Tag: Akhilesh Yadav

  • अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं

    अखिलेश के 'घुसपैठिया' बयान पर हरीश रावत ने जताई आपत्ति, बोले- यह कहना किसी भी तरह उचित नहीं


    देहरादून। उत्तर प्रदेश में ‘घुसपैठिया’ शब्द को लेकर दिए गए बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आलोचना हो रही है। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके बयान पर आपत्ति जताई है। रावत ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहना किसी भी तरह उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने की नसीहत भी दी।

    हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट में अखिलेश यादव की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बयान देते समय अखिलेश यादव के मन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि रही होगी। हालांकि, रावत ने याद दिलाया कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश पहले एक ही राज्य का हिस्सा थे और विभाजन के समय दोनों राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल था।

    बंटवारे के बाद जहां रहे, वहां के नागरिक हैं लोग

    हरीश रावत ने कहा कि जब उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एक राज्य थे, तब लोगों ने अलग-अलग क्षेत्रों को अपना कर्मक्षेत्र बनाया। किसी ने नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी में काम किया, तो किसी ने इलाहाबाद, गोरखपुर, बनारस और लखनऊ को अपना कार्यक्षेत्र चुना।

    उन्होंने कहा कि राज्य के बंटवारे के समय जो लोग जहां रह गए, वे वहीं के निवासी हैं और उन्हें वहां रहने का पूरा अधिकार है। उत्तराखंड में रह गए लोगों को वहां सम्मान और अधिकार मिलना चाहिए। इसी तरह उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोगों के अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। रावत के मुताबिक, ऐसे नागरिकों के लिए ‘घुसपैठिया’ शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है।

    दूसरे राज्यों में काम करने वालों का देश के निर्माण में योगदान

    रावत ने कहा कि भारत में लोग रोजगार और कामकाज के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं। दूसरे राज्यों में जाकर काम करने वाले लोगों और प्रवासियों का देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसलिए उनके योगदान को सम्मान की नजर से देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ‘घुसपैठिया’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रावत ने यह भी कहा कि भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करती है और विपक्षी दलों को उसके उकसावे में आने से बचना चाहिए।

    अखिलेश यादव के बयान से शुरू हुआ विवाद

    दरअसल, शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा था, “यूपी में सबसे बड़े घुसपैठिया कौन हैं? उत्तराखंड के…” इसके बाद उन्होंने कहा कि पहले ‘घुसपैठिया’ की परिभाषा तय करनी होगी।

    अखिलेश के इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया। समाजवादी पार्टी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव का इशारा एक व्यक्ति की ओर था। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बयान को उत्तराखंड के लोगों का अपमान बताया था। इसके बाद हरीश रावत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

  • यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद

    यूपी में चुनावी गठबंधन पर फंसा पेंच! कांग्रेस ने सपा को नहीं सौंपी उम्मीदवारों की लिस्ट तो सीट बंटवारे पर बढ़ा विवाद


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान तेज होती दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के उद्देश्य से दोनों दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा जारी है लेकिन उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस उन सीटों और उम्मीदवारों का स्पष्ट ब्योरा दे जहां उसकी जीत की संभावना सबसे अधिक है। दूसरी ओर कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन की बातचीत के दौरान उम्मीदवारों के नामों की सूची साझा करना जरूरी नहीं है। इसी मुद्दे पर दोनों दलों के बीच मतभेद गहराने की खबरें सामने आ रही हैं।

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से लगभग 180 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इस सूची को लेकर समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं में नाराजगी बताई जा रही है। सपा के भीतर यह चिंता है कि कांग्रेस को अधिक सीटें देने से गठबंधन की चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव कांग्रेस को 100 से कम सीटें देने के पक्ष में हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में उनकी ओर से कोई स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा अभी सामने नहीं आया है।

    कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कम से कम 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। उनके इस बयान ने सीट बंटवारे की चर्चा को और गर्म कर दिया है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में इतनी अधिक सीटों पर दावा करना गठबंधन के भीतर बातचीत को चुनौतीपूर्ण बना सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस का मानना है कि उसके पास ऐसे उम्मीदवार हैं जो कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं। पार्टी का कहना है कि सीटों का चयन केवल संख्या के आधार पर नहीं बल्कि उनकी चुनावी स्थिति और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    रिपोर्ट के मुताबिक 19 अक्टूबर को राहुल गांधी के आवास पर आयोजित चाय पार्टी के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने प्रियंका गांधी वाड्रा के सामने उम्मीदवारों और सीटों की सूची का मुद्दा उठाया था। बताया जाता है कि प्रियंका गांधी ने इस पर सूची साझा करने का आश्वासन दिया था। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 180 सीटों की सूची को अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह सूची बातचीत शुरू करने का एक आधार है और दोनों दल आपसी सहमति से सीटों की संख्या तय कर सकते हैं। चर्चा के दौरान 80 से 90 सीटों पर भी समझौते की संभावना का जिक्र किए जाने की बात सामने आई है।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने आंतरिक सर्वे के आधार पर सीटों को चार श्रेणियों में बांटा है। इसका उद्देश्य उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करना है जहां पार्टी की स्थिति मजबूत है और जहां जीत की संभावना अधिक हो सकती है। वहीं समाजवादी पार्टी चाहती है कि कांग्रेस अपने संभावित उम्मीदवारों की जानकारी देकर गठबंधन की रणनीति को स्पष्ट करे। सपा नेताओं की चिंता है कि कमजोर उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से विपक्षी वोटों का नुकसान हो सकता है और इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।

    गौरतलब है कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था और 40 प्रतिशत सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपनाई थी। हालांकि पार्टी को केवल दो सीटों पर जीत मिली थी। इसी पिछले प्रदर्शन को देखते हुए सीटों के बंटवारे में कांग्रेस की चुनावी ताकत को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसा फॉर्मूला तैयार करने की है जिससे सीटों पर सहमति भी बने और भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की एकजुटता भी कायम रहे। फिलहाल उम्मीदवारों की सूची और सीटों की संख्या पर जारी मतभेद के कारण बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
  • आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज

    आजम खान के समर्थन में उतरे अखिलेश यादव, जेल में मुलाकात के बाद दिया बड़ा बयान, पत्रकारों के सवाल पर दिखे नाराज


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को रामपुर जेल पहुंचकर पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि आजम खान पहले भी आजम थे आज भी आजम हैं और आगे भी आजम रहेंगे। उन्होंने कहा कि फर्जी मुकदमों में इतनी ताकत नहीं है कि आजम खान को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। अखिलेश के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और राजनीतिक एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    जेल से बाहर निकलने के बाद अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आजम खान के साथ अपनी मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। हालांकि जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि आजम खान से मिलने आने में करीब 11 महीने का समय क्यों लग गया तो वह सवाल पर नाराज होते दिखाई दिए। इस दौरान बातचीत का वीडियो भी सामने आया है। मुलाकात के बाद उनके बयान और सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई।

    आजम खान समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और रामपुर की राजनीति में उनका लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों और जेल में रहने को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार बहस होती रही है। समाजवादी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखती रही है जबकि आरोपों और कानूनी मामलों का फैसला अदालतों की प्रक्रिया के तहत होता है। अखिलेश यादव का ताजा बयान इसी राजनीतिक संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में आजम खान के राजनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें फर्जी मुकदमों के जरिए दबाया नहीं जा सकता। समाजवादी पार्टी लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कानूनी कार्रवाई के नाम पर उनके वरिष्ठ नेता को निशाना बनाया गया है। हालांकि किसी मुकदमे को फर्जी या सही मानने का अंतिम फैसला संबंधित अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    रामपुर जेल में हुई इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने लंबे अंतराल के बाद आजम खान से मुलाकात की। पत्रकारों ने इसी अवधि को लेकर सवाल किया था। सवाल के जवाब में अखिलेश की नाराजगी ने इस मुलाकात को और चर्चा में ला दिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का विस्तृत ब्यौरा सामने नहीं आया है।

    आजम खान उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और रामपुर से उनका गहरा राजनीतिक जुड़ाव रहा है। उनके जेल में रहने और कानूनी मामलों को लेकर समाजवादी पार्टी के समर्थक लगातार प्रतिक्रिया देते रहे हैं। अखिलेश यादव का यह दौरा पार्टी के भीतर आजम खान के महत्व को दोहराने वाला कदम माना जा रहा है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व अपने वरिष्ठ नेता के साथ खड़े होने का संदेश देना चाहता है।

    फिलहाल इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव के बयान और पत्रकारों के सवाल पर उनकी प्रतिक्रिया चर्चा में है। आजम खान से मिलने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खत्म नहीं हुआ है। वहीं मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और आगे पार्टी इस मामले को लेकर क्या रणनीति अपनाएगी इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय

    रामपुर जेल में एक घंटे तक अखिलेश-आजम की मुलाकात, भाजपा पर बरसे सपा प्रमुख, बोले- आजम के परिवार के साथ हुआ अन्याय


    नई दिल्ली। रामपुर जेल में गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक रिश्ता बताया। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि आजम खान उनके दिल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ उनका जुड़ाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। इस मुलाकात को लेकर सियासी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने इस दौरान आजम खान के परिवार पर कार्रवाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।

    अखिलेश यादव गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने हेलीपैड पर उतरा। यहां से वह कार के जरिए सीधे रामपुर जेल पहुंचे। उनके साथ आजम खान के बड़े बेटे अदीब भी कार में मौजूद थे लेकिन वह जेल के अंदर मुलाकात के लिए नहीं गए। जेल प्रशासन की व्यवस्था के बीच अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत करीब एक घंटे तक चली। जानकारी के मुताबिक अखिलेश यादव दोपहर करीब 1 बजकर 42 मिनट पर जेल के अंदर दाखिल हुए और 2 बजकर 51 मिनट के आसपास बाहर निकले। एक साल के भीतर अखिलेश यादव की आजम खान से यह तीसरी मुलाकात बताई जा रही है।

    जेल से बाहर आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के परिवार ने जितना अन्याय झेला है वैसा किसी राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का पढ़ाई लिखाई और शिक्षा से कोई विशेष जुड़ाव नहीं है। जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस विश्वविद्यालय के सपने को पूरा करने के लिए लगातार प्रयासरत है। अखिलेश यादव के इस बयान को आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन और उनके परिवार के साथ खड़े रहने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

    आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम पैन कार्ड से जुड़े मामले में रामपुर जेल में बंद हैं। इस मामले में एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने दोनों को सात सात साल की सजा सुनाई थी। आजम खान ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है। ऐसे में उनकी कानूनी लड़ाई और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार जारी हैं। अखिलेश यादव पहले भी आजम खान के समर्थन में बयान देते रहे हैं और अब जेल में मुलाकात के बाद उन्होंने एक बार फिर उनके प्रति भावनात्मक जुड़ाव जाहिर किया।

    मुलाकात के दौरान और उसके बाद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पहले दिन से चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत की बात कहती रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर वोट चोरी के आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप अखिलेश यादव के राजनीतिक बयान हैं और इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों तथा आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को अलग से देखना जरूरी है।

    अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने पर जौहर विश्वविद्यालय के हेलीपैड के पास आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा उनके बड़े बेटे अदीब और अन्य समर्थक मौजूद रहे। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी उनका स्वागत किया। इस दौरान अदीब जेल के बाहर ही रहे। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान पार्टी और आजम खान के समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल इस मुलाकात का मुख्य संदेश आजम खान के प्रति अखिलेश यादव का भावनात्मक समर्थन रहा जबकि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग पर उनके आरोपों ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी है। 

  • अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज

    अखिलेश-योगी की सियासी चुनौती पर राजभर का वार, बोले- अखिलेश जी अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाइए, यूपी में बयानबाजी तेज


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सोमवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ललकारने के बाद पीछे हटने वाले को भगोड़ा कहा जाता है। उन्होंने अखिलेश यादव से अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती से पीछे नहीं हटने की बात कही। राजभर का यह बयान योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर हुई बयानबाजी के बाद आया है।
    दरअसल अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। इसके जवाब में योगी ने पलटवार करते हुए कहा था कि अखिलेश चाहें तो दोनों चुनाव लड़कर देख सकते हैं। इसके बाद अखिलेश ने अपने बयान में कहा कि इसके लिए उनका सिपाही ही काफी है। इसी घटनाक्रम को लेकर राजभर ने अखिलेश पर तंज कसते हुए उन्हें चुनौती स्वीकार करने की नसीहत दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी आरोप-प्रत्यारोप चर्चा में आ गए हैं।
    दूसरी ओर लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय पर हुए हंगामे का मामला भी लगातार सुर्खियों में है। रविवार को पार्टी कार्यालय में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हुआ था। इस घटना से जुड़े एक नए वीडियो में कांग्रेस की महिला नेता ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बहस दिखाई देने की बात सामने आई है। वीडियो में ममता चौधरी को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह अजय राय की शक्ल नहीं देखना चाहतीं। इसके जवाब में अजय राय नाराज होते हुए उन्हें औकात में रहने की बात कहते सुनाई देते हैं।
    इस विवाद के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेदों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ममता चौधरी ने आरोप लगाया है कि अजय राय ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई थी। वहीं घटना के वीडियो सामने आने के बाद पार्टी के भीतर अनुशासन और कार्यकर्ताओं के व्यवहार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यालय में हुए हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें भी सामने आई थीं।
    इसी बीच अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया को श्रद्धांजलि दी और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में डुप्लीकेट और ट्रिपल वोट मौजूद हैं। अखिलेश ने आजमगढ़ की सदर विधानसभा सीट का जिक्र करते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति के नाम पर दस वोट दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगी।
    अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर भाजपा की कथित गड़बड़ियों को उजागर करेगी। दूसरी ओर राजभर ने दावा किया कि जनता ने इंडिया गठबंधन को नकार दिया है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनका इंडिया गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। इन बयानों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल आगामी चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और विरोधियों पर हमले तेज कर रहे हैं। अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती और कांग्रेस कार्यालय का विवाद फिलहाल प्रदेश की सियासत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
  • अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों

    अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों


    लखनऊ। चुनाव आयोग में कथित तौर पर सामने आई अंदरूनी असहमति की रिपोर्ट के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में नहीं कराए जाएं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

    अखिलेश बोले- यूपी चुनाव की निगरानी पर उठ रहे सवाल
    अखिलेश यादव ने कहा कि जब आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं तो आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव ऐसे माहौल में नहीं होना चाहिए, जहां चुनाव आयोग की भूमिका पर ही राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हों।

    उन्होंने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। अखिलेश का आरोप है कि जिन इलाकों में समाजवादी पार्टी के समर्थक मतदाता थे, वहां वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में एफिडेविट के साथ शिकायत भी की थी, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

    उपचुनावों को लेकर भी लगाए आरोप
    सपा अध्यक्ष ने यूपी में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन चुनावों के दौरान भी उनकी पार्टी ने अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

    अखिलेश ने दावा किया कि कुछ लोगों के हस्ताक्षर तक बनाए गए और उनके आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    ‘सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहा आयोग’
    अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सत्ता के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं, ताकि सत्ता में बैठे लोगों का प्रभाव बना रहे। उनके मुताबिक, यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है और आने वाले समय में जनता भी इसका जवाब देगी। अखिलेश ने कहा कि यूपी के चुनाव और उपचुनाव में पार्टी ने जिन मुद्दों को उठाया, उन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

    आयोग ने रिपोर्ट पर दिया अलग पक्ष
    इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आए मतभेद के दावे को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    वहीं, रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • यूपी विधान परिषद में सपा का नेतृत्व बदला, मो. जासमीर अंसारी होंगे नेता प्रतिपक्ष, अखिलेश यादव ने दी मंजूरी

    यूपी विधान परिषद में सपा का नेतृत्व बदला, मो. जासमीर अंसारी होंगे नेता प्रतिपक्ष, अखिलेश यादव ने दी मंजूरी

    लखनऊ। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अपने नेतृत्व में बदलाव किया गया है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मो. जासमीर अंसारी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। जासमीर अंसारी मौजूदा नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    जासमीर अंसारी मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले हैं। वह वर्तमान में विधान परिषद में सपा के उपनेता की भूमिका में हैं। विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें सपा के उपनेता के तौर पर दर्ज किया गया है।

    पार्टी के इस फैसले के बाद विधान परिषद में सपा के नेतृत्व की जिम्मेदारी जासमीर अंसारी के पास आने की बात कही जा रही है। उनके नाम पर अखिलेश यादव की मंजूरी के बाद अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।

    जासमीर अंसारी को नई जिम्मेदारी दिए जाने की खबर से सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। पार्टी के भीतर इसे आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

  • अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?

