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  • एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    एयर इंडिया की AI 1741 फ्लाइट लैंडिंग के दौरान पक्षी से टकरा गई। पायलट ने विमान को सुरक्षित उतारा और सभी 164 यात्री सुरक्षित रहे।

    नई दिल्ली ।दिल्ली से पटना आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 1741 के साथ सोमवार सुबह लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना सामने आई। विमान में 164 यात्री सवार थे। पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से पहले विमान के दाहिने हिस्से में एक पक्षी टकरा गया। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत सतर्कता बरती और विमान को सुरक्षित तरीके से रनवे पर उतार लिया।

    विमान ने सुबह करीब 7:43 बजे पटना एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की। विमान के जमीन पर उतरने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित टर्मिनल भवन तक पहुंचाया गया। घटना के दौरान किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है। पायलट की तत्परता और समय पर लिए गए फैसले से स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    लैंडिंग से पहले विमान के दाहिने इंजन के आसपास पक्षी के टकराने का पता चला। इसके बाद पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल और हवाई अड्डे के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए आपातकालीन व्यवस्था सक्रिय कर दी।

    किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए रनवे के आसपास दमकल वाहनों और चिकित्सा दलों को तैयार रखा गया। विमान के सुरक्षित उतरने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया और इसके बाद तकनीकी टीम ने विमान की विस्तृत जांच शुरू की।

    ग्राउंड इंजीनियरिंग और तकनीकी विशेषज्ञों ने विमान के बाहरी हिस्से के साथ दोनों इंजनों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान बर्ड हिट की पुष्टि हुई। शुरुआती तकनीकी निरीक्षण में विमान के मुख्य इंजन और टरबाइन में किसी बड़े आंतरिक या संरचनात्मक नुकसान की जानकारी नहीं मिली।

    सुरक्षा मानकों के तहत विमान की दोबारा उड़ान से पहले आवश्यक तकनीकी जांच और प्रक्रियाएं पूरी की गईं। विमान को उड़ान के लिए उपयुक्त पाए जाने के बाद आगे के संचालन की अनुमति दी गई। इस प्रक्रिया के कारण विमान के निर्धारित कार्यक्रम पर असर पड़ा।

    AI 1741/1852 विमान को पटना से दिल्ली के लिए सुबह 8:45 बजे रवाना होना था। हालांकि, बर्ड हिट के बाद की गई अनिवार्य सुरक्षा जांच और तकनीकी परीक्षण के चलते विमान को करीब डेढ़ घंटे की देरी से दिल्ली के लिए रवाना किया गया।

    बर्ड स्ट्राइक विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती मानी जाती है, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान जब विमान अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर होता है। पक्षी के इंजन या विमान के किसी महत्वपूर्ण हिस्से से टकराने की स्थिति में तकनीकी समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में पायलट की सतर्कता के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सेवाओं की तत्परता भी महत्वपूर्ण होती है।

    पटना एयरपोर्ट पर हुई इस घटना में विमान को सुरक्षित उतारने के बाद यात्रियों को टर्मिनल तक पहुंचाया गया और तकनीकी जांच के जरिए विमान की उड़ान क्षमता सुनिश्चित की गई। घटना के कारण कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन सभी 164 यात्रियों के सुरक्षित रहने से बड़ी चिंता टल गई। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद विमान ने निर्धारित मार्ग पर अपनी अगली उड़ान भरी।

  • विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    विमान चालकों के लिए कड़े होंगे नियम, गांजा कांड के बाद सरकार और एयर इंडिया ने बढ़ाई सख्ती

    नई दिल्ली । हजारों फीट की ऊंचाई पर यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में घटित एक गंभीर विमान दुर्घटना के बाद सरकार ने सभी एयरलाइंस के फ्लाइट क्रू और विमान चालकों के मादक पदार्थ परीक्षण को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब आकस्मिक ड्रग टेस्ट के दायरे को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बनाई जा रही है।

