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  • पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन

    पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश और ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वाराणसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में शामिल होंगे। दौरे के अगले चरण में वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे।

    प्रधानमंत्री का कार्यक्रम उद्योग, रोजगार, महिला भागीदारी, रक्षा क्षमताओं और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों पर केंद्रित रहेगा। दोनों राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए विनिर्माण क्षेत्र और वित्तीय तकनीक से संबंधित सुविधाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करेंगे। आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं पर आधारित इस इकाई से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    इस इकाई में तैयार होने वाले परिधानों को कंपनी के वैश्विक ग्राहक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। परियोजना को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री दोपहर करीब एक बजे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के एयर डिस्प्ले-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता और हवाई कौशल प्रदर्शित किया जाएगा।

    एयर डिस्प्ले में तेजस, एलसीएच प्रचंड, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनके साथ परिवहन विमानों की भी भागीदारी होगी। भारतीय थलसेना और नौसेना की मौजूदगी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम हवाई करतब दिखाएंगी। इन प्रदर्शनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित उड़ान और संचालन संबंधी दक्षता देखने को मिलेगी।

    वाराणसी के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री ओडिशा रवाना होंगे। शाम करीब 4:45 बजे भुवनेश्वर में वह RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    RBI का नया डेटा सेंटर देश की वित्तीय प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर होंगे, जहां महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों सहित RBI की प्रमुख डिजिटल सेवाओं से जुड़े सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इस सुविधा को अपटाइम इंस्टीट्यूट के टियर-IV मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर की परिचालन मजबूती और विश्वसनीयता से संबंधित उच्च स्तर का मानक है।

    भुवनेश्वर में स्थापित होने वाला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करना और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।

  • तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    तेजस में सवार हुए भारत और जापान के एयरफोर्स चीफ, ‘वीर गार्जियन 2026’ में दिखा बढ़ता रक्षा सहयोग

    नई दिल्ली । भारत और जापान के बीच चल रहे संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ के दौरान दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों ने भारतीय स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरिता और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रविवार को जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां तेजस से जुड़ी उड़ान गतिविधि हुई।

    भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने तेजस में अकेले उड़ान भरी। वहीं जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल ताकेहिरो मोरिता ने भी जोधपुर से भारतीय लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान का अनुभव लिया। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की यह गतिविधि संयुक्त अभ्यास के दौरान भारत और जापान के बीच हवाई सहयोग को सामने लाती है।

    ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है। इसका आयोजन जोधपुर में 9 सितंबर से 22 सितंबर तक किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की वायुसेनाएं युद्ध जैसी परिस्थितियों में विभिन्न हवाई अभियानों और युद्धक गतिविधियों का प्रशिक्षण ले रही हैं।

    अभ्यास के तहत दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने एयर स्ट्राइक से जुड़े अभियानों का भी अभ्यास किया है। इसका उद्देश्य दोनों वायुसेनाओं के बीच ऑपरेशनल तालमेल, आपसी समझ और संयुक्त अभियानों के दौरान समन्वय को मजबूत करना है। प्रशिक्षण के दौरान दोनों देशों के वायु योद्धाओं को एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं और युद्धक तौर-तरीकों को समझने का अवसर मिल रहा है।

    इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय वायुसेना की ओर से स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस शामिल है। इसके अलावा सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान भी अभ्यास का हिस्सा हैं। जापान की ओर से एफ-2ए लड़ाकू विमानों ने इसमें भाग लिया है।

    इस बार का अभ्यास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के लड़ाकू विमान भारत में आयोजित ‘वीर गार्जियन’ के इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास में शामिल हुए हैं। इससे दोनों वायुसेनाओं को अलग-अलग प्रकार के लड़ाकू विमानों के साथ संयुक्त अभियानों और प्रशिक्षण गतिविधियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला है।

    अभ्यास के दौरान अब तक दोनों देशों के वायु योद्धाओं ने अलग-अलग हवाई अभियानों और ऑपरेशनल गतिविधियों को पूरा किया है। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में काम करने, संचालन प्रक्रियाओं को समझने और बेहतर समन्वय विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    जोधपुर के आसमान में तेजस की उड़ान ने संयुक्त अभ्यास में भारत की स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को भी प्रमुखता से सामने रखा। दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की मौजूदगी ने अभ्यास के महत्व को रेखांकित किया। तेजस में उड़ान का अनुभव लेने की गतिविधि भारत और जापान की वायुसेनाओं के बीच बढ़ते व्यावहारिक सहयोग तथा आपसी समझ को मजबूत करने वाले प्रशिक्षण के तौर पर सामने आई है।

  • अमेरिकी सैनिक मोबाइल फोन सुरक्षा, अमेरिकी वायु सेना सैनिक, पेंटागन साइबर सुरक्षा, लोकेशन डेटा सुरक्षा, अमेरिकी सैन्य कंप्यूटर

    अमेरिकी सैनिक मोबाइल फोन सुरक्षा, अमेरिकी वायु सेना सैनिक, पेंटागन साइबर सुरक्षा, लोकेशन डेटा सुरक्षा, अमेरिकी सैन्य कंप्यूटर

    नई दिल्ली । अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल फोन और कंप्यूटरों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी वायु सेना और अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने अपने कुछ उपकरणों में विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा के संभावित दुरुपयोग से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों और सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।

