Tag: Akhilesh Yadav

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, अखिलेश यादव ने AI वीडियो शेयर कर BJP पर साधा निशाना


    नई दिल्‍ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम का 4 मिनट 40 सेकेंड का AI वीडियो शेयर किया और सवाल किया, “क्या फिर चले गए वनवास?” इस वीडियो के जरिए मंदिर में हुई चोरी और उससे जुड़े घटनाक्रम को प्रतीकात्मक अंदाज में दिखाया गया है.

    अखिलेश यादव ने जो वीडियो शेयर किया है, वह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि एक सिनेमैटिक प्रस्तुति है. इसकी शुरुआत सूनी और शांत अयोध्या से होती है. इसके बाद मंदिर के अंदर भगवान श्रीराम की AI से बनाई गई आकृति दिखाई देती है. पूरे वीडियो में माहौल गंभीर रखा गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि मंदिर में हुई घटना से अयोध्या का वातावरण बदल गया है.

    वीडियो के अगले हिस्से में मंदिर का वो कोना दिखता है जहां चोरी हुई. विजुअल्स में एक बड़ा दानपात्र और आसपास का सामान नजर आता है. गाना आगे बढ़ने पर अयोध्या के लोग और साधु-संत हाथ जोड़े खड़े दिखाई देते हैं, और प्रभु राम नगरी की सीमा की तरफ बढ़ते हैं. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने इस पूरे वीडियो और भजन के माध्यम से धर्म के नाम पर सरकार को आड़े हाथों लिया है.

    बता दें कि अबतक इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की टीमों ने अनुकल्प मिश्रा समेत सभी सात आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. करीब डेढ़ से ढाई घंटे चली इस कार्रवाई में अलमारियों और बक्सों का कोना-कोना छाना गया. जांच में सामने आया है कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा ने अपने घर पर सात दिनों की भव्य रामकथा का आयोजन कराया था, जिस पर 50 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए थे. इस आयोजन के एक वीडियो में चंपत राय भी मौजूद दिख रहे हैं.

    यह पूरा मामला 5 जून 2026 को तब सामने आया था, जब राम मंदिर परिसर में रूटीन चेकिंग के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने कुछ कर्मचारियों की जेब से नकदी बरामद की. इसके बाद 7 जून को जब यह बात पब्लिक हुई, तो अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस गबन का मुद्दा उठाकर जांच की मांग की. विपक्ष के दबाव और लोगों के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया.

    फिलहाल मामले की जांच तेज है. प्रशासन लगातार सभी आरोपियों की अवैध संपत्तियों और सबूतों को जुटाने में लगा है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके.

  • लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर ओपी राजभर का हमला, बोले- भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना, 'सैफई परिवार को मिलेगी सजा

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर ओपी राजभर का हमला, बोले- भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना, 'सैफई परिवार को मिलेगी सजा


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। इस बार उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा नमूना” करार दिया।

    ओपी राजभर ने कहा कि यदि किसी को अखिलेश यादव सरकार के समय हुए भ्रष्टाचार के उदाहरण देखने हों तो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे सबसे बड़ा उदाहरण है। उनका आरोप है कि निजी लाभ और धन कमाने की लालसा में एक्सप्रेसवे के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण यह सड़क हादसों का केंद्र बन गई। उन्होंने दावा किया कि कई लोग इसे “मौत का एक्सप्रेसवे” भी कहने लगे हैं क्योंकि यहां बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं हुई हैं।

    राजभर ने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान सैफई परिवार और उनके करीबी लोगों ने जनता के धन का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद से लेकर इटावा तक जमीन खरीद और मुआवजे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। उनके मुताबिक पहले औने-पौने दाम पर जमीनें खरीदी गईं, फिर एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया और रिकॉर्ड में बदलाव कर जमीनों को आवासीय श्रेणी में दिखाया गया, जिससे भारी मुआवजा हासिल किया जा सके।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे की घोषणा के बाद भी कई जमीनों की रजिस्ट्रियां कराई गईं और बाद में उन जमीनों का मुआवजा लिया गया। राजभर का दावा है कि एक्सप्रेसवे का मार्ग इस तरह बदला गया कि सैफई परिवार और उनसे जुड़े लोगों की जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ गया।

    कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मूल रूप से करीब 270 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे निजी हितों के चलते 300 किलोमीटर से अधिक लंबा कर दिया गया। उनका कहना था कि इसका खामियाजा आज भी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। लंबी दूरी तय करने के कारण यात्रियों का समय, ईंधन और पैसा तीनों अधिक खर्च हो रहे हैं।