    यह प्रशासनिक पहल फुकेत से नई दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई 2379 में हुई एक गंभीर घटना के बाद सामने आई है। उड़ान के दौरान विमान में अचानक तेज हलचल हुई और वह हवा में लगभग 300 फीट नीचे आ गया। इस हादसे में तीन शिशुओं सहित 137 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से कई लोग घायल हो गए थे। जांच के दौरान मुख्य विमान चालक के शरीर में भांग या गांजे जैसे वर्जित नशीले पदार्थ की पुष्टि हुई थी।

    विमानन सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले को देखते हुए विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के उड़ान परिचालन विभाग ने सभी पायलटों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्जित दवाओं और मादक पदार्थों के सेवन की जांच अब शत-प्रतिशत चालकों के लिए लागू होगी। यह प्रक्रिया कंपनी की गुरुग्राम अकादमी, फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर और संबंधित एयरलाइंस कार्यालयों में संचालित की जा रही है।

    विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा सितंबर 2021 में मादक पदार्थों की जांच से संबंधित नियम जारी किए गए थे, जिन्हें जनवरी 2022 से प्रभावी रूप से लागू किया गया था। वर्तमान नियमों में औचक जांच का प्रावधान है, लेकिन हालिया सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्र सरकार नियमों को अधिक कठोर बनाने पर विचार कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत परीक्षणों की आवृत्ति और जांच का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया जाएगा।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करने वाले उड़ानों में भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। नागरिक उड्डयन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि क्रू सदस्यों के नियमित और आकस्मिक परीक्षण से उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और इस प्रकार की लापरवाही पर पूर्ण विराम लग सकेगा।

    विमानन मंत्रालय और संबंधित एयरलाइंस का मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जांच की नई व्यवस्था से न केवल एयरलाइंस के अनुशासन में सुधार होगा, बल्कि उड़ानों के दौरान यात्रियों का विश्वास भी पुनः मजबूत होगा। सरकार आने वाले दिनों में इस संबंध में नई मानक संचालन प्रक्रिया जारी कर सकती है।

  • फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़

    फुकेट-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन के डोप टेस्ट ने बढ़ाई चिंता, 300 फीट नीचे आने के बाद जांच में नया मोड़


    नई दिल्ली । 
    फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में हुई तेज टर्बुलेंस की घटना की जांच के बीच मामले में नया पहलू सामने आया है। 4 अगस्त को हुई इस घटना के बाद विमान के कैप्टन का साइकोएक्टिव पदार्थों के सेवन को लेकर पोस्ट-फ्लाइट स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक टेस्ट में कैप्टन के पॉजिटिव पाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि एयरलाइन ने इस नतीजे की पुष्टि या खंडन नहीं किया है।

    एयर इंडिया के मुताबिक संबंधित फ्लाइट के क्रू सदस्यों का तय नियमों के तहत फ्लाइट के बाद स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया था। एयरलाइन का कहना है कि इन टेस्ट के नतीजे उसके साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है। एयरलाइन ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित अधिकारियों की जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

    यह वही एयरबस A320 विमान था, जिसमें कुल 145 लोग सवार थे। यात्रा के दौरान ओडिशा के पास विमान को तेज एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। झटकों के दौरान विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे की ओर चला गया। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी और कई लोगों को चोटें आईं।

    दिल्ली पहुंचने के बाद 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद विमान की उड़ान, टर्बुलेंस की प्रकृति और क्रू द्वारा स्थिति को संभालने के तरीके समेत कई पहलुओं पर सवाल उठे। अब कैप्टन के कथित पॉजिटिव डोप टेस्ट ने जांच के दायरे में एक और महत्वपूर्ण पहलू जोड़ दिया है।

    नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस पूरे मामले की जांच कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टर्बुलेंस किस वजह से हुआ और क्या मौसम संबंधी परिस्थितियां इसकी वजह थीं। इसके अलावा विमान पर टर्बुलेंस के संभावित तकनीकी प्रभाव की भी जांच की जा रही है। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि झटकों के कारण किसी हाइड्रोलिक सिस्टम पर असर पड़ा था या नहीं।

    जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि टर्बुलेंस के बाद विमान को दिल्ली तक ले जाना उचित निर्णय था या उसे किसी नजदीकी हवाई अड्डे पर उतारा जाना चाहिए था। वाराणसी और लखनऊ जैसे वैकल्पिक हवाई अड्डों पर विमान को डायवर्ट किए जाने की संभावना पर भी जांच में विचार किया जा रहा है।

