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  • अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप

    अजीत डोभाल पर पाकिस्तान के परमाणु सलाहकार का आरोप, भारत पर अस्थिरता फैलाने का लगाया आरोप


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों से जुड़े एक वरिष्ठ सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) मजहर जमील ने भारत पर पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने के लिए आतंकवादी संगठनों का कथित तौर पर समर्थन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके लिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए इसे ‘डोभाल सिद्धांत’ करार दिया।

    पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी (एनसीए) के सलाहकार जमील ने दावा किया कि भारत अपनी रणनीति के तहत आतंकवाद का इस्तेमाल कर रहा है और पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) जैसे संगठनों को भारत का कथित समर्थन मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

    मुक्ति वाहिनी और एलटीटीई का भी किया जिक्र

    13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) में अपने संबोधन के दौरान जमील ने भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने 1971 में मुक्ति वाहिनी और 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) को भारत से मिले कथित समर्थन का जिक्र किया।

    उन्होंने अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के बीच अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईएसएएफ) की मौजूदगी के दौरान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के आसपास भारत द्वारा छह वाणिज्य दूतावास संचालित किए जाने का भी उल्लेख किया। जमील ने इन घटनाओं को पाकिस्तान में भारत की कथित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की।

    ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी जताई चिंता

    जमील ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ब्रह्मोस मिसाइलों को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भारत ने ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं।

    हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इसे भारत की सामरिक परमाणु हथियारों से जुड़ी स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड का हिस्सा बताना भी सही नहीं है।

    जमील ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने दक्षिण एशिया को परमाणु संघर्ष के कगार पर पहुंचा दिया था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के रणनीतिक संयम के कारण स्थिति को संभाला जा सका। ये उनके आरोप और आकलन हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    परमाणु पनडुब्बियों और मिसाइलों पर भी उठाए सवाल

    जमील ने स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आकलन का हवाला देते हुए भारत की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने संकेत दिया कि परमाणु पनडुब्बियों से दागी जाने वाली मिसाइलों की तैनाती के जरिए भारत अपनी सामरिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने दावा किया कि भारत ने अपने कुछ परमाणु वारहेड को पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ जोड़ दिया है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और उसके निष्कर्षों की अलग से जांच जरूरी है।

    2022 की ब्रह्मोस दुर्घटना को जानबूझकर किया गया हमला बताया

    जमील ने मार्च 2022 में भारतीय वायु सेना की एक ब्रह्मोस मिसाइल के गलती से लॉन्च होने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को पाकिस्तान पर जानबूझकर किए गए हमले के रूप में पेश किया।

    दरअसल, मार्च 2022 में एक मिसाइल तकनीकी प्रक्रिया के दौरान गलती से लॉन्च हो गई थी और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के खानेवाल जिले में जाकर गिरी थी। भारत ने इस घटना को आकस्मिक मिसाइल प्रक्षेपण बताया था और मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी।

    जमील के बयान से स्पष्ट है कि पाकिस्तान के सुरक्षा प्रतिष्ठान में भारत की बढ़ती सैन्य और सामरिक क्षमताओं को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने और जानबूझकर अस्थिरता फैलाने जैसे आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

  • डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

    डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

    नई दिल्ली । नई दिल्ली में 22 से 23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन होने जा रहा है जिसकी अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और एनएसए शामिल होंगे और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य और नई तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है। बैठक का मुख्य विषय आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां तय किया गया है जिसके तहत साइबर सुरक्षा आतंकवाद सूचना युद्ध और उभरती तकनीक के सुरक्षा प्रभाव जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।
    दो दिन चलने वाली इस बैठक में सदस्य देश अपने अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे ताकि सामूहिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जा सके। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान काउंटर टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग पर ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इससे सीमा पार खतरों से निपटने और एक मजबूत बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
    भारत इस मंच के माध्यम से ब्रिक्स के भीतर सुरक्षा सहयोग को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रखते हुए उसे रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों तक विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी बीच इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के शामिल होने की संभावना भी चर्चा में है जो अगस्त 2025 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा।
    वांग यी चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका भी निभाते हैं और एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। इस यात्रा को भारत और चीन के बीच चल रहे संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की टाइमिंग के कारण पिछले कुछ ब्रिक्स बैठकों में उनकी अनुपस्थिति भी देखी गई थी।
    इस बार की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़े भू राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिश होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक भरोसा बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भारत-पाक रिश्ते सुधारने की दिशा में पहल शुरू, 3 महीनों में हुई दो गुप्त बैठकें, NSA डोभाल सक्रिय

    भारत-पाक रिश्ते सुधारने की दिशा में पहल शुरू, 3 महीनों में हुई दो गुप्त बैठकें, NSA डोभाल सक्रिय


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा होने के बीच भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दोनों देशों के बीच भले ही आधिकारिक स्तर पर बातचीत बंद हो, लेकिन बैक-चैनल संवाद को फिर से सक्रिय करने की कोशिशें जारी हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले तीन महीनों में दोनों पक्षों के रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों और पूर्व राजनयिकों के बीच कम से कम दो गुप्त बैठकें हुई हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, ये मुलाकातें कतर और एशिया के एक अन्य देश की राजधानी में आयोजित की गईं। हालांकि इन बैठकों को औपचारिक वार्ता का दर्जा नहीं दिया गया है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच संवाद की कोशिशें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि भारत में भी इस बात पर सहमति बन रही है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ संपर्क का एक गोपनीय माध्यम खुला रहना चाहिए।

