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सऊदी अरब में सुरक्षा चिंताओं से उड़ानें प्रभावित, एयर इंडिया समेत कई कंपनियों ने सेवाएं कीं रद्द
नई दिल्ली ।सऊदी अरब में सुरक्षा स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय विमानन कंपनियों ने कई शहरों के लिए अपनी उड़ान सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रियाद, जेद्दा तथा दम्माम के लिए आने-जाने वाली उड़ानें 20 अक्टूबर 2026 तक रद्द रखने का फैसला किया है। वहीं, इंडिगो और अकासा एयर ने भी कुछ सऊदी गंतव्यों के लिए अपनी सेवाओं को अलग-अलग तारीखों तक स्थगित कर दिया है।एयर इंडिया ने यात्रियों के लिए जारी यात्रा परामर्श में बताया कि सऊदी अरब में विकसित हो रही स्थिति को देखते हुए रियाद, दम्माम और जेद्दा से संबंधित उसकी सभी उड़ानें 20 अक्टूबर तक संचालित नहीं होंगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि रद्द उड़ानों से प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड दिया जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी अपने परिचालन से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए दम्माम, जेद्दा और रियाद के लिए आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन 20 अक्टूबर तक बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, वह क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यकता के मुताबिक उड़ानों के संचालन की समीक्षा करेगी। प्रभावित यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित टीमें काम कर रही हैं।एयर इंडिया एक्सप्रेस ने रद्द उड़ानों के यात्रियों को दो विकल्प दिए हैं। वे बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी यात्रा की तारीख बदल सकते हैं या टिकट का पूरा रिफंड ले सकते हैं। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इन विकल्पों और उड़ान की मौजूदा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।इससे पहले इंडिगो ने भी सऊदी अरब की स्थिति का आकलन करने के बाद रियाद, जेद्दा, दम्माम और मदीना के लिए तथा वहां से संचालित उड़ानों को 24 अक्टूबर 2026 तक रद्द रखने की घोषणा की थी। इस फैसले से इन शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, उड़ानों की बहाली को लेकर अंतिम निर्णय स्थिति की समीक्षा के आधार पर लिया जाएगा।अकासा एयर ने भी सऊदी अरब के लिए अपनी सेवाओं पर अस्थायी रोक बढ़ाई है। एयरलाइन ने रियाद से आने-जाने वाली उड़ानों का निलंबन 24 अक्टूबर तक और जेद्दा के लिए उड़ानों का निलंबन 21 अक्टूबर तक बढ़ाने की जानकारी दी है। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड लेने या बिना अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख बदलने का विकल्प दिया गया है।अलग-अलग एयरलाइंस की ओर से घोषित तारीखों में अंतर होने के कारण यात्रियों के लिए अपनी संबंधित उड़ान की जानकारी अलग से जांचना जरूरी है। फिलहाल एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 20 अक्टूबर तक, जबकि इंडिगो ने 24 अक्टूबर तक कुछ सेवाएं रद्द रखने की घोषणा की है। अकासा एयर की ओर से रियाद और जेद्दा के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है।एयरलाइंस ने यात्रियों को हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने की सलाह दी है। साथ ही, टिकट बुकिंग के दौरान दिया गया मोबाइल नंबर और ईमेल पता अपडेट रखने को कहा गया है, ताकि उड़ान में बदलाव या रद्द होने की स्थिति में जरूरी सूचना समय पर मिल सके।सऊदी अरब में स्थिति की लगातार समीक्षा के बीच उड़ान सेवाओं की बहाली इस बात पर निर्भर करेगी कि परिचालन को सुरक्षित तरीके से दोबारा शुरू करना कब संभव होता है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और रिफंड या पुनर्निर्धारण से संबंधित विकल्पों की जानकारी लेकर ही आगे की योजना बनाएं। -

: एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला
नई दिल्ली । केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ी लागत को लेकर एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एटीएफ की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मंत्री का यह बयान इंडिगो की ओर से एटीएफ की बढ़ी कीमतों के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के ऐलान के बाद आया है। नायडू ने कहा कि एटीएफ की बढ़ती लागत विमानन क्षेत्र के सामने अहम मुद्दों में से एक है और सरकार इस पर संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर रही है।राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा। मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और सभी पक्षों का नजरिया समझने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
