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  • अजित पवार विमान हादसा: एनसीपी MLC का दावा, क्या पायलट था आत्मघाती हमलावर?

    अजित पवार विमान हादसा: एनसीपी MLC का दावा, क्या पायलट था आत्मघाती हमलावर?


    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अजित पवार की मौत और बारामती विमान हादसे को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं। एनसीपी एमएलसी अमोल मितकरी ने इस घटना को 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या से जोड़ते हुए कहा कि यह सिर्फ दुर्घटना नहीं बल्कि बड़ी साजिश हो सकती है।

    मितकरी का विवादित दावा
    अकोला में जनसभा में मितकरी ने कहा, “जैसे LTTE ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची थी, उसी तरह अजित पवार के मामले में भी साजिश रची गई। क्या विमान उड़ा रहे कैप्टेन सुमित कपूर आत्मघाती थे? अगर उनकी पत्नी कह रही हैं कि वे जिंदा हैं, तो इस हादसे में वास्तव में कौन मरा?”

    उन्होंने सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में इतनी शांति क्यों है जबकि घटना के आसपास कई सवाल हैं। मितकरी ने कहा कि केवल तकनीकी जांच पर्याप्त नहीं है और ब्लैक बॉक्स डेटा के अलावा सीसीटीवी फुटेज भी जनता के सामने आना चाहिए।

    जांच और सीसीटीवी की मांग

    एमएलसी ने पूछा कि कैप्टेन साहिल मदान और कैप्टेन को विमान उड़ाना था, वे कहाँ हैं और उनके मूवमेंट का सीसीटीवी फुटेज क्यों जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को केवल तकनीकी पक्ष तक सीमित नहीं रहना चाहिए और दृश्य साक्ष्य भी सामने लाना चाहिए।

    बारामती में प्रदर्शन

    बारामती में एनसीपी कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने प्रशासनिक भवन के बाहर इकट्ठा होकर जांच की मांग की। लोगों ने पवार की स्मृतियों से जुड़ी तख्तियां भी रखीं। स्थानीय निवासी बोले कि हादसे को 25 दिन हो गए हैं, लेकिन कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। उपमंडलीय मजिस्ट्रेट को गहन जांच के लिए ज्ञापन भी सौंपा गया।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हादसे की सीबीआई जांच का अनुरोध कर चुकी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट 28 फरवरी या उससे पहले आ जाएगी।
  • NCP के दोनों गुटों के विलय की चर्चा पर अब संजय राउत का बड़ा बयान, यह पूरी तरह से…

    NCP के दोनों गुटों के विलय की चर्चा पर अब संजय राउत का बड़ा बयान, यह पूरी तरह से…


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद NCP के दोनों गुटों विलय को लेकर सियासी गलियारों में लगातार चर्चा जारी है. शरद पवार गुट के नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि विलय को लेकर बातचीत अंतिम दौर में था जबकि दिवंगत अजित पवार गुट के नेता इन दावों को खारिज कर रहे हैं. इस बीच शिवसेनायूबीटीके सांसद संजय राउत ने इस पर एक बार फिर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एनसीपी के विलय का मामला उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए.संजय राउत ने गुरुवार05 फरवरीको मुंबई में मीडिया से बात करते हुए एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर कहा अगर यह उनकी समस्या है तो उन्हें इसका समाधान निकालना चाहिए लेकिन एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे शरद पवार को सलाह दे रहे हैं यह बहुत दिलचस्प है.

    NCP गुटों के बीच चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं

    शिवसेनायूबीटीके मुखपत्र सामना के मुताबिक संजय राउत ने आगे कहा जिन लोगों को शरद पवार राजनीति में लाए जिन्हें पद प्रतिष्ठा और ताकत दी वही अब शरद पवार को सलाह दे रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए लेकिन यह पूरी तरह से उनका आंतरिक मामला है. शरद पवार और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच चल रही चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हमारा ध्यान इंडिया अलायंस और महाविकास अघाड़ी पर फोकस है.

    28 जनवरी को विमान हादसे में अजित पवार का निधन
    बता दें कि 28 जनवरी को बारामती में हुए एक विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के अध्यक्ष अजित पवार का निधन हो गया. इस घटना के तीन दिन बाद 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उन्हें पार्टी के विधायक दल का नेता भी चुना गया. वहीं अध्यक्ष पद को लेकर एनसीपी में मंथन जारी है.

  • अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..