    नियमों के तहत जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट क्रू को उड़ान ड्यूटी से हटाया जाता है। इस मामले में भी पायलट फिलहाल उड़ान नहीं भर रहे हैं। साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े डोप टेस्ट के नियमों के अनुसार पहली बार पॉजिटिव पाए जाने वाले क्रू सदस्य को नशामुक्ति और पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट मिलने पर ही सक्रिय ड्यूटी पर लौटने की अनुमति मिल सकती है।

    अगर उड़ान ड्यूटी पर लौटने के बाद वही व्यक्ति दूसरी बार ऐसे पदार्थों के लिए पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसके लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है। तीसरी बार पॉजिटिव पाए जाने की स्थिति में फ्लाइंग लाइसेंस रद्द किए जाने का प्रावधान है।

    अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुसार किसी भी लाइसेंसधारी पायलट को ऐसे साइकोएक्टिव पदार्थों के प्रभाव में उड़ान संचालन नहीं करना चाहिए, जिनसे सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अब इस मामले में टर्बुलेंस की वजह, विमान की तकनीकी स्थिति और कैप्टन के कथित डोप टेस्ट समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

  • फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान मंगलवार को अचानक आए तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण विमान को कुछ समय के लिए तेज झटकों का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई में भी क्षणिक बदलाव दर्ज किया गया। इस घटना में कई यात्रियों और कुछ क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    एअर इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार फुकेत से दिल्ली आने वाली फ्लाइट एआई2379 उड़ान के दौरान अप्रत्याशित टर्बुलेंस से प्रभावित हुई। विमान में आए तेज झटकों के कारण कुछ यात्रियों को हल्की चोटें लगीं। एयरलाइन ने बताया कि किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को गंभीर चोट नहीं आई है। एहतियात के तौर पर जिन लोगों को चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें एयरपोर्ट पर मौजूद मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

    एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ ने प्रभावित यात्रियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। साथ ही संबंधित विमानन अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की आवश्यक औपचारिकताओं और जांच प्रक्रिया में भी सहयोग किया जा रहा है। एयर इंडिया ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार टर्बुलेंस उड़ान के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, तेज हवाओं या वायुमंडलीय दबाव में परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो सकता है। अधिकांश मामलों में आधुनिक विमान ऐसे हालात से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर यात्रियों को सीट बेल्ट बांधकर रखने की सलाह लगातार दी जाती है, ताकि अचानक झटकों की स्थिति में चोट लगने का खतरा कम हो सके।

    हाल के महीनों में एअर इंडिया की उड़ानों से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। जून में दिल्ली से रायपुर जा रही एक उड़ान लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना का शिकार हुई थी। उस समय भी विमान सुरक्षित उतरा था और किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को नुकसान नहीं पहुंचा था। घटना के बाद विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की गई और सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद उसे दोबारा परिचालन के लिए मंजूरी दी गई थी।

    ताजा घटना के बाद भी विमान की सुरक्षित लैंडिंग ने यात्रियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत दी है। एयरलाइन और विमानन अधिकारियों की ओर से पूरी घटना की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। फिलहाल सभी प्रभावित यात्रियों की स्थिति सामान्य बताई गई है और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

  • एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    नई दिल्ली । टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी सहायक बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से 22,238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। यह पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी अवधि में दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी लगभग 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी का पुनर्गठन अभी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

    वार्षिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों एयरलाइंस की कुल संयुक्त आय 71,870 करोड़ रुपये रही। परिचालन गतिविधियों के बावजूद बढ़ते खर्च, आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और अन्य परिचालन चुनौतियों का असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई दिया। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान चरण को लंबे समय तक चलने वाली परिवर्तन प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।

    एयर इंडिया ने इस दौरान 51,452 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका शुद्ध घाटा 15,368 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व 19,088 करोड़ रुपये दर्ज किया गया और कंपनी को 6,767 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। दोनों कंपनियों के संयुक्त परिणाम बताते हैं कि एयरलाइन समूह अभी भी व्यापक पुनर्गठन और निवेश के दौर में है।