कॉन्फ्रेंस में नायडू ने विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार के दीर्घकालिक विजन की भी जानकारी दी। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ को बढ़ावा देना, देश में कई एयरपोर्ट हब विकसित करना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में एसएएफ की हिस्सेदारी को लेकर नियम बनाया है। इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का एक प्रतिशत हिस्सा एसएएफ से आना चाहिए। यह हिस्सेदारी 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
नायडू ने बताया कि सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप एसएएफ के उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है। सरकार विमानन क्षेत्र में एसएएफ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा भारत का लक्ष्य देशभर में कई एयरपोर्ट हब विकसित कर ग्लोबल एविएशन हब बनने का है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने की योजना है, जिसके तहत छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ सकेंगे।
एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इंजन बनाने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ गतिविधियों तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। एटीएफ की कीमतों को लेकर सरकार की बातचीत के बीच अब संबंधित पक्षों की राय और उसके बाद मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।
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अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी
नई दिल्ली ।भारत में घरेलू हवाई यात्री यातायात में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। इस महीने घरेलू एयरलाइनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 6.34 प्रतिशत घटकर करीब 1.21 करोड़ रह गई। विमानन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में भी बदलाव देखने को मिला।अगस्त में इंडिगो घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी एयरलाइन बनी रही, हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी जुलाई के मुकाबले कम हुई। जुलाई में इंडिगो की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 65 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कंपनी घरेलू हवाई यातायात में सबसे आगे रही।
अगस्त के दौरान इंडिगो से 78.87 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया। घरेलू बाजार में उसकी हिस्सेदारी घटने के बावजूद यात्रियों की संख्या के लिहाज से वह अन्य प्रमुख एयरलाइनों से आगे रही।
एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी में इस दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई में समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। अगस्त में एयर इंडिया समूह के विमानों से 32.32 लाख यात्रियों ने यात्रा की।
अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी अगस्त में 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रही। एयरलाइन ने इस महीने 6.68 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। इस तरह बाजार हिस्सेदारी के मामले में अकासा एयर ने तीसरा स्थान बरकरार रखा।
स्पाइसजेट के प्रदर्शन में अगस्त के दौरान गिरावट देखने को मिली। जुलाई में उसकी बाजार हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 1.2 प्रतिशत रह गई। एयरलाइन ने इस महीने करीब 1.40 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।
स्पाइसजेट को अगस्त में कई परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों का असर उसकी उड़ानों पर भी पड़ा और कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई। बाजार हिस्सेदारी में कमी के बीच एयरलाइन के परिचालन प्रदर्शन पर भी निगरानी बनी रही।
उड़ानों के समय पर संचालन के मामले में अगस्त के दौरान इंडिगो का प्रदर्शन प्रमुख एयरलाइनों में सबसे बेहतर रहा। एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद अकासा एयर का प्रदर्शन 90.5 प्रतिशत रहा।
एयर इंडिया समूह का ऑन-टाइम परफॉरमेंस अगस्त में 83.9 प्रतिशत रहा। वहीं, अलायंस एयर का प्रदर्शन 71.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से अलग-अलग एयरलाइनों के समय पर उड़ान संचालन में अंतर का पता चलता है।
स्पाइसजेट से जुड़ी परिचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर भी निगरानी जारी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए एयरलाइन की मौजूदा चुनौतियों के बीच उसके वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहा है।
मंत्री के अनुसार, डीजीसीए को एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन की मौजूदा परिस्थितियों के बीच विमानन सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।
अगस्त के आंकड़ों में जहां घरेलू हवाई यातायात में सालाना गिरावट सामने आई, वहीं एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में अलग-अलग बदलाव दर्ज हुए। इंडिगो अभी भी बाजार में सबसे आगे रही, जबकि एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़ी और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में कमी आई।
