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  • धन-समृद्धि का पर्व अक्षय तृतीया: लक्ष्मी पूजन का खास महत्व और आसान तरीका

    धन-समृद्धि का पर्व अक्षय तृतीया: लक्ष्मी पूजन का खास महत्व और आसान तरीका


    नई दिल्ली। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन को अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाली समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान-पुण्य और खरीदारी का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। लोग इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई चीजें खरीदते हैं ताकि घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि हो। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की जाती है।

    इस दिन धरती पर भ्रमण करती हैं
    कथाओं के अनुसार कहा जाता हैं कि, अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी भ्रमण को निकलती हैं। इस दौरान भक्तों के घर जा कर उन्हें सुख समृदि का वरदान देती हैं। शास्त्रों और वाराह पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी 7 से 9 बजे तक भ्रमण करने जाती हैं। वहीं जहां पर माता लक्ष्मी के भक्त भक्ति भाव से उनकी पूजा अर्चना करते हैं वहां माता लक्ष्मी प्रकट होकर उनको आशीर्वाद देती हैं।

    वहीं कुछ लोगों का मनाना हैं कि, अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि इस दिन को धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति बनी रहती है।

    आज अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें लक्ष्मी पूजन
    अक्षय तृतीया पर विशेष रूप से लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थान पर चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें। अब देवी को रोली, चंदन, अक्षत अर्पित करें। इस दौरान फूल माला भी पहनाएं। यह शुभ होता है। पूजा के दौरान ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और खीर व पंचामृत का भोग बनाकर पूजा में शामिल करें। अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें।

    मां लक्ष्मी की आरती
    ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
    तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
    मैया तुम ही जग-माता।।
    सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
    मैया सुख संपत्ति दाता।
    जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
    मैया तुम ही शुभदाता।
    कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
    मैया सब सद्गुण आता।
    सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
    मैया वस्त्र न कोई पाता।
    खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
    मैया क्षीरोदधि-जाता।
    रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।
    मैया जो कोई नर गाता।
    उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।

    ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
    तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
    ऊं जय लक्ष्मी माता।।