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  • CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए

    CJI सूर्यकांत ने NALSAR छात्रों के विवाद में BCI को फटकारा, कहा विरोध के कारण छात्रों का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नांदेड़ हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल ने कहा, डरने वाला नहीं, पंजाब की शांति और सांप्रदायिक सद्भाव सर्वोच्च प्राथमिकता

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुए हमले के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पंजाब की शांति, धार्मिक सद्भाव और देश के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।

    सुखबीर बादल ने कहा कि कुछ ताकतें पंजाब के शांतिपूर्ण माहौल और सांप्रदायिक भाईचारे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगे और राज्य में शांति तथा सभी समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने के लिए मजबूती से खड़े रहेंगे।

    उन्होंने कहा कि उनके लिए पंजाब और देश का विकास सबसे महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को भी उन्होंने उतना ही अहम बताया। उनके मुताबिक, पंजाब की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    सुखबीर बादल ने अपने पिता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को भी याद किया। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने हमेशा सभी समुदायों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने की कोशिश की। उनके अनुसार, उनके पिता की राजनीति में सांप्रदायिक सौहार्द और पंजाब की शांति को विशेष महत्व दिया जाता था।

    सुखबीर बादल ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल ने कभी उन ताकतों के सामने समझौता नहीं किया, जो पंजाब के शांतिपूर्ण वातावरण को प्रभावित करना चाहती थीं। उन्होंने इसी सोच को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि राज्य में भाईचारा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।

    नांदेड़ की घटना का जिक्र करते हुए सुखबीर बादल ने अपने ऊपर हुए पिछले हमले की भी बात की। उन्होंने कहा कि दोनों घटनाओं का संबंध बेहद पवित्र धार्मिक स्थलों से है। उन्होंने पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर और अब नांदेड़ स्थित तख्त हजूर साहिब में हुई घटनाओं का उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी कोशिशें क्यों न की जाएं, अंतिम निर्णय ईश्वर के हाथ में है। सुखबीर बादल ने विश्वास जताया कि गुरु साहिब का आशीर्वाद उनके साथ है और पंजाब की शांति को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।

    अकाली दल प्रमुख ने कहा कि पंजाब ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है और राज्य की जनता शांति तथा भाईचारे को महत्व देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना का असर पंजाब के सामाजिक माहौल पर नहीं पड़ना चाहिए और सभी समुदायों को संयम बनाए रखना जरूरी है।

    सुखबीर बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसी घटनाओं से भयभीत होकर अपनी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने पंजाब की एकता, धार्मिक सद्भाव और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    नांदेड़ की घटना के बाद उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पंजाब के सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा तेज है। बादल ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी ऐसी कोशिश को सफल नहीं होने देने की अपील की, जिससे समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है।

  • दिलजीत दोसांझ की सतलुज पर सियासी संग्राम तेज अकाली दल ने हर गांव में स्क्रीनिंग का किया ऐलान

    दिलजीत दोसांझ की सतलुज पर सियासी संग्राम तेज अकाली दल ने हर गांव में स्क्रीनिंग का किया ऐलान


    नई दिल्ली । पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। फिल्म को रिलीज के कुछ समय बाद ही प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर कई संगठनों ने सवाल उठाए हैं। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह इस फिल्म को पंजाब के हर गांव और हर क्षेत्र में लोगों तक पहुंचाएगा ताकि नई पीढ़ी राज्य के इतिहास के उस दौर से परिचित हो सके जिसे लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है।

    शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि फिल्म में जिन घटनाओं और परिस्थितियों को दिखाया गया है उन्हें समाज के सामने आना चाहिए। उनका कहना है कि पंजाब के कठिन दौर को समझना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है और इसी उद्देश्य से पार्टी गांव गांव में फिल्म की स्क्रीनिंग करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास से जुड़े विषयों को लोगों तक पहुंचने से रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

    यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म में 1990 के दशक के दौरान पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों से जुड़े मामलों की पृष्ठभूमि को दिखाया गया है। खालड़ा ने उस समय कथित तौर पर ऐसे मामलों की जांच कर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखने का दावा किया था। यही विषय फिल्म के केंद्र में है और इसी कारण यह चर्चा का विषय बनी हुई है।

    फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग उठाई जबकि कुछ संगठनों ने सार्वजनिक प्रदर्शन की घोषणा की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

    इसी क्रम में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने भी 14 जुलाई को विशेष अरदास आयोजित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम हरीके पत्तन स्थित सतलुज नदी के किनारे आयोजित किया जाएगा जहां उन लोगों की आत्मा की शांति और उनके परिवारों के लिए न्याय की प्रार्थना की जाएगी जिनका उल्लेख उस दौर की घटनाओं के संदर्भ में किया जाता है। धार्मिक सभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    दूसरी ओर फिल्म को हटाने के फैसले को लेकर भी अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों की समीक्षा जरूरी है जबकि अन्य इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। इसी बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि संबंधित मामले की परिस्थितियों की समीक्षा के लिए एक समिति गठित किए जाने की बात कही गई है ताकि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा सके।

    फिलहाल सतलुज फिल्म केवल मनोरंजन का विषय नहीं रह गई है बल्कि यह इतिहास राजनीति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर होने वाले फैसले और घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।