    ओपी राजभर ने कहा कि इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की परतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं और समय आने पर सभी तथ्य सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को सजा मिलेगी और कानून अपना काम करेगा।

    राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। हालांकि, इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

  • सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    सपा में जल्द हो सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव, ओपी राजभर के दावों ने अटकलों को दी हवा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर संभावित टूट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख और एनडीए सहयोगी ओमप्रकाश राजभर के लगातार दावों ने इस चर्चा को और हवा दे दी है कि सपा में जल्द बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    राजभर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और इसका असर जल्द सामने आएगा। उनके अनुसार, सपा के ‘बागी सांसदों’ के समूह का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के उस क्षेत्र का एक नेता करेगा, जिसे वह ‘बागी भूमि’ कहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में सपा कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर कुछ वर्गों में नाराजगी बढ़ी है, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और गहरा गया है।

    राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को अब “सांसद बचाओ अभियान” शुरू करना चाहिए और नाराज सांसदों से मिलकर स्थिति संभालनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर कई सांसद असंतुष्ट हैं और समय के साथ बड़ा बदलाव सामने आ सकता है।

    अखिलेश यादव का पलटवार
    राजभर के इन बयानों पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भविष्य की भविष्यवाणी करने वालों को पहले अपनी पार्टी की स्थिति देखनी चाहिए। अखिलेश ने एनडीए सहयोगियों पर सीट बंटवारे को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा गठबंधन के भीतर असंतोष की वास्तविकता को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

    राजभर का जवाब और तीखी बयानबाजी
    अखिलेश की प्रतिक्रिया के बाद ओमप्रकाश राजभर ने एक और पोस्ट में अपने हमले और तेज कर दिए। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि अखिलेश यादव राजनीतिक रूप से अधिक समझदार हैं, लेकिन अब उनकी यह धारणा बदल गई है। राजभर ने दावा किया कि सपा के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले समय में कई चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे भविष्य में कुछ और राजनीतिक खुलासे कर सकते हैं।

    पुराने मुद्दों का भी जिक्र
    अपने बयान में राजभर ने 2008 के चर्चित ‘वोट के बदले नोट’ प्रकरण का भी उल्लेख किया और उस दौर की राजनीति पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

  • रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस

    रामचरितमानस पर सपा का बदला रुख: अखिलेश यादव ने इसे बताया ‘सांस्कृतिक संविधान’, यूपी की राजनीति में फिर गरमाई बहस




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रामचरितमानस को लेकर समाजवादी पार्टी का रुख चर्चा में है। लोकसभा चुनाव से पहले जिस मुद्दे पर सपा के भीतर विवाद और राजनीतिक टकराव देखने को मिला था, अब उसी पर पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का रुख काफी नरम और अलग नजर आ रहा है।

    हाल ही में लखनऊ में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक वकील के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद मामला फिर सुर्खियों में आया। बताया गया कि वकील के हाथ में रामचरितमानस की प्रति थी। इसी घटना के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए रामचरितमानस को “सांस्कृतिक संविधान का एक रूप” और “नैतिक आचार संहिता” बताया, जिससे राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

    पहले विवाद, अब नया रुख
    लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस के कुछ दोहों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इन दोहों को महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति अपमानजनक बताते हुए उन्हें हटाने की मांग की थी। इस बयान के बाद बीजेपी ने सपा पर तीखा हमला बोला था और मामला राजनीतिक रूप से काफी गरमा गया था।

    बाद में यह विवाद इतना बढ़ा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद पर खुलकर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया था, लेकिन अब उनका बदला हुआ स्टैंड राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    चुनावी रणनीति या जनभावना का असर?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अपनी छवि को व्यापक जनसमर्थन के अनुरूप ढालने की कोशिश कर रही है। रामचरितमानस जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नरम रुख अपनाकर सपा आम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

    वहीं बीजेपी का आरोप है कि सपा राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए अब धार्मिक प्रतीकों का सहारा ले रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे अब धार्मिक ग्रंथों का सम्मान दिखा रहे हैं।

    विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया
    इस मुद्दे पर कांग्रेस ने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि रामचरितमानस भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का हिस्सा है और इसे राजनीति से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं बसपा ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी से दूरी बनाए रखी है।