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त्योहारी सीजन में हवाई किरायों में 100 फीसदी तक उछाल, दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी
नई दिल्ली । देश में त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ हवाई यात्रियों की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। विमान टिकटों के किराए में अचानक तेज बढ़ोतरी का दावा किया गया है। व्यापारियों और उद्यमियों के संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने केंद्र सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और विमान कंपनियों के किराए पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की मांग की है।CTI के अनुसार, कुछ दिन पहले जिन घरेलू उड़ानों के टिकट अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध थे, उनके किराए में अब 50 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। संगठन का कहना है कि त्योहारी मौसम में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने वाली है और इसी दौरान किराए में इतनी बड़ी वृद्धि आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और उच्च मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा रही है।
त्योहारी सीजन गणपति महोत्सव से शुरू होकर दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहने वाला है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और परिवारों तक पहुंचने के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में हवाई यात्रा की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। बढ़ती मांग के बीच टिकटों के दाम में तेज वृद्धि यात्रियों के यात्रा बजट को प्रभावित कर सकती है।
किराए में बढ़ोतरी का असर प्रमुख घरेलू रूटों पर भी बताया गया है। कुछ समय पहले दिल्ली और मुंबई के बीच आने-जाने का हवाई किराया करीब 10 हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 18 हजार से 25 हजार रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसी तरह दिल्ली-अहमदाबाद रूट पर पहले करीब 10 से 12 हजार रुपये का किराया था, जो अब 18 से 20 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।
दिल्ली-बेंगलुरु रूट पर भी किराए में बड़ा अंतर सामने आया है। पहले जहां आने-जाने का टिकट करीब 12 से 15 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसके लिए 30 से 35 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। दिल्ली-कोलकाता रूट पर भी पहले लगभग 11 हजार रुपये का किराया था, जो अब करीब 20 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
CTI ने विमान कंपनियों की क्षमता में कमी का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में घरेलू उड़ानों की सीट क्षमता में 5.6 फीसदी की कमी आई है। इसमें इंडिगो की क्षमता 4.5 फीसदी और एयर इंडिया की 8.8 फीसदी कम होने का दावा किया गया है। CTI का कहना है कि बड़ी विमान कंपनियों के पास घरेलू बाजार का बड़ा हिस्सा होने के कारण सीटों की उपलब्धता में कमी का सीधा असर किराए पर पड़ता है।
इसके अलावा छोटे बच्चों के हवाई किराए में बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया गया है। CTI के मुताबिक, तीन दिन से दो साल तक के बच्चों का शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जबकि इस आयु वर्ग के बच्चों को अलग सीट उपलब्ध नहीं कराई जाती।
CTI ने सरकार से मांग की है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों को राहत देने के लिए विमान कंपनियों के किराए की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए और जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएं।
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एयरलाइंस को संकट के समय बड़ी राहत… सरकार ने घरेलू उड़ानों के टिकटों पर से हटाया प्राइस कैप
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (West Asia War) की वजह से बढ़ते ऊर्जा संकट पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी बीच एयरलाइंस (Airlines) को इस संकट से उबारने के लिए सरकार (Government) ने एक राहत दी है। उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Aviation) ने दिसंबर में घरेलू उड़ानों के टिकटों पर लगाई गई अस्थायी मूल्य सीमा को हटा लिया है। मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि दिसंबर में स्थिति बिगड़ने की वजह से ऐसा किया गया था, अब जबकि स्थिति सामान्य है, और पश्चिम एशिया में जारी संकट की वजह से इसे हटाया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने एयरलाइंस को चेतावनी दी है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल किया गया, तो फिर से लागू किया जाएगा।मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि 23 मार्च से यह प्राइस कैप आधिकारिक तौर पर हट जाएगा। इसके साथ ही डीजीसीए ने आदेश दिया है कि सभी एयरलाइंस के किराए पर बराबर नजर रखी जाएगी। आदेश में कहा गया, “वर्तमान स्थिति अब स्थिर हो चुकी है, क्षमता बहाल हो गई है और पूरे सेक्टर में संचालन सामान्य हो गया है, इसलिए समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है कि 23 मार्च 2026 से किराया सीमा हटा दी जाए।” इसके साथ ही आदेश में जोड़ा गया कि अगर हवाई यात्रियों की संख्या वृद्धि के दौरान एयरलाइंस ने गलत तरीके से टिकटों की कीमत में वृद्धि की तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।”
गौरतलब है कि सरकार की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट की वजह से एयरलाइंस को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए 18 मार्च को एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट के अधिकारी मंत्रालय पहुंचे थे। वहां पर इन्होंने किराए सीमा को हटाने की मांग की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन एजेंसियों ने इस संबंध में सरकार को पत्र भी लिखा था।
आपको बता दें, सरकार की तरफ से घरेलू उड़ानों के किराए पर यह मूल्य सीमा 6 दिसंबर को लगाई गई थी। इस दौरान सरकार द्वारा लागू किए गए एक नियम की वजह से इंडिगो की बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल हो गई थीं, जिसकी वजह से अव्यवस्था फैल गई थी। उस समय सरकार ने सीमित क्षमता के दौर में यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाया था। अधिकतम एकतरफा किराया ₹18,000 तय किया गया था।
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शीतकालीन छुट्टियों के लिए गोवा जाने के इच्छुक यात्रियों के लिए रेलवे ने शुरू की स्पेशल ट्रेन
रायपुर । इस शीतकालीन छुट्टियों में अगर आप गोवा जाने का प्लान बना रहे हैं तो अब आपके लिए रेलवे ने एक नई सुविधा शुरू की है। रेलवे 20 दिसंबर से बिलासपुर–मडगांव के बीच साप्ताहिक शीतकालीन स्पेशल ट्रेन चलाएगा ताकि यात्रियों को छुट्टियों में गोवा पहुंचने में कोई कठिनाई न हो। यह ट्रेन हर शनिवार को चलेगी और चार फेरे करेगी।विमान सेवाओं में अनिश्चितता के कारण रेलवे ने यह कदम उठाया है जिससे गोवा जाने वाले यात्रियों को एक आरामदायक और विश्वसनीय विकल्प मिल सके। रेलवे का यह कदम विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए राहत देने वाला है जो विमान सेवाओं में हो रही अनिश्चितता के कारण यात्रा की योजना में बदलाव कर रहे थे।
शीतकालीन स्पेशल ट्रेन का समय और मार्ग
यह शीतकालीन स्पेशल ट्रेन 20 दिसंबर 27 दिसंबर 3 जनवरी और 10 जनवरी को बिलासपुर से मडगांव के लिए चलेगी जो प्रत्येक शनिवार को निर्धारित है। वहीं मडगांव से बिलासपुर के लिए यह ट्रेन 22 29 दिसंबर और 5 तथा 12 जनवरी को सोमवार को चलेगी। ट्रेन की संख्या 08241 बिलासपुर–मडगांव और 08242 मडगांव–बिलासपुर होगी।
इस ट्रेन के माध्यम से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी क्योंकि इस ट्रेन में 18 कोच की व्यवस्था की गई है जिसमें विभिन्न श्रेणियों की सीटें और सुविधा दी जाएगी। इसके साथ ही ट्रेन में पर्याप्त संख्या में सीटें उपलब्ध हैं जो यात्रियों की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने में सहायक होगी।
वाणिज्यिक ठहराव और कोच की सुविधा
इस ट्रेन का वाणिज्यिक ठहराव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख स्टेशनों जैसे बिलासपुर भाटापारा रायपुर दुर्ग राजनांदगांव गोंदिया और नागपुर पर होगा। इन स्टेशनों पर ट्रेन रुकने से यात्रियों को आरामदायक और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव होगा।
इसके अलावा शीतकालीन स्पेशल ट्रेन में यात्रियों की विभिन्न जरूरतों के हिसाब से कोच की व्यवस्था की गई है। ट्रेन में एक एसएलआरडी तीन सामान्य दो स्लीपर दो एसी-III इकोनामी आठ एसी-III एक एसी-II और जनरेटर कार सहित कुल 18 कोच की सुविधा उपलब्ध है। यह कोच विभिन्न यात्री वर्गों के लिए उपयुक्त हैं जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान आराम और सुविधा का अनुभव होगा।
रेलवे की यह पहल क्यों है महत्वपूर्ण
वर्तमान में विमान सेवाओं में अनिश्चितता और टिकट की उच्च कीमतों के कारण यात्रा की योजना बनाना मुश्किल हो गया था। ऐसे में रेलवे की यह पहल यात्रियों के लिए एक राहत की बात है। विशेष रूप से शीतकालीन छुट्टियों के दौरान गोवा जाने के इच्छुक यात्रियों के लिए यह एक उत्तम विकल्प साबित हो सकता है।
इसके अलावा रेलवे का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी योगदान दे रहा है क्योंकि यात्रा के लिए कम से कम संसाधनों का उपयोग होता है। ट्रेन से यात्रा करने से यात्री जल्दी और सुरक्षित रूप से अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं साथ ही यह एक किफायती और सुरक्षित विकल्प भी है।
इस शीतकालीन सीजन में गोवा जाने की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए रेलवे द्वारा शुरू की गई शीतकालीन स्पेशल ट्रेन एक बेहतरीन विकल्प है। रेलवे का यह कदम न केवल यात्रियों की यात्रा को आरामदायक बनाएगा बल्कि उन्हें एक सुविधाजनक और विश्वसनीय यात्रा अनुभव भी प्रदान करेगा।
