

    लिथियम बैटरी से आग बहुत तेजी से पकड़ती है, क्योंकि इस बैटरी में एनर्जी बहुत अधिक होती है। इस आग को कंट्रोल करना भी मुश्किल हो जाता है। एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि एयरक्राफ्ट के केबिन के अंदर छोटी सी बैटरी में लगी आग भी तेजी से फैल सकती है, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है।

    डीजीसीए के सर्कुलर में कहा गया है, “अलग-अलग रिचार्जेबल डिवाइस में लिथियम बैटरी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से हवाई जहाज से लिथियम बैटरी ले जाने में बढ़ोतरी हुई है। पावर बैंक, पोर्टेबल चार्जर और लिथियम बैटरी वाले ऐसे ही डिवाइस आग लगने का कारण बन सकते हैं और जहाज में आग लगा सकते हैं।” आगे कहा गया है, “ओवरहेड स्टोरेज डिब्बे में या कैरी-ऑन बैगेज के अंदर रखी लिथियम बैटरी छिपी हो सकती हैं, उन तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है, या यात्री या क्रू मेंबर उन पर आसानी से नजर नहीं रख सकते। इससे धुआं या आग लगने का पता चलने और उस पर कार्रवाई करने में देरी हो सकती है, जिससे फ्लाइट की सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है।”

    मौजूदा एविएशन सेफ्टी गाइडलाइंस के अनुसार, पावर बैंक सिर्फ केबिन बैगेज में ले जाने की इजाजत है, चेक-इन लगेज में नहीं। हालांकि, यात्रियों को फ्लाइट के दौरान पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने की इजाजत नहीं है। एयरलाइंस ने अब यात्रियों को इस पाबंदी के बारे में बताने के लिए बोर्डिंग अनाउंसमेंट और इनफ्लाइट ब्रीफिंग के जरिए याद दिलाना शुरू कर दिया है।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।