    यूपी की सियासत में नया मोड़
    रामचरितमानस को लेकर सपा के बदले सुर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह मुद्दा सियासी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल यह साफ है कि यूपी की राजनीति में धर्म और संस्कृति एक बार फिर रणनीतिक बहस का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

  • मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस

    मायावती के घर पहुंचे कांग्रेस नेताओं को लगा झटका, BSP ने नहीं दी एंट्री; कांग्रेस ने जारी किया नोटिस


    नई दिल्ली। Mayawati के लखनऊ स्थित आवास पर कांग्रेस के कुछ दलित नेताओं के पहुंचने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बिना किसी तय कार्यक्रम के पहुंचे प्रतिनिधिमंडल को मायावती से मुलाकात नहीं मिल सकी, क्योंकि उनके आवास पर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

    यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब यूपी की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित गठबंधन और समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने नेताओं के इस अचानक दौरे को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दिया है।

    क्या हुआ था पूरा मामला?
    कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के कुछ नेता लखनऊ में बैठक के बाद अचानक Mayawati से शिष्टाचार मुलाकात के लिए उनके आवास पहुंचे थे। हालांकि, यह मुलाकात पहले से तय नहीं थी, जिसके चलते उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

    प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं ने दावा किया कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी और इसका कोई राजनीतिक संदेश नहीं था। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए नोटिस जारी कर दिया।

    राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूपी में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। कुछ ही घंटों पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने 2027 चुनाव को लेकर कांग्रेस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे। ऐसे में इस घटना ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है।

    कांग्रेस की सफाई
    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक अचानक लिया गया शिष्टाचार निर्णय था और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी को लेकर कोई संदेश देने जैसी बात पूरी तरह गलत है।

  • यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान

    यूपी में सपा सरकार बनी तो पहले 90 दिन में ये करेंगे: अखिलेश यादव का बड़ा प्लान



    नई दिल्ली। अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि अगर राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो पहले 90 दिनों के भीतर कई अहम फैसले लिए जाएंगे। उन्होंने यह बात PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ऑडिट को लेकर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।इस बैठक में Dimple Yadav और Shivpal Singh Yadav समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

    90 दिन में क्या होगा प्लान?
    अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बनने पर सबसे पहले 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में “न्याय” दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि 90 दिनों के भीतर जातिगत जनगणना कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

    आरक्षण और भर्ती को लेकर आरोप
    प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आरक्षण व्यवस्था में गड़बड़ी कर रही है और भर्तियों में PDA वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने 69,000 शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें आरक्षण नियमों का सही पालन नहीं हुआ।

    बीजेपी पर तीखा हमला
    सपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और इसे उन्होंने “संवैधानिक अधिकारों पर हमला” बताया। उन्होंने दावा किया कि PDA समाज को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है और इसे लेकर सपा सरकार बनने पर सख्त कदम उठाएगी।

    सपा का दावा: नई नीति का रोडमैप तैयार
    अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी ने PDA आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर एक विस्तृत डॉक्यूमेंट तैयार किया है, जिसे भविष्य की सरकार में लागू किया जाएगा

  • सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार

    सीएम योगी से झगड़ लूंगा, पर आपको मंत्री बनवा दूंगा,अखिलेश पर ओमप्रकाश राजभर का तीखा पलटवार



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। सुभासपा प्रमुख और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर बेहद सख्त और व्यंग्यात्मक अंदाज में हमला बोला है। यह पूरा विवाद अखिलेश यादव के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे पर सवाल उठाए थे।

    अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि यूपी में नए मंत्रियों के नाम तय होने के बाद भी उनके विभागों का बंटवारा नहीं किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि सरकार में मंत्रालयों और विभागों के बंटवारे में देरी की वजह अंदरूनी खींचतान और कमीशन का विवाद है। अखिलेश ने यह भी कहा था कि नए मंत्री सिर्फ “दर्शक दीर्घा” में बैठे नजर आ रहे हैं और फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

    इसके जवाब में ओमप्रकाश राजभर ने पहले अवधी भाषा में एक तीखा पोस्ट किया और फिर उसे हिंदी में भी साझा किया। उन्होंने अखिलेश यादव पर निजी और राजनीतिक दोनों तरह के तंज कसे। राजभर ने कहा कि अखिलेश के भाई के निधन के बाद उन्हें कुछ समय तक राजनीति से दूर रहकर शोक मनाना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय वे लगातार राजनीतिक बयान दे रहे हैं।

    राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा कि अखिलेश “परिवार में गमी” के बावजूद राजनीति कर रहे हैं और दूसरों के घर की चिंता कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश को कम से कम तेरहवीं तक राजनीति से दूरी बनाए रखनी चाहिए थी।

    बात यहीं नहीं रुकी। ओमप्रकाश राजभर ने आगे व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव को मंत्री पद की इतनी इच्छा है, तो वे सुभासपा जॉइन कर लें। उन्होंने दावा किया कि वह खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी झगड़ लेंगे, लेकिन अखिलेश को किसी न किसी विभाग का मंत्री जरूर बनवा देंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि बेगाने मंत्रिमंडल में अखिलेश “दीवाने” बन रहे हैं और बिना वजह सरकार के फैसलों पर टिप्पणी कर रहे हैं।

    इस पूरे विवाद ने यूपी की सियासत में एक बार फिर गरमाहट बढ़ा दी है। जहां अखिलेश यादव सरकार पर निशाना साध रहे हैं, वहीं ओमप्रकाश राजभर उनके बयानों का कड़ा और चुटीला जवाब दे रहे हैं।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव

    यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार से लागू नए रेट के बाद लखनऊ में पेट्रोल 97.53 रुपए और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच नेताओं और अफसरों ने ईंधन बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों को लेकर तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही बेहतर विकल्प है, और साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

    वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का असर यूपी में साफ नजर आ रहा है। रामपुर में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गुरुवार को 4 ई-रिक्शा खरीदे हैं और अब वह गनर के साथ इन्हीं ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके ई-रिक्शा उनके घर पर ही रहते हैं और शहर में आने-जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है।

    गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने भी कार पूलिंग कर उदाहरण पेश किया। उन्होंने कुशीनगर सांसद विजय दुबे के साथ इलेक्ट्रिक कार में 25 किलोमीटर की दूरी तय की और खजनी पहुंचे। इस दौरान रवि किशन ने वीडियो बनाकर बताया कि पीएम मोदी की अपील के बाद ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अफसर भी इस अभियान में शामिल होते दिखे। लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अपनी फ्लीट छोड़कर बुलेट से सचिवालय पहुंचे। फिरोजाबाद में डीएम और उनका स्टाफ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर ऑफिस पहुंचे। मुरादाबाद में कमिश्नर ऑन्जनेय कुमार सिंह ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचकर संदेश दिया कि ऊर्जा बचत जरूरी है।

    प्रयागराज में मेयर गणेश केसरवानी भी घर से साइकिल चलाकर नगर निगम पहुंचे और उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भविष्य के लिए जरूरी है।

    यूपी सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अफसरों के काफिले में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी। सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो/बस का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप वर्चुअल आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।

  • दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात

    दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक यादव का निधन, डॉक्टरों ने कही बड़ी बात


    नई दिल्ली। लखनऊ  समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के छोटे भाई Prateek Yadav का बुधवार सुबह निधन हो गया। 38 वर्षीय प्रतीक को सुबह करीब 6 बजे गंभीर हालत में लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर फैल गई।

    सिविल अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. डीसी पांडेय के अनुसार, जब प्रतीक यादव को अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी धड़कन पूरी तरह बंद हो चुकी थी और पल्स भी डाउन थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा गया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम में शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। हालांकि मौत के कारण स्पष्ट नहीं होने की वजह से डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित रख लिया है, ताकि आगे की जांच की जा सके।

    घटना के समय उनकी पत्नी और भाजपा नेता Aparna Yadav असम में थीं। वे मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने गुवाहाटी गई थीं। पति के निधन की सूचना मिलते ही वे तुरंत लखनऊ पहुंचीं और सीधे घर रवाना हुईं।

    इस दौरान Dimple Yadav, Shivpal Singh Yadav समेत कई बड़े नेता और परिवारजन प्रतीक यादव के आवास पहुंचे। Akhilesh Yadav भी पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे और परिवार के सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह परिवार के लिए बेहद दुखद क्षण है और आगे जो भी निर्णय परिवार लेगा, वही मान्य होगा।

    जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें 30 अप्रैल को गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक वे पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसमें फेफड़ों की नसों में खून का थक्का जम जाता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है।

    Prateek Yadav राजनीति से दूर रहते थे और रियल एस्टेट व फिटनेस बिजनेस से जुड़े थे। उन्होंने करीब 14 साल पहले Aparna Yadav से लव मैरिज की थी। दोनों की दो बेटियां हैं।

    फिलहाल उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का पहुंचना जारी है। प्रशासन और पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।