    अखिलेश के ‘PDA रथ’ के भगवा रंग पर मायावती का हमला, पूछा- क्या मुस्लिम वोटरों से भरोसा उठ गया?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को अखिलेश यादव के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रथ में सपा के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस-भाजपा से जुड़ा भगवा रंग ज्यादा नजर आ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने सवाल किया कि क्या सपा चुनावी लाभ के लिए अपनी पहचान और रणनीति बदल रही है या उसका मुस्लिम मतदाताओं से भरोसा कम हो गया है।

    ‘रंग बदलने’ की रणनीति पर सवाल
    मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए प्रचारित किए जा रहे PDA रथ में सपा का लाल रंग कम और भगवा रंग ज्यादा दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए सपा नेतृत्व पर निशाना साधा।

    मायावती ने यह भी दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज ने बड़े पैमाने पर सपा का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद भाजपा को सत्ता में आने से नहीं रोका जा सका। उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से सवाल किया कि वे बार-बार सपा को वोट देकर अपना वोट क्यों खराब करें। यह मायावती का राजनीतिक दावा है; इसके समर्थन में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन और भाजपा की सरकार बनने का संदर्भ दिया।

    मुस्लिम वोट को लेकर भी साधा निशाना
    बसपा प्रमुख ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाताओं का रुख अब बसपा की ओर बदल रहा है। उन्होंने इसकी तुलना ऊंची जातियों के ब्राह्मण मतदाताओं के पूर्व में बसपा से दूर होने से की। यह भी मायावती का चुनावी आकलन है, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य।

    उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विकास के मुद्दे पर भी अपनी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख किया। मायावती ने कहा कि उनके मुताबिक बसपा सरकार के दौरान अपराध नियंत्रण, शांति-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के क्षेत्र में काम हुआ था।

    PDA की परिभाषा पर भी अखिलेश को घेरा
    मायावती ने सपा के PDA फॉर्मूले की व्याख्या पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी जरूरत के हिसाब से सपा ने PDA के अर्थ और सामाजिक समीकरणों को अलग-अलग तरीके से पेश किया है।

    उन्होंने कहा कि कभी इसे ‘पिछड़ा, दलित’, कभी ‘पंडित’ से जोड़कर बताया गया और बाद में खुद को अंबेडकरवादी दिखाने के प्रयास भी किए गए। मायावती ने अखिलेश यादव और सपा नेताओं के नीले रंग के कपड़ों में तस्वीरें खिंचवाने का भी जिक्र किया और दावा किया कि जनता ने इसे स्वीकार नहीं किया।

    बसपा की विचारधारा का किया जिक्र
    मायावती ने अपनी पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर काम करती है। उन्होंने पार्टी को अंबेडकरवादी बताते हुए सभी वर्गों के लिए रोजगार, सम्मान और सामाजिक भागीदारी की बात कही।

    24 सितंबर से अखिलेश का PDA रथ अभियान
    इस बीच अखिलेश यादव 24 सितंबर को PDA रथ के जरिए अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने वाले हैं। रिपोर्टों के मुताबिक उनका कार्यक्रम रायबरेली में हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी के आवास से जुड़ा है। इसी प्रस्तावित अभियान के रथ के रंग को लेकर मायावती ने सवाल उठाए हैं।

    उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच यह बयानबाजी दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक और उदाहरण है। फिलहाल मायावती के हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’

    यूपी में सपा के खिलाफ पोस्टर वार, अखिलेश के साथ आजम-अतीक-मुख्तार की तस्वीरें, लिखा- ‘यही चलाते थे सरकार’


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाकर पोस्टर अभियान सामने आया है। सोमवार को लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे लिखे गए हैं।

    ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का नारा
    इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन भी इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, अवध से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नामों की सूची वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान के अलावा कई अन्य नाम भी शामिल हैं। पोस्टरों के जरिए सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था और कथित माफिया प्रभाव को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    लखनऊ से कई जिलों तक पहुंचे पोस्टर
    लखनऊ के अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई शहरों में ऐसे पोस्टर सामने आने की रिपोर्ट है। इस अभियान में सपा शासनकाल से जुड़े कथित माफिया नेटवर्क को मुद्दा बनाकर अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की गई है। हालांकि, पोस्टरों पर उन्हें लगाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति का नाम स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन पोस्टरों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    गोंडा में सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर फाड़े
    गोंडा में अखिलेश यादव के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दी। बालपुर चौराहे पर सपा नेता लालचंद्र गौतम ने एक पोस्टर फाड़ दिया। पोस्टर में आजम खान, अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ वही नारे लिखे गए थे।

    अंबेडकरनगर में तीन जगह होर्डिंग
    अंबेडकरनगर के अकबरपुर में शिव बाबा धाम के आसपास तीन स्थानों पर रात में विवादित होर्डिंग लगाए गए। इनमें अखिलेश यादव के साथ अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर की तस्वीरें लगाई गई थीं। होर्डिंग पर ‘माफियाराज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ लिखा गया था। सुबह जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सपा कार्यकर्ताओं ने इन्हें हटाया। पुलिस और एलआईयू ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन पोस्टर लगाने वालों का पता नहीं चल सका।