    वर्तमान शेयरधारिता संरचना के अनुसार एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस के पास है, जबकि 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस के स्वामित्व में है। इसके अलावा 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों के पास है, जो वर्ष 2022 में निजीकरण के बाद लागू की गई कर्मचारी शेयर लाभ योजना के तहत प्रदान की गई थी।

    एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शेयरधारकों के नाम अपने संदेश में कहा कि किसी वैश्विक स्तर की एयरलाइन का निर्माण अल्प अवधि में संभव नहीं होता। उनके अनुसार एयर इंडिया के व्यापक परिवर्तन को कुछ तिमाहियों के प्रदर्शन से नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी संस्थाओं का विकास वर्षों की निरंतर प्रक्रिया का परिणाम होता है।

    उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का पुनरुद्धार लगभग पांच से दस वर्षों की यात्रा है। जब टाटा समूह ने वर्ष 2022 में एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब कंपनी कई परिचालन और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही थी। इन चुनौतियों में पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना, संगठनात्मक संस्कृति में सुधार और वैश्विक स्तर की परिचालन क्षमता विकसित करना शामिल है।

    चेयरमैन ने यह भी संकेत दिया कि विमानों के पुर्जों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लंबे समय से बनी हुई बाधाओं ने भी सुधार प्रक्रिया की गति को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनी अपने बेड़े के विस्तार, सेवा गुणवत्ता में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    वित्तीय परिणाम यह दर्शाते हैं कि एयर इंडिया का पुनर्गठन अभी शुरुआती चरणों से आगे बढ़ते हुए एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। टाटा समूह एयरलाइन को प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से लगातार निवेश कर रहा है। आने वाले वर्षों में आधुनिकीकरण, परिचालन सुधार और सेवा विस्तार की योजनाओं का प्रभाव कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई देने की उम्मीद की जा रही है।

  • आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा

    आखिरी समय पर बदली फ्लाइट तो एयरलाइन पर गिरी कानूनी गाज कश्मीर ट्रिप खराब होने पर छह यात्रियों को मिलेगा मुआवजा


    भोपाल । भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एयर इंडिया को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए छह वरिष्ठ नागरिक यात्रियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एयरलाइन को कुल 96 हजार रुपए की राशि क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि यह राशि 8 दिसंबर 2024 से सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर संबंधित यात्रियों को दी जाए। आयोग ने माना कि एयरलाइन ने यात्रियों को यात्रा शुरू होने से महज दो घंटे पहले फ्लाइट कार्यक्रम में बदलाव की सूचना दी जिससे उनकी पूरी यात्रा योजना बुरी तरह प्रभावित हुई और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।

    मामले के अनुसार भोपाल निवासी छह वरिष्ठ नागरिकों ने 13 अप्रैल 2024 को 11 मई 2024 की भोपाल से दिल्ली होते हुए श्रीनगर और 17 मई 2024 की वापसी यात्रा के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट बुक की थी। टिकटों पर करीब 1.18 लाख रुपए खर्च किए गए थे। टिकट कन्फर्म होने के बाद यात्रियों ने श्रीनगर पहलगाम और गुलमर्ग में होटल हाउसबोट स्थानीय टैक्सी पर्यटन पैकेज और अन्य सेवाओं की अग्रिम बुकिंग भी कर ली थी। वापसी यात्रा के लिए दिल्ली से रानी कमलापति स्टेशन तक वंदे भारत एक्सप्रेस के आरक्षित टिकट भी पहले से बुक थे।

    यात्रा के दिन एयर इंडिया ने उड़ान शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले सूचना दी कि निर्धारित यात्रा संभव नहीं होगी और यात्रियों को अगले दिन भेजा जाएगा। अचानक हुए इस बदलाव के कारण पूरी यात्रा योजना अस्तव्यस्त हो गई। यात्रियों को होटल बुकिंग दोबारा करनी पड़ी स्थानीय परिवहन और पर्यटन पैकेज बदलने पड़े जबकि रेलवे टिकटों में भी बदलाव करना पड़ा। उनका कहना था कि यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो इतना बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता। यात्रियों ने एयरलाइन से कई बार मुआवजे की मांग की लेकिन राहत नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान एयर इंडिया ने अपना बचाव करते हुए कहा कि फ्लाइट रद्द नहीं हुई थी बल्कि दिल्ली में बर्ड स्ट्राइक की अप्रत्याशित घटना के कारण उड़ान प्रभावित हुई थी। एयरलाइन के अनुसार इसी वजह से यात्रियों की दिल्ली से श्रीनगर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने की आशंका थी इसलिए उन्हें अगले दिन की उड़ान में समायोजित किया गया। एयर इंडिया ने इसे अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति बताते हुए सेवा में कमी से इनकार किया।