    अजित पवार का वायरल वीडियो: रेखा के सामने बोले अमिताभ बच्चन हैं सबसे पसंदीदा अभिनेता..


    नई दिल्ली। 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार एक विमान दुर्घटना में निधन हो गए। यह घटना पूरे देश में शोक और चिंता की लहर फैलाने वाली थी। वे बारामती में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे और उनका विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की मौत हो गई।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मंच पर अजित पवार, बॉलीवुड की पावर सिंगर आशा भोसले और सदाबहार अभिनेत्री रेखा एक साथ दिखाई दे रहे हैं। वहां मौजूद दर्शकों के सामने जब उनसे उनकी पसंद-नापसंद के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा पसंद अमिताभ बच्चन हैं।

    इसके बाद उन्होंने रेखा को अपनी पसंदीदा अभिनेत्री बताया और साझा किया कि उन्हें अमिताभ-रेखा की फिल्में ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘घर’ बेहद पसंद हैं। रेखा इस बात पर मुस्कुरा उठीं और दर्शक भी इस पल को देखकर उत्साहित नजर आए।यह वीडियो अब एक्स (पहले ट्विटर) पर तेजी से शेयर हो रहा है और फैंस अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कई लोग इसे भावनात्मक और यादगार पल बता रहे हैं, तो कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स इसे चर्चा का विषय बना रहे हैं।

    अमिताभ बच्चन और रेखा की ऑन-स्क्रीन जोड़ी 1970 और 1980 के दशक में बेहद लोकप्रिय थी। दोनों ने ‘सिलसिला’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘गंगा की सौगंध’ और ‘दो अनजाने’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया।

    अजित पवार के निधन पर देश के कई बड़े सितारों ने भी शोक व्यक्त किया। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार कमल हासन सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। उनके निधन के बाद महाराष्ट्र में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया गया और बारामती में उनका अंतिम संस्कार बड़े सम्मान के साथ संपन्न हुआ।

  • सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात

    सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM बनाने की मांग तेज, NCP नेताओं की CM फडणवीस से मुलाकात


    मुंबई । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। उनके पद, विभागों और एनसीपी की भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पार्टी के भीतर यह मांग उठने लगी है कि उपमुख्यमंत्री का पद अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को सौंपा जाए।

    इन्हीं मुद्दों को लेकर शुक्रवार को एनसीपी के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने उनके आधिकारिक निवास वर्षा बंगले पहुंचे। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे शामिल थे। यह बैठक करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें विभागों के बंटवारे और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

    पोर्टफोलियो और नेतृत्व को लेकर मंथन

    अजित पवार के पास सरकार में वित्त, आबकारी और खेल जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी थी, साथ ही वे उपमुख्यमंत्री भी थे। अब पार्टी के भीतर इस बात पर गहन विचार चल रहा है कि इन विभागों की जिम्मेदारी किसे दी जाए और एनसीपी की राष्ट्रीय कमान किसके हाथ में होगी। पार्टी सूत्रों का दावा है कि एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर जो बातचीत अजित पवार कर रहे थे, उस पर अंतिम निर्णय शरद पवार ही लेंगे।

    प्रफुल्ल पटेल का बयान: जल्द हो फैसला

    मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया से कहा कि पार्टी ने जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जल्द निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, “अजित पवार के विभागों और एनसीपी से जुड़े फैसलों को लेकर अनिश्चितता नहीं होनी चाहिए। मौजूदा हालात में कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को देखते हुए देरी ठीक नहीं है।”

    NCP में टूट और मौजूदा राजनीतिक समीकरण

    शरद पवार द्वारा 1999 में स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जुलाई 2023 में दो हिस्सों में बंट गई थी, जब अजित पवार महायुति सरकार में शामिल हुए थे। उस समय उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर भी अजित पवार उसी पद पर बने रहे। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच कानूनी संघर्ष हुआ, जिसमें अजित पवार के गुट को मूल एनसीपी नाम और ‘एनालॉग अलार्म घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला। फिलहाल अजित पवार का गुट सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा है, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी एसपी विपक्षी महा विकास अघाड़ी में शामिल है।

    आगे क्या?

    अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, विभागों का बंटवारा किस दिशा में होता है और एनसीपी के दोनों गुटों के भविष्य को लेकर शरद पवार क्या फैसला लेते हैं। आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकते हैं।

  • महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान

    महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़ टला एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की तैयारी अंतिम दौर में थी, 8 फरवरी को होना था ऐलान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में फरवरी के पहले हफ्ते एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता था। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़ोंशरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपीके एक होने की पटकथा लगभग तैयार थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 8 फरवरी 2026 को औपचारिक विलय की घोषणा होनी थी, लेकिन कुछ राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से यह प्रक्रिया फिलहाल टाल दी गई।

    बीते कुछ महीनों से चाचा-भतीजे की बढ़ती नजदीकियां महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी रहीं। पुणे और बारामती क्षेत्र में स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों गुटों के नेताओं का साथ आना इस बात का संकेत माना जा रहा था कि पार्टी में आई टूट स्थायी नहीं रहेगी। इसी बीच बंद कमरे में हुई कई बैठकों ने सियासी हलचल और तेज कर दी थी।

    जिला परिषद चुनाव के बाद ऐलान की रणनीति
    एक रिपोर्ट के अनुसार, विलय को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। जिला परिषद और नगर निकाय चुनावों के बाद औपचारिक घोषणा की रणनीति तय की गई थी। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि बंटा हुआ जनाधार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है।

    एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने पुष्टि की कि दोनों गुटों के बीच लगातार संवाद चल रहा था। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को उनके आवास पर अहम बैठक हुई, जिसमें चुनाव साथ लड़ने और संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंतिम दौर की चर्चा की गई। इसके अगले दिन 17 जनवरी को शरद पवार के आवास पर भी भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

    कैबिनेट फेरबदल पर भी हुई चर्चा
    एनसीपी (एसपी) नेता शशिकांत शिंदे ने भी स्वीकार किया कि विलय को लेकर बातचीत नई नहीं है और दोनों पक्षों की सहमति से आगे बढ़ रही थी। उनके अनुसार, अजित पवार पहले ही संकेत दे चुके थे कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद दोनों गुट साथ आ सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए चेहरों को सरकार में शामिल करने पर भी अनौपचारिक चर्चा हुई थी।

    दोनों गुटों ने हाल के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में गठबंधन किया था और 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों में भी साथ लड़ने की योजना बनाई गई थी।

    दुर्घटना के बाद रुकी प्रक्रिया
    28 जनवरी 2026 को विमान दुर्घटना में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद विलय की आधिकारिक घोषणा पर फिलहाल विराम लग गया। हालांकि शिंदे ने संकेत दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अनुकूल परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह विलय होता, तो यह शरद पवार की पार्टी के लिए सरकार में शामिल होने की दिशा में बड़ा कदम साबित होता। फिलहाल एनसीपी (एसपी) महाविकास अघाड़ी का हिस्सा है, जबकि अजित पवार की एनसीपी सत्तारूढ़ महायुति में शामिल रही है। ऐसे में दोनों गुटों का एक होना राज्य की सत्ता राजनीति के समीकरण पूरी तरह बदल सकता था।

    भले ही 8 फरवरी को होने वाला संभावित ऐलान टल गया हो, लेकिन एनसीपी के दोनों गुटों के एक होने की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में इससे जुड़ा कोई बड़ा फैसला फिर सुर्खियों में आ सकता है।

  • अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा

    अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की पत्नी को राज्य की डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं, प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इसके अलावा, शरद गुट के साथ NCP के विलय की भी चर्चा जोर पकड़ रही है, जिससे पार्टी का राजनीतिक समीकरण और मजबूत हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन और पार्टी की रणनीति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    इससे साफ है कि NCP और महाराष्ट्र राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

  • पुणे राजनीति में हलचल: सुप्रिया सुले–अजित पवार एक मंच पर, निकाय चुनाव का मेनिफेस्टो जारी

    पुणे राजनीति में हलचल: सुप्रिया सुले–अजित पवार एक मंच पर, निकाय चुनाव का मेनिफेस्टो जारी

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। वर्षों बाद एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले और उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक ही मंच पर साथ नजर आए। मौका था पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों के लिए एनसीपी (एसपी) और एनसीपी द्वारा संयुक्त मेनिफेस्टो जारी करने का। राजनीतिक गलियारों में इसे स्थानीय स्तर पर एक नई रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    पानी संकट और टैंकर माफिया पर सख्त रुख

