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  • मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

    मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना पर हमला करने की खबरों से इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का और मदीना की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। कई इलाकों में मिसाइलों का मलबा गिरने की भी जानकारी दी गई थी।

    हूती समूह के इस बयान से सऊदी अरब और यमन के बीच सीमा पार तनाव बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा कि जब भी वे सैन्य अभियान चलाते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के इनकार और उनके बताए लक्ष्यों पर तत्काल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

    सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकने का किया दावा

    सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों का मलबा मक्का के पास और जेद्दा, ताइफ तथा रबिघ में मिलने की जानकारी सामने आई।

    शनिवार को सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा के लोगों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। करीब 10 मिनट बाद एजेंसी ने बताया कि खतरा टल गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइलों के मलबे की जानकारी वाले सभी स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ और क्या कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची थी। हूतियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मक्का और मदीना को निशाना नहीं बनाया।

    रियाद एयरपोर्ट और अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा, रबिघ तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया।

    वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए अन्य ठिकानों पर हमलों की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी इन दावों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर मिसाइल हमले का आरोप

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया है। यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत पर गिरी।

    दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन ठिकानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

    2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा

    ताजा घटनाक्रम से यमन में संघर्ष रोकने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

    ईरान के साथ जारी व्यापक अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उस चेतावनी में मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को अलग रखा गया था।

  • : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    : एटीएफ की बढ़ती कीमतों पर सरकार की एयरलाइंस और तेल कंपनियों से बातचीत, राम मोहन नायडू बोले- सभी पक्षों से चर्चा के बाद फैसला

    नई दिल्ली । केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ी लागत को लेकर एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण एटीएफ की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। मंत्री का यह बयान इंडिगो की ओर से एटीएफ की बढ़ी कीमतों के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने के ऐलान के बाद आया है। नायडू ने कहा कि एटीएफ की बढ़ती लागत विमानन क्षेत्र के सामने अहम मुद्दों में से एक है और सरकार इस पर संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर रही है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईएफक्यूएम सिम्पोजियम 2026 कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों से बातचीत में नायडू ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट एटीएफ की कीमतों पर भारी बोझ डाल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों यानी ओएमसी, दोनों के साथ बातचीत कर रही है और बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह देखा जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस मामले में कोई भी फैसला लेने से पहले नागर विमानन मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करेगा। मंत्रालय संबंधित पक्षों के साथ बैठक करने जा रहा है और सभी पक्षों का नजरिया समझने के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

    कॉन्फ्रेंस में नायडू ने विमानन क्षेत्र को लेकर सरकार के दीर्घकालिक विजन की भी जानकारी दी। इसमें सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ को बढ़ावा देना, देश में कई एयरपोर्ट हब विकसित करना और घरेलू एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल में एसएएफ की हिस्सेदारी को लेकर नियम बनाया है। इसके तहत 2027 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का एक प्रतिशत हिस्सा एसएएफ से आना चाहिए। यह हिस्सेदारी 2028 तक दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

    नायडू ने बताया कि सरकार सरकारी रिफाइनरियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के साथ ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप एसएएफ के उत्पादन को लेकर बातचीत कर रही है। सरकार विमानन क्षेत्र में एसएएफ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ इसके उत्पादन की क्षमता विकसित करने पर भी काम कर रही है। इसके अलावा भारत का लक्ष्य देशभर में कई एयरपोर्ट हब विकसित कर ग्लोबल एविएशन हब बनने का है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाने की योजना है, जिसके तहत छोटे शहरों के यात्री घरेलू गेटवे के माध्यम से लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ सकेंगे।

    एयरक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत इंजन बनाने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी एमआरओ गतिविधियों तथा कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से होगी। उन्होंने स्वदेशी हेलीकॉप्टर इंजन बनाने में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। नायडू ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में हासिल की गई जानकारी और तकनीक आगे चलकर सिविल एविएशन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद कर सकती है। एटीएफ की कीमतों को लेकर सरकार की बातचीत के बीच अब संबंधित पक्षों की राय और उसके बाद मंत्रालय के फैसले पर नजर रहेगी।

  • विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    नई दिल्ली । विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर 2026 से इमिग्रेशन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए कागज पर प्रिंट किए गए बोर्डिंग पास को अनिवार्य नहीं रखा जाएगा। यात्री अपने मोबाइल फोन में उपलब्ध ई-बोर्डिंग पास दिखाकर निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे नियमित रूप से विदेश यात्रा करने वाले लोगों को दस्तावेज संभालने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर लागू की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को भी डिजिटल बोर्डिंग पास के आधार पर यात्रियों की प्रक्रिया संचालित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। व्यवस्था लागू होने के बाद इमिग्रेशन काउंटर पर यात्रियों को अपने मोबाइल में मौजूद वैध ई-बोर्डिंग पास प्रस्तुत करने की सुविधा मिलेगी।