    हालांकि आयोग ने एयरलाइन के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि यदि वास्तव में बर्ड स्ट्राइक हुई थी तो उसके समर्थन में डीजीसीए की जांच रिपोर्ट तकनीकी रिपोर्ट या अन्य आधिकारिक दस्तावेज पेश किए जाने चाहिए थे लेकिन एयरलाइन ऐसा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। केवल लिखित दावा करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि फोर्स मेज्योर का दावा करने वाली एयरलाइन पर ही उसे प्रमाणित करने की जिम्मेदारी होती है।

    परिवादियों की ओर से पैरवी करने वाली अधिवक्ता कल्पना वर्मा ने बताया कि यात्रियों ने प्रति व्यक्ति लगभग 40 हजार रुपए के वास्तविक नुकसान का दावा किया था लेकिन आयोग ने फिलहाल प्रति व्यक्ति 15 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और एक हजार रुपए वाद व्यय देने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। यह फैसला उन यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिन्हें अंतिम समय में फ्लाइट में बदलाव या एयरलाइन की लापरवाही के कारण परेशानी उठानी पड़ती है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    मुंबई एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, एक ही रनवे पर आमने-सामने आए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान

    नई दिल्ली । मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा विमान हादसा उस समय टल गया, जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के दो विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने आ गए। घटना के दौरान कुछ समय के लिए हवाई अड्डे पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की त्वरित कार्रवाई और दोनों विमानों के पायलटों की सतर्कता के कारण संभावित टक्कर टाल दी गई। इस घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और सभी सुरक्षित रहे।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार देर रात लगभग 10 बजे की है। सिलीगुड़ी से मुंबई पहुंची एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ान AIX 1547 लैंडिंग के बाद निर्धारित समय पर रनवे खाली नहीं कर सकी थी। इसी दौरान मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना होने वाली एयर इंडिया की उड़ान AI 816 उसी रनवे से टेकऑफ की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में थी। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक ही रनवे पर आमने-सामने की स्थिति में आ गए, जिससे संभावित दुर्घटना का खतरा उत्पन्न हो गया।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने तत्काल हस्तक्षेप किया और टेकऑफ की अनुमति वापस लेते हुए एयर इंडिया के विमान को तुरंत रोकने का निर्देश दिया। पायलटों ने बिना किसी देरी के एटीसी के निर्देशों का पालन किया, जिसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से रनवे से हटाकर बे में ले जाया गया। समय रहते उठाए गए इस कदम ने संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया।

    घटना के बाद संबंधित विमान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आवश्यक तकनीकी और परिचालन संबंधी जांच शुरू करने की तैयारी की गई है। विमान के सिस्टम, रनवे संचालन और पूरी घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऐसी स्थिति कैसे बनी और भविष्य में इसे रोकने के लिए किन सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता है।

    एयर इंडिया ने घटना के बाद जारी बयान में कहा कि यात्रियों की सुरक्षा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एयरलाइन ने बताया कि प्रभावित यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई और सभी आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरी घटना की आंतरिक समीक्षा की जाएगी और संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई अड्डों पर रनवे संचालन अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जहां प्रत्येक विमान की आवाजाही एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी में होती है। किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में एटीसी के त्वरित निर्देश और पायलटों की समय पर प्रतिक्रिया बड़े हादसों को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है। यही कारण है कि इस घटना में भी सतर्कता के चलते किसी प्रकार की जनहानि या विमान को नुकसान नहीं हुआ।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि रनवे पर दोनों विमान एक साथ कैसे पहुंचे और क्या परिचालन प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे।

  • अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    अहमदाबाद विमान हादसे पर नया मोड़: पायलट की गलती नहीं, 4 सेकेंड में आई विद्युत विफलता बनी वजह? पायलट संगठन का बड़ा दावा

    नई दिल्ली । अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। दुर्घटना के कारणों पर चल रही जांच के बीच पायलटों के एक प्रमुख संगठन ने आधिकारिक अंतरिम निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए नई तकनीकी जानकारी सामने रखी है। संगठन का दावा है कि उपलब्ध सिम्युलेटर परीक्षण और तकनीकी विश्लेषण इस संभावना की ओर संकेत करते हैं कि दुर्घटना की मुख्य वजह किसी पायलट की जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि विमान में उत्पन्न हुई गंभीर विद्युत प्रणाली की विफलता हो सकती है।

    विमान दुर्घटना के बाद जारी अंतरिम जांच निष्कर्षों में यह संकेत दिया गया था कि इंजन को मिलने वाली ईंधन आपूर्ति बंद होने के कारण विमान की शक्ति प्रणाली प्रभावित हुई और कुछ ही सेकेंड के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। हालांकि अब पायलट संगठन ने इस निष्कर्ष को चुनौती देते हुए कहा है कि उनके द्वारा कराए गए विस्तृत सिम्युलेटर परीक्षण आधिकारिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाते।

    संगठन के अनुसार, दुर्घटना से पहले विमान के वजन, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिम्युलेटर पर कई परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में यह पाया गया कि यदि ईंधन आपूर्ति को मैन्युअल रूप से बंद किया जाए तो बैकअप पावर सिस्टम को सक्रिय होने में आधिकारिक दावे की तुलना में काफी अधिक समय लगता है। संगठन का कहना है कि यह अंतर जांच की दिशा और निष्कर्षों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विमान में विद्युत प्रणाली की व्यापक विफलता अनेक अन्य प्रणालियों को भी प्रभावित कर सकती है। यदि उड़ान के महत्वपूर्ण चरण में अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाए तो इंजन नियंत्रण, संचार प्रणाली और अन्य सुरक्षा तंत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। पायलट संगठन इसी संभावना की ओर संकेत करते हुए कह रहा है कि दुर्घटना की जड़ में कोई बड़ी तकनीकी खराबी हो सकती है, जिसकी गहन जांच आवश्यक है।

    दुर्घटना से जुड़े कुछ विवरणों का हवाला देते हुए संगठन ने यह भी दावा किया कि विमान में उड़ान के अंतिम क्षणों से पहले विद्युत असामान्यताओं के संकेत देखे गए थे। उनके अनुसार, उपलब्ध जानकारी इस बात की ओर इशारा करती है कि विमान में अचानक और व्यापक स्तर पर तकनीकी गड़बड़ी उत्पन्न हुई हो सकती है। यही कारण है कि संगठन ने जांच एजेंसियों से सभी तकनीकी पहलुओं की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़ी दुर्घटना की जांच में जल्दबाजी से निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। आधुनिक विमानों में हजारों तकनीकी पैरामीटर रिकॉर्ड होते हैं और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए उड़ान डेटा, कॉकपिट रिकॉर्डिंग, रखरखाव इतिहास और तकनीकी परीक्षणों का व्यापक अध्ययन किया जाता है। इसलिए किसी भी वैकल्पिक तकनीकी संभावना को पूरी तरह खारिज करने से पहले उसका परीक्षण आवश्यक माना जाता है।

    इस बीच पायलट संगठन ने संबंधित तकनीकी आंकड़े और परीक्षण परिणाम विमान निर्माता तथा विमानन अधिकारियों को सौंपने का दावा किया है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि दुर्घटना की अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले सभी उपलब्ध साक्ष्यों और विशेषज्ञों की राय का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शी जांच न केवल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को सामने लाने के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

    अहमदाबाद विमान हादसे ने देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को गहराई से प्रभावित किया था। अब जांच के इस नए मोड़ ने तकनीकी विशेषज्ञों, विमानन समुदाय और आम लोगों के बीच दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अंतिम निष्कर्ष आने तक इस मामले पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।