    अयोध्या में राम मंदिर मार्ग पर भी पोस्टर
    अयोध्या में राम मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग टेढ़ी बाजार ओवरब्रिज पर भी सपा के खिलाफ पोस्टर लगाया गया। इसमें अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ और ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ जैसे नारे लिखे थे। पोस्टर की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने शहर के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर-बैनर हटवाए। लगाने वालों की पहचान अभी सामने नहीं आई है।

    चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था पर सियासी घेराबंदी
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस पोस्टर अभियान में सपा के पिछले शासनकाल की कानून-व्यवस्था और अपराध से जुड़े मुद्दों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने की कोशिश दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, पोस्टर लगाने वाले की पहचान और उसके पीछे किसी राजनीतिक संगठन की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को संबंधित पोस्टर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में इस अभियान पर सपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि इन पोस्टरों के पीछे कौन है।

  • अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं

    अखिलेश ने एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाकर भाजपा पर साधा निशाना, बोले- निर्माण पूरा होने से पहले ही टूटने लगते हैं


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार में बने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। सपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का वीडियो दिखाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में किसी प्रोजेक्ट का निर्माण पूरा बाद में होता है, जबकि उसके टूटने की शुरुआत पहले ही हो जाती है। उन्होंने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था और इसका मेंटीनेंस अभी भी जारी है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में उद्घाटन के कुछ समय बाद क्षति की खबरें भी सामने आई हैं।

    रिवरफ्रंट और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता का किया जिक्र
    अखिलेश यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति को लेकर वीडियो दिखाते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि दिल्ली और लखनऊ वालों के बीच इस बात को लेकर मुकाबला चल रहा है कि किसके पास ज्यादा मुनाफा होगा। उन्होंने सपा सरकार के दौरान बने रिवरफ्रंट और अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को बेहतर बताया।

    उन्होंने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का भी जिक्र किया और कहा कि उसका डिजाइन सबसे अच्छा है, लेकिन भाजपा के लोग अब उसे खराब कर रहे हैं। उन्होंने रिवरफ्रंट पर लगे फव्वारों और सपा सरकार के दौरान बच्चों को दिए गए लैपटॉप का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अभी भी वैसे ही हैं।

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर इससे पहले भी गुणवत्ता के सवाल उठते रहे हैं। अगस्त में सड़क के हिस्सों को लेकर मरम्मत और पंखों से सुखाने का वीडियो सामने आने के बाद भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा था।

    यूपीआई भुगतान पर टैक्स को लेकर भी हमला
    अखिलेश यादव ने यूपीआई से भुगतान करने पर व्यापारियों पर लगाए गए टैक्स को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने यूपीआई को “रुपये ऐंठने वाली योजना” बताते हुए कहा कि चुंगीजीवी लोगों को रुपये ऐंठने वाली योजना बंद कर देनी चाहिए। उनका आरोप था कि ऐसी योजनाएं उद्योगपतियों की जेबें भरने के लिए बनाई जा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर उनके बयान की हालिया रिपोर्टिंग भी सामने आई है।

    https://x.com/yadavakhilesh/status/2100210386243084303

    200 करोड़ पौधे लगाने के दावे पर सवाल
    सपा प्रमुख ने प्रदेश में 200 करोड़ पेड़ लगाए जाने के सरकारी दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान एक हजार एकड़ जमीन पर एक लाख 34 हजार पेड़ लगवाए गए थे। अखिलेश ने सवाल किया कि यदि सरकार ने 200 करोड़ पौधे लगाए हैं तो वह यह भी बताए कि इतनी बड़ी संख्या में पौधे लगाने के लिए जमीन कहां है। यह दावा और उनका सवाल हालिया रिपोर्टिंग में भी दर्ज है।

    पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा सपा में लौटे
    इस दौरान पूर्व मंत्री राम आश्रय कुशवाहा भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। सपा की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव अपने बीच महसूस होते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बना देते, तब तक वह घर नहीं बैठेंगे।

    राजनीतिक रूप से अखिलेश यादव के इस कार्यक्रम में सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधने के साथ पार्टी में पूर्व मंत्री की वापसी को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा गया।