    सूत्रों के मुताबिक, इस पहल की जानकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को भी दी गई है। वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी ऐसे बैक-चैनल संवाद में रुचि दिखाई गई है।

    बताया जा रहा है कि इस पूरी कवायद का मकसद भविष्य में किसी आतंकी हमले या बड़े तनाव की स्थिति में हालात को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकना है। फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद का एकमात्र आधिकारिक माध्यम डीजीएमओ स्तर की साप्ताहिक हॉटलाइन बातचीत है, जो हर मंगलवार को होती है।

    भारत का मानना है कि बैक-चैनल बातचीत उसकी उस नीति के खिलाफ नहीं है, जिसमें कहा गया है कि आतंकवाद और वार्ता साथ-साथ नहीं चल सकते। इसे एक ऐसे संपर्क तंत्र के रूप में देखा जा रहा है, जिससे संकट की स्थिति में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद संभव हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भारत के लिए यह संवाद तंत्र जरूरी माना जा रहा है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनावों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। साथ ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है और उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन भी हासिल बताया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में किसी आतंकी घटना की स्थिति में भारत के लिए वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना आसान नहीं होगा।

    भारत और पाकिस्तान के बीच बैक-चैनल वार्ता का इतिहास पहले भी रहा है। वर्ष 2015 से 2018 के दौरान NSA अजीत डोभाल ने बैंकॉक में अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। हाल ही में 30 अप्रैल 2025 को लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को पाकिस्तान का नया NSA नियुक्त किया गया है। वे पाकिस्तान के पहले ऐसे अधिकारी हैं जो ISI प्रमुख और NSA दोनों जिम्मेदारियां एक साथ संभाल रहे हैं। इससे पाकिस्तान की सैन्य और नागरिक सत्ता पर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का प्रभाव और मजबूत माना जा रहा है।

  • .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी

    .भारत-यूक्रेन के बीच जल्‍द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी


    नई दिल्ली। भारत और यूक्रेन के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक अहम समझौता जल्द ही आधिकारिक रूप ले सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। यह घोषणा यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव की हालिया भारत यात्रा के बाद सामने आई, जहां उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की।

    सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर

    रूस के साथ जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में पहुंच चुके यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं। अब वह इन अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है। भारत भी यूक्रेन की इस विशेषज्ञता से लाभ उठाने में रुचि दिखा रहा है।

    भारत का रुख: संवाद से समाधान

    बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक बार फिर भारत की उस नीति को दोहराया, जिसमें किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर बल दिया जाता है।

    शांति प्रयासों में सहयोग की उम्मीद
    रुस्तम उमेरोव ने स्थायी शांति की दिशा में भारत की भूमिका और समझ की सराहना की। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी रूस और यूक्रेन यात्राओं के दौरान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।

  • आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    आज भी फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं NSA अजीत डोभाल

    नई दिल्‍ली। आज के दौर में जहां मोबाइल फोन और इंटरनेट जीवन की अनिवार्य जरूरत बन चुके हैं, वहीं भारत के सबसे ताकतवर सुरक्षा विशेषज्ञों में से एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए (NSA) अजीत डोभाल ने अपनी एक अनूठी आदत से सबको चौंका दिया है। शनिवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ के उद्घाटन सत्र में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए बताया कि वे आज भी मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग नहीं करते हैं।

    डोभाल ने कहा, “फोन और इंटरनेट ही संवाद के एकमात्र माध्यम नहीं हैं। संपर्क करने के ऐसे कई अन्य तरीके हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को पता तक नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल विशेष परिस्थितियों में ही फोन का उपयोग करते हैं, जैसे कि विदेश में रहने वाले लोगों या अपने परिवार से बात करने के लिए।

    उन्होंने युवाओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संदेश हमेशा ईमानदारी से संप्रेषित होने चाहिए, न कि प्रोपेगेंडा के माध्यम से।
    कौन हैं अजीत डोभाल?
    अजीत डोभाल भारत के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। 1945 में उत्तराखंड में जन्मे डोभाल केरल कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी हैं। उनके नाम कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जो किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं। वे भारत के इतिहास में ‘कीर्ति चक्र’ पाने वाले सबसे युवा पुलिस अधिकारी हैं। सितंबर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक की योजना बनाने और उन्हें सफलतापूर्वक अंजाम देने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। डोकलाम विवाद को सुलझाने और पूर्वोत्तर भारत में उग्रवाद को खत्म करने में उन्होंने कड़ा रुख अपनाया।
    पाकिस्तान में 7 साल ‘अंडरकवर’

    अजीत डोभाल का करियर हैरतअंगेज कारनामों से भरा रहा है। कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में एक ‘अंडरकवर’ एजेंट के रूप में 7 साल बिताए, जहां उन्होंने चरमपंथी समूहों की खुफिया जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में 6 साल तक काम किया। 1971 से 1999 के बीच उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के कम से कम 15 अपहरण मामलों को सुलझाया। 1999 के कुख्यात कंधार कांड (IC-814) में वे मुख्य वार्ताकारों में से एक थे। मिजोरम और पंजाब में आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ उन्होंने जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।

    युवा नेताओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने भावुक होकर कहा कि भारत ने अपनी आजादी के लिए बहुत भारी कीमत चुकाई है। कई पीढ़ियों ने इसके लिए नुकसान और कठिनाइयां झेली हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी उन्नत सभ्यता से प्रेरणा लें और देश के मूल्यों, अधिकारों और विश्वासों के आधार पर एक शक्तिशाली भारत का निर्माण करें।