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  • भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    भारत-पाक तनाव के बीच पाकिस्तान का नया NOTAM जारी, भारतीय विमान और सैन्य उड़ानों पर 23 अगस्त तक एयरस्पेस बंद

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच जारी कूटनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लागू प्रतिबंध की अवधि एक बार फिर बढ़ा दी है। नए आदेश के अनुसार भारतीय पंजीकरण वाले सभी विमान, भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए विमान तथा सैन्य उड़ानें अब 23 अगस्त 2026 की रात 11:59 बजे तक पाकिस्तान के एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकेंगी। पहले यह प्रतिबंध 24 जुलाई को समाप्त होने वाला था, लेकिन अवधि खत्म होने से पहले ही इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

    यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच विमानन संबंध सामान्य नहीं हो सके हैं। सुरक्षा कारणों से लागू यह प्रतिबंध लगातार बढ़ाया जा रहा है और पिछले कई महीनों से इसकी अवधि समय-समय पर आगे बढ़ाई जाती रही है। नए नोटिस के जारी होने के बाद भारतीय विमानन कंपनियों को अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में पहले की तरह वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना होगा।

    भारत और पाकिस्तान के बीच विमानन प्रतिबंधों की शुरुआत अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। उस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में तीखा तनाव देखने को मिला। इसके बाद सुरक्षा और कूटनीतिक कदमों के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की एयरलाइंस और सैन्य विमानों के लिए अपने-अपने हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा दिया था। तब से यह व्यवस्था लगातार प्रभावी बनी हुई है।

    पाकिस्तान की ओर से जारी नवीनतम NOTAM में स्पष्ट किया गया है कि भारत में पंजीकृत किसी भी विमान को उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसमें वे विमान भी शामिल हैं जो भारतीय एयरलाइंस द्वारा संचालित या लीज पर लिए गए हैं। साथ ही सैन्य उड़ानों पर भी यह प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सीधी हवाई आवाजाही पूरी तरह प्रभावित बनी हुई है।

    इस प्रतिबंध का सबसे अधिक असर उन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ता है जिन्हें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरना पड़ता था। अब इन उड़ानों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ता है, जिससे उड़ान अवधि बढ़ने के साथ ईंधन की खपत और परिचालन लागत भी बढ़ जाती है। कई मामलों में यात्रियों को अधिक यात्रा समय और उड़ानों के संचालन में अतिरिक्त बदलाव का सामना करना पड़ता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच सुरक्षा और कूटनीतिक परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक इस प्रकार के प्रतिबंध जारी रह सकते हैं। विमानन क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होने के लिए दोनों देशों के बीच विश्वास और संवाद की प्रक्रिया का आगे बढ़ना आवश्यक माना जा रहा है। फिलहाल 23 अगस्त तक भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद रहेगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन मौजूदा वैकल्पिक मार्गों के अनुसार ही जारी रहने की संभावना है।

  • भारत की रिपोर्ट से लीक हो गई US-इंडोनेशिया की सीक्रेट एयरस्पेस डील, बवाल के बाद हटना पड़ा पीछे

    भारत की रिपोर्ट से लीक हो गई US-इंडोनेशिया की सीक्रेट एयरस्पेस डील, बवाल के बाद हटना पड़ा पीछे

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जंग रहे युद्ध के बीच अमेरिका साउथ ईस्ट एशिया में स्थित एक मुस्लिम देश संग मिलकर बड़ा खेल करने की तैयारी में था। हालांकि एक भारतीय रिपोर्ट ने इस प्लान पर पानी फेर दिया है। बीते दिनों अमेरिका और दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया के बीच एक सीक्रेट समझौते की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब इंडियन मीडिया की एक रिपोर्ट से हुए खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है।

    दरअसल अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक डिफेंस डील साइन होनी थी। हालांकि डील साइन होने से ठीक पहले 12 अप्रैल को एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अमेरिका इंडोनेशिया के एयरस्पेस में अपने सैन्य विमानों को पूरी इजाजत देने की योजना बना रहा है। इस लीक के बाद इंडोनेशिया में भारी हंगामा हुआ और आखिरकार इस प्रावधन को फाइनल डील से बाहर कर दिया गया है।
    रिपोर्ट में हुआ खुलासा

    इस डील की पूरी जानकारी रिपोर्ट ‘संडे गार्जियन’ में प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच कई महीने से इस गुप्त योजना पर काम कर रही थी। फरवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वाइट हाउस में हुई बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इसे 13 अप्रैल को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री शाफ्री जमसोएद्दीन की बैठक में औपचारिक रूप से शामिल किया जाना था, लेकिन विवाद के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका।

    डील में क्या था?

    इस प्रस्तावित डील के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भरने की इजाजत मिल जाती। आधिकारिक तौर पर इसे इमरजेंसी और संकट के समय इस्तेमाल के लिए बताया गया, लेकिन इसका असली मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना था, खासकर उस समय जब ईरान ने होर्मुज पर दबाव बढ़ा दिया है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अमेरिका मलक्का स्ट्रेट पर पकड़ मजबूत करना चाहता था, जो दुनिया का सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्ग है और जहां से करीब 30 प्रतिशत समुद्री तेल और 40 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है।
    इंडोनेशिया ही क्यों?

    इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इस रणनीति के केंद्र में है, क्योंकि वह मलक्का के पास स्थित है।

    अमेरिका के लिए यह डील इंडो-पैसिफिक में चीन पर नजर रखने के लिए अहम साबित हो सकती थी, क्योंकि फिलहाल उसे उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के सैन्य ठिकानों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो दूरी के लिहाज से कम प्रभावी हैं।
    क्यों हटना पड़ा पीछे?

    हालांकि जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, इंडोनेशिया में इसका तीखा विरोध शुरू हो गया। जकार्ता में सांसदों ने इस तरह के किसी भी समझौते की वैधता पर सवाल उठाए। संसद के डिप्टी चेयर सुकामता ने साफ कहा कि किसी भी विदेशी सैन्य सहयोग के लिए संसद से सलाह लेना जरूरी है और बिना कानूनी आधार के एयरस्पेस देना संभव नहीं है।

    इस विरोध के बाद प्रबोवो सरकार दबाव में आ गई। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी विमानों को ओवरफ्लाइट एक्सेस देने का प्रस्ताव फाइनल डील का हिस्सा नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यह सिर्फ “लेटर ऑफ इंटेंट” के स्तर पर चर्चा में था और अभी न तो अंतिम है और न ही बाध्यकारी। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी समझौते में इंडोनेशिया की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह डील फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।