    अमेरिकी सीनेटर रॉन वाइडन की ओर से जारी पत्रों और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी वायु सेना ने करीब दो महीने पहले अपने कंप्यूटर और मोबाइल फोन में विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने की प्रक्रिया पूरी की। दूसरी ओर, अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों में ऐसे पहचानकर्ताओं को हाल में निष्क्रिय किया है।

    विज्ञापन पहचानकर्ता ऐसे डिजिटल संकेतक होते हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर मोबाइल और कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों से संबंधित विज्ञापन और डेटा विश्लेषण के लिए किया जा सकता है। इनसे जुड़े डेटा में स्थान संबंधी जानकारी भी शामिल हो सकती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय यह है कि यदि संवेदनशील स्थानों या सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी गलत हाथों में पहुंचती है तो उसका इस्तेमाल सुरक्षा जोखिम पैदा करने के लिए किया जा सकता है।

    मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने इसी खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डेटा का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों को ट्रैक करने और संभावित रूप से उन्हें निशाना बनाने के लिए किया गया। हालांकि, ऐसे डेटा के इस्तेमाल और किसी विशेष हमले के बीच सीधा संबंध हर मामले में स्थापित होना अलग जांच का विषय है।

    इसी पृष्ठभूमि में अमेरिकी सांसदों ने सैन्य प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाली डिजिटल तकनीक से जुड़े सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए हैं। सीनेटर रॉन वाइडन और प्रतिनिधि पैट हैरिगन ने सैन्य अधिकारियों से जुड़े सुरक्षा उपायों की समीक्षा के लिए पेंटागन से जांच की मांग की थी। उनका मुख्य concern यह है कि सामान्य व्यावसायिक तकनीक से एकत्र होने वाला डेटा संवेदनशील सैन्य गतिविधियों के बारे में अनजाने में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकता है।

    अमेरिकी वायु सेना द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करने का फैसला इसी व्यापक सुरक्षा चिंता से जुड़ा माना जा रहा है। सैन्य उपकरणों पर इस तरह की तकनीकी पाबंदी का उद्देश्य उन डिजिटल संकेतों को कम करना है जिनका उपयोग डिवाइस या उपयोगकर्ता से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए किया जा सकता है।

    स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी अपने विंडोज उपकरणों के संबंध में इसी दिशा में कदम उठाया है। विशेष अभियान चलाने वाले सैन्य बलों के लिए स्थान और संचार से जुड़ी जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ऐसी इकाइयों की गतिविधियां अक्सर संवेदनशील सैन्य अभियानों से जुड़ी होती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने सैन्य क्षेत्र में निजी कंपनियों से मिलने वाले डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस को भी तेज किया है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर और विभिन्न डिजिटल सेवाओं से बड़ी मात्रा में डेटा उत्पन्न होता है। यदि इस जानकारी तक अनधिकृत लोगों या संगठनों की पहुंच बनती है तो संवेदनशील गतिविधियों की पहचान करने का जोखिम बढ़ सकता है।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा विज्ञापन पहचानकर्ताओं को बंद करना इस खतरे को कम करने की दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है। हालांकि, केवल एक सेटिंग बंद करने से डिजिटल सुरक्षा से जुड़े सभी जोखिम समाप्त नहीं होते। सैन्य उपकरणों, नेटवर्क, एप्लीकेशन और डेटा साझाकरण से जुड़े व्यापक सुरक्षा उपाय भी महत्वपूर्ण बने रहते हैं। इस मामले ने यह स्पष्ट किया है कि आधुनिक युद्ध और सैन्य अभियानों में डिजिटल लोकेशन डेटा भी सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुका है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

  • बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज

    बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज




    नई दिल्ली। पाकिस्तान एयरफोर्स के एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के बांग्लादेश दौरे को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह टीम ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के साथ “एयर स्टाफ टॉक्स” (Air Staff Talks) में हिस्सा ले रही है। इस तरह की बातचीत का उद्देश्य आमतौर पर दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और रक्षा संबंधों को मजबूत करना होता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार यह बैठक 10 मई के आसपास शुरू हुई और इसमें पाकिस्तान वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चर्चा का एक बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सैन्य समन्वय से जुड़ा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भविष्य में बांग्लादेशी पायलटों और तकनीशियनों के लिए पाकिस्तान में ट्रेनिंग कार्यक्रम पर विचार हो सकता है।

    इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में JF-17 थंडर लड़ाकू विमान को लेकर संभावित चर्चा का भी उल्लेख किया जा रहा है। JF-17 एक हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है। हालांकि बांग्लादेश द्वारा इस विमान की खरीद या किसी सौदे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे केवल संभावित चर्चा के रूप में ही देखा जा सकता है।

    इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश में एयरफोर्स के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा जांच का भी जिक्र किया गया है, लेकिन इन मामलों को लेकर भी विस्तृत और स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सीमित है।

    साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान वायुसेना के अधिकारी बांग्लादेश में कुछ एयरबेस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जिनमें रनवे विस्तार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम शामिल हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित है।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैन्य स्तर पर संपर्क और बातचीत बढ़ने की दिशा जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन JF-17 सौदा, भारतीय सीमा के पास सैन्य रणनीति या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव जैसे दावे फिलहाल पूरी तरह पुष्टि किए बिना स्पष्ट रूप से नहीं कहे जा सकते।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।