    घोषणापत्र जारी करते हुए सुप्रिया सुले ने पुणे और मुंबई में सक्रिय टैंकर माफिया का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी के बीच अवैध टैंकर कारोबार आम लोगों का शोषण कर रहा है। मेनिफेस्टो में इस माफिया पर नियंत्रण और पारदर्शी जल आपूर्ति व्यवस्था लागू करने का वादा किया गया है, ताकि नागरिकों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े।

    यातायात सुधार पर बड़ा जोर

    संयुक्त घोषणापत्र में पुणे की गंभीर ट्रैफिक समस्या को दूर करने के लिए ठोस रोडमैप रखा गया है। इसके तहत शहर में 33 मिसिंग रोड लिंक को जोड़ने का वादा किया गया है, जिससे सड़क नेटवर्क मजबूत होगा और जाम की समस्या कम होगी। इसके साथ ही सड़कों के चौड़ीकरण और ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है।

    फ्री बस और मेट्रो यात्रा का वादा

    घोषणापत्र में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। शहरवासियों को मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा उपलब्ध कराने की योजना शामिल की गई है। इसका उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना, ईंधन खर्च कम करना और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना बताया गया।

    स्वास्थ्य सुविधाएं हर नागरिक के पास

    स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी घोषणापत्र में अहम वादा किया गया है। इसके अनुसार हर नागरिक को उसके घर से दो किलोमीटर के दायरे में अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराया जाएगा। इससे आपात स्थिति में इलाज तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित की जा सकेगी।

    राजनीतिक संकेत भी अहम

    सुप्रिया सुले और अजित पवार का एक मंच पर आना सिर्फ नगर निकाय चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह तस्वीर आगामी चुनावी समीकरणों के लिए भी संकेत दे सकती है। हालांकि दोनों नेताओं ने मंच से सिर्फ स्थानीय विकास और नागरिक सुविधाओं पर ही जोर दिया।

    निष्कर्ष:
    संयुक्त मेनिफेस्टो के जरिए एनसीपी (एसपी) और एनसीपी ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के मतदाताओं को विकास, बेहतर सुविधाओं और पारदर्शी प्रशासन का भरोसा दिलाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह एकजुटता चुनावी नतीजों में कितना असर दिखा पाती है।

  • अगर हम बोलने लगेंगे तो…' अजित पवार के हफ्ताखोरी वाले आरोप पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार

    अगर हम बोलने लगेंगे तो…' अजित पवार के हफ्ताखोरी वाले आरोप पर BJP प्रदेश अध्यक्ष का पलटवार


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में जैसे जैसे नगर निगम चुनाव सामने आ रहे हैं वैसे-वैसे राजनीतिक गठबंधन की जड़ें हिलती दिख रही है. ताजा बयान बाजी महायुति में शामिल एनसीपी की ओर से आया है. कोई और नहीं बल्कि खुद NCP अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने बीजेपी पर ही आरोप लगा दिए हैं.

    एनसीपी अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने पुणे के पिंपरी चिंचवड़ इलाके में बीजेपी पर करप्शन और हफ्ताखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार ने कहा बीजेपी ने पिंपरी चिंचवड़ इलाके में जम कर पैसे लूटे. उन्होंने कहा कि बीजेपी हफ्ताखोरी करती है मेरे पास सबूत है. मुझ पर भी 70000 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया गया था और जिन्होंने आरोप लगाया मैं उन्हीं के साथ बैठा हूं. क्या वे सब आज मेरे साथ हैं या नहीं? मुझे बताओ…

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण की कड़ी प्रतिक्रिया
    अजीत पवार के आरोपों पर बीजेपी ने तुरंत पलटवार किया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि अगर बीजेपी बोलने लगी तो अजीत पवार मुश्किल में पड़ जाएंगे. उन्होंने कहा कि अजीत पवार को पहले अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए. रविन्द्र चव्हाण ने आरोपों को चुनावी समय में दिया गया बयान बताया और इसे पूरी तरह अनुचित करार दिया.

    संबंधित एजेंसियों के पास जाना चाहिए था- रविन्द्र चव्हाण
    रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि अजित पवार जैसा अनुभवी नेता अगर गंभीर आरोप लगाता है तो उसे मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय संबंधित एजेंसियों के पास जाना चाहिए था. आईएएनएस के अनुसार उन्होंने कहा कि यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली पार्टी पर है. चव्हाण ने चेतावनी दी कि आरोप प्रत्यारोप की मर्यादा तय होनी चाहिए क्योंकि पलटवार हुआ तो अजीत पवार को ही ज्यादा परेशानी होगी.

  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।