    अब तक कई अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बोर्डिंग पास की प्रिंटेड कॉपी अपने साथ रखनी पड़ती थी। यात्रा के दौरान इस कागजी दस्तावेज की जरूरत अलग-अलग चरणों में पड़ सकती थी। नई व्यवस्था के बाद यात्रियों के लिए मोबाइल में बोर्डिंग पास रखना पर्याप्त होगा। इससे प्रिंट निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अतिरिक्त जरूरत कम होगी।

    ई-बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान कागज पर मुहर लगाने की व्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी। यानी डिजिटल बोर्डिंग पास दिखाकर प्रक्रिया पूरी करने वाले यात्रियों को अपने पास पर इमिग्रेशन की स्टांप लगवाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव हवाई यात्रा को अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

    हालांकि, जिन यात्रियों के पास पहले से प्रिंट किया हुआ बोर्डिंग पास मौजूद है, उनके लिए भी यात्रा की सुविधा बनी रहेगी। उन्हें कागजी बोर्डिंग पास रखने के कारण रोका नहीं जाएगा। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे भौतिक बोर्डिंग पास पर इमिग्रेशन की मुहर नहीं लगाई जाएगी। यात्रियों के लिए डिजिटल माध्यम को सुविधाजनक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    इस बदलाव को लागू करने की जिम्मेदारी से जुड़े विभागों और एयरपोर्ट संचालकों के बीच तैयारी शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर डिजिटल प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही के दौरान अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को कम करना और इमिग्रेशन क्लियरेंस को डिजिटल माध्यम से अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    यात्रियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने मोबाइल फोन में वैध ई-बोर्डिंग पास आसानी से उपलब्ध रखें। विदेश यात्रा से पहले बोर्डिंग पास डाउनलोड करने और फोन की बैटरी पर्याप्त रखने जैसी सामान्य सावधानियां उपयोगी रहेंगी। साथ ही यात्रियों को एयरलाइन की ओर से मिलने वाले यात्रा संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।

    नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन यात्रियों को मिल सकता है जो लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राएं करते हैं और हर यात्रा में दस्तावेजों की प्रिंटेड प्रतियां संभालते हैं। मोबाइल आधारित बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से यात्रा प्रक्रिया में कागज पर निर्भरता घटेगी। 1 सितंबर से लागू होने वाला यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में डिजिटल सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

  • अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    नई दिल्ली ।अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज करते हुए अब तक का सबसे अधिक तिमाही एबिटडा हासिल किया है। कंपनी के अनुसार, जून तिमाही में एबिटडा 5,642 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक है। मजबूत परिचालन प्रदर्शन और विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बढ़ती गतिविधियों ने कंपनी के परिणामों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही के दौरान कुल आय सालाना आधार पर 50 प्रतिशत बढ़कर 33,546 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि कंपनी के विविध कारोबारी पोर्टफोलियो और अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार विस्तार का संकेत मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि स्थापित व्यवसायों के साथ उभरते क्षेत्रों में निवेश का लाभ अब वित्तीय परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    तिमाही के दौरान कर से पहले मुनाफा 1,295 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस आंकड़े में एक विशेष सेटलमेंट से जुड़े प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। इस अवधि में अदाणी एयरपोर्ट्स का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां एबिटडा 49 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,633 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन क्षमता और यात्री गतिविधियों ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।

    कंपनी का कहना है कि उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत हो रहे हैं। इसी कारण कारोबार का विस्तार केवल राजस्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिचालन दक्षता और लाभप्रदता में भी लगातार सुधार देखने को मिला है। विविध क्षेत्रों में मौजूदगी के कारण कंपनी को स्थिर विकास का आधार भी मिला है।

    पहली तिमाही के दौरान कई प्रमुख परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय परिचालन की शुरुआत कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर रही। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना पर टोल संग्रह शुरू होने से भी परिचालन गतिविधियों में नई गति आई। ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी ने सोलर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता का विस्तार किया, जबकि डेटा सेंटर कारोबार में बड़े हाइपरस्केल ऑर्डर मिलने से भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    कॉपर कारोबार ने भी तिमाही के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया। क्षमता विस्तार के बाद इस कारोबार से 749 करोड़ रुपये का एबिटडा प्राप्त हुआ। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने 1.7 गीगावॉट क्षमता वाली नई मॉड्यूल उत्पादन लाइन शुरू की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है।

    कंपनी ने हाल ही में 15,000 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रबंधन का मानना है कि इससे संस्थागत निवेशकों का कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और विकास योजनाओं पर भरोसा मजबूत हुआ है। कंपनी का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुनियादी ढांचा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी कारोबार विकसित करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    कंपनी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए अनुशासित निवेश अब बेहतर परिचालन क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन में बदलने लगे हैं। आने वाले समय में परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग, नई परियोजनाओं का विस्तार और परिचालन दक्षता कंपनी की विकास यात्रा को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।