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  • त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

    नई दिल्ली । देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ हवाई यात्रियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। विमान टिकटों के किराए में अचानक तेज बढ़ोतरी का दावा किया गया है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विमान कंपनियों के किराए पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की मांग की है।

    CTI के अनुसार, कुछ दिन पहले जिन घरेलू उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थे, उनके किराए में अब 50 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संगठन का कहना है कि त्योहारी मौसम में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने वाली है और इसी दौरान किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।

    त्योहारी सीजन गणपति महोत्सव से शुरू होकर दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। बढ़ती मांग के बीच टिकटों के दाम में तेज वृद्धि यात्रियों के यात्रा बजट को प्रभावित कर सकती है।

    किराए में बढ़ोतरी का असर प्रमुख घरेलू रूटों पर भी बताया गया है। कुछ समय पहले दिल्ली और मुंबई के बीच आने-जाने का हवाई किराया करीब 10 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार से 25 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसी तरह दिल्ली-अहमदाबाद रूट पर पहले करीब 10 से 12 हजार रुपये का किराया था, जो अब 18 से 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।

    दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी किराए में बड़ा अंतर सामने आया है। पहले जहां आने-जाने का टिकट करीब 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसके लिए 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी पहले लगभग 11 हजार रुपये का किराया था, जो अब करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

    CTI ने विमान कंपनियों की क्षमता में कमी का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में घरेलू उड़ानों की सीट क्षमता में 5.6 फीसदी की कमी आई है। इसमें इंडिगो की क्षमता 4.5 फीसदी और एयर इंडिया की 8.8 फीसदी कम होने का दावा किया गया है। CTI का कहना है कि बड़ी विमान कंपनियों के पास घरेलू बाजार का बड़ा हिस्सा होने के कारण सीटों की उपलब्धता में कमी का सीधा असर किराए पर पड़ता है।

    इसके अलावा छोटे बच्चों के हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। CTI के मुताबिक, तीन दिन से दो साल तक के बच्चों का शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इस आयु वर्ग के बच्चों को अलग सीट उपलब्ध नहीं कराई जाती।

    CTI ने सरकार से मांग की है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत देने के लिए विमान कंपनियों के किराए की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएं।

  • इंडिगो को ₹2,536 करोड़ का तिमाही घाटा: महंगे ईंधन और रुपये की कमजोरी से बढ़ा दबाव, किराया बढ़ने के संकेत

    इंडिगो को ₹2,536 करोड़ का तिमाही घाटा: महंगे ईंधन और रुपये की कमजोरी से बढ़ा दबाव, किराया बढ़ने के संकेत

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के वित्तीय नतीजों ने एविएशन सेक्टर में दबाव की तस्वीर को एक बार फिर सामने ला दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी को 2,536 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने 3,068 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। एक साल के भीतर मुनाफे से घाटे में पहुंचना इस बात का संकेत है कि एयरलाइन उद्योग इस समय बढ़ती लागत, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और परिचालन चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

    इंटरग्लोब एविएशन के तहत संचालित इंडिगो का कुल कारोबार हालांकि इस अवधि में थोड़ा बढ़ा है, लेकिन मुनाफे पर भारी दबाव देखने को मिला है। कंपनी का परिचालन राजस्व 22,438 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाता है। इसके बावजूद खर्चों में तेज बढ़ोतरी ने लाभ को घाटे में बदल दिया। कंपनी के अनुसार इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ती कीमतें और भारतीय रुपये की कमजोरी रही है। डॉलर में होने वाले लीज, मेंटेनेंस और अन्य भुगतान के कारण मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर लागत पर पड़ता है।

    इसके अलावा इस तिमाही में कंपनी पर लगभग 250 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च भी आया, जिसने वित्तीय परिणामों को और प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य पूर्व में तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक विमानन उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। इंडिगो ने संकेत दिए हैं कि यदि लागत में यह बढ़ोतरी जारी रहती है तो आने वाले समय में हवाई किरायों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कंपनी अब फ्यूल हेजिंग जैसी रणनीतियों पर भी विचार कर रही है, ताकि भविष्य में ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। यह रणनीति दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस पहले से अपनाती रही हैं। इसके साथ ही इंडिगो ने लगभग 450 मिलियन डॉलर के प्रीपेमेंट को भी मंजूरी दी है, जिसका उपयोग विमान और इंजन जैसे एविएशन एसेट्स की खरीद में किया जाएगा। यह कदम कंपनी को लंबी अवधि में लीज निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

    प्रबंधन का कहना है कि वित्तीय दबाव के बावजूद कंपनी की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। कंपनी की क्षमता में वृद्धि हुई है और कुल आय में भी सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि यात्रियों की संख्या में हल्की गिरावट देखने को मिली है, जो इस तिमाही में 1.1 प्रतिशत घटकर 31.6 मिलियन रह गई। प्रति किलोमीटर आय और सीट भराव दर में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि उद्योग मानकों के अनुसार यह स्थिति अब भी स्थिर मानी जा रही है।

    शेयर बाजार में भी नतीजों का असर देखने को मिला और कंपनी के शेयर में दबाव रहा। हालांकि इंडिगो का बाजार पूंजीकरण अब भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो इसकी बाजार स्थिति को दर्शाता है। कुल मिलाकर यह तिमाही एयरलाइन उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रही है, जहां बढ़ती लागत ने मजबूत मांग के बावजूद मुनाफे को प्रभावित किया है। आने वाले महीनों में किराया निर्धारण और ईंधन कीमतों की दिशा कंपनी के प्रदर्शन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।