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  • NGT का बड़ा आदेश: भोपाल में प्रदूषण रोकने के लिए 100 दिन की विंटर एक्शन प्लान तैयारी अनिवार्य

    NGT का बड़ा आदेश: भोपाल में प्रदूषण रोकने के लिए 100 दिन की विंटर एक्शन प्लान तैयारी अनिवार्य


    भोपाल । भोपाल की लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल NGT ने मध्यप्रदेश सरकार और नगर निगम को सख्त निर्देश जारी किए हैं। एनजीटी ने कहा है कि राजधानी में सर्दियों के दौरान एयर क्वालिटी इंडेक्स कई बार 300 के पार पहुंच जाता है, जो गंभीर स्थिति का संकेत है। इसी को देखते हुए ठंड शुरू होने से पहले 100 दिन का विस्तृत विंटर एक्शन प्लान तैयार करने के आदेश दिए गए हैं।

    एनजीटी ने स्पष्ट कहा है कि अगर अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली सर्दियों में वायु प्रदूषण की स्थिति और भी भयावह हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद पीएम 2.5 और धूल के महीन कण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं और ये हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अस्थमा तथा अन्य श्वसन रोगों का बड़ा कारण बन रहे हैं।

    मामले में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान ने बताया कि विशेषज्ञों ने खुले में कचरा, पत्तियां, बायोमास और फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। साथ ही पारंपरिक अलाव को भी प्रदूषण का बड़ा कारण बताया गया है, जिसके विकल्प के रूप में एलपीजी और इलेक्ट्रिक हीटर को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

    एनजीटी ने अपने निर्देशों में खुले में कचरा जलाने, लकड़ी और कोयले के तंदूरों के उपयोग तथा निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण लगाने को कहा है। इसके अलावा होटल, ढाबों और रेस्तरां में लकड़ी-कोयले के उपयोग को सीमित करने की सिफारिश भी की गई है। ट्रिब्यूनल ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने, ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और लो-इमिशन जोन विकसित करने जैसे उपायों पर जोर दिया है।

    साथ ही ई-रिक्शा, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके। निर्माण स्थलों पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य करने, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने और नागरिकों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
    नगर निगम को नियमित सड़क सफाई, पानी का छिड़काव और डिवाइडरों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। एनजीटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर कदम की निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जो लगातार कार्रवाई की समीक्षा करेगी।

  • पश्चाताप कर लें हिजाब विवाद पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने CM नीतीश कुमार को दी सलाह

    पश्चाताप कर लें हिजाब विवाद पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने CM नीतीश कुमार को दी सलाह


    नई दिल्ली । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के मुस्लिम महिला के चेहरे से नकाब हटा दिया इसे लेकर विपक्ष के साथ कई मुस्लिमों संगठनों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की अब इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखते हुए सीएम नीतीश कुमार को सलाह दी है

    बसपा चीफ मायावती ने कहा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरण के सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब चेहरे का नकाब हटाने का मामला सुलझने की बजाय खासकर मंत्रियों आदि की बयानबाजी के कारण विवाद का रूप लेकर यह लगातार तूल पकड़ता ही जा रहा है जो दुखद व दुभाग्यपूर्ण है

    ‘पश्चाताप कर यहीं विवाद को यहीं खत्म करने का करें प्रयास’

    मायावती ने कहा यह मामला पहली नजर में ही महिला सुरक्षा व सम्मान से जुड़ा होने के कारण मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से अब तक सुलझ जाना चाहिये था खासकर तब जब कई जगहों पर ऐसी अन्य वारदातें भी सुनने को मिल रही हैं अच्छा होगा कि मुख्यमंत्री इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखते हुये इसके लिये पश्चाताप कर लें और कड़वा होते जा रहे इस विवाद को यहीं पर खत्म करने का प्रयास करें

    कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर देने पर दी प्रतिक्रिया
    इसके अलावा मायावती ने कहा बहराइच जिला पुलिस द्वारा पुलिस परेड में स्थापित परम्परा नियमों से हटकर एक कथावाचक को सलामी देने का मामला भी काफी बड़े विवाद में है और इसको लेकर सरकार कठघरे में है पुलिस परेड व सलामी की अपनी परम्परा नियम मर्यादा अनुशासन व पवित्रता है जिसको लेकर खिलवाड़ कतई नहीं किया जाना चाहिये

    मायावती ने कहा यह अच्छी बात है कि यूपी के पुलिस प्रमुख ने इस घटना का संज्ञान लेकर जिला पुलिस कप्तान से जवाब तलब किया है कार्रवाई का लोगों को इंतजार है वैसे राज्य सरकार भी इसको गंभीरता से लेकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृति पर रोक लगाये तो यह पुलिस प्रशासन अनुशासन एवं कानून का राज के हक में उचित होगा

    पूर्व सीएम ने कहा जहाँ तक कल दिनांक 19 दिसम्बर से शुरू हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के संक्षिप्त शीतकालीन सत्र का सवाल है तो यह सत्र भी पिछले सत्रों की तरह ही जनहित व जनकल्याण के मुद्दों से दूर रहने के कारण सत्ता व विपक्ष के बीच वाद-विवाद में घिर गया है बेहतर होता कि सरकार किसानों के खाद की समस्या के साथ-साथ जनहित की अन्य समस्याओं तथा जनकल्याण के प्रति गंभीर होकर संदन में इन पर जवाबदेह होती

    उन्होंने आगे कहा इसके साथ ही संसद का शीतकालीन सत्र भी राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भीषण समस्या सहित देश व जनहित की विकराल रूप धारण कर रही समस्याओं पर विचार किये बिना ही कल समाप्त हो गया जबकि पूरे देश की निगाहें लगी थीं कि सरकार व विपक्ष दोनों देश के ज्वलन्त समस्याओं पर विचार करेंगे और इससे कुछ उम्मीद की नई किरण पैदा होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होना दुभाग्यपूर्ण देश की चिन्तायें लगातार बरकरार हैं

    बांग्लादेश में बिगड़ते हालातों पर जताई चिंता

    इसके अलावा मायावती ने कहा इसके साथ-साथ पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं तथा वहाँ भी नेपाल की तरह भारत विरोधी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं वे भी चिन्तनीय स्थिति है जिसपर भी केन्द्र सरकार समुचित संज्ञान लेकर दीर्घकालीन नीति के तहत कार्य करे तो यह उचित होगा

  • ठंड और बढ़ता वायु प्रदूषण बना सेहत के लिए खतरा, आयुर्वेदिक उपाय बन सकते हैं सुरक्षा कवच

    ठंड और बढ़ता वायु प्रदूषण बना सेहत के लिए खतरा, आयुर्वेदिक उपाय बन सकते हैं सुरक्षा कवच


    नई दिल्ली  /प्रदेश में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है, वैसे-वैसे वायु प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक होता जा रहा है। राजधानी समेत कई जिलों में हवा की गुणवत्ता खराब हो चुकी है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में छींक, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसम खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा जोखिम भरा है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है या जो पहले से ही अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक उपाय ठंड और प्रदूषण दोनों से बचाव का प्रभावी, सुरक्षित और किफायती विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं।

    सही दिनचर्या से मिलेगा दोहरी सुरक्षा
    राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के रोग एवं विकृति विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि सर्दियों में यदि ऋतु के अनुसार दिनचर्या और भोजन अपनाया जाए, तो ठंड और प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों को काफी हद तक रोका जा सकता है। उनके अनुसार, रोजाना सरसों के तेल से हल्की मालिश सिर से पांव तक करने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और त्वचा भी सुरक्षित रहती है। इसके साथ ही सुबह नाक में अणु तेल या सरसों तेल की 1–2 बूंद डालने से नाक और फेफड़ों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

    सूर्यस्नान, योग और भाप के लाभ

    सर्दियों में रोजाना कम से कम 30 मिनट धूप में बैठना शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। विशेषज्ञों की सलाह से अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी प्राणायाम करने से श्वसन तंत्र सशक्त होता है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं। रात में भाप लेना भी बेहद फायदेमंद माना गया है। इससे नाक और सांस की नलियां साफ होती हैं, बलगम निकलता है और सर्दी-जुकाम में राहत मिलती है।

    सर्दियों में सही भोजन बनेगा सेहत की ढाल
    आयुर्वेद में हेमंत और शिशिर ऋतु में उष्ण, तरल और स्नेही आहार को लाभकारी बताया गया है। बाल रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया के अनुसार बच्चों को रोज हल्दी वाला दूध देना चाहिए, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इस मौसम में आसानी से मिलने वाला आंवला विटामिन-सी और आयरन का बेहतरीन स्रोत है। इसके अलावा गुड़, अदरक, कच्ची हल्दी, तिल और सोंठ से बने व्यंजन शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं और ठंड के असर को कम करते हैं।

    पाचन ठीक रहेगा तो बीमारियां रहेंगी दूर
    प्रभारी अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह बताते हैं कि ठंड के मौसम में पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है, जिससे कब्ज, गैस और अपच की समस्या बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए दिनभर गुनगुना पानी पीना, रात को दूध में एक चम्मच घी लेना और सुबह भिगोया हुआ मेथी दाना खाना फायदेमंद होता है।

    आयुर्वेदिक जीवनशैली है सबसे आसान समाधान
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग नियमित योग, संतुलित आहार और आयुर्वेदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो ठंड और प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। यह न केवल बीमारी से बचाव करता है, बल्कि शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